तेजपाल खाटोणा चण्डावल

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तेजपाल खाटोणा चण्डावल ील्डिंग_थोड़ी_मजबूत_लगाना मेरे दोस्त
्योंकि_बेटीगं_अब_हम_करेंगे।

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22/01/2025

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लिव इन रिलेशनशिप मतलब आर्थिक और शारीरिक हवस ..जिसमें दो विपरीत लिंग के व्यक्ति इसलिए साथ-साथ रहते हैं की उनकी शारीरिक भू...
30/09/2024

लिव इन रिलेशनशिप मतलब आर्थिक और शारीरिक हवस ..जिसमें दो विपरीत लिंग के व्यक्ति इसलिए साथ-साथ रहते हैं की उनकी शारीरिक भूख की पूर्ति हो सके क्योंकि कोठे पर जाना महंगा और सामाजिक दृष्टि से निम्न कार्य है।

अगर कोई महिला 40 वर्ष के बाद यह कार्य करती हैं तो उससे मूर्ख कोई स्त्री इस धरती पर नहीं है.. आजकल स्त्री/पुरुष पति पत्नि बनकर ही मुश्किल से साथ टिक पाते हैं.. जहाँ माता-पिता रिश्तेदारों और भाईयों का हस्तक्षेप सभी का दबाव रहता है।

फिर इन बेहूदे रिश्तों की तो कोई गारण्टी वारंटी भी नहीं होती.. बड़े बड़े शहरों में अमीर महिलाएँ अपने शौक के लिए पहले पालतू कुत्ता पालती थी आजकल लिव इन रिलेशनशिप के नाम पर आदमी पालती है.. पहले कुत्ते साथ लेकर चलने का फैशन था आजकल मर्द साथ लेकर चलने का फैशन बन गया है।

होड़ लगी है भैया.. ना कोई बाप ना मइया पैसा बोलता है साहब... इधर सुन्दर महिला और अकेली देखकर 16 साल से लेकर 80 साल के बूढ़ों की लार टपकने लगती है वह भरसक प्रयास करते हैं महिलाओं को पटाने के लिए... प्रेम व्रेम कुछ नहीं ..पुरुष स्त्री का माल हड़पने की फ़िराक़ में रहता है और स्त्री पुरुष का जिसके जो हाथ लगता है लेकर फरार हो जाते हैं।

अगर किसी बूढे पुरुष पर कोई महिला फिदा हो रही है तो समझ जाये बूढे के दिन पूरे हो गए हैं और अगर कोई बुढ़ी महिला पर युवा पुरुष फिदा हो रहे हैं तो उस महिला का अंत निकट है.. 100% में से मात्र 1% लोग बुढ़ापे में सहारा ढूंढते है अन्यथा हर कोई माल की फ़िराक़ में साथ रहने का ढोंग करते हैं और मोका मिलते ही हत्या कर देते हैं या कागजात जोर-जबरदस्ती करके अपने नाम करा लेते हैं।

अगर आप भी किसी लिव इन रिलेशनशिप के बारे में सोच रहे हैं तो सावधान.... बड़े धोखे है इस राह में .. पुरुष तो 99% शादीशुदा होते हैं जो सिर्फ मौज शौक के लिए महिलाओं का इस्तेमाल करते हैं.. और लड़कियां भी आजकल अंकल की संकल बनाने में लगी हुई है... 😏

27/07/2024

बहुत ही दुखदाई घटना है इनसानियत ओर मानवता के नाते अपराधियों की कोई जाति नहीं होती मित्रों ग़द्दारों को जल्द से जल्द करवाईं करते हुए कड़ी से कड़ी सज़ा देवे ताकि भविष्य में किसी के साथ ऐसी घटना न हो 🙏🙏बहुत ही दुखदाई ख़बर है भगवान उनकी पवित्र आत्मा को शांति प्रदान करें और परिवार को दुख सहन करने की हिम्मत देinc devasi
https://www.instagram.com/reel/C97OkOMSLzn/?igsh=MWYxMG1uNXR6NXU4Ng==

लगभग 1950 के आसपास दिल्ली बस स्टेण्ड का एक दृश्य
30/05/2024

लगभग 1950 के आसपास दिल्ली बस स्टेण्ड का एक दृश्य

समस्त देशवासियों को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं।
23/05/2024

समस्त देशवासियों को बुद्ध पूर्णिमा की हार्दिक शुभकामनाएं।

बाहर से रहो silent 😶 मगर अंदर से वो तूफान नही रुकना चाइए जिसे कामयाबी   कहते है...!!🙏🙏
22/05/2024

बाहर से रहो silent 😶 मगर अंदर से वो
तूफान नही रुकना चाइए जिसे कामयाबी
कहते है...!!🙏🙏

15/05/2024

30 जून तारीख #राईका_बाग रेलवे स्टेशन के धरना-प्रदर्शन में देवासी समाज के सभी नेताओं व महात्माओं को ज्यादा से ज्यादा भाग लेना चाहिए

11/05/2024

11/05/2024
पूरानी लिखीत बात याद आ गई केवल सत्रह दिन में कैसे व्यक्तियों ही नहीं सरकारों के दिन बदल जाते हैं या बदल दिये जाते हैं इस...
19/03/2024

पूरानी लिखीत बात याद आ गई
केवल सत्रह दिन में कैसे व्यक्तियों ही नहीं सरकारों के दिन बदल जाते हैं या बदल दिये जाते हैं इसे जानने के लिये वो सत्रह दिन एक जरुरी क़िताब है. जासूसी उपन्यास की तरह यहाँ पल पल फ़रेब है. जेम्स बॉन्ड की फिल्मों सी दिलचस्प. अपनी मर्यादा में रहते हुए मैं कथा के पात्रों या विवरण पर मौन ही रहूँगा. मुझे to इस कथा से ज्यादा इसके कथाकार और उसके कथा कौशल पर ही लिखने की सुविधा है. डॉ ब्रजेश राजपूत जिन्हे हिंदी समाज ABP याने आनन्द बाज़ार पत्रिका news channel के सुदर्शन संवाद data ब्रजेश राजपूत के नाम से ज्यादा janta है अपनी शालीन शैली में कुछ भी कह देने की सूझ बूझ से संपन्न है. शायद ख़ुद ब्रजेश को नहीं पता होगा ki वक्त है बदलाव का में एक ki पराजय और एक ki विजय गाथा लिखने के बाद इतनी जल्दी उन्हें एक भीषण संग्राम ki कहानी फिर से लिखनी होगी. उन्होंने लिखी और खूब लिखी. इतनी रोचक कि पूरी पढ़े बिना आप उठ नहीं सकते. सब कुछ कह दिया है और जो नहीं कहा वह असली ताकत है एक लेखक और पत्रकार की. उनकी पक्तियों के पीछे लगातार हमारे समय की धूल और धुआँ बोलता रहता है आप पृष्ठ दर पृष्ठ हत प्रभ होते जाते हैं और फ़िल्म ख़त्म होने पर उस दर्शक की तरह लौटते हैं जो the एन्ड पढ़कर भी सीट छोड़ने तैयार नहीं है...
( Ek IAS Officer )

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