लव स्टोरी और कहानियां

लव स्टोरी और कहानियां देश प्रेमी

तिरंगा हर शहर मे इसी तरह होना चाहिए
16/08/2023

तिरंगा हर शहर मे इसी तरह होना चाहिए

 #एक फटी धोती और फटी  #कमीज पहने एक  व्यक्ति अपनी 15-16 साल की बेटी के साथ एक बड़े होटल में पहुंचा। उन दोंनो को कुर्सी प...
01/06/2022

#एक फटी धोती और फटी #कमीज पहने एक व्यक्ति अपनी 15-16 साल की बेटी के साथ एक बड़े होटल में पहुंचा। उन दोंनो को कुर्सी पर बैठा देख एक #वेटर ने उनके सामने दो #गिलास साफ ठंडे पानी के रख दिए और पूछा- आपके लिए क्या लाना है?

उस व्यक्ति ने कहा- "मैंने मेरी बेटी को वादा किया था कि यदि तुम कक्षा दस में जिले में प्रथम आओगी तो मैं तुम्हे शहर के सबसे बड़े होटल में एक डोसा खिलाऊंगा।
इसने वादा पूरा कर दिया। कृपया इसके लिए एक डोसा ले आओ।"वेटर ने पूछा- "आपके लिए क्या लाना है?" उसने कहा-"मेरे पास एक ही डोसे का पैसा है।"पूरी बात सुनकर वेटर मालिक के पास गया और पूरी कहानी बता कर कहा-"मैं इन दोनो को भर पेट नास्ता कराना चाहता हूँ।अभी मेरे पास पैसे नहीं है,इसलिए इनके बिल की रकम आप मेरी सैलेरी से काट लेना।"मालिक ने कहा- "आज हम होटल की तरफ से इस #होनहार बेटी की सफलता की पार्टी देंगे।"

होटलवालों ने एक टेबल को अच्छी तरह से सजाया और बहुत ही शानदार ढंग से सभी उपस्थित ग्राहको के साथ उस गरीब बच्ची की सफलता का जश्न मनाया।मालिक ने उन्हे एक बड़े थैले में तीन डोसे और पूरे मोहल्ले में बांटने के लिए मिठाई उपहार स्वरूप पैक करके दे दी। इतना सम्मान पाकर आंखों में खुशी के आंसू लिए वे अपने घर चले गए।

समय बीतता गया और एक दिन वही लड़की I.A.S.की परीक्षा पास कर उसी शहर में कलेक्टर बनकर आई।उसने सबसे पहले उसी होटल मे एक सिपाही भेज कर कहलाया कि कलेक्टर साहिबा नास्ता करने आयेंगी। होटल मालिक ने तुरन्त एक टेबल को अच्छी तरह से सजा दिया।यह खबर सुनते ही पूरा होटल ग्राहकों से भर गया।

कलेक्टर रूपी वही लड़की होटल में मुस्कराती हुई अपने माता-पिता के साथ पहुंची।सभी उसके सम्मान में खड़े हो गए।होटल के मालिक ने उन्हे गुलदस्ता भेंट किया और आर्डर के लिए निवेदन किया।उस लड़की ने खड़े होकर होटल मालिक और उस बेटर के आगे नतमस्तक होकर कहा- "शायद आप दोनों ने मुझे पहचाना नहीं।मैं वही लड़की हूँ जिसके पिता के पास दूसरा डोसा लेने के पैसे नहीं थे और आप दोनों ने #मानवता की सच्ची मिसाल पेश करते हुए,मेरे पास होने की खुशी में एक शानदार पार्टी दी थी और मेरे पूरे मोहल्ले के लिए भी मिठाई पैक करके दी थी।

आज यह पार्टी मेरी तरफ से है और उपस्थित सभी ग्राहकों एवं पूरे होटल स्टाफ का बिल मैं दूंगी।कल आप दोनों को "" श्रेष्ठ नागरिक "" का सम्मान एक नागरिक मंच पर किया जायेगा।

शिक्षा-- किसी भी गरीब की गरीबी का मजाक बनाने के वजाय उसकी प्रतिभा का उचित सम्मान करें l

ट्रैन के ए.सी. कम्पार्टमेंट में मेरे सामने की सीट पर बैठी लड़की ने मुझसे पूछा " हैलो, क्या आपके पास इस मोबाइल की सिम निका...
23/10/2021

