30/01/2026
संत बिटप सरिता गिरि धरनी। परहित हेतु सबन्ह कै करनी॥
संत हृदय नवनीत समाना। कहा कबिन्ह परि कहि न जाना॥
अदभुत है आप का यूं मुस्कुराना किसी अबोध बालक की तरह।
आप सदा चैतन्य रहे मेरे महादेव की कृपा सदैव बनी रहे।।
श्री हरिवंश
#प्रेमानंदमहाराज