बड़हलगंज/Barhalganj

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10/03/2026

• ईरान-इज़रायल तनाव से टाइल्स और सैनिटरी उद्योग पर असर पड़ेगा।

• गोरखपुर टाइल्स एवं सेनेटरी एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्की कुकरेजा ने बताया कि खाड़ी देशों से आने वाली प्रोपेन गैस और एलएनजी की आपूर्ति प्रभावित हो सकती है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ेगी और उत्पादों के दाम में तेजी आएगी।

• यदि यह तनाव लंबा खिंचा तो भवन निर्माण और इंटीरियर कार्यों पर व्यापक प्रभाव पड़ेगा।

29/01/2026

UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक, दुरुपयोग की आशंका जताई केंद्र सरकार को नए सिरे से ड्राफ्ट तैयार करने के निर्देश, 19 मार्च को अगली सुनवाई*

देश की उच्च शिक्षा व्यवस्था को लेकर चल रही सबसे बड़ी नीतिगत बहस के बीच सुप्रीम कोर्ट ने विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के नए नियमों पर बड़ा और निर्णायक आदेश देते हुए अंतरिम रोक लगा दी है। शीर्ष अदालत ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि मौजूदा नियमों की भाषा और संरचना अस्पष्ट है और इनका दुरुपयोग होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता, इसलिए इन्हें वर्तमान स्वरूप में लागू नहीं किया जा सकता।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को निर्देश दिया है कि नियमों को संविधान के अनुरूप संतुलित और निष्पक्ष ढंग से नए सिरे से ड्राफ्ट किया जाए। मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की गई है।

*शीर्ष अदालत की अहम टिप्पणी:* शिक्षण संस्थानों में दिखनी चाहिए भारत की एकता
सुनवाई के दौरान प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्य कांत ने समाज में व्याप्त जातिगत विभाजन पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि *आजादी के 75 वर्षों बाद भी भारतीय समाज पूरी तरह जातियों से मुक्त नहीं हो सका* है। उन्होंने कहा कि *शिक्षण संस्थानों में स्वतंत्र, समान और समावेशी वातावरण* होना चाहिए, जहाँ भारत की विविधता के बीच एकता दिखाई दे।
अदालत ने यह भी कहा कि शिक्षा संस्थान केवल डिग्री देने वाले केंद्र नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों और सामाजिक समरसता के केंद्र होने चाहिए।

*UGC के नए नियमों में क्या प्रस्तावित था*

UGC द्वारा अधिसूचित नए नियमों के तहत हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में Equality Opportunity Centre (EOC) और इक्वलिटी कमेटी बनाने का प्रावधान किया गया था। *नियमों के अनुसार*

• हर कॉलेज में EOC की स्थापना अनिवार्य
• पिछड़े और वंचित छात्रों को पढ़ाई, फीस और भेदभाव से संबंधित सहायता
• कॉलेज प्रमुख को इक्वलिटी कमेटी का अध्यक्ष बनाया जाना
• कमेटी में SC/ST, OBC, महिलाएँ और दिव्यांग प्रतिनिधियों को शामिल करना
• जाति-आधारित भेदभाव की शिकायत पर 24 घंटे में बैठक
• 15 दिन में रिपोर्ट और 7 दिन में कार्रवाई की समयसीमा
• हर छह महीने में UGC को रिपोर्टिंग
• नियम उल्लंघन पर ग्रांट रोकने, डिग्री व डिस्टेंस कोर्स बंद करने और मान्यता रद्द करने का अधिकार
देशभर में क्यों हुआ विरोध
UGC के नए नियमों को लेकर देशभर के विश्वविद्यालयों, शिक्षाविदों, छात्र संगठनों और सामाजिक समूहों ने गंभीर आपत्तियाँ उठाईं। विरोध के मुख्य बिंदु निम्नलिखित रहे—
•भेदभाव की परिभाषा एकतरफा होने का आरोप
आलोचकों का कहना है कि नियमों में SC/ST/OBC, महिलाएँ और दिव्यांग शामिल हैं, लेकिन जनरल कैटेगरी को पीड़ित के रूप में मान्यता नहीं, बल्कि संभावित आरोपी के रूप में देखा गया है।
•झूठी शिकायत पर दंड का प्रावधान नहीं
नियमों में फर्जी या गलत शिकायत करने वालों पर किसी प्रकार के दंड का प्रावधान नहीं होने से दुरुपयोग की आशंका जताई गई।
•इक्वलिटी कमेटी में संतुलित प्रतिनिधित्व नहीं
EOC और इक्वलिटी कमेटी में सामान्य वर्ग के प्रतिनिधित्व को अनिवार्य नहीं किया गया, जिससे एकतरफा निर्णय होने का खतरा बताया गया।
कॉलेजों पर अत्यधिक दंडात्मक शक्ति
ग्रांट रोकने और मान्यता रद्द करने जैसे कठोर प्रावधानों से कॉलेज प्रशासन पर अत्यधिक दबाव और भय का माहौल बनने की आशंका जताई गई।
*UGC एक्ट 1956 से बाहर नियम बनाने का आरोप*
विरोधियों का कहना है कि UGC का अधिकार क्षेत्र अकादमिक मानकों तक सीमित है और सामाजिक अपराध या दंडात्मक कानून बनाना UGC के वैधानिक अधिकार क्षेत्र से बाहर है।
*सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट रुख: संवैधानिकता सर्वोपरि*
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि शिक्षा नीति चाहे कितनी भी आवश्यक क्यों न हो, उसे संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 19 के अनुरूप होना चाहिए। अदालत ने कहा कि अस्पष्ट कानून और नियम मनमानी कार्रवाई, राजनीतिक दुरुपयोग और अकादमिक स्वतंत्रता के हनन का माध्यम बन सकते हैं।
अदालत ने यह भी कहा कि नियमों को इस प्रकार तैयार किया जाना चाहिए कि वे
• भेदभाव रोकें
• सभी वर्गों के अधिकारों की रक्षा करें
• शिक्षण संस्थानों की स्वायत्तता बनाए रखें
केंद्र सरकार और UGC को निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार और UGC को निर्देश दिया है कि वे
• नियमों का पुनः मसौदा तैयार करें
• सभी हितधारकों से परामर्श करें
• संवैधानिक संतुलन बनाए रखते हुए स्पष्ट परिभाषाएँ तय करें
• दुरुपयोग रोकने के लिए सुरक्षा प्रावधान जोड़ें

