आर्यावर्त नागरिक सेवा ट्रस्ट - Public Charitable Trust

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आर्यावर्त नागरिक सेवा ट्रस्ट - Public Charitable Trust official page.
प्राचीन भारतीय सत्य-संस्कृति पुनर्स्थापना मिशन. पंजीकृत कार्यालय: 36 सनांवा मार्ग अरियामऊ, श्री कोटवाधाम - बाराबंकी, उ.प्र. - 225415 (भारत)।

23/04/2026

हाईस्कूल व इंटरमीडिएट परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले छात्र-छात्राओं को हार्दिक बधाई शुभकामनाएं!
सत्यमेव जयते नानृतम

भारतीय सभ्यता सहस्रों वर्षों से जीवित है। इसका मूल आधार हमारी मर्यादा ही रही है, जो हम भारतीयों की असली पूंजी और सांस्कृ...
30/03/2026

भारतीय सभ्यता सहस्रों वर्षों से जीवित है। इसका मूल आधार हमारी मर्यादा ही रही है, जो हम भारतीयों की असली पूंजी और सांस्कृतिक पहचान है। धन, संपदा और वैभव आते-जाते रहते हैं। इतिहास गवाह है कि साम्राज्य उभरे, फले-फूले और लुप्त भी हुए।
इस मर्यादा की रक्षा के लिए पुरुषों को एक नारी सदा ब्रह्मचारी का आदर्श पालन करना चाहिए। विवाह से पहले पूर्ण ब्रह्मचर्य और विवाह के बाद केवल अपनी पत्नी के प्रति पूर्ण निष्ठा। इसी प्रकार महिलाओं को पतिव्रता धर्म का निर्वाह करना चाहिए। पति को सम्मान देकर समर्पण और एकनिष्ठा बनाए रखना। इससे परिवार में पवित्रता, स्थिरता और सकारात्मक संस्कारों का संरक्षण होता है, जो मजबूत समाज और राष्ट्र का आधार बनता है।
किंतु वर्तमान समय में दुर्भाग्य से कुछ स्वार्थी और ढोंगी व्यक्ति धर्म तथा अनुष्ठान की आड़ में कुंवारी कन्याओं और विवाहित महिलाओं का शोषण कर रहे हैं। तंत्र-मंत्र, भूत-प्रेत निवारण या दिव्य शक्ति के नाम पर वे महिलाओं की आस्था और कमजोरी का दुरुपयोग करते हैं। ऐसे पाखंडी आस्था को कलंकित कर सामाजिक मूल्यों को बदनाम कर रहे हैं।
सच्ची मर्यादा और आस्था अंधविश्वास में नहीं, विवेक, शिक्षा और जागरूकता में निहित है। महिलाओं को सशक्त बनाना, तर्कसंगत सोच विकसित करना और सच्चे गृहस्थ संत-गुरुओं की पहचान करना आवश्यक है। ढोंगी तत्वों से सावधानी बरतते हुए हमें सत्य के वास्तविक स्वरूप चरित्र, मर्यादा और नैतिकता को अपनाना चाहिए। यही संतुलित मार्ग है जो हमारी प्राचीन भारतीय सत्य संस्कृति को सुरक्षित रखते हुए आधुनिक चुनौतियों का सामना करेगा।
सत्यमेव जयते नानृतम

आर्यावर्त नागरिक सेवा ट्रस्ट परिवार की ओर से आपको एवं आपके परिवारजनों को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!रंगों का यह पावन त्य...
04/03/2026

आर्यावर्त नागरिक सेवा ट्रस्ट परिवार की ओर से आपको एवं आपके परिवारजनों को होली की हार्दिक शुभकामनाएँ!
रंगों का यह पावन त्योहार आपके जीवन में खुशियाँ, प्रेम, स्वास्थ्य एवं समृद्धि की बहार लाए।
सभी पुरानी कटुता भूलकर आपसी स्नेह व उल्लास बढ़ाएँ।
रंग-बिरंगी होली आपके जीवन को और भी रंगीन बनाए।
सत्यमेव जयते नानृतम

*जय जगजीवन!*         *जय सत्यनाम!!* *।।बगैर चीर-फाड़ + शर्तिया इलाज़।।**"आर्यावर्त नागरिक सेवा ट्रस्ट" के तत्वावधान में ...
04/02/2026