ट्रैन के ए.सी. कम्पार्टमेंट में मेरे सामने की सीट पर बैठी लड़की ने मुझसे पूछा " हैलो, क्या आपके पास इस मोबाइल की सिम निकालने की पिन है??"
उसने अपने बैग से एक फोन निकाला था, और नया सिम कार्ड उसमें डालना चाहती थी। लेकिन सिम स्लॉट खोलने के लिए पिन की जरूरत पड़ती है जो उसके पास नहीं थी। मैंने हाँ में गर्दन हिलाई और अपने क्रॉस बेग से पिन निकालकर लड़की को दे दी। लड़की ने थैंक्स कहते हुए पिन ले ली और सिम डालकर पिन मुझे वापिस कर दी।
थोड़ी देर बाद वो फिर से इधर उधर ताकने लगी, मुझसे रहा नहीं गया.. मैंने पूछ लिया "कोई परेशानी??"
वो बोली सिम स्टार्ट नहीं हो रही है, मैंने मोबाइल मांगा, उसने दिया। मैंने उसे कहा कि सिम अभी एक्टिवेट नहीं हुई है, थोड़ी देर में हो जाएगी। और एक्टिव होने के बाद आईडी वेरिफिकेशन होगा उसके बाद आप इसे इस्तेमाल कर सकेंगी।
लड़की ने पूछा, आईडी वेरिफिकेशन क्यों??
मैंने कहा " आजकल सिम वेरिफिकेशन के बाद एक्टिव होती है, जिस नाम से ये सिम उठाई गई है उसका ब्यौरा पूछा जाएगा बता देना"
लड़की बुदबुदाई "ओह्ह "
मैंने दिलासा देते हुए कहा "इसमे कोई परेशानी की कोई बात नहीं"
वो अपने एक हाथ से दूसरा हाथ दबाती रही, मानो किसी परेशानी में हो। मैंने फिर विन्रमता से कहा "आपको कहीं कॉल करना हो तो मेरा मोबाइल इस्तेमाल कर लीजिए"
लड़की ने कहा "जी फिलहाल नहीं, थैंक्स, लेकिन ये सिम किस नाम से खरीदी गई है मुझे नहीं पता"
मैंने कहा "एक बार एक्टिव होने दीजिए, जिसने आपको सिम दी है उसी के नाम की होगी"
उसने कहा "ओके, कोशिश करते हैं"
मैंने पूछा "आपका स्टेशन कहाँ है??"
लड़की ने कहा "दिल्ली"
और आप?? लड़की ने मुझसे पूछा
मैंने कहा "दिल्ली ही जा रहा हूँ, एक दिन का काम है,
आप दिल्ली में रहती हैं या...?"
लड़की बोली "नहीं नहीं, दिल्ली में कोई काम नहीं , ना ही मेरा घर है वहाँ"
तो ???? मैंने उत्सुकता वश पूछा
वो बोली "दरअसल ये दूसरी ट्रेन है, जिसमे आज मैं हूँ, और दिल्ली से तीसरी गाड़ी पकड़नी है, फिर हमेशा के लिए आज़ाद"
आज़ाद??
लेकिन किस तरह की कैद से??
मुझे फिर जिज्ञासा हुई किस कैद में थी ये कमसिन अल्हड़ सी लड़की..
लड़की बोली, उसी कैद में थी जिसमें हर लड़की होती है। जहाँ घरवाले कहे शादी कर लो, जब जैसा कहे वैसा करो। मैं घर से भाग चुकी हुँ..
मुझे ताज्जुब हुआ मगर अपने ताज्जुब को छुपाते हुए मैंने हंसते हुए पूछा "अकेली भाग रही हैं आप? आपके साथ कोई नजर नहीं आ रहा? "
वो बोली "अकेली नहीं, साथ में है कोई"
कौन? मेरे प्रश्न खत्म नहीं हो रहे थे
दिल्ली से एक और ट्रेन पकड़ूँगी, फिर अगले स्टेशन पर वो जनाब मिलेंगे, और उसके बाद हम किसी को नहीं मिलेंगे..
ओह्ह, तो ये प्यार का मामला है।
उसने कहा "जी"
मैंने उसे बताया कि 'मैंने भी लव मैरिज की है।'
ये बात सुनकर वो खुश हुई, बोली "वाओ, कैसे कब?" लव मैरिज की बात सुनकर वो मुझसे बात करने में रुचि लेने लगी
मैंने कहा "कब कैसे कहाँ? वो मैं बाद में बताऊंगा पहले आप बताओ आपके घर में कौन कौन है?
उसने होशियारी बरतते हुए कहा " वो मैं आपको क्यों बताऊं? मेरे घर में कोई भी हो सकता है, मेरे पापा माँ भाई बहन, या हो सकता है भाई ना हो सिर्फ बहने हो, या ये भी हो सकता है कि बहने ना हो और 2-4 गुस्सा करने वाले बड़े भाई हो"
मतलब मैं आपका नाम भी नहीं पूछ सकता "मैंने काउंटर मारा"
वो बोली, 'कुछ भी नाम हो सकता है मेरा, टीना, मीना, रीना, कुछ भी'
बहुत बातूनी लड़की थी वो.. थोड़ी इधर उधर की बातें करने के बाद उसने मुझे टॉफी दी जैसे छोटे बच्चे देते हैं क्लास में,
बोली आज मेरा बर्थडे है।
मैंने उसकी हथेली से टॉफी उठाते बधाई दी और पूछा "कितने साल की हुई हो?"
वो बोली "18"
"मतलब भागकर शादी करने की कानूनी उम्र हो गई आपकी"
वो "हंसी"
कुछ ही देर में काफी फ्रैंक हो चुके थे हम दोनों। जैसे बहुत पहले से जानते हो एक दूसरे को..
मैंने उसे बताया कि "मेरी उम्र 35 साल है, यानि 17 साल बड़ा हुँ"
उसने चुटकी लेते हुए कहा "लग तो नही रहे हो"
मैं मुस्कुरा दिया
मैंने उसे पूछा "तुम घर से भागकर आई हो, तुम्हारे चेहरे पर चिंता के निशान जरा भी नहीं है, इतनी बेफिक्री मैंने पहली बार देखी"
खुद की तारीफ सूनकर वो खुश हुई, बोली "मुझे उन जनाब ने मेरे लवर ने पहले से ही समझा दिया था कि जब घर से निकलो तो बिल्कुल बिंदास रहना, घरवालों के बारे में बिल्कुल मत सोचना, बिल्कुल अपना मूड खराब मत करना, सिर्फ मेरे और हम दोनों के बारे में सोचना और मैं वही कर रही हूँ"
मैंने फिर चुटकी ली, कहा "उसने तुम्हे मुझ जैसे अनजान मुसाफिरों से दूर रहने की सलाह नहीं दी?"
उसने हंसकर जवाब दिया "नहीं, शायद वो भूल गया होगा ये बताना"
मैंने उसके प्रेमी की तारीफ करते हुए कहा " वैसे तुम्हारा बॉय फ्रेंड काफी टेलेंटेड है, उसने किस तरह से तुम्हे अकेले घर से रवाना किया, नई सिम और मोबाइल दिया, तीन ट्रेन बदलवाई.. ताकि कोई ट्रेक ना कर सके, वेरी टेलेंटेड पर्सन"
लड़की ने हामी भरी, " बोली बहुत टेलेंटेड है वो, उसके जैसा कोई नहीं"
मैंने उसे बताया कि "मेरी शादी को 10 साल हुए हैं, एक बेटी है 8 साल की और एक बेटा 1 साल का, ये देखो उनकी तस्वीर"
मेरे फोन पर बच्चों की तस्वीर देखकर उसके मुंह से निकल गया "सो क्यूट"
मैंने उसे बताया कि "ये जब पैदा हुई, तब मैं कुवैत में था, एक पेट्रो कम्पनी में बहुत अच्छी जॉब थी मेरी, बहुत अच्छी सेलेरी थी.. फिर कुछ महीनों बाद मैंने वो जॉब छोड़ दी, और अपने ही कस्बे में काम करने लगा।"
लड़की ने पूछा जॉब क्यों छोड़ी??
मैंने कहा "बच्ची को पहली बार गोद में उठाया तो ऐसा लगा जैसे मेरी दुनिया मेरे हाथों में है, 30 दिन की छुट्टी पर घर आया था, वापस जाना था लेकिन जा ना सका। इधर बच्ची का बचपन खर्च होता रहे उधर मैं पूरी दुनिया कमा लूं, तब भी घाटे का सौदा है। मेरी दो टके की नौकरी, बचपन उसका लाखों का.."
लड़की ने कहा "वेरी इम्प्रेसिव"
मैं मुस्कुराकर खिड़की की तरफ देखने लगा
लड़की ने पूछा "अच्छा आपने तो लव मैरिज की थी न,फिर आप भागकर कहाँ गए??
कैसे रहे और कैसे गुजरा वो वक्त??
उसके हर सवाल और हर बात में मुझे महसूस हो रहा था कि ये लड़की लकड़पन के शिखर पर है, बिल्कुल नासमझ और मासूम छोटी बहन सी।
मैंने उसे बताया कि हमने भागकर शादी नहीं की, और ये भी है कि उसके पापा ने मुझे पहली नजर में सख्ती से रिजेक्ट कर दिया था।"
उन्होंने आपको रिजेक्ट क्यों किया?? लड़की ने पूछा
मैंने कहा "रिजेक्ट करने का कुछ भी कारण हो सकता है, मेरी जाति, मेरा काम,,घर परिवार,
"बिल्कुल सही", लड़की ने सहमति दर्ज कराई और आगे पूछा "फिर आपने क्या किया?"
