10/04/2025
कट्टर समर्थक की कलम से,,,,,*बालाराम जी मूंढ़ के राजनीतिक प्रभाव,प्रशासनिक पकड़ और जमीनी जुड़ाव ने कार्यकर्ताओं का बढ़ाया मान: परिसीमन से बायतु विधानसभा में खुशी की लहर*
*बालोतरा-बाड़मेर दोनों जिलों में सर्वाधिक 61 नवसृजित ग्राम पंचायत बायतु विधानसभा क्षेत्र में बनाए गए*
जब राज्य सरकार ने पंचायती राज में पुनर्गठन की अधिसूचना जारी की,तब बायतु विधानसभा क्षेत्र के भाजपा कार्यकर्ता थोड़े निराश थे।यह निराशा इस बात की थी कि पार्टी सत्ता में है लेकिन विधायक हमारा नहीं है,ऐसे में पंचायत पुनर्गठन में कार्यकर्ता,पार्टी और क्षेत्र की आवश्यकताओं के अनुरूप कार्य हो पाएंगे अथवा नहीं?लेकिन आज जब यह कार्य पूर्ण हुआ तो कार्यकर्ताओं और जनता की वह निराशा अपार हर्ष,आनंद एवं उत्साह में बदल गई।इस बदलाव के वाहक और नायक के रूप में उभर कर आए है बाला राम मूढ़।
नए राजस्व ग्राम,ग्राम पंचायत तथा पंचायत समिति के निर्माण में आज बायतु ने पूरे प्रदेश में कीर्तिमान स्थापित किया है तो इसका पूरा श्रेय बालाराम को जाता है जिन्होंने बिना थके,बिना रुके निरंतर प्रयास कर इस मिशन को पूरा किया है।विधानसभा क्षेत्र की भौगोलिक संरचना की सूक्ष्म जानकारी,पार्टी के छोटे से छोटे कार्यकर्ता से नियमित संवाद,मंडल अध्यक्षों व अन्य पार्टी पदाधिकारियों के साथ सतत बैठके और आमजन से सीधे तथा विस्तृत संवाद की शैली से बालाराम मूढ़ ने बायतु के सारे समीकरण,कयास व भूगोल को ऐसा स्वरूप प्रदान किया है कि निकट भविष्य में यह न केवल पार्टी के लिए अपितु क्षेत्र के विकास के लिए भी वरदान साबित होगा।सीमावर्ती जिलों हेतु जनसंख्या के मापदंडों में शिथिलता तथा पुनर्गठन हेतु समयावधि में बढ़ोतरी हेतु राज्य सरकार के समक्ष सक्षम एवं सफल पैरवी उनकी पार्टी और सरकार में गहरे प्रभाव को सिद्ध करती है।2009 में कांग्रेस सरकार द्वारा किए गए पक्षपातपूर्ण परिसीमन से भाजपा कार्यकर्ताओं में जो रोष था, बालाराम के प्रयासों ने उस रोष को भी खत्म कर दिया कि इस बार बिना जाति,धर्म,क्षेत्र का पक्षपात किए जनता की सुविधा,शासन तक उनकी आसान पहुंच,कार्यकर्ताओं की मांग तथा विकास के पैमानों के आधार पर पुनर्गठन करवाया गया है।
अपनी राजनीतिक सूझबूझ,संगठन और सरकार में गहरी पकड़,अधिकारियों पर प्रभावी नियंत्रण,कार्यकर्ताओं व आमजन से सहज और सतत संपर्क के कारण बालाराम मूढ़ का नाम आज पूरे मालाणी अंचल में चर्चा का विषय बन गया है। बायतु की जनता को भी यह अहसास हो गया है कि जो व्यक्ति पराजित होकर भी इतना सक्रिय तथा प्रभावी है,यदि विधायक के रूप में निर्वाचित हो जाते तो इनमें क्षेत्र का कायापलट करवाने की पूर्ण कुव्वत है।इसलिए बायतु की फिजाओं में एक बार फिर नारे लग रहे है *बायतु का एक ही राम, बाला राम बाला राम*..
क्या हार में क्या जीत में,
किंचित नहीं भयभीत में
संघर्ष पथ पर जो मिले,यह भी सही वह भी सही
चाहे ह्रदय को ताप दो, चाहे मुझे अभिशाप दो,
कुछ भी करो,कर्तव्य पथ से किंतु भागूंगा नहीं.....