31/05/2026
आज अपनी जन्मभूमि सहौड़ा में बचपन की यादें फिर से ताज़ा हो गईं। गौमाता के लिए चारा काटने वाली मशीन, जिसे बचपन में चलाया करता था, आज वर्षों बाद फिर से चलाने का अवसर मिला। इसे चलाकर मन को अपार आनंद और आत्मिक संतोष की अनुभूति हुई।
गांव, खेती, पशुपालन और गौसेवा से जुड़े ये संस्कार ही मेरी सबसे बड़ी पूंजी हैं। जीवन में चाहे कितनी भी व्यस्तताएं आ जाएं, अपनी मिट्टी और अपनी जड़ों से जुड़ने का सुख अलग ही होता है।
सहौड़ा की पावन धरती, यहां के लोगों का स्नेह और बुजुर्गों का आशीर्वाद सदैव मुझे समाज सेवा के लिए प्रेरित करता है। अपनी जन्मभूमि से यह जुड़ाव ही मेरी असली पहचान है।
अपनी जन्मभूमि सहौड़ा, मेरी पहचान, मेरा गौरव और मेरा अभिमान।
Vijay Gangwar
— डॉ. विजय गंगवार
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