मैंने कहा "मैंने कुछ नहीं किया,उसके पिता ने रिजेक्ट कर दिया वहीं से मैंने अपने बारे में अलग से सोचना शुरू कर दिया था। खुशबू ने मुझे कहा कि भाग चलते हैं, मेरी वाइफ का नाम खुशबू है..मैंने दो टूक मना कर दिया। वो दो दिन तक लगातार जोर देती रही, कि भाग चलते हैं। मैं मना करता रहा.. मैंने उसे समझाया कि "भागने वाले जोड़े में लड़के की इज़्ज़त पर पर कोई ख़ास फर्क नहीं पड़ता, जबकि लड़की के पूरे कुल की इज्ज़त धुल जाती है। भगाने वाला लड़का उसके दोस्तों में हीरो माना जाता है लेकिन इसके विपरीत जो लड़की प्रेमी संग भाग रही है वो कुल्टा कहलाती है, मुहल्ले के लड़के उसे चालू कहते है । बुराइयों के तमाम शब्दकोष लड़की के लिए इस्तेमाल किये जाते हैं। भागने वाली लड़की आगे चलकर 60 साल की वृद्धा भी हो जाएगी तब भी जवानी में किये उस कांड का कलंक उसके माथे पर से नहीं मिटता। मैं मानता हूँ कि लड़का लड़की को तौलने का ये दोहरा मापदंड गलत है, लेकिन हमारे समाज में है तो यही , ये नजरिया गलत है मगर सामाजिक नजरिया यही है,
वो अपने नीचे का होंठ दांतो तले पीसने लगी, उसने पानी की बोतल का ढक्कन खोलकर एक घूंट पिया।
मैंने कहा अगर मैं उस दिन उसे भगा ले जाता तो उसकी माँ तो शायद कई दिनों तक पानी भी ना पीती। इसलिए मेरी हिम्मत ना हुई कि ऐसा काम करूँ.. मैं जिससे प्रेम करूँ उसके माँ बाप मेरे माँ बाप के समान ही है। चाहे शादी ना हो, तो ना हो।
कुछ पल के लिए वो सोच में पड़ गई , लेकिन मेरे बारे में और अधिक जानना चाहती थी, उसने पूछा "फिर आपकी शादी कैसे हुई???
मैंने बताया कि " खुशबू की सगाई कहीं और कर दी गई थी। धीरे धीरे सबकुछ नॉर्मल होने लगा था। खुशबू और उसके मंगेतर की बातें भी होने लगी थी फोन पर, लेकिन जैसे जैसे शादी नजदीक आने लगी, उन लोगों की डिमांड बढ़ने लगी"
डिमांड मतलब 'लड़की ने पूछा'
डिमांड का एक ही मतलब होता है, दहेज की डिमांड। परिवार में सबको सोने से बने तोहफे दो, दूल्हे को लग्जरी कार चाहिए, सास और ननद को नेकलेस दो वगैरह वगैरह, बोले हमारे यहाँ रीत है। लड़का भी इस रीत की अदायगी का पक्षधर था। वो सगाई मैंने तुड़वा डाली..इसलिए नही की सिर्फ मेरी शादी उससे हो जाये बल्कि ऐसे लालची लोगों में खुशबू कभी खुश नही रह सकती थी ना उसका परिवार, फिर किसी तरह घरवालों को समझा बुझा कर मैं फ्रंट पर आ गया और हमारी शादी हो गई। ये सब किस्मत की बात थी..
लड़की बोली "चलो अच्छा हुआ आप मिल गए, वरना वो गलत लोगों में फंस जाती"
मैंने कहा "जरूरी नहीं कि माता पिता का फैसला हमेशा सही हो, और ये भी जरूरी नहीं कि प्रेमी जोड़े की पसन्द सही हो.. दोनों में से कोई भी गलत या सही हो सकता है..काम की बात यहाँ ये है कि कौन ज्यादा वफादार है।"
लड़की ने फिर से पानी का घूंट लिया और मैंने भी.. लड़की ने तर्क दिया कि "हमारा फैसला गलत हो जाए तो कोई बात नहीं, उन्हें ग्लानि नहीं होनी चाहिए"
मैंने कहा "फैसला ऐसा हो जो दोनों का हो,बच्चो और माता पिता दोनों की सहमति, वो सबसे सही है। बुरा मत मानना मैं कहना चाहूंगा कि तुम्हारा फैसला तुम दोनों का है, जिसमे तुम्हारे पेरेंट्स शामिल नहीं है, ना ही तुम्हे इश्क का असली मतलब पता है अभी"
उसने पूछा "क्या है इश्क़ का सही अर्थ?"
मैंने कहा "तुम इश्क में हो, तुम अपना सबकुछ छोड़कर चली आई ये सच्चा इश्क़ है, तुमने दिमाग पर जोर नहीं दिया ये इश्क है, फायदा नुकसान नहीं सोचा ये इश्क है...तुम्हारा दिमाग़ दुनियादारी के फितूर से बिल्कुल खाली था, उस खाली जगह में इश्क का फितूर भर दिया गया। जिन जनाब ने इश्क को भरा क्या वो इश्क में नहीं है.. यानि तुम जिसके साथ जा रही हो वो इश्क में नहीं, बल्कि होशियारी हीरोगिरी में है। जो इश्क में होता है वो इतनी प्लानिंग नहीं कर पाता है, तीन ट्रेनें नहीं बदलवा पाता है, उसका दिमाग इतना काम ही नहीं कर पाता.. कोई कहे मैं आशिक हुँ, और वो शातिर भी हो ये नामुमकिन है।
मजनू इश्क में पागल हो गया था, लोग पत्थर मारते थे उसे, इश्क में उसकी पहचान तक मिट गई। उसे दुनिया मजनू के नाम से जानती है जबकि उसका असली नाम कैस था जो नहीं इस्तेमाल किया जाता। वो शातिर होता तो कैस से मजनू ना बन पाता। फरहाद ने शीरीं के लिए पहाड़ों को खोदकर नहर निकाल डाली थी और उसी नहर में उसका लहू बहा था, वो इश्क़ था। इश्क़ में कोई फकीर हो गया, कोई जोगी हो गया, किसी मांझी ने पहाड़ तोड़कर रास्ता निकाल लिया..किसी ने अतिरिक्त दिमाग़ नहीं लगाया..चालाकी नही की
लालच ,हवस और हासिल करने का नाम इश्क़ नहीं है.. इश्क समर्पण करने को कहते हैं जिसमें इंसान सबसे पहले खुद का समर्पण करता है, जैसे तुमने किया, लेकिन तुम्हारा समर्पण हासिल करने के लिए था, यानि तुम्हारे इश्क में लालच की मिलावट हो गई ।
लकड़ी अचानक से खो सी गई.. उसकी खिलख़िलाहट और लपड़ापन एकदम से खमोशी में बदल गया.. मुझे लगा मैं कुछ ज्यादा बोल गया, फिर भी मैंने जारी रखा, मैंने कहा " प्यार तुम्हारे पापा तुमसे करते हैं, कुछ दिनों बाद उनका वजन आधा हो जाएगा, तुम्हारी माँ कई दिनों तक खाना नहीं खाएगी ना पानी पियेगी.. जबकि आपको अपने आशिक को आजमा कर देख लेना था, ना तो उसकी सेहत पर फर्क पड़ता, ना दिमाग़ पर, वो अक्लमंद है, अपने लिए अच्छा सोच लेता।
आजकल गली मोहल्ले के हर तीसरे लौंडे लपाटे को जो इश्क हो जाता है, वो इश्क नहीं है, वो सिनेमा जैसा कुछ है। एक तरह की स्टंटबाजी, डेरिंग, अलग कुछ करने का फितूर..और कुछ नहीं।
लड़की का चेहरे का रंग बदल गया, ऐसा लग रहा था वो अब यहाँ नहीं है, उसका दिमाग़ किसी अतीत में टहलने निकल गया है। मैं अपने फोन को स्क्रॉल करने लगा.. लेकिन मन की इंद्री उसकी तरफ थी।
थोड़ी ही देर में उसका और मेरा स्टेशन आ गया.. बात कहाँ से निकली थी और कहाँ पहुँच गई.. उसके मोबाइल पर मैसेज टोन बजी, देखा, सिम एक्टिवेट हो चुकी थी.. उसने चुपचाप बैग में से आगे का टिकट निकाला और फाड़ दिया.. मुझे कहा एक कॉल करना है, मैंने मोबाइल दिया.. उसने नम्बर डायल करके कहा "सोरी पापा, और सिसक सिसक कर रोने लगी, सामने से पिता भी फोन पर बेटी को संभालने की कोशिश करने लगे.. उसने कहा पिताजी आप बिल्कुल चिंता मत कीजिए मैं घर आ रही हूँ..दोनों तरफ से भावनाओ का सागर उमड़ पड़ा"
हम ट्रेन से उतरे, उसने फिर से पिन मांगी, मैंने पिन दी.. उसने मोबाइल से सिम निकालकर तोड़ दी और पिन मुझे वापस कर दिया
कहानी को अंत तक पढ़ने का धन्यवाद।
देश की सभी बेटियों को समर्पित-
ये मेरा दावा है माता पिता से ज्यादा तुम्हे दुनिया मे कोई प्यार नहीं करता।