*अगली सुनवाई 19 मार्च को*
अदालत ने सभी पक्षों से विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा है और मामले की अगली सुनवाई 19 मार्च को निर्धारित की है। तब तक UGC के विवादित नियमों पर लगी अंतरिम रोक जारी रहेगी।
शिक्षा नीति, सामाजिक न्याय और लोकतंत्र की परीक्षा
यह मामला केवल UGC के नियमों का नहीं, बल्कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली के भविष्य से जुड़ा है। यह विवाद सामाजिक न्याय, मेरिट, अकादमिक स्वतंत्रता और राज्य नियंत्रण के बीच संतुलन की बड़ी संवैधानिक बहस को जन्म दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह आदेश नीति-निर्माण प्रक्रिया में संवैधानिक विवेक और लोकतांत्रिक संतुलन की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

UGC के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट की रोक केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं, बल्कि भारतीय उच्च शिक्षा व्यवस्था की दिशा तय करने वाला ऐतिहासिक न्यायिक हस्तक्षेप माना जा रहा है। आने वाली सुनवाई और संशोधित नियम देश की शिक्षा नीति के भविष्य की दिशा तय करेंगे।

उत्तर प्रदेश में 12वीं तक के सभी विद्यालय 5 जनवरी तक बंद रहेंगे।उत्तर प्रदेश में अत्यधिक शीतलहर और घने कोहरे के कारण, सर...
02/01/2026

उत्तर प्रदेश में 12वीं तक के सभी विद्यालय 5 जनवरी तक बंद रहेंगे।

उत्तर प्रदेश में अत्यधिक शीतलहर और घने कोहरे के कारण, सरकार ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशानुसार, राज्य के सभी विद्यालयों (सीबीएसई, आईसीएसई, यूपी बोर्ड सहित) में कक्षा 1 से कक्षा 12 तक की पढ़ाई 5 जनवरी 2026 तक स्थगित कर दी गई है, ताकि बच्चों की सुरक्षा और स्वास्थ्य सुनिश्चित किया जा सके। छात्रों और अभिभावकों से अनुरोध है कि वे नियमित जानकारियों के लिए अपने विद्यालय से संपर्क बनाए रखें।“

02/01/2026

भीषण ठंड व शीतलहर के चलते गोरखपुर में कक्षा 1 से 10 तक के विद्यालयों में 2 व 3 जनवरी को अवकाश

गोरखपुर। जनपद में लगातार बढ़ती ठंड और शीतलहर को देखते हुए जिलाधिकारी गोरखपुर के निर्देशानुसार कक्षा 1 से 10 तक के सभी विद्यालयों में दो दिवसीय अवकाश घोषित किया गया है। यह अवकाश दिनांक 02 जनवरी 2026 एवं 03 जनवरी 2026 को प्रभावी रहेगा।
जिला विद्यालय निरीक्षक गोरखपुर डॉ. अगर कान्त सिंह द्वारा जारी आदेश के अनुसार यह अवकाश जनपद में संचालित समस्त राजकीय, परिषदीय, सहायता प्राप्त, मान्यता प्राप्त, स्ववित्त पोषित विद्यालयों सहित सीबीएसई, आईसीएसई एवं अन्य सभी बोर्डों के विद्यालयों पर लागू होगा। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि विद्यार्थियों के स्वास्थ्य और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है, ताकि अत्यधिक ठंड के कारण बच्चों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
हालांकि, अवकाश के दौरान शिक्षकों को विद्यालयों में ससमय उपस्थित रहना अनिवार्य होगा। शिक्षक विद्यालयों में उपस्थित होकर विभागीय कार्यों, प्रशासनिक दायित्वों तथा प्री-बोर्ड परीक्षाओं से संबंधित कार्यों का सुचारु रूप से संपादन सुनिश्चित करेंगे।
जिला प्रशासन ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे बच्चों को ठंड से बचाव के लिए आवश्यक सावधानियां बरतें। मौसम विभाग द्वारा शीतलहर की चेतावनी को ध्यान में रखते हुए आगे भी आवश्यकतानुसार निर्णय लिया जा सकता है।

 #किसान दिवस पर आयोजित हुआ भव्य सम्मान समारोह, किसानों की समस्याओं पर प्रशासन हुआ गंभीर #चौधरी चरण सिंह जयंती पर किसान द...
23/12/2025

