Bhim army suresh meena

Bhim army suresh meena भीम आर्मी भारत एकता मिशन सामाजिक अत्य?

26/01/2022

आदिवासी चेतना के प्रणेता उनके उत्थान के लिए अंग्रेजों से आजीवन संघर्ष करने वाले महान क्रांतिकारी क्रांतिसूर्य जननायक अमर शहीद इंडियन रॉबिनहुड #टंट्या_भील जी की जयंती पर कोटि कोटि सादर विन्रम नमन जोहार ।
#टंट्या_भील जी के शौर्य और बलिदान की गाथा आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरित करती है।

महान क्रांतिकारी वीर टंट्या भील का जन्म 26 जनवरी सन् 1840 में मध्यप्रदेश के तत्कालीन पूर्व निमाड़ प्रदेश तथा वर्तमान खंडवा जिले की पंधाना तहसील के बडदा गांव में हुआ। मां का नाम जानकी तथा पिता का नाम भावसिंह था। टंट्या को स्कूली शिक्षा की कोई सुविधा नहीं थी परन्तु मानवतावादी मूल्य संस्कार से उन्हें वास्तविकता की शिक्षा मिली।

सन् 1857,स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अंग्रेज़ी साम्राज्यवाद और सत्तावाद शोषण,अन्याय चरम सीमा पर पहुंच चुका था और दमनकारी माहौल बना हुआ था। इसके विरुद्ध टंट्या ने लड़ाई शुरू की। टंट्या को जानबूझकर गुंडा -बदमाश,गुनेहगार ,लुटेरा ठहराया गया और जेल भेजा गया।

24 नवंबर 1878 में टंट्या जेल की दीवार तोड़कर भाग निकले। फिर उन्होंने अंग्रेज़ी सत्ता के खिलाफ लोगों को संगठित करने का काम जोरों से शुरू किया। पुलिस की वेशभूषा में वे अंग्रेज़ो की मदद करने वाले सेठ,साहूकारों और जमींदारों को लूटकर गरीबों में बांट देते थे और लोगो को संगठित करते थे।

टंट्या ने नौजवानों की फौज तैयार करके 10 वर्ष तक आंदोलन का सफल नेतृत्व किया। टंट्या अंग्रेज़ो पर हावी हो गए। उन्हें पकड़ने के लिए ₹ 10,500 का इनाम रखा गया। टंट्या को गिरफ्तार करने के लिए इश्तिहार छापे गए, जिसमे इनाम घोषित किया गया |

फिर भी वह पुलिस के हाथो नहीं लगते थे। इसलिए उन्हें पकड़ने हेतु इंग्लैंड से एक खास अफसर को बुलाया गया। जब टंट्या को इस बात का ज्ञात हुआ तो तुरंत उन्होंने तांगे वाले की वेशभूषा में उस अफसर को लेने खुद रेलवे स्टेशन पहुंच गए और अफसर को लेकर जंगल के रास्ते चल पड़े।

चलते चलते टंट्या ने अफसर से पूछा की आपको टंट्या के बारे में क्या पता है? वो कैसा है? उसे कैसे पकड़ोगे? इस पर अफसर बोला की "टंट्या बहुत खतरनाक है,उसे पकड़ना नामुमकिन है,लेकिन कोशिश जरूर करूंगा।" उसी वक़्त टंट्या उसके सामने खड़े होकर सीना तानकर बोले "मैं ही टंट्या हूं,पकड़ के दिखाओ मुझे।" इससे अफसर की ऐसी की तैसी हो गई। टंट्या ने उसे मारा नहीं क्योंकि टंट्या मानवतावादी थे।

आखिर टंट्या के साथ विश्वासघात हुआ। गांव के गणपत पटेल ने राखी बंधवाने के बहाने टंट्या को उसके घर बुलाया। जब टंट्या ने हाथ आगे किया तो पहले से ही घर में छिपे अंग्रेज़ो ने टंट्या को पकड़कर हथकड़ी पहना दी। टंट्या को हथकड़ीयो और बेड़ियों में जकड दिया गया | कड़े पहरे में उसे खंडवा से इंदौर होते हुए जबलपुर भेजा गया | जहा-जहा टंट्या को ले जाया गया, उन्हें देखने के लिए अपार जनसमूह उमडा | 19 अक्टूबर, 1889 को टंट्या को फांसी की सजा सुनाई गयी |