 #झाला_मान_सिंह_बड़ीसादड़ी_का_इतिहास महाराणा प्रताप का जीवन बचाने वाले उनके हमशक्ल बड़ीसादड़ी के झाला मानसिंह या मन्ना चित्त...
27/11/2020

#झाला_मान_सिंह_बड़ीसादड़ी_का_इतिहास

महाराणा प्रताप का जीवन बचाने वाले उनके हमशक्ल बड़ीसादड़ी के झाला मानसिंह या मन्ना चित्तौड़गढ़ के बड़ीसादड़ी नगर के थे बड़ीसादड़ी का झाला मन्ना महल, झाला मन्ना पैनोरमा।

झाला मानसिंह बड़ी सादड़ी के राजपूत परिवार से थे महाराणा रायमल ने बड़ी सादड़ी की जागीर झाला मानसिंह के पूर्वजों श्री अज्जा और सज्जा को दी थी।

जिस प्रकार हल्दीघाटी के युद्ध में महाराणा प्रताप का मुकुट पहनकर झाला मानसिंह ( झाला मन्ना ) ने अपने प्राणों की आहुति देकर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप के प्राणों की रक्षा की थी उसी प्रकार खानवा के युद्ध में महाराणा सांगा को झाला मान के दादा झाला बीदा ने अपनी जान देकर बचाया था इससे अधिक स्वामी भक्ति का परिचय तो और क्या होगा।

(झाला मान पैनोरमा बड़ीसादड़ी, चित्तौड़गढ़)

सन 18 जून 1576, अकबर और महाराणा प्रताप के बीच लड़ा गया हल्दीघाटी युद्ध महाभारत के युद्ध की तरह ही भयानक और विशालकारी था हल्दी घाटी के इस भीषण और महाप्रलयकारी युद्ध में जब महाराणा प्रताप ने अकबर के सेनापति महाराणा मानसिंह पर हमला किया तब उनके भाले के एक ही वार से राजा मानसिंह का महावत मारा गया।

असंख्य मुगल सैनिक बोखला गए और महाराणा प्रताप पर वार करने के लिए आगे बढ़े इधर राजपूत सैनिक भी प्राण हथेली पर रखकर युद्ध लड़ रहे थे महाराणा का एक एक सैनिक लाखो पर भी भारी पड़ रहा था महाराणा प्रताप के सिर पर मेवाड़ का राजमुकुट था असंख्य मुगल सैनिक उसी को निशाना बनाकर वार कर रहे थे।