*जय जगजीवन!* *जय सत्यनाम!!*
*।।बगैर चीर-फाड़ + शर्तिया इलाज़।।*
*"आर्यावर्त नागरिक सेवा ट्रस्ट" के तत्वावधान में प्रत्येक पूर्णिमा तिथि को श्री कोटवाधाम में "धर्मार्थ होम्योपैथिक चिकित्सा शिविर" का आयोजन किया जा रहा है। इस सार्वजनिक धर्मार्थ न्यास के श्री कोटवाधाम विद्यापीठ इंटरमीडिएट कॉलेज के सामने स्थित पंजीकृत कार्यालय पर सुबह 8:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक चलने वाले चिकित्सा शिविर में नाक, कान, गला, हाइड्रोसील, बवासीर सहित असाध्य रोगों से पीड़ित नए-पुराने सभी रोगियों का उपचार किया जाता है।*
*एक बार सेवा का मौका अवश्य प्रदान करें!*
*"प्रबंध ट्रस्टी"*
*डॉ सत्यनाम शरण दास*
*(डी० एच० एम० एस०)*
मो.नं.+919454796377

आर्यावर्त नागरिक सेवा ट्रस्ट की ओर से महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्रपिता का जीवन सत...
30/01/2026

आर्यावर्त नागरिक सेवा ट्रस्ट की ओर से महात्मा गांधी जी की पुण्यतिथि पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि। राष्ट्रपिता का जीवन सत्य, अहिंसा और सर्वोदय का अनुपम प्रतीक है। उन्होंने अंग्रेजी साम्राज्यवाद के विरुद्ध अहिंसक संघर्ष से भारत को आजादी दिलाई तथा स्वदेशी, खादी, सामाजिक समानता और ग्राम-स्वराज के आदर्श स्थापित किए। उनका संदेश आज भी प्रासंगिक है जो समाज सेवा, शांति और नैतिकता पर आधारित है। ट्रस्ट परिवार उनके दिखाए मार्ग पर चलते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और नागरिक जागरूकता के माध्यम से समाजसेवा में संलग्न है।
सत्यमेव जयते नानृतम

प्राचीन भारतीय सत्य संस्कृति की पुनर्स्थापना केवल सतनाम पंथी विचारधारा के माध्यम से ही संभव है, क्योंकि यह विचारधारा मूल...
08/01/2026

प्राचीन भारतीय सत्य संस्कृति की पुनर्स्थापना केवल सतनाम पंथी विचारधारा के माध्यम से ही संभव है, क्योंकि यह विचारधारा मूलतः सत्य, समानता, अहिंसा और निर्गुण उपासना पर आधारित है जो आदिकाल से भारतीय आत्मा की मूल धारा रही है।
सतनाम पंथ के संस्थापक संत श्री जगजीवन दास ने 16वीं शताब्दी में इस पंथ की स्थापना की। उन्होंने सतनाम को परम सत्य और एकमात्र ईश्वर का नाम माना, जो निराकार, सर्वव्यापी और अनंत है। यह विचार गरु नानक, संत कबीर, संत रैदास और अन्य संत -परंपरा से भी जुड़ता है, जहाँ सत्य ही सर्वोच्च धर्म है और मूर्तिपूजा, जातिवाद, पशुबलि, मांसाहार, नशा व व्यभिचार का पूर्ण त्याग आवश्यक है। संत जगजीवन दास ने जातिगत भेदभाव को समाप्त करने के लिए 87 शिष्यों का आध्यात्मिक संगठन "सतनाम संघ" बनाया और सामाजिक क्रांति की, "सत्य नाम सत्य" प्राचीन भारतीय संस्कृति का मूल मंत्र है, जो सत्य की खोज और आत्म-ज्ञान का आधार है। मध्यकाल में शुरू हुए कर्मकांड, जातिवाद और अंधविश्वास ने इस सत्य-संस्कृति को विकृत कर दिया।
सतनाम पंथी विचारधारा इन्हीं विकृतियों का विरोध करती है। यहां की गुरुवादी परंपरा आम जनमानस को अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का मार्गदर्शन करती है। सतनाम पंथ सात नियमों पर टिका है। सत्य बोलना, अहिंसा, शाकाहार, नशा-त्याग, चोरी-व्यभिचार से दूर रहना, गुरु-भक्ति और समानता। यही विचारधारा प्राचीन भारतीय आत्मा को पुनर्जीवित करती है, जहाँ सत्य से बढ़कर कोई धर्म नहीं। आज के भौतिकवादी युग में समाजिक मूल्यों से विमुख हो रहे मानवों के बीच सतनाम पंथी विचारधारा ही प्राचीन सत्य-संस्कृति को पुनः स्थापित कर सकती है।
सत्यमेव जयते नानृतम

देश की खुशहाली का रास्ता गाँवों और खेतों से होकर गुजरता है- चौधरी चरण सिंह
23/12/2025

