19/12/2025
आज दिल्ली में लोक सभा अध्यक्ष श्री Om Birla जी से संसद भवन स्थित उनके कक्ष में मुलाकात करके #अरावली_पर्वतमाला को बचाने के लिए लोक सभा के स्तर से हस्तक्षेप करने की मांग रखी | मैंने लोक सभा अध्यक्ष जी से कहा कि अरावली पर्वतमाला को बचाने के लिए उठ रही आवाज किसी एक पहाड़ी को बचाने का विषय नहीं है बल्कि यह जनस्वास्थ्य, अर्थव्यवस्था और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा हुआ मामला है | दिल्ली -एनसीआर से लेकर हरियाणा व राजस्थान के एक दर्जन जिलों मे फैली अरावली पर्वतमाला भारत की सबसे प्राचीन पर्वत श्रृंखलाओं में से एक है और दिल्ली–एनसीआर के लिए यह सिर्फ पहाड़ नहीं, बल्कि जल, वायु और जैव-विविधता की जीवनरेखा है। दुर्भाग्य से आज यह पर्वतमाला गंभीर संकट से जूझ रही है और इन सब हालतों के मध्य भारत सरकार द्वारा गठित एक कमेटी की रिपोर्ट के आधार पर माननीय सुप्रीम कोर्ट ने अरावली की परिभाषा ही बदल दी जिससे इस पर्वतमाला के भविष्य पर सवाल खड़े हो गए | मुझे आश्चर्य इस बात का है कि एक तरफ देश के उच्चतम न्यायालय ने दिल्ली-NCR की हवा को बढ़ते वायु प्रदूषण के कारण “स्वास्थ्य आपातकाल” कहा है और प्रदूषण रोकने के लिए जल्दी कदम उठाने की बात कही मगर दूसरी तरफ माननीय सुप्रीम कोर्ट ने ही अरावली की जो नई परिभाषा तय की है वो अरावली को बर्बाद करने की एक नई परिभाषा बनेगी जिस पर सुप्रीम कोर्ट को पुनर्विचार करना चाहिए | पिछले कुछ दशको में अरावली की पहाड़ीयों का विनाश इतने बड़े पैमाने पर हुआ है कि राजस्थान मे अजमेर से झुंझनू और हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिले तक फैली अरावली मे 12 से ज़्यादा दरारें खुल गई जहाँ से थार रेगिस्तान की धूल दिल्ली- एनसीआर तक उड़ रही है ,ऐसा पर्यावरण से जुड़े जानकारो ने मुझे कहा है | अरावली की नई परिभाषा से खनन को बढ़ावा मिलेगा और पहाड़ीयां ज़मीदोँज हो जाएगी तथा भारत की प्राचीन पर्वतमाला निरंतरता खो देगी जिससे ज़्यादा गैप और दरारें बन जाएगी, अरावली राजस्थान की भी लाइफ लाइन और पहचान है क्योंकि इस पर्वतमाला की 692 KM लंबाई मे से लगभग 550 KM राजस्थान से गुजरती है और अरावली का नुकसान होने से मरुस्थल का विस्तार होगा, गर्म हवाओं का व्यापक असर राजस्थान मे बढ़ेगा और बंगाल की खाड़ी से आने वाले मानसून से होने वाली बारिश भी प्रभावित होगी तथा इससे निकलने वाली नदियां भी लुप्त होगी |
Rashtriya Loktantrik Party