टंट्या को जबलपुर की जेल में रखा गया और वहीं 4 दिसंबर 1889 को टंट्या भील को फांसी दे दी गई। इस तरह एक आदिवासी झंझावात का अंत कर दिया गया। अंग्रेज़ो ने टंट्या के बारे में लिखा कि टंट्या रोबिन्हुड जैसे बहादुर ,साहसी और मानवतावादी क्रांतिकारी थे लेकिन हमारे चाटुकार इतिहासकारों ने टंट्या का सही इतिहास लिखा ही नहीं।

1857 की क्रांति के बाद टंट्या भील अंग्रेजो को चुनौती देने वाला ऐसा जननायक था, जिसने अंग्रेजी सत्ता को ललकारा | पीडितो-शोषितों का यह मसीहा मालवा-निमाड में लोक देवता की तरह आराध्य बना, जिसकी बहादुरी के किस्से हजारों लोगो की जुबान पर थे | बारह वर्षों तक भीलो के एकछत्र सेनानायक टंट्या के कारनामे उस वक्त के अखबारों की सुर्खिया होते थे | गरीबो को जुल्म से बचाने वाले जननायक टंट्या का शव उसके परिजनों को सौपने से भी अंग्रेज डरते थे |

टंट्या को फांसी दी गयी और उसके तुरंत बाद जनाक्रोश के डर से उन्हें जबलपुर से पातालपानी के जंगल में लाया गया और उनके शव को पहाड़ी से नीचे फेक दिया गया। जहा पर इस ‘वीर पुरुष’ की समाधि और स्मारक बना हुआ है। वहा से गुजरने वाली हर ट्रेन रूककर टंट्या को सलामी देती है |

सैकडो वर्षों बाद भी ‘टंट्या भील’ का नाम श्रद्धा से लिया जाता है | अंग्रेजी सत्ता के खिलाफ बगावत करने वाले टंट्या का नाम इतिहास के पृष्ठों में स्वर्णाक्षरो से अंकित है |

स्वाधीनता के स्वर्णिम अतीत में जाँबाजी का अमिट अध्याय बन चुके आदि विद्रोही टंट्या भील अंग्रेजी दमन को ध्वस्त करने वाली जिद तथा संघर्ष की मिसाल है। टंट्या भील के शौर्य की छबियां वर्ष 1857 के बाद उभरीं। आदिवासी जननायक टंट्या ने ब्रिटिश हुकूमत द्वारा ग्रामीण जनता के शोषण और उनके मौलिक अधिकारों के साथ हो रहे अन्याय-अत्याचार की खिलाफत की। दिलचस्प पहलू यह है कि स्वयं प्रताड़ित अंग्रेजों की सत्ता ने जननायक टंट्या को “इण्डियन रॉबिनहुड’’ का खिताब दिया। जननायक टंट्या भील को वर्ष 1889 में फाँसी दे दी गई bhim jay johar

25/01/2022

हाल ही में प्रतापगढ़ जिले में आदिवासी बालिका के साथ गैंगरेप की मामला हुआ है। इस घटना के बारे में आप सभी को कुछ सच्चाई बताना चाहूँगा, हालांकि इस घिनोनी व दुःखद घटनाक्रम के बारे में सोशल मीडिया पर कुछ नही लिखना चाहता था लेकिन एक बात याद आ गयी कि जब सच से ज्यादा झूठ का ज्यादा प्रचार होता है तब सच दब जाता है और झूठ भी सच बन जाता है और प्रतापगढ़ जिले की घटना में यही हो रहा है। सच को दबाने के लिये कुछ सत्ताधारी व विपक्षी नेता कुछ दिन से प्रतापगढ़ में ढोंग रचकर सच को दबाना चाह रहे हैं और साथ ही अपनी राजनीतिक रोटी भी सेंक रहे हैं।

