29/11/2023
हर तारीख़ दां हिंदुस्तानी ये बात जानता ही है के पेहली सदी हिजरी के दौरे अखीर मैं जिस मुजाहिद ने सर ज़मीने हिंदुस्तान पर सबसे पेहले इसलाम का परचम बुलंद किया वो ज़ात
हज़रत मोहम्मद बिन क़ासिम अल्वी रेह्म्तुल्लाहे अलैह
की है आपने सबसे पेहले मुलतान और सिंध के इलाक़े पर फतेह हासिल फरमाकर इस्लामी हुकूमत क़ायम की थी मगर 90 हिजरी मैं आपको बग़दाद बुलाकर सुलेमान बिन अब्दुल मुलक ने आपको शहीद कर दिया था?
फिर 90 हिजरी से लेकर 282 हिज्री तक हिंदुस्तान की हुदूद मैं कोई भी मुबल्लिग़ ए इस्लाम बाज़ाब्ता तौर पर तबलीग़ी दस्तूर औ निज़ाम लेकर दाखिल नहीं हुआ,
और फिर वो वक्त भी आ गया जब हिंदुस्तान में सरकार मदार ए पाक के कदम पड़ते ही कुफ्रियत का खात्मा होने लगा सरकार मदार ए पाक की आमद
हुज़ूर सय्यिदुना मदारुलआलामीन रदियल्लाहू तआला अन्हू )👇👇👇
सन् 282 हिज्री मैं मुबल्लिग़ ए आज़म बनकर तशरीफ लाऐ
और देखते ही देखते आपने हिंदुस्तान के चप्पे चप्पे पर पर्चमे इस्लाम को इतना बुलंद कर दिया के जो बयान नही किया जा सक्ता.
हज़रत मोलाना सय्यद इक़बाल जौनपुरी फरमाते हैं-
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हुज़ूर सय्यिदुना बदीउद्दीन अहमद ज़िंदा शाह मदार क़ुद्दिसा सिर्रोहू
उस वक़्त हिंदुस्तान तशरीफ लाऐ जब यहां मुसलमानों का नाम औ निशान भी नही था
मोहम्मद बिन क़सिम की अल्वी की हुकूमत ज़वाल पिज़ीर हो चुकी थी(तारीख़ सलातीने शरक़िया वा सूफ़ीयाऐ जौनपुर & तारीख़े हिंदी)
मदार पाक ने हिंदुस्तान में कहां कहां दौरे किए इसके बारे में अगली पोस्ट में लिखूंगा पहले ये जान लो के कुतबूल मदार कहते किसे है
(DAM MADAR BEDA PAAR)
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(क़ुत्बुल मदार दुनया के चारो गोशों मैं गश्त करता है)
इमाम याफई अलेहिर्र्हमा अल हावी मैं और इमाम इबने हजर मक्की फतावा हदीसीया मैं रक़म फरमाते हैं;;;–
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वो क़ुतब (मदार) जो ग़ोस ओ क़ुतब के मक़ाम औ मरातिब का जामेअ वा मुताहम्मिल होता है,
उस को अल्लाह तआला दुन्या के चारों गोशों मैं गश्त कराता है जेसे आसमान के चारो तरफ सितारे चक्कर लगाते है,
और अल्लाह तआला उसकी ग़ैरतदारी मैं उसके आहवाल को खास औ आम सै पौशीदा रखता है
वो आलिम होने के बा वजूद नाख्वानिदा लगता है,
वो ज़हीन होते हुए भी कम फेहम मअलूम होता है,
दुनया से बे नियाज़ होकर भी दुनया को अपनी गिरफ्त मैं रख्ता है,
खुदा से क़रीब तर होते हुए भी कुछ दूर सा लगता है,
दर्द मन्द होते हुए भी तंग दिल जान पढ़ता है,
बेखौफ होने के बा वाजूद सेहमा सेहमा मेहसूस होता है,
औलीया अल्लाह मैं उसका मक़ाम ऐसा है जेसे दाएरे के मरकज़ नुक़ते का,उसी पर आलम की दुरुस्तगी का दारो मदार होता है
(फतावा हदीसिया सफ्हा-322)
इबारते मज़्कूरा सरकारे मदारुलआलामीन रदियल्लाहू तआला अन्हु की ऐक इजमाली सवानेह उम्री(biography)है,
तारीख़ शाहिद है के आपने आफाक़े आलम का ग़श्त फरमाया है ऐशीया,यूरोप,अमेरिका औ अफ्रीक़ा,और ऑस्ट्रेलिया,सीरीया,हिजाज़,ईराक़,
अफ़ग़ानिस्तान,ब्रिटेन,बरतानिया,अ
लमानिया,चीन,रोम,यूनान,ईरान,मिस
्र,फारस,सुडान,मराकिश,जापान,कोल
मबो,इंडोनेशीया,श्री लंका,बंगला देश,नेपाल यहां तक के दुनिया तो दुनया चांद पर भी आपका चिल्ला मौजूद है
अकसर मक़ामात पर आज भी आप के चिल्ले जात,आपके खुल्फा के मज़ारात,आपकी गदीयां,आपके तकीये और आपके नाम से मनसूब दीगर निशानियां आपकी अज़मतों की यादगार हैं
चांद पर मदार ए पाक के चिल्ले का बकिया अगली पोस्ट में जरूर पढ़िए
आप लोगो का शुक्रिया पोस्ट पढ़ने के लिऐ
मौला अमान में रखे आप सभी
(हक अल्लाह मुहम्मद मदार)
(सबका बेड़ा पार)