#किसान दिवस पर आयोजित हुआ भव्य सम्मान समारोह, किसानों की समस्याओं पर प्रशासन हुआ गंभीर

#चौधरी चरण सिंह जयंती पर किसान दिवस आयोजित, खाद दुकानों पर कार्रवाई और नहर सफाई के निर्देश*

#गोरखपुर। जनपद गोरखपुर में किसान दिवस के अवसर पर एनेक्सी सभागार में एक भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि वरिष्ठ नेता राधेश्याम सिंह तथा विशिष्ट अतिथि जिलाधिकारी दीपक मीणा रहे। इस अवसर पर देश के पूर्व प्रधानमंत्री एवं किसानों के मसीहा कहे जाने वाले चौधरी चरण सिंह की जयंती पर उनके चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि अर्पित की गई। सभागार में उपस्थित किसानों एवं अधिकारियों ने चौधरी चरण सिंह के विचारों को स्मरण करते हुए उन्हें नमन किया।
कार्यक्रम में जिले के विभिन्न विकास खंडों से आए सैकड़ों किसानों ने प्रतिभाग किया। सम्मान समारोह के दौरान जिलाधिकारी दीपक मीणा ने किसानों की समस्याओं को गंभीरता से सुना और कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर तत्काल कार्रवाई एवं स्पष्ट निर्देश दिए। डीएम ने कहा कि चौधरी चरण सिंह ने हमेशा किसानों के अधिकारों, सम्मान और आत्मनिर्भरता की बात की और आज किसान दिवस के अवसर पर उनके आदर्शों को व्यवहार में उतारना हम सभी की जिम्मेदारी है।
खाद की कालाबाजारी और अनियमितताओं पर सख्त रुख अपनाते हुए जिलाधिकारी ने कहा कि जिन खाद की दुकानों पर रेट लिस्ट नहीं लगी है, वहां तत्काल रेट लिस्ट अनिवार्य रूप से लगाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि नियमों का उल्लंघन करने वाले दुकानदारों के खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी। इसी क्रम में डीएम ने जानकारी दी कि जनपद में जांच के दौरान नियमों का पालन न करने पर दो खाद दुकानों का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। उन्होंने स्पष्ट कहा कि किसानों के साथ किसी भी प्रकार का शोषण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
कार्यक्रम में किसानों द्वारा प्रधानमंत्री कुसुम योजना के अंतर्गत सब्सिडी का मुद्दा भी जोर-शोर से उठाया गया। किसानों ने सोलर पंप एवं अन्य उपकरणों पर मिलने वाली सब्सिडी में देरी की शिकायत की। वहीं मशरूम उत्पादन से जुड़े छोटे किसानों ने प्लांट स्थापना हेतु अतिरिक्त सब्सिडी की मांग रखी। जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि पीएम कुसुम योजना सहित अन्य कृषि योजनाओं का लाभ पात्र किसानों तक समयबद्ध और पारदर्शी तरीके से पहुंचाया जाए।
नहरों की सफाई का मुद्दा भी किसान दिवस में प्रमुखता से उठा। किसानों ने बताया कि कई नहरों में समय पर सफाई न होने से टेल तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है, जिससे फसलों को नुकसान हो रहा है। इस पर जिलाधिकारी दीपक मीणा ने स्पष्ट किया कि जहां नहरों में पानी का प्रवाह 8 क्यूसेक से कम होगा, वहां मनरेगा मजदूरों के माध्यम से सफाई कराई जाएगी और जहां इससे अधिक पानी होगा, वहां जेसीबी मशीन का प्रयोग किया जाएगा। उन्होंने सिंचाई विभाग को निर्देश दिया कि नहरों की स्थिति का आकलन कर शीघ्र कार्यवाही सुनिश्चित करें।
छुट्टा पशुओं से फसल नुकसान की समस्या को लेकर भी किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त की। किसानों का कहना था कि छुट्टा पशु खेतों में घुसकर फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं। इस पर डीएम ने कहा कि प्रशासन इस समस्या के समाधान के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। उन्होंने किसानों से भी अपील की कि वे अपने-अपने क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर सहयोग करें और गौशालाओं के संचालन में सक्रिय भूमिका निभाएं। डीएम ने कहा कि जहां भी समस्या अधिक है, वहां विशेष निगरानी रखी जाएगी।
कार्यक्रम में जिलाधिकारी ने किसानों की मेहनत और योगदान की सराहना करते हुए कहा कि किसान देश की रीढ़ हैं और उनकी समस्याओं का समाधान प्रशासन की प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि किसान अपने क्षेत्रों में बेहतर कार्य कर रहे हैं और सरकार की योजनाओं का लाभ लेकर कृषि को आधुनिक दिशा में आगे बढ़ा रहे हैं।
इस अवसर पर मुख्य विकास अधिकारी शाश्वत त्रिपुरारी, उप निदेशक कृषि धनंजय सिंह, जिला कृषि अधिकारी देवेंद्र प्रताप सिंह सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। कार्यक्रम के दौरान किसान मेला एवं किसान प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया, जिसमें कृषि से जुड़ी आधुनिक तकनीकों, उपकरणों एवं योजनाओं की जानकारी दी गई।
आत्मा योजना के अंतर्गत चयनित प्रगतिशील किसानों को प्रशस्ति पत्र एवं अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया गया। सम्मान पाकर किसानों के चेहरे पर खुशी और गर्व साफ दिखाई दिया। कार्यक्रम के समापन पर जिलाधिकारी एवं अन्य अतिथियों ने किसानों को चौधरी चरण सिंह के आदर्शों पर चलने और आत्मनिर्भर कृषि की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश दिया।
कुल मिलाकर किसान दिवस का यह आयोजन किसानों की समस्याओं, सम्मान और संवाद का सशक्त मंच साबित हुआ, जहां प्रशासन और किसान एक साथ मिलकर समाधान की दिशा में आगे बढ़ते नजर