देश की खुशहाली का रास्ता गाँवों और खेतों से होकर गुजरता है- चौधरी चरण सिंह

दुखद समाचार है कि प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र जी का निधन हो गया है। 89 वर्ष की आयु में उन्होंने आज, 24 नवंबर 2025 क...
24/11/2025

दुखद समाचार है कि प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता धर्मेंद्र जी का निधन हो गया है। 89 वर्ष की आयु में उन्होंने आज, 24 नवंबर 2025 को मुंबई में अंतिम सांस ली। वे हाल ही में बीमारी के कारण ब्रेच कैंडी अस्पताल में भर्ती थे और घर लौटने के बाद भी उनकी हालत स्थिर नहीं रही।
उनके निधन की खबर फैलते ही बॉलीवुड और पूरे देश में शोक की लहर दौड़ गई है। करण जौहर, काजोल, अजय देवगन, करीना कपूर, राजिनीकांत, चिरंजीवी, कमल हासन, प्रियंका चोपड़ा, अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान और अक्षय कुमार जैसे सितारों ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी है। काजोल और शिल्पा शेट्टी उनके घर पहुंचीं, जबकि अमिताभ बच्चन, शाहरुख खान, आमिर खान, सलमान खान और अक्षय कुमार अंतिम संस्कार में शामिल हुए।
धर्मेंद्र जी, जिन्हें 'ही-मैन' के नाम से जाना जाता था, ने छह दशकों में 300 से अधिक फिल्मों में काम किया। 'शोले', 'फूल और पत्थर', 'मेरा गाँव मेरा देश', 'यादों की बारात' जैसी क्लासिक फिल्मों ने उन्हें अमर बना दिया। उनका आखिरी फिल्म 'इक्कीस' (श्रीराम राघवन निर्देशित) 25 दिसंबर 2025 को रिलीज होगी, जिसमें वे अमिताभ बच्चन के पोते अगस्त्य नंदा के साथ नजर आएंगे।
वे अपनी पहली पत्नी प्रकाश कौर के पुत्र सनी देओल और बॉबी देओल, तथा दूसरी पत्नी हेमा मालिनी की पुत्री ईशा देओल और आहना देओल को छोड़ गए हैं। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदनाएं। ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करें।
ॐ शांति!

भारत में सत्यनाम साधक संत गुरुओं की लंबी श्रृंखला है और प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति को मनाया जाने वाला "सत...
10/11/2025

भारत में सत्यनाम साधक संत गुरुओं की लंबी श्रृंखला है और प्रत्येक वर्ष 14 जनवरी यानी मकर संक्रांति को मनाया जाने वाला "सतनाम महोत्सव" सतनाम अनुयायियों का सबसे बड़ा त्यौहार। यह पर्व केवल सूर्य के मकर राशि में प्रवेश का उत्सव नहीं, बल्कि आत्मा के अंधकार से प्रकाश की ओर जाने का प्रतीक है। दुनिया भर के सतनाम अनुयाई इस दिन को सतनाम जप महोत्सव के रूप में मनाते हैं।
सत्य सनातन "सतनाम मत" में मकर संक्रांति का बहुत गहरा आध्यात्मिक महत्व है। इस दिन सतनाम अनुयाई सुबह स्नान कर सफेद वस्त्र धारण करते हैं, फिर अपने अराध्य गुरु को धूप दीप चंदन देकर, गुरु मूरत में सूरत लगाकर, महामंत्र सतनाम का २१ बार जाप करते हैं। तत्पश्चात खिचड़ी और गुड़-तिल के बने लड्डू का भोग लगाकर उसे जीवों में बांटते है। सतनामी गुरु गदि्दयों पर इस दिन भजन सुमिरन सत्संग के साथ ही सामूहिक खिचड़ी भोज के आयोजन की परंपरा आदिकाल से चली आ रही है।
सत्यमेव जयते नानृतम

02/10/2025

अंतर्राष्ट्रीय अहिंसा दिवस की शुभकामनाएं !
सत्यमेव जयते नानृतम

महात्मा गांधी ने विश्व को एक नई दिशा दिखाई2 अक्टूबर, भारत में गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो राष्ट्रपिता महात्...
01/10/2025