एक बात समझनी पड़ेगी कि सत्ता में कांग्रेस के विधायक भी सीआई व थाने के स्टाफ को हटाने को लेकर मुख्यमंत्री महोदय को लेटर लिख रहे हैं और प्रतिपक्ष के नेता गुलाब जी कटारिया व प्रतापगढ़ के भाजपा नेता भी सीआई व पूलिस स्टाफ पर आरोप लगा रहे हैं। हकीकत यह है कि चोरी की वारदात में संदिग्ध पकड़े और उनके फोन में गैंगरेप के वीडियो मिले, इस वीडियो के आधार पर पीड़ित लड़की की पहचान कर पुलिस लड़की के घर तक पहुंची और लड़की को न्याय दिलाने व पहचान उजागर नही करने की बात करके उससे रिपोर्ट ली। इस रिपोर्ट के आधार पर बाकी मुजरिम व पनाह देने वाले व्यापारी तक पुलिस पहुंची। अब पुलिस की गलती क्या रही आप समझ गये होंगे कि कहानी क्या है।

वर्तमान विधायक के प्रति पीड़ित परिवार के अंदर खोंफ कितना है वो आप उनके ही पत्र में देख सकते है। जब धरियावद विधायक नागराज जी मीना पीड़ित के घर गये, इससे कुछ समय पहले पीड़ित लड़की व उनके मां-बाप को पता चला कि वो हमारे घर आ रहे हैं तो वे सब पीड़ित लड़की व उसके माता-पिता सहित घर छोड़कर भाग गये। भाजपा के नेताओं ने भी जब उस पीड़ित लड़की से मिलने की बात की तब भी वो लड़की व माता पिता घर छोड़कर भाग गये। अब इनकी राजनीतिक रोटियां सेंकने के चक्कर में पीड़ित लड़की व माता पिता को बार बार घर बार छोड़कर भागना पड़ रहा है।

इन राजनितिक पार्टियों के नेताओं का उद्देश्य यही है कि सच दब जाये और झूठ आगे आये। सच यह है कि 8-10 लोगों का गिरोह है जिन्होंने 30-35 नाबालिग व बालिक लड़कियों के साथ सामूहिक दुष्कर्म किया है और साथ ही चोरी-डकैती की वारदातों को अंजाम देकर एक-दो व्यापारी को देते थे और यह व्यापारी व एक दो अन्य लोग उनको पनाह देते थे और यह झूठ है कि पुलिस ने रिश्वत ली और लापरवाही कर पीड़ित के घर जाकर उसको न्याय दिलाने का ढोंग रचना।

विपक्ष द्वारा सरकार को घेरने क़ी बात करना, यह सारे ढोंग रचे जा रहे हैं प्रतापगढ़ जिले में। इसी घटना को लेकर भविष्य का नतीजा यह बिल्कुल सही है कि कम से कम 30 से 35 नाबालिक लड़कियों के साथ गैंगरेप हुआ है लेकिन इस राजनीतिक नाट्यक्रम को देखकर सामने आई पीड़ितों के अलावा दूसरी कोई भी पीड़ित लड़कियां पुलिस प्रशासन से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं कर अपने साथ हुए अन्याय को सहेगी और भविष्य में कोई भी पुलिस अधिकारी किसी पीड़ित को न्याय दिलाने के लिये आगे से पैरवी नही करेगा।

अब प्रतापगढ़ की जनता को मेरा संदेश है कि जो जो भी पीड़ित को न्याय दिलाने की बात करके पीड़ित के घर जाकर बालिका व माता पिता को जलील कर रहे हैं और अपनी राजनीतिक रोटियां सेंक रहे हैं, उनको लोकतांत्रिक तरीके से सबक सिखाओ। जोहार।।

राजकुमार रोत
विधायक, विधानसभा क्षेत्र चौरासी
जिला डूंगरपुर, राज.
@ Army Suresh meena

25/01/2022

#@जय भीम जय जोहार

25/01/2022

मैं उस धर्म को पसंद करता हूँ, जो स्वतंत्रता, समानता और भाईचारे की भावना सिखाता है । –डॉ.बाबासाहेब आंबेडकर

23/01/2022

* #जब विचारों का युध्द छिड़ा हो तो किताबों से बड़ा हथियार कोई और नही !*

*~ बौध्दचार्य शांति स्वरूप जी*

Jay bhim jay johar
27/12/2021

Jay bhim jay johar

मामा बालेश्वर की पुण्यतिथि पर शत शत नमन हार्दिक श्रद्धांजलि जय जोहार जय भीम जय आदिवासी
26/12/2021

मामा बालेश्वर की पुण्यतिथि पर शत शत नमन हार्दिक श्रद्धांजलि जय जोहार जय भीम जय आदिवासी

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