बहन की शादी में आई देवरिया की नवविवाहिता का हत्यारा गिरफ्तारगोरखपुर। झंगहा थाना क्षेत्र के जंगलरसुलपुर नंबर दो, लक्ष्मीप...
25/11/2025

बहन की शादी में आई देवरिया की नवविवाहिता का हत्यारा गिरफ्तार

गोरखपुर। झंगहा थाना क्षेत्र के जंगलरसुलपुर नंबर दो, लक्ष्मीपुर गांव में चचेरी बहन की शादी में आई नवविवाहिता शिवानी की सनसनीखेज हत्या का खुलासा पुलिस ने कर दिया है। पुलिस ने मुख्य आरोपी विनय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। वारदात के बाद आरोपी वाराणसी भाग गया था, जहां से उसे दबिश देकर पकड़ा गया।

देवरिया जिले के रुद्रपुर थाना क्षेत्र के अवस्थी गांव निवासी शिवानी तीन दिन पहले ही मायके आई थी। रविवार देर रात जयमाल समारोह के बाद वह घर लौट आई थी। जब उसकी मां नोहरी देवी देर रात कार्यक्रम से वापस पहुंचीं, तो शिवानी घर पर नहीं मिली। बड़ी बेटी से जानकारी लेने के बाद घर के आसपास खोजबीन शुरू की गई।

तलाश के दौरान घर के पास बने टॉयलेट के नीचे एक हाथ दिखाई दिया। दरवाजा खोला गया तो अंदर शिवानी का खून से लथपथ शव पड़ा मिला। उसका गला धारदार हथियार से बेरहमी से रेत दिया गया था। भयावह दृश्य देखकर मां चीख पड़ीं और गांव में अफरा-तफरी मच गई।

*डॉग स्क्वायड और फोरेंसिक टीम जुटाए अहम साक्ष्य*

सूचना पर पहुंची पुलिस ने डॉग स्क्वायड और फोरेंसिक टीम को बुलाकर मौके की बारीकी से जांच कराई। खोजी कुत्ता खून के धब्बे सूंघते हुए मृतका के घर के पीछे की गली तक गया, जहां आरोपी विनय का घर स्थित बताया गया है। फोरेंसिक टीम ने खून, मिट्टी, फिंगरप्रिंट सहित कई महत्वपूर्ण नमूने एकत्र किए हैं।
कॉल डिटेल और साक्ष्यों से आरोपी तक पहुंची पुलिस

शिवानी की मां ने पहले अज्ञात के खिलाफ हत्या की तहरीर दी थी। पुलिस ने गांव वालों से पूछताछ, कॉल डिटेल और जुटाए साक्ष्यों के आधार पर आरोपी की लोकेशन ट्रेस की। कुछ लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ भी की गई। इसके बाद आरोपी विनय के वाराणसी भागने की जानकारी मिली और उसे गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस लाइन वाइट सभागार में मामले की जानकारी देते हुए पुलिस अधीक्षक उत्तरी ज्ञानेंद्र ने बताया कि मृतका शिवानी अभियुक्त विनय पर शादी का दबाव बना रही थी। इसी कारण विनय ने उससे पीछा छुड़ाने के लिए उसकी हत्या कर दी।

पुलिस ने आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भेज दिया है। वारदात के खुलासे के बाद गांव में दहशत और आक्रोश दोनों व्याप्त हैं। पुलिस मामले की आगे की कार्रवाई में जुटी है।

22/11/2025

एसआईआर वेरिफिकेशन के नाम पर सक्रिय जालसाज, बीएलओ बनकर मांग रहे ओटीपी — प्रशासन ने जारी की चेतावनी

#गोरखपुर।जिले में इन दिनों एसआईआर (स्पेशल समरी रिवीजन) वेरिफिकेशन के नाम पर एक नया फर्जीवाड़ा तेजी से फैल रहा है। जालसाज खुद को बीएलओ (बूथ लेवल ऑफिसर) बताकर मतदाता सूची सत्यापन का हवाला देते हुए लोगों से मोबाइल पर भेजा गया ओटीपी (वन टाइम पासवर्ड) मांग रहे हैं। प्रशासन ने इसे एक गंभीर साइबर धोखाधड़ी करार देते हुए नागरिकों को आगाह किया है कि बीएलओ किसी भी स्थिति में किसी से ओटीपी नहीं मांगते। किसी के बहकावे में आकर ओटीपी साझा करना लोगों की निजी जानकारी, बैंक खाते और डिजिटल वॉलेट की सुरक्षा के लिए बेहद खतरनाक साबित हो सकता है।

