15/11/2025
“प्रिय साथियों…
हम सबने मिलकर एक सपना देखा था:
बिहार को बदलने का।
और हम सबने दिल से कोशिश भी की।”
“पर जब नतीजे उम्मीद के मुताबिक नहीं आते,
तो दिल टूटना, निराश होना… बिल्कुल स्वाभाविक है।
लेकिन एक बात याद रखिए:
लड़ाई हारने से मिशन खत्म नहीं होता।”
*1. बिहार की राजनीतिक हकीकत*
“बिहार… वो मिट्टी जहाँ लोग दशकों से उन्हीं पार्टियों से जुड़कर बैठे हैं।
उनकी सोच बदलना, पुराने रिश्ते तोड़ना,
और एक नई पार्टी पर भरोसा जमाना
सिर्फ दो–तीन साल में सम्भव नहीं था।
और ये हम सब जानते भी थे।”
*2. बिहारी जज़्बा*
“बिहार के लोग हार मानना जानते ही नहीं।
यही तो हमारे खून में है!
UPSC जैसे सबसे कठिन इम्तिहान को भी
हम बिहारी सालों-साल देकर पास करते हैं…
फेल होते हैं, फिर उठते हैं…
और तब तक लड़ते हैं जब तक जीत न जाएँ।”
“तो फिर बिहार को बदलने की लड़ाई में
हम इतनी जल्दी हार कैसे मान लें?”
*3. हमारे सामने चुनौतियाँ*
“हमारे और पुरानी पार्टियों के बीच
ज़मीन-आसमान का फ़ासला था।
उनकी जड़ें 30–40 साल से जमीन में धंसी थीं…
और हम सिर्फ 2–3 साल पहले पहली बार खेत में उतरे थे।”
*4. बिहार की सामाजिक सच्चाई*
“बिहार में आज भी लोग
या तो किसी ‘मशहूर अपराधी’
या किसी ‘सेलिब्रिटी’ को फॉलो करते हैं।
क्योंकि उन्हें उनके ‘नाम’ पर भरोसा होता है।
हमारे उम्मीदवार पढ़े-लिखे, सुलझे हुए…
लेकिन भीड़ को कौन सुनता है?
उन्हें चमक चाहिए, शिक्षा नहीं।”
*5. ग्राउंड रियलिटी*
“हमारे स्वयंसेवक कम थे…
बाकी पार्टियाँ हर गली, हर घर, हर मोहल्ले में थीं।
लोग उसी को वोट देते हैं जो
बार-बार मिलकर अपना रिश्ता जोड़ता है।”
*6. गरीबी का दर्द*
“और भैया… बिहार की गरीबी बहुत गहरी है।
रोज़ ₹100 कमाने वाले लोगों के लिए
₹10,000 का चेक
और बाद में ₹2 लाख का वादा…
यह बहुत बड़ी चीज है।”
“बुजुर्गों के लिए ₹400 से ₹1100 की पेंशन
उनकी आँखों में उम्मीद भर देती है।
इनका असर आंधी की तरह चला।”
*7. डर की राजनीति*
“लोग डर गए थे कि
अगर JSP को वोट देंगे तो कहीं RJD न जीत जाए।
इस डर ने हमारी मेहनत को बहुत नुकसान पहुँचाया।”
*8. लेकिन कहानी यहाँ खत्म नहीं होती*
“लेकिन…!!
क्या हम रुक जाएंगे?”
“नहीं!”
“ये तो शुरुआत है…
हमने सिर्फ पहला कदम उठाया है।
अभी हमें लंबा सफ़र तय करना है।”
*9. उम्मीद और संकल्प*
“हम अपनी कमियाँ सुधारेंगे,
अपने संगठन को मजबूत करेंगे,
हर गाँव, हर टोले तक पहुँचेंगे,
और लोगों के दिलों में वो भरोसा बनाएँगे
जिसकी बिहार को जरूरत है।”
“सपना अभी ज़िंदा है।
जज़्बा अभी ज़िंदा है।
और बिहार बदलने की आग…
आज पहले से भी ज़्यादा तेज़ जल रही है।”
“हम हार नहीं मानेँगे।”
“हम रुकेंगे नहीं।”
“हम जीतकर ही रहेंगे।”
*“जन सुराज — बदलाव का संकल्प”*