14/04/2021
#बलिदान_दिवस_शहीद_लखसिंह_चोचरा
तू शहीद हुआ ना जाने कैसे तेरी मां सोई होगी, एक बात तो तय है तुझे लगने वाली गोली भी सौ बार रोई होगी
शहीद लख सिंह जी अवकाश पर आए हुए थे और 11 अप्रैल 1961 को इनको तत्काल ड्यूटी ज्वाइन करने का आदेश आता है पुलिस को सूचना मिली की सरगिला का पार कोटड़ा (शिव) में 3-4 डकैत छिपे हुए है बाड़मेर पुलिस अधीक्षक ने हैड कांस्टेबल लख सिंह के नेतृत्व में टीम का गठन करके तुरन्त कार्यवाही का आदेश दिया
ये मुठभेड़ 2-3 दिन चली जिसमे लख सिंह और टीम द्वारा 3 डकैत को मार गिराया और अंत में लख सिंह अपने प्राणों की परवाह किए बिना रेत के टीले में छिपे डकैत को मार गिराने के लिए आगे बढ़े तब उसने एक गोली चलाई जो इस वीर को गली और 14 अप्रैल 1961 शहीद हो गए
लख सिंह को मरणोपरांत 2 जनवरी 1962 को पुलिस गेलेट्री पुरस्कार दिया गया है
बाड़मेर पुलिस की कलम से
जला अस्थियां अपनी सारी सुलग गई जिसमें चिनगारी, चढ गए पुष्प वेदी पर जो लिए बिना गर्दन का मोल!
कलम आज उनकी जय बोल......
कलम आज उनकी जय बोल......
नमन नमन नमन
जय हिंद