महाराजा मानसिंह पर हमला करते समय चेतक के घायल हो जाने से मुगल सैनिकों ने महाराणा प्रताप के चारों और घेरा डालना शुरू कर दिया और धीरे-धीरे महाराणा प्रताप संकट कि स्थिति में फसने लगे।

उसी समय स्थिति की गंभीरता को परख कर महाराणा प्रताप के स्वामीभक्त परमप्रतापी सरदार झालामान सिंह ( झाला मन्ना ) अपनी स्वामिभक्ति का प्रमाण देते हुए आगे बड़े और महाराणा प्रताप के सर से राज चिन्ह और मुकुट लेकर अपने सर पर धारण कर लिया और महाराणा प्रताप को युद्ध क्षेत्र से निकल जाने को कहा।

झाला मन्ना की चाल कामयाब रही और शत्रुओं ने झाला मन्ना को ही महाराणा प्रताप समझ लिया और उन पर आक्रमण करने के लिए टूट पड़े भीषण युद्ध हुआ लेकिन अंत में हुआ वहीं की जो होना था भीषण युद्ध करते करते झाला मन्ना वीरगति को प्राप्त हुए वीरगति को प्राप्त होने से पहले ही झाला मन्ना मुगल सेना को पूर्व की ओर पीछे धकेल चुके थे।

उनके इसी बलिदान की वजह से महाराणा प्रताप बाद में मेवाड़ को पुनः मुक्त करा पाए इस प्रकार झाला मन्ना ने अपने स्वामी का शीश बचाने के लिए अपना शीश कटा दिया उनके इस बलिदान की गाथा सदियों तक दोहराई जाएगी।

#बड़ीसादड़ी

बड़ीसादड़ी को झाला मन्ना नगरी या झाला मान की नगरी भी कहा जाता है बड़ीसादड़ी चित्तौड़गढ़ जिले से 65 किमी की दुरी पर और उदयपुर जिले से 100 किमी की दुरी पर स्थित है।

(झाला मान की नगरी-बड़ीसादड़ी)

बड़ीसादड़ी में देखने योग्य कुछ महत्वपूर्ण स्थानों में झाला मन्ना का महल, झाला मन्ना का पैनोरमा आदि है चलिए इन पर चर्चा करते है -

बड़ी सादड़ी में झाला मन्ना का विशाल महल स्थित है महाराणा रायमल द्वारा दी गई जागीरी पर जाला मन्ना के पूर्वजों द्वारा बनाया गया यह महल अत्यधिक सुंदर है यह महल बड़ी सादड़ी शहर की सुंदरता को आसमान की असीमित ऊंचाइयों तक ले जाता है महल के पास ही स्थित तालाब भी शहर की सौंदर्यता को बढ़ाता है।

चित्तौड़गढ़, बड़ी सादड़ी के जुझारू वीर योद्धा झाला मन्ना का पैनोरमा बड़ीसादड़ी में एक ऊंची पहाड़ी पर स्थित है इसे देखने बड़ीसादड़ी शहर और आस पास से असंख्य लोग आते हैं इसे देखने से लोगों का जोश और उत्साह बढ़ता है।

यहां पर स्थित घोड़े पर सवार झाला मन्ना की विशालकाय प्रतिमा हुबहू महाराणा प्रताप के दर्शन कराती है। इस पैनोरमा में झाला मन्ना के संपूर्ण जीवन तथा उनके बलिदान का विवरण चित्राया गया है इसमें महाराणा प्रताप के हल्दीघाटी युद्ध का विवरण है।

बड़ीसादड़ी नगर से 70 किमी समीप दुर्गो का राजा कहा जाने वाला चित्तौड़गढ़ दुर्ग स्थित है इस किले की सम्पूर्ण जानकारी नीचे पोस्ट लिंक में उपस्थित है।

चित्तौड़गढ़ दुर्ग - चित्तौडग़ढ़ किले का इतिहास, Best Places to Visit in Chittorgarh, Chittorgarh Johar History, Rajasthan Best Fort in hindi, विजय स्तम्भ, फतेह प्रकाश पैलेस

बड़ीसादड़ी नगर से 45 किमी दूर भगवान श्री सांवरिया सेठ जी का भव्य मंदिर है इनके दर्शन करने सम्पूर्ण भारत के श्रद्धालु आते है मंदिर की सम्पूर्ण जानकारी नीचे दी गई लिंक पर जाकर प्राप्त कर सकते है।

सांवरिया सेठ के भव्य मंदिर का इतिहास, भगवान श्री सांवरिया सेठ के दर्शन का समय, भगवान श्री कृष्ण का श्री सांवरिया सेठ मंदिर-चित्तौडग़ढ़ करीब 450 साल पुराना माना जाता है।

(पोस्ट लेखक --: रॉयल राजपूत अज्य ठाकुर गोत्र भारद्वाज पंजाब जिला पठानकोट गांव अंदोई)

24/11/2020

मारवाड़ के राणा प्रताप सिंह 💪
जिनका इतिहास नही लीखा गया
जिन्होने आजीवन मुगलो से लोहा लिया ओर हमेशा जीते
स्वतंत्रता जिनके रग रग में दौड़ रही थी
ऐसे थे राव चंद्रसैन राठौड़

24/11/2020

ये है पाकिस्तान की फौज 😂
जिन्हे कश्मीर जितना है 🤪
गजब की बेइज्ती हो रखी है

24/11/2020

कारगिल युद्ध 1999
देखे ओर शेयर करे
🚩🚩जय हिंद जय भारत 🚩🚩

🤣😂😋😍😛 #बहुत_दिनों_से_एक_पड़ोसी_नहीं_दिखे, #मुझे_लगा_कहीं  "निपट"   #तो_नहीं_गए....! #यही_सोच_कर_आज_मैं_उनके  🏚   #घर चला ...
11/08/2020

🤣😂😋😍😛
#बहुत_दिनों_से_एक_पड़ोसी_नहीं_दिखे,
#मुझे_लगा_कहीं "निपट" #तो_नहीं_गए....!