महात्मा गांधी ने विश्व को एक नई दिशा दिखाई

2 अक्टूबर, भारत में गांधी जयंती के रूप में मनाया जाता है, जो राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के जन्मदिवस का प्रतीक है। यह दिन न केवल भारत में बल्कि विश्व भर में अहिंसा, सत्य और मानवता के मूल्यों को याद करने का अवसर है। 1869 में गुजरात के पोरबंदर में जन्मे मोहनदास करमचंद गांधी ने अपने जीवन और कार्यों से विश्व को एक नई दिशा दिखाई। उनकी शिक्षाएं आज भी प्रासंगिक हैं और मानव समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत बनी हुई हैं।

महात्मा गांधी का जीवन सादगी, सत्य और अहिंसा का जीवंत उदाहरण है। दक्षिण अफ्रीका में नस्लीय भेदभाव का सामना करने के बाद उन्होंने सत्याग्रह का मार्ग अपनाया, जो अन्याय के खिलाफ अहिंसक प्रतिरोध का प्रतीक बना। भारत लौटने के बाद, गांधीजी ने स्वतंत्रता संग्राम को एक जन आंदोलन में बदल दिया। चंपारण सत्याग्रह, नमक सत्याग्रह, दांडी यात्रा और भारत छोड़ो आंदोलन जैसे उनके प्रयासों ने ब्रिटिश शासन की नींव हिला दी। गांधीजी का दर्शन केवल राजनीतिक स्वतंत्रता तक सीमित नहीं था। वे सामाजिक सुधारों के पक्षधर थे। उन्होंने अस्पृश्यता के खिलाफ संघर्ष किया, स्वदेशी और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया, और महिलाओं के सशक्तिकरण की वकालत की। उनका मानना था कि सच्ची आजादी तभी संभव है जब समाज में समानता, भाईचारा और नैतिकता हो। भारत में गांधी जयंती एक राष्ट्रीय अवकाश है। इस दिन स्कूलों, कॉलेजों और सरकारी संस्थानों में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें गांधीजी के विचारों पर चर्चा, भजन संध्या, और स्वच्छता अभियान शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र ने 2007 में 2 अक्टूबर को अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस के रूप में घोषित किया, जो गांधीजी के वैश्विक प्रभाव को दर्शाता है।

आज के समय में, जब विश्व हिंसा, असहिष्णुता और पर्यावरणीय संकटों से जूझ रहा है, गांधीजी का अहिंसा और पर्यावरण के प्रति उनका दृष्टिकोण अत्यंत प्रासंगिक है। उनकी शिक्षाएं हमें सिखाती हैं कि परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करनी चाहिए। उनकी प्रसिद्ध उक्ति, "वो बदलाव बनो जो तुम दुनिया में देखना चाहते हो," आज भी हर व्यक्ति को प्रेरित करती है। गांधीजी का अहिंसक प्रतिरोध आज भी संघर्षों को सुलझाने का एक शक्तिशाली हथियार है। विश्व में बढ़ते तनाव और हिंसा के बीच, उनकी शिक्षाएं हमें संवाद और सहानुभूति का रास्ता दिखाती हैं। गांधीजी स्वच्छता और सादगी के प्रबल समर्थक थे। भारत में स्वच्छ भारत अभियान जैसे प्रयास उनकी इस सोच को आगे बढ़ाते हैं। गांधीजी का स्वदेशी आंदोलन आज के स्टार्टअप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसे प्रयासों में झलकता है। उनकी आत्मनिर्भरता की अवधारणा ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में मददगार हो सकती है। गांधीजी ने जातिगत भेदभाव और सामाजिक असमानता के खिलाफ आवाज उठाई। आज भी उनके विचार सामाजिक न्याय और समावेशी विकास के लिए प्रासंगिक हैं।

गांधी जयंती पर देशभर में लोग राजघाट, नई दिल्ली, जहां गांधीजी का अंतिम संस्कार हुआ, और अन्य स्मारकों पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं। स्कूलों में निबंध लेखन, भाषण, और नाटक आयोजित होते हैं। कई संगठन स्वच्छता अभियान और पौधरोपण जैसे कार्यों में भाग लेते हैं, जो गांधीजी के स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के विचारों को बढ़ावा देते हैं। गांधी जयंती केवल एक अवकाश नहीं है, बल्कि यह एक अवसर है अपने जीवन में गांधीजी के सिद्धांतों को अपनाने का। उनकी शिक्षाएं हमें सिखाती हैं कि सत्य और अहिंसा के रास्ते पर चलकर हम न केवल अपने जीवन को बेहतर बना सकते हैं, बल्कि समाज और विश्व को भी बदल सकते हैं। आइए, इस गांधी जयंती पर हम संकल्प लें कि हम उनके दिखाए मार्ग पर चलकर एक बेहतर और समावेशी विश्व की रचना करेंगे।

सत्यमेव जयते नानृतम

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