*जालसाज बदल रहे हैं तरीके, बीएलओ का नाम इस्तेमाल कर रहे धोखाधड़ी*

जिलें में साइबर ठग अब नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाने पर ले रहे हैं। मतदाता सूची संशोधन और परिवार विवरण सत्यापन के नाम पर फोन कॉल कर वे खुद को बीएलओ बताते हैं। इसके बाद वे दावा करते हैं कि आपका नाम, पता या अन्य दस्तावेज पुन: सत्यापित करना है। इसी बहाने वे मोबाइल पर भेजे गए ओटीपी की मांग करते हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार ओटीपी साझा करते ही जालसाज पीड़ित के बैंक खाते, यूपीआई, डिजिटल वॉलेट, सोशल मीडिया और ईमेल खातों तक अनधिकृत पहुंच बना लेते हैं। कई मामलों में खातों से तुरंत पैसे निकाल लिए जाते हैं।

*प्रशासन ने कहा — “बीएलओ कभी ओटीपी नहीं मांगते*

जिला प्रशासन और चुनाव कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि बीएलओ का कार्य केवल घर-घर जाकर फॉर्म भरवाना, दस्तावेज लेना और मतदाता सूची से जुड़े आवश्यक विवरणों का सत्यापन करना होता है।
बीएलओ किसी भी नागरिक से मोबाइल ओटीपी, बैंक विवरण, पासवर्ड या कोई गोपनीय जानकारी नहीं मांगते।
प्रशासन ने चेतावनी दी है कि यदि कोई व्यक्ति खुद को बीएलओ बताकर ओटीपी मांग रहा है, तो वह निश्चित रूप से जालसाज है।

*ओटीपी साझा किया तो मिनटों में खाली हो सकता है बैंक खाता*

साइबर सेल ने बताया कि कई लोग जागरूकता की कमी और सरकारी प्रक्रिया समझ न पाने के कारण जालसाजों के झांसे में आ जाते हैं।
ओटीपी साझा होते ही जालसाज खाते में लिंक किए मोबाइल नंबर, ईमेल और बैंक एप्प्स को कनेक्ट कर लेते हैं, जिसके बाद कुछ ही मिनटों में बचत खाते, फिक्स्ड डिपॉजिट, क्रेडिट कार्ड और यूपीआई बैलेंस खाली हो सकता है।
कुछ मामलों में जालसाज पीड़ित की पहचान का इस्तेमाल दूसरे अपराधों में भी कर सकते हैं।

*कैसे बचें ऐसे साइबर ठगी से?*

प्रशासन और साइबर सेल ने नागरिकों से सतर्क रहने के लिए निम्न सलाह जारी की है—

किसी भी व्यक्ति को ओटीपी, पासवर्ड या बैंक से संबंधित जानकारी बिल्कुल न दें।

बीएलओ कभी फोन पर सत्यापन नहीं करते, न ही ओटीपी मांगते हैं।

किसी संदिग्ध कॉल या संदेश पर तुरंत 1930 (साइबर हेल्पलाइन) पर शिकायत दर्ज कराएं।

बैंक खाते की जानकारी अपडेट करने, केवाईसी, वोटर आईडी सत्यापन जैसे बहानों पर ओटीपी मांगने वाली कॉल तुरंत काट दें।

जिस नंबर से कॉल आए, उसे ब्लॉक कर दें और साइबर सेल को सूचित करें।

प्रशासन ने नागरिकों से की अपील

जिला प्रशासन ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि ऐसे मामलों को अपने परिचितों, परिवार और बुजुर्गों तक भी साझा करें, ताकि कोई धोखाधड़ी का शिकार न बने।
साथ ही, यदि कोई संदिग्ध कॉल या संदेश मिले तो जानकारी तुरंत निकटतम थाने, साइबर सेल या हेल्पलाइन नंबर पर दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।

गोरखपुर प्रशासन ने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि “सतर्क रहना ही सुरक्षा है। ओटीपी साझा करते ही आप अपनी आर्थिक सुरक्षा खो सकते हैं।”
नागरिकों को सलाह दी गई है कि ऐसे किसी भी कॉल से सावधान रहें और अपनी व्यक्तिगत व बैंकिंग जानकारी हमेशा गोपनीय रखें।

चटोरी गली में शॉर्ट सर्किट से आग: दो दुकानें जलकर राख, ठेकेदार पर लापरवाही के आरोप #गोरखपुर, मंगलवार। कैंट क्षेत्र स्थित...
18/11/2025

चटोरी गली में शॉर्ट सर्किट से आग: दो दुकानें जलकर राख, ठेकेदार पर लापरवाही के आरोप

#गोरखपुर, मंगलवार। कैंट क्षेत्र स्थित गोरखपुर की प्रसिद्ध चटोरी गली मंगलवार शाम दहशत से भर उठी, जब अचानक शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। घनी आबादी वाले इस इलाके में आग ने देखते ही देखते भयानक रूप ले लिया और दो दुकानों को राख में बदल दिया। घटना से अफरा-तफरी मच गई, लोग चीखते-भागते रहे, और पूरा क्षेत्र धुएं की चपेट में आ गया।

घटना के दौरान मौके पर मौजूद लोगों ने बताया कि अचानक बिजली के तारों से चिंगारी उठी, जो पलभर में लपटों में बदल गई। आग फैलने के कारण आसपास का माहौल दहशत से भर गया और लोग अपने-अपने सामान को बचाने के लिए दौड़ पड़े।

सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की टीम तत्काल मौके पर पहुंची। मुख्य अग्निशमन अधिकारी (सीएफओ) संतोष कुमार रॉय ने बताया कि आग की सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियाँ मौके पर भेजी गईं और कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया गया। उन्होंने बताया कि आग का कारण शॉर्ट सर्किट प्रतीत होता है, हालांकि असली वजह की पुष्टि जांच के बाद ही की जाएगी। इस हादसे में किसी तरह की जानमाल की हानि होने से बचाव हुआ, लेकिन आर्थिक नुकसान काफी अधिक बताया जा रहा है।

ठेकेदार पर लापरवाही के आरोप

दुकानदारों ने नगर निगम के ठेकेदारों पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि चटोरी गली में नगर निगम की ओर से बिल्डिंग मरम्मत का काम चल रहा था, जिसके दौरान ठेकेदारों ने सुरक्षा के उपायों का पालन नहीं किया। दुकानदारों का आरोप है कि दुकानों के खुलने के वक्त काम कराना एक गंभीर लापरवाही है, और अगर मरम्मत का काम दुकानों के बंद होने के बाद किया जाता, तो शायद यह हादसा टल सकता था।

दुकानदारों ने कहा कि यह लापरवाही भविष्य में भी किसी बड़े हादसे को न्योता दे सकती है, इसलिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई होनी चाहिए।

*जांच जारी, नुकसान का आकलन होगा*

फिलहाल आग लगने के कारणों की जांच जारी है, और नगर निगम अधिकारियों ने भी इस मामले की गंभीरता को देखते हुए ठेकेदार की भूमिका की जांच शुरू कर दी है। आग से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है, और दुकानदारों की शिकायतें भी दर्ज की गई हैं।

चटोरी गली में आग की लपटें भले ही बुझ गई हों, लेकिन सवाल अभी भी हर ओर उठ रहे हैं — ठेकेदारों की लापरवाही, सुरक्षा व्यवस्था की कमी और जिम्मेदार कार्रवाई को लेकर। अब देखना है कि नगर निगम इस गंभीर हादसे पर ठेकेदारों के खिलाफ क्या कदम उठाता है।

12/11/2025

जिंदगी की जंग जीतकर घर लौटे धर्मेंद्र, सुबह-सुबह अस्पताल से हुए डिस्चार्ज

 #गोरखपुर में शुरू हुआ विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) अभियानडीएम दीपक मीणा ने दी जानकारी — 2003 के बाद 2025 में दोबारा हो...
06/11/2025

#गोरखपुर में शुरू हुआ विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (SIR) अभियान

डीएम दीपक मीणा ने दी जानकारी — 2003 के बाद 2025 में दोबारा हो 4 रहा मतदाता सूची का गहन सत्यापन

7 फरवरी 2026 को जारी होगी अंतिम सूची

*हर पात्र नागरिक का नाम मतदाता सूची में हो, कोई नाम न कटे, न दोहराया जाए_डीएम दीपक मीणा*

#गोरखपुर।जिलाधिकारी एवं जिला निर्वाचन अधिकारी दीपक मीणा ने पर्यटन भवन कलेक्ट्रेट सभागार में प्रेस वार्ता कर बताया कि निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार जनपद गोरखपुर में विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) अभियान प्रारंभ हो चुका है। यह अभियान 4 नवंबर 2025 से 4 दिसंबर 2025 तक चलेगा। इसके तहत जिले की सभी विधानसभाओं में मतदाता सूची का घर-घर सत्यापन किया जाएगा।

डीएम दीपक मीणा ने कहा कि वर्ष 2003 के बाद यह पहला अवसर है जब निर्वाचन आयोग इस स्तर पर मतदाता सूची की गहन समीक्षा कर रहा है। इस पुनरीक्षण का उद्देश्य मतदाता सूची को सटीक, त्रुटिरहित और अद्यतन बनाना है ताकि कोई पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे और कोई अपात्र व्यक्ति सूची में शामिल न रह जाए।

* *मतदाता सूची सत्यापन की प्रक्रिया*

डीएम ने बताया कि प्रत्येक मतदान केंद्र पर तैनात बीएलओ (Booth Level Officer) घर-घर जाकर मतदाताओं की जानकारी एकत्र करेंगे और गणना प्रपत्र (Enumeration Form) भरवाएंगे। प्रत्येक बीएलओ को प्रतिदिन कम से कम 50 प्रपत्र भरने का लक्ष्य दिया गया है।

परिवारों के सदस्यों को कहा गया है कि जो लोग बाहर नौकरी या पढ़ाई के सिलसिले में रह रहे हैं, उनके स्थान पर घर पर मौजूद सदस्य गणना प्रपत्र भरकर बीएलओ को दे सकते हैं। “यदि परिवार के सदस्य बाहर रहते हैं तो भी घर पर रह रहे लोग उनका प्रपत्र भर सकते हैं। यह जानकारी सही व पूरी होनी चाहिए ताकि नाम अंतिम प्रकाशन में जोड़ा जा सके।”

डीएम ने स्पष्ट किया कि जिन लोगों ने गणना प्रपत्र भर दिए हैं, उनका नाम मतदाता सूची के अंतिम प्रकाशन में स्वतः शामिल कर लिया जाएगा और उनका नाम सूची से नहीं काटा जाएगा।
यदि किसी व्यक्ति के द्वारा त्रुटिपूर्ण प्रपत्र भरा गया है या किसी कारण से उसका नाम सूची में नहीं आता है, तो वह संबंधित ईआरओ (Electoral Registration Officer) के समक्ष आपत्ति (Objection) दाखिल कर अपना नाम पुनः जुड़वा सकता है।