#यही_सोच_कर_आज_मैं_उनके 🏚 #घर चला गया।

देखा तो उनके 👢 पैर में प्लास्टर चढ़ा हुआ था।
उसे देख कर मेरे "कब" और "कैसे" वाले सवालों पर उन्होंने "रहस्यमयी मुस्कान" के साथ धीरे से जवाब दिया....
"टैन्शन मत लो” , मुझे हुआ कुछ नहीं है।
जब तक लॉक-डाउन लगा है, कहीं जाना तो था नहीं....
इसलिये ऑफ़िस से आते वक्त पैर में प्लास्टर चढ़वा लिया था.....
नहीं तो.... घरवाली काम करवा-करवा कर कमर तोड़ देती।

😗 मानो या ना मानो 😗

अब.... आराम ही आराम है और सेवा भी भरपूर मिल रही है। काम करवाना तो दूर, पानी के खाली ग्लास तक को हाथ लगाने नहीं देती।
उपर से दिन भर ये सुनने को मिलता है.... इस बहाने आपकी "सेवा" का अवसर पाकर मैं तो "धन्य" हो गई....!!
😆😆😂😂🤣🤣🤣🤣

“अफ़सोस” ऐसा बिचार मुझे क्योऺ नहीं आया. इस बात का अफसोस मुझे जिंदगी की आखिरी सांस तक रहेगा ... 😍😋🤣😛

 ाकिस्तानीयो_को_मारकर_शहीद_हुए_पवित्र_सिंह_चौधरी_के_बलिदान_दिवस_पर_शत_शत_नमन🇮🇳👇👇👇👇 #कहानी 👇👇👇कारगिल में शहीद हुए पवित्र ...
09/07/2020

ाकिस्तानीयो_को_मारकर_शहीद_हुए_पवित्र_सिंह_चौधरी_के_बलिदान_दिवस_पर_शत_शत_नमन🇮🇳
👇👇👇👇 #कहानी 👇👇👇
कारगिल में शहीद हुए पवित्र का जन्म नारनौंद उपमंडल के गांव मिल्कपुर में 9 अगस्त 1978 को एक फौजी के घर में हुआ था। उनके पिता स्व किताब सिंह जब भी आर्मी से छुट्टी लेकर घर आते थे तो पवित्र बचपन में उनसे खिलौनों में भी बंदूक मांगते थे। बंदूक लेकर वह अपने पिता से कहता कि मैं बड़ा होकर फौजी बनूंगा और आपकी तरह सरहद पर दुश्मनों को मारकर देश सेवा करूंगा।

पवित्र ने गांव के ही सरकारी स्कूल से अपनी 10वीं पास की। 11वीं में पढ़ाई के लिए उन्होंने राखी शाहपुर की वोकेशनल में पढ़ाई शुरू की। पढ़ाई के साथ खेलों में भी पवित्र हमेशा आगे रहता था। 29 फरवरी 1996 को आठ जाट रेजिमेंट में भर्ती होकर बचपन के अपने सपने को साकार कर दिखाया।

9 जुलाई 1999 को 11 दुश्मनों को मौत के घाट उतारने के बाद देश के लिए लड़ते हुए शहीद हो गए। यह इत्तफाक ही है कि शहीद पवित्र की जन्म व शहादत की तारीख नौ ही है। शहीद पवित्र की मां व उसके परिजन उसके जन्मदिन व शहादत पर हर वर्ष खेल व अन्य कार्यक्रम करवाते हैं।

बचपन से ही देशसेवा का जज्बा था, इसलिए पढ़ते-पढ़ते ही आर्मी में भर्ती में भर्ती हो गया। इस बात पर गर्व है कि मेरा बेटा देश के 11 दुश्मनों को मारकर शहीद हुआ है। पवित्र जैसे बहादुर देश पर मर मिटने वाले बच्चे सभी माताओं की कोख से पैदा हों, ताकि देश की सेवा कर सकें। -सुजानी देवी, शहीद पवित्र की मां।
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पवित्र कुमार बचपन से ही विनम्र स्वभाव के थे। घर वाले अगर किसी बात पर गुस्सा हो जाते थे तो पवित्र उसका जवाब हंसते हुए देते थे। 1985 में उनके पिता किताब सिंह सात केवलरी आर्मी से सेवानिवृत्त हुए, तब उनसे ही उसने सेना में भर्ती होने व देश की सेवा करने का जज्बा पैदा हो गया।- प्रदीप व सवित्र, शहीद के भाई।

देश सेवा का जज्बा उसे अपने पिता से विरासत में मिला था। फौजी पिता के घर जन्म होने के कारण उनके संस्कार में ही राष्ट्र प्रेम की भावना भर गई थी। अपने सपने को साकार कर उन्होंने अपने गांव व देश का नाम रोशन किया।- सुल्तान सिंह, शहीद पवित्र के दादा

दोबारा हो स्मारक का निर्माण
शहीद पवित्र कुमार के भाई सवित्र श्योराण ने कहा कि पवित्र की याद में गांव में स्मारक का निर्माण करवाया गया था। किसी शरारती तत्व ने शहीद की प्रतिमा को 28 अप्रैल 2018 को खंडित कर उनके हाथ में बनी बंदूक को क्षतिग्रस्त कर दिया। पुलिस ने अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज कर कार्रवाई के नाम पर सिर्फ लीपापोती की।
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घटना को एक साल से भी ज्यादा समय हो चुका है, लेकिन अभी तक स्मारक को क्षतिग्रस्त करने वालों को पकड़ा नहीं जा सका है, जिससे ग्रामीणों व परिजनों में रोष है। परिजनों की मांग है कि सरकार व प्रशासन उनकी प्रतिमा को खंडित करने वाले शरारती तत्वों को कड़ी सजा दे और स्मारक में उनकी प्रतिमा की दोबारा स्थापना की जाए।

पेयजल की समस्या
शहीद पवित्र के गांव खेड़ी रोज (मिल्कपुर) में पीने के पानी की स्थिति खराब है। लोग पानी दूर दराज के खेतों से लेकर काम चला रहे हैं। गंदे पानी की निकासी के भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। राखी गढ़ी से गुलकनी के लिए सड़क का चौड़ीकरण का काम बीच में ही लटका हुआ है। रोड के दोनों तरफ गहरी खाई खोदकर छोड़ दी गई है, जिससे हादसों का लगातार खतरा बना हुआ है।

स्कूल से हटा दिया शहीद का नाम
गांव में खेड़ी रोज व मिल्कपुर दो ग्राम पंचायतों का एक ही सरकारी स्कूल है। स्कूल का नाम शहीद के नाम से रखा गया था लेकिन गांव के ही कुछ लोगों ने उसी रात स्कूल के गेट से शहीद का नाम हटा दिया। इस तरफ प्रशासन ने भी कोई ध्यान नहीं दिया। आज तक प्रशासन की तरफ से शहीद के नाम पर किसी भी सरकारी संस्था का नाम नहीं रखा है।

