झूमते जंगल, उमंगित पहाड़, बलखाती नदियां और इंद्रधनुषी घाटियों कीगोद में बसा है छत्तीसगढ़। यहां कदम कदम पर कुदरत कौतुक दिखाती है, यहां कोस-कोस पर इतिहास का वैभव जगमगाता है। छत्तीसगढ़ के जादुई संसार को नजदीक से देखने केलिए छत्तीसगढ़ टूरिज्म बोर्ड ने प्रदेश के अलग-अलग हिस्सों में शानदार रिसॉर्ट्स और कॉटेजेस का निर्माण किया है। ट्रेवल शो ठौर-ठिकाना के ज़रिए हम आपको ले जाएंगे न्यास गौरैय्याँ सिद्ध शक्त
ि पीठ चौरेल बेमिसाल ठौर-ठिकानों पर, जहां से आप छत्तीसगढ़ के अनछुए सौंदर्य को जी-भरकर देख सकते हैं।
बालोद जिला बनने के बाद दुसरी गौरेय्या महोत्सव मेला में एक हप्ते पहले भक्ति की बयार बहती रही। तांदुला संगम स्थल श्री सिद्ध गौरेय्या शक्ति पीठ चौरेल, पैरी आश्रम व मोहलई के कबीर घाट में माघी पूर्णिमा का विशाल मेला लगता है। जिसमें बालोद जिले के औरअन्य शहरो के हजारों श्रद्धालुओं
रात 12 बजे के बाद से सुबह 9 बजे तक नदी में स्नान का दौर चला। इस दिन नदी में स्नान करके पूजा पाठ करने का विशेष महत्व है। स्नान केबाद मंदिरों में पूजा करने भक्तों की कतारे लगी रहती है। गौरेय्या मंदिर में स्थापित विभिन्न देवी देवताओं की मूर्ति के दर्शन करने श्रद्धालु जुटे रहे। मंदिर की घंटी दिन-रात गूंजती रहति है। माघी पूर्णिमा के रायपुर की रंगारंग प्रस्तुति गौरेय्या मंदिर प्रांगण होती है।कबीर घाट में दूर-दूर से आए साहेब संतों का प्रवचन चलता रहता है
इधर पैरी आश्रम में रात को कवि सम्मेलन तथा रँगारँग प्रोग्राम आयोजित होता है गौरेय्या मंदिर प्रांगण में महाराज का प्रवचन कार्यक्रम का रसास्वादन लेते है।
पुलिस प्रशासन रहा सतर्क : मेले में जुटी भीड़ को देखते हुए किसी प्रकार की अप्रिय घटना को रोकने पुलिस बल भी यहां मौजूद रहता है बालोद टीआई सहित गुंडरदेही व अर्जुंदा थाने का स्टाफ सुरक्षा व्यवस्था में जुटा रहा। आपातकालीन सेवा के लिए एंबुलेंस चिकित्सा केंद्र, फायर ब्रिगेड भी उपलब्ध रहता है नदी के तीनों छोर पर दुकानें सजी हुई होती है। साथ ही रात को मंदिरों को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है तथा
मंदिर के गर्भगृह में स्थापित है सिद्ध शिवलिंग
गौरेय्या मंदिर की प्रमुख खासियतयहां की शिवलिंग प्रतिमा है। जिसे लोन चमत्कारी मानते हैं। यह एक मंदिर में गर्भगृह मेंस्थापित है। कहा जाता है कि इस शिवलिंग पर जितना भी जल चढ़ाओ वह जल बहकर कहां जाता है, किसी को पतानहीं चलता। देखते-देखते जल गायब हो जाता है। यही अद्भुत प्रमाण श्रद्धालुओं को इस शक्ति पीठ की ओर खींचती है। हर साल माघी पूर्णिमा पर श्रद्धालु इस शिवलिंग में जल चढ़ाते हैं। इसके अलावा मंदिर प्रांगण में स्थापितकिए गए प्राचीन मूर्तियों को भी लोग एक ओजस्वी धरोहर समझकर पूजा करते हैं। मेले में खासकर महिलाओं द्वारा इन मूर्तियों मेंचावल रुपए चढ़ाए जाते हैं।ग्राम चौरेल मेँ दो दिवसीय रामायण प्रतियोगिता होती है