एक मतदाता – एक ही जगह नाम

डीएम दीपक मीणा ने बताया कि एक नागरिक का नाम केवल एक ही विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में रह सकता है। यदि किसी व्यक्ति का नाम दो जगह पाया जाता है, तो उसे अपने प्रपत्र में यह उल्लेख करना आवश्यक है ताकि दूसरे स्थान से उसका नाम हटाया जा सके। “एक व्यक्ति भारतवर्ष के किसी भी हिस्से में केवल एक स्थान पर मतदाता रह सकता है। अगर किसी का नाम दो जगह है तो यह निर्वाचन नियमों के विरुद्ध है। इसलिए फॉर्म में पुराने स्थान का उल्लेख अवश्य करें।”

पुनरीक्षण कार्यक्रम की प्रमुख तिथियाँ

निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार –गणना कार्य की अवधि: 04 नवम्बर से 04 दिसम्बर 2025 तक ड्राफ्ट मतदाता सूची का प्रकाशन: 09 दिसम्बर 2025 दावे एवं आपत्तियों की अवधि: 09 दिसम्बर 2025 से 08 जनवरी 2026 तक दावे/आपत्तियों के निस्तारण की अवधि: 09 दिसम्बर 2025 से 31 जनवरी 2026 तक अंतिम मतदाता सूची का प्रकाशन: 07 फरवरी 2026

जिले में मतदाताओं की संख्या में भारी बढ़ोतरी
डीएम दीपक मीणा ने बताया कि वर्ष 2003 में जिले में कुल 26,68,592 मतदाता दर्ज थे, जिनमें पुरुष 14,87,545 और महिलाएं 11,81,047 थीं।
वर्तमान वर्ष 2025 में मतदाताओं की संख्या बढ़कर 36,66,533 हो गई है, जिनमें 19,72,109 पुरुष, 16,94,178 महिलाएं और 246 अन्य मतदाता शामिल हैं। “लगभग 10 लाख नए मतदाताओं का जुड़ना गोरखपुर की लोकतांत्रिक जागरूकता का प्रतीक है।”

जिले की निर्वाचन व्यवस्था
गोरखपुर जिले में कुल 9 विधानसभा क्षेत्र हैं —
कैम्पियरगंज (320)
पिपराइच (321)
गोरखपुर शहर (322)
गोरखपुर ग्रामीण (323)
सहजनवा (324)
खजनी (325)
चौरीचौरा (326)
बांसगांव (327)
चिल्लूपार (328)
इन सभी क्षेत्रों के लिए 9 निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी (EROs), 45 सहायक निर्वाचक अधिकारी (AEROs), 3,679 बीएलओ, 440 सुपरवाइजर, 3,679 मतदेय स्थल और 2,063 मतदान केंद्र बनाए गए हैं।
त्रुटियों के सुधार पर विशेष ध्यान
डीएम ने कहा कि कई बार मतदाता सूची में प्रवासन, मृत्यु, विवाह या दोहरे पंजीकरण के कारण नामों में त्रुटियाँ हो जाती हैं। इस बार विशेष पुनरीक्षण अभियान में सभी प्रकार की गलतियों को ठीक किया जाएगा “यह सुनिश्चित किया जाएगा कि कोई भी जीवित पात्र मतदाता सूची से वंचित न हो और कोई मृत या दोहरा नाम सूची में न रहे।
उन्होंने यह भी कहा कि बीएलओ द्वारा घर-घर जाकर सत्यापन के दौरान आधार, पैन, ड्राइविंग लाइसेंस या अन्य पहचान पत्र दिखाना जरूरी होगा ताकि मतदाता की पहचान सही ढंग से सुनिश्चित की जा सके।

राजनीतिक दलों और नागरिकों से अपील
डीएम दीपक मीणा ने सभी राजनीतिक दलों,जनप्रतिनिधियों और नागरिकों से अपील की कि वे इस अभियान में सहयोग करें। “यह केवल सरकारी कार्य नहीं है, बल्कि लोकतंत्र की जड़ को मजबूत करने का कार्य है। हर पात्र मतदाता को सूची में शामिल करना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।”

प्रेस वार्ता में उप जिला निर्वाचन अधिकारी / एडीएम वित्त विनीत कुमार सिंह, सहायक निर्वाचन अधिकारी शंकर मिश्रा, सहायक सूचना निदेशक प्रशांत श्रीवास्तव, और संबंधित तहसीलों के एसडीएम व निर्वाचन कर्मी उपस्थित रहे।

डीएम का संदेश
डीएम दीपक मीणा ने कहा कि विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण केवल एक औपचारिक कार्य नहीं है, बल्कि यह लोकतांत्रिक सहभागिता का मूल आधार है। हर नागरिक का नाम मतदाता सूची में होना उसका अधिकार है, और इस अधिकार को सुनिश्चित करना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है। गोरखपुर जिला इस कार्य को शत-प्रतिशत पारदर्शिता और गंभीरता से पूरा करेगा।
विशेष प्रगाढ़ पुनरीक्षण के तहत हर घर पहुंचेगा बीएलओ, हर पात्र मतदाता का नाम जोड़ा जाएगा, और त्रुटिपूर्ण नाम हटाए जाएंगे।