👇👇 ेंग_रेप_पीड़िता_से_शादी 👇👇 #जरूर_पढ़े_ओर_शेयर_करे 👇👇हरियाणा के जींद में रहने वाले जितेंदर छत्तर ने एक गैंग रेप पीड़ित...
08/07/2020

👇👇 ेंग_रेप_पीड़िता_से_शादी 👇👇 #जरूर_पढ़े_ओर_शेयर_करे 👇👇
हरियाणा के जींद में रहने वाले जितेंदर छत्तर ने एक गैंग रेप पीड़िता से शादी की. एक रेप पीड़िता से शादी करना और फिर बलात्कारियों को सजा दिलवाने के संघर्षों की कहानी समाज के लिए किसी प्रेरणा से कम नहीं है.
यूपी के गोंडा में एक महिला ने आत्महत्या कर ली क्योंकि उसका गैंगरेप करने वालों को पुलिस ने क्लीनचिट दे दी थी. आरोपियों ने रेप करते हुए महिला का वीडियो भी बनाया था. इस मामले पर जब सुनवाई नहीं हो रही थी तो महिला और उसके पति ने लखनऊ विधान भवन के आगे खुद को जलाने की कोशिश भी की थी. लेकिन इंसाफ की लड़ाई लड़ रहे ये पति-पत्नी इतने खुशकिस्मत नहीं थे. बलात्कारियों को बेकसूर बता दिया गया तो महिला ये बर्दाश्त नहीं कर पाई और फांसी लगा ली. अब पति लड़े भी तो किसके लिए...पत्नी तो साथ छोड़ गई.

लेकिन एक और पति है जो अपनी पत्नी के लिए अब भी लड़ रहा है. अपनी पत्नी के गुनहगारों को सजा दिलवाने की जिद किए बैठा है. इस इंसान की कहानी सुनकर आप पति-पत्नी के रिश्ते, प्यार और साथ निभाने के जज्बे को बहुत करीब से समझ पाएंगे.

हिंदुस्तान टाइम्स की रिर्पोर्ट के अनुसार- हरियाणा के जींद में रहने वाले जितेंदर छत्तर ने एक गैंग रेप पीड़िता से शादी की. एक रेप पीड़िता से शादी करना और फिर बलात्कारियों को सजा दिलवाने के संघर्षों की कहानी जितेंदर खुद बयां कर रहे हैं-

'पहले मैं उस बात से शुरुआत कर रहा हूं जिसे पढ़ना और लिखना बहुत असहज है. कुछ सालों पहले 8 लोगों ने मेरी पत्नी का सामूहिक बलात्कार किया. उन्होंने रेप करते हुए उसकी तस्वीरें लीं और वीडियो भी बनाए, जिसका इस्तेमाल करके उन्होंने उसे ब्लैकमेल भी किया. उन्होंने उसकी नग्न तस्वीरें ली थीं, और उन तस्वीरों को हथियार बनाकर उन्होंने एक से डेढ़ साल तक उसका बलात्कार भी किया.

जब ये सब कुछ हुआ था तब हमारी शादी नहीं हुई थी. ये रिश्ता हमारे माता-पिता ने पक्का किया था, शादी सबको मंजूर थी. सितंबर 2015 में हमारी मंगनी हो गई. शादी 4 महीने के बाद होनी थी तब तक मैं अपनी मंगेतर से मिल भी नहीं सकता था क्योंकि हरियाणा में ऐसा ही रिवाज है.

मंगनी के बाद हम एक दूसरे से फोन पर बात किया करते थे. मैं छत्तर गांव का था और वो जींद में रहती थी जो 30 किलोमीटर की दूरी पर थे. एक दिन उसने कहा कि उसे एक बहुत जरूरी बात कहनी है. और वो चाहती है कि मैं अपने माता-पिता के साथ एक बार फिर से उनके घर आऊं. हम जब वहां पहुंचे तो उसने बताया कि वो एक बलात्कार पीड़िता है और वो एक झूठ के साथ किसी रिश्ते की शुरुआत नहीं करना चाहती. अपनी आखों में आंसू लिए उसने मेरी तरफ देखकर कहा- 'मैं इस रिश्ते के लायक नहीं हूं, आप मुझसे शादी मत करो.'

मेरी अंतरात्मा मुझे झकझोरने लगी और मैंने सोच- मेरा भगवान मुझे माफ नहीं करेगा अगर मैं इस लड़की से शादी नहीं करूंगा. मैंने उससे कहा- 'मैं सिर्फ तुमसे शादी ही नहीं करूंगा बल्कि ये वादा भी करता हूं कि तुम्हें न्याय मिले.' इंसाफ की लड़ाई तो हमारी शादी के पहले ही शुरू हो गई थी.'

अब यहां आप समझ सकते हैं कि जितेंदर की जगह अगर कोई दूसरा होता तो इस शादी को तभी तोड़ देता. क्योंकि हमारे समाज में तो यही माना जाता है कि जिस महिला का बलात्कार हो जाता है उसकी कोई इज्जत नहीं होती. लेकिन जितेंदर ने ऐसा नहीं किया.

इस सच को जानने के दो हफ्ते बाद ही जिंतेदर ये निर्णय कर चुके थे कि उन्हें अपनी मंगेतर के बलात्कारियों को सजा दिलवानी है. उन्होंने मंगेतर के साथ उन 8 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई, वकील किए, और कानूनी कारवाई को आगे बढ़ाया. केस बनने के बाद इन दोनों के परिवार वालों को धमकियां मिलने लगीं लेकिन ये नहीं रुके. दिसंबर 2015 में इनकी शादी भी हो गई.

जितेंदर ने अपनी पत्नी के बलात्कारियों को सजा दिलाने का प्रण लिया है

ये सब करना किसी के लिए भी इतना आसान नहीं होता. लेकिन जितेंदर छत्तर का कहना है कि इंसाफ की ये लड़ाई वो सिर्फ इसलिए लड़ पा रहे हैं क्योंकि उनके माता-पिता का आशीर्वाद और मर्जी इसमें शामिल थी. बिना उनकी मर्जी के हरियाणा जैसी जगह ये सब कर पाना असंभव था. माता-पिता के संबंध गांववालों के साथ अच्छे थे इसलिए गांववालों ने भी साथ दिया. जितेंदर कहते हैं- 'शादी से पहले पूरी पंचायत मेरी पत्नी को न्याय दिलाने के मेरे फैसले में मेरे साथ खड़ी थी.'

जितेंदर बताते हैं कि- आरोपी राजनीतिक परिवार से थे, रसूखदार थे. उन्होंने केस वापस लेने के लिए धमकाया भी और पैसे की पेशकश भी की. पुलिस के सामने हमने जो सबूत रखे गए थे वो अदालत में नहीं रखे गए और मेरे खिलाफ धोखाधड़ी के तीन मामले भी बनाए गए. जिन्हें जांच में गलत पाया गया. जिला अदालत ने तो आरोपियों को बरी कर दिया लेकिन फिर मैंने हाईकोर्ट में अर्जी डाली है.'

खेती-बाड़ी करने वाले एक कसान के लिए हाईकोर्ट में केस लड़ना इतना भी आसान नहीं होता. लिहाजा जिंतेदर को वकीलों की फीस देने के लिए अपनी जमीन भी बेचनी पड़ी. उन्हें फीस के लिए 14 लाख का इंतजाम करना था जिसके लिए उन्होंने गांव के दो प्लॉट बेच दिए. गांव से अदालत के चक्कर लगाना आसान नहीं था इसलिए गांव छोड़कर जींद में रहने लगे. जितेंदर को खेती-बाड़ी भी छोड़नी पड़ी.

लेकिन इतना पैसा वकीलों को देने से बेहतर था कि जितेंदर खुद वकील बन जाएं. इसलिए अब वो लॉ कर रहे हैं. जितेंदर कहते हैं- 'लॉ करने के बाद मैं खुद अपनी पत्नी का केस लड़ पाऊंगा. क्योंकि न तो मैं केस लड़ने के लिए और फीस भर सकता हूं और न ही किसी और वकील पर भरोसा कर सकता हूं.'

और तो और जितेंदर अपनी पत्नी को भी लॉ की पढ़ाई करवा रहे हैं. उनके दो साल का एक बेटा भी है और वो चाहते हैं कि वो अपने परिवार के साथ चंड़ीगढ़ चले जाएं. महिलाओं की जिंदगियां बर्बाद करने वाले रेप कल्चर और पित्रसत्तात्मक समाज से दूर चंडीगढ़ के ही किसी अच्छे स्कूल में वो बच्चे का दाखिला करवाना चाहते हैं. जितेंदर कहते हैं कि- 'हमें लगता है कि बदलाव आएगा. शहरों के मीटू मूवमेंट की तरह किसी न किसी दिन गांवों में रहने वाली महिलाओं की जिंदगियां भी बदलेंगी. मैं और मेरी पत्नी पूरी मेहनत कर रहे हैं. हमें लगता है कि हम बदलाव ला सकते हैं.'

'हरि' के इस प्रदेश में बलात्कार बहुत आम है
हरियाणा का नाम भले ही भगवान 'हरि' के नाम पर हो लेकिन यहां होने वाले सामूहिक बलात्कारों की संख्या भारत के किसी भी दूसरे प्रदेश से ज्यादा है. फिर भी इस अपराध के बारे में बात नहीं की जाती. समाज सारा दोष सिर्फ महिलाओं पर ही मढ़ देता है. लड़कियों के माता-पिता हमेशा अपनी बेटियों की सुरक्षा के लिए डर में जीते हैं.

सरकार भले ही बदल जाती हैं लेकिन हरियाणा के हालात जस के तस बने हुए हैं. न तो महिलाओं के प्रति सोच बदली और न बलात्कार के मामलों में कमी आ रही है. रेवाड़ी गैंगरेप कौन नहीं भूला. कुछ ही महीनों पहले यहां cbse की टॉपर 19 साल की एक लड़की को अगवा कर उसका बलात्कार किया गया था. ये मामले यहां की स्थिति खुद बयां करते हैं.

हरियाणा में रेप बड़ी समस्या है

जितेंदर के बारे में एक बात जो सबसे रेचक है वो ये है कि ये वही शख्स हैं जिनकी एक बात कुछ सालों पहले काफी चर्चित हुई थी. तब उन्हें खाप पंचायत का लीडर कहा गया था और उन्होंने कहा था कि चाऊमीन की वजह से रेप होते हैं. मीडिया में उनकी इस बात की काफी आलोचना की गई थी. लेकिन ऐसा कहने वाला ये शख्स उस वक्त लिंग चयन और कन्या भ्रूण हत्या रोकने के लिए खाप पंचायतों के साथ जींद के 24 गांवों में काम कर रहा था.

जितेंदर कहते हैं- 'मैंने वक्त के साथ सीख रहा हूं. उस समय मुझे लगता था कि बढ़ते रेप का कारण कहीं न कहीं शराब, ड्रग्स और फास्टफूड हैं. मेरी कही इस बात पर बहुत कुछ कहा गया, लेकिन मैंने तो हमेशा महिलाओं की समस्याओं को ही अहमियत दी थी. मैंने पत्रकारों को यही बताया था कि इस मामले में पुरुषों को शिक्षित होने की जरूरत है, हमारे बच्चों को पारंपरिक मूल्य सिखाने की जरूरत है, जिसमें महिलाओं का सम्मान करना भी शामिल है, लेकिन असली बात तो पीछे ही छूट गई और चाउमीन वाली बात को लेकर हंगामा हो गया.'

जितेंदर की कहानी सुनकर एक तरफ तो हरियाणा के रेप कल्चर और समाज की सोच पता चलती है जो महिलाओं के खिलाफ है. वहीं व्यक्ति की उस सोच का भी पता चलता है जो महिलाओं के प्रति सिर्फ सम्मान रखती है. जितेंदर चाहते तो शादी तोड़कर आराम से जीवन बिता रहे होते, लेकिन एक जिम्मेदार व्यक्ति की तरह उन्होंने अपनी पत्नी का साथ दिया. ये एक महिला के प्रति सम्मान ही तो था जो उनसे वो करवा गया जो कोई नहीं करता. दुनिया में ऐसे लोग कम हैं और हरियाणा में तो बहुत ही कम. लेकिन यही कुछ लोग दुनिया को प्रेरित करने के लिए काफी होते हैं. जितेंदर छत्तर पर राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता निर्देशक विभा बक्शी एक डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'Son-Rise' बना रही हैं. जो हो न हो समाज को बदलने की दिशा में एक अहम भूमिका निभा सकती है.

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