 #मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बनटांगिया गांव में दीपावली मनाई, 49 करोड़ की 133 परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण* #गो...
20/10/2025

#मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बनटांगिया गांव में दीपावली मनाई, 49 करोड़ की 133 परियोजनाओं का शिलान्यास व लोकार्पण*

#गोरखपुर। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ रविवार को बनटांगिया जंगल तिनकोनिया नंबर-3 पहुंचे, जहां उन्होंने लगभग 49 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली 133 विकास परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने ग्रामवासियों के साथ दीपावली का पर्व मनाया और सभी को मिठाइयां बांटकर उत्सव की शुभकामनाएं दीं।

मुख्यमंत्री ने गांव का भ्रमण कर ग्रामीणों से संवाद किया तथा ग्राम प्रधान राम नगीना के आवास पर दीप प्रज्वलित कर शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य हर गरीब तक खुशी पहुंचाना है — “कम से कम हर गरीब के घर तक मिठाई और खुशी जरूर पहुंचे, इसके लिए सभी को प्रयास करना चाहिए।”
मुख्यमंत्री के आगमन से बनटांगिया ग्रामवासियों में उत्साह का माहौल रहा। गांव दीपों की रोशनी और उत्सव की भावना से जगमगा उठा।

11/10/2025

लेखपाल की गलती से परेशान हुआ काश्तकार, एसडीएम और तहसीलदार की तत्परता से आज ही दुरुस्त हुई खतौनी*

गोरखपुर। तहसील सदर क्षेत्र के एक काश्तकार को लेखपाल की गलती के कारण तहसील के चक्कर काटने पढ़ते खतौनी में हुई त्रुटि को ठीक कराने के लिए उसे कानूनगो, लेखपाल और कंप्यूटर ऑपरेटर के बीच बार-बार दौड़ना पड़ा। लेकिन एसडीएम सदर दीपक गुप्ता और डिप्टी कलेक्टर/तहसीलदार ज्ञान प्रताप सिंह की संवेदनशीलता और तत्परता से मामला आज ही निपट गया। तहसीलदार के हस्तक्षेप के बाद खतौनी में की गई गलती दुरुस्त कर काश्तकार को उसी दिन नई खतौनी उपलब्ध करा दी गई।

काश्तकार ने बताया कि उसका गांव वर्ष 2008 में सर्वे में चला गया था, जिसके बाद कंप्यूटराइज खतौनियां नहीं मिलती थीं। 2022 में तत्कालीन जिलाधिकारी ने गोरखपुर जनपद के 43 गांवों को संबंधित तहसीलों में सम्मिलित करने के लिए राजस्व परिषद को प्रस्ताव भेजा था। परिषद के निर्देश के बाद इन गांवों की खतौनियों को कंप्यूटरीकृत करने का कार्य चल रहा था। इसी क्रम में अंश निर्धारण कर शासन से अनुमोदन भी प्राप्त हुआ।

जब काश्तकार ने नई खतौनी देखी तो पाया कि उसके खाता संख्या 198 के गाटा संख्या 707 ढ के स्थान पर 707 छ दर्ज कर दी गई है। यह गलती लेखपाल की ओर से खतौनी तैयार करते समय हुई थी। काश्तकार ने यह त्रुटि एसडीएम सदर दीपक गुप्ता और डिप्टी कलेक्टर/तहसीलदार ज्ञान प्रताप सिंह को अवगत कराया। अधिकारियों ने तत्काल कानूनगो और लेखपाल को फोन कर गलती दुरुस्त करने का निर्देश दिया।

लेखपाल और कानूनगो ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए खतौनी संशोधित कर रजिस्ट्रार को भेज दी, लेकिन कंप्यूटर ऑपरेटर की तकनीकी आपत्तियों के कारण रिपोर्ट में कुछ कमियां रह गईं। ऑपरेटर ने प्रारंभ में कहा कि रिपोर्ट सोमवार को दुरुस्त की जाएगी।

काश्तकार की परेशानी समझते हुए एसडीएम दीपक गुप्ता और तहसीलदार ज्ञान प्रताप सिंह ने देर शाम स्वयं हस्तक्षेप किया और निर्देश दिया कि आज ही खतौनी दुरुस्त कर दी जाए। अधिकारियों के निर्देश पर कंप्यूटर ऑपरेटर ने तत्काल त्रुटि सुधार की प्रक्रिया पूरी की और उसी दिन खतौनी काश्तकार को उपलब्ध करा दी।

एसडीएम और तहसीलदार की इस तत्परता से न केवल काश्तकार को राहत मिली बल्कि अन्य किसानों में भी प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों के संवेदनशील रवैये से यह संदेश गया है कि प्रशासन आम नागरिकों के हित में गंभीर और सक्रिय है।

काश्तकार ने संतोष जताते हुए कहा — “अगर एसडीएम और तहसीलदार साहब व्यक्तिगत रूप से हस्तक्षेप न करते तो मुझे सोमवार तक इंतजार करना पड़ता। उनकी मुस्तैदी के कारण आज ही सही खतौनी मिल गई।”

बरहाल, यह मामला इस बात का उदाहरण है कि अगर अधिकारी तत्परता दिखाएं तो एक साधारण किसान को दिनों की परेशानी से उसी दिन निजात मिल सकती है।

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