28/05/2026
#संस्मरण:
बात 1993 की है, उस समय मैं भारतीय जनता पार्टी चितबड़ागांव का मण्डल अध्यक्ष था, बाबरी विध्वंस के बाद विधानसभा चुनाव का सीज़न था, फेफना यानि कालान्तर में कोपाचीट विधानसभा से स्व. गौरी भइया चुनावी मैदान में थे, भाजपा ने उस समय सरदासपुर रसड़ा निवासी बीएचयू की छात्र राजनीति से उभरे व्यक्तित्व स्व. महेन्द्र नाथ सिंह को चुनावी मैदान में उतारा था।
चुनाव प्रचार जोर-शोर से चल रहा था, चितबड़ागांव में भाजपा बुलन्दी पर थी, वॉल राइटिंग व भाजपा के पोस्टर, झण्डे-बैनर आदि द्वारा चल रहे प्रचार से यह तय था कि कोपाचीट विधानसभा में भले ही भाजपा की बयार न चल पा रही हो लेकिन चितबड़ागांव में भाजपा का तूफान चल रहा था।
सुबह का वक़्त था, घड़ी में लगभग 9 बज रहे थे, बीती रात वॉल राइटिंग कराने के बाद मैं घर पर अपना भोजन तैयार करने की तैयारी में जुटा था, तभी दरवाजे पर किसी ने मुझे आवाज़ लगाई....
मैं रोटी बनाने के लिए आटा गूंथ रहा था, आवाज़ सुनकर मैंने दरवाजा खोला तो देखा सामने हाथ जोड़कर गौरी भइया खड़े थे, मैंने उन्हें प्रणाम किया और कहा-
'आदरणीय मन्त्री जी मैं आपको वोट नहीं दूंगा'....
गौरी भइया मुस्कुराते हुए बोले-
'बाबा मुझे मालूम है कि आप बीजेपी के समर्थक हैं आप भाजपा को ही वोट देंगे.... मुझे तो बस आपके साथ चाय पीनी है'....
मैंने उन्हें अन्दर आने को कहा, इतने में स्व. जगदीश सिंह पहलवान जी ने कहा-
'ए गउरी! का झुठहीं पत्थर में तीर चलवले बाड़ा, छोड़ा समय जियान मत कर$'....
गौरी भइया ने स्व. पहलवान जी व उनके साथ छोटकन सिंह जी, सूर्यनाथ सिंह जी व स्व. रामजी सिंह आदि समर्थकों से कहा- तहँ लोग आगे बढ़$ जा हम आवा तानी'.....
गौरी भइया मेरी तरफ पुनः मुख़ातिब होते हुए मुझसे बोले-
'बाबा चाय में देर होगी, मेरे साथ बाजार चलिए और मुझे एक पान खिला दीजिए'....
न चाहते हुए भी मैं गौरी भइया के साथ बाज़ार की तरफ चल पड़ा....
गौरी भइया ने बड़ी आत्मीयता से मेरे कन्धे पर हाथ रखा और बात-चीत करते हुए रामशाला स्थित शिवजी चौरसिया भाई की पान की दुकान के सामने पहुँचे, मैंने उन्हें 2 रूपए का एक पान खिलाया।
गौरी भइया वहाँ से अपनी जीप पर सवार हुए और मुझसे कहा-
'बाबा पान खिलाने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद'
कुछ ही दिनों बाद चुनाव का रिज़ल्ट घोषित हुआ और स्व. गौरी भइया चुनाव हार गए। भाजपा को पूरे विधानसभा में 5000 व चितबड़ागांव जो गौरी भइया का गढ़ माना जाता था यहाँ भाजपा को कुल पोलिंग वोट 5000 में 2800 वोट मिले थे जो श्रद्धेय गौरी भइया की हार का कारण बन गया।
स्व. गौरी भइया की जगह अगर आज के मन्त्री जी होते तो शायद मुझे होम अरेस्ट या जिला बदर करवा देते लेकिन सादगी व ईमानदारी की प्रतिमूर्ति व विपक्ष को भी समान आदर देने वाले स्व. गौरी भइया ने यह जानकर भी मुझे समय दिया कि मैं उनका धुर विरोधी हूँ।
श्रद्धेय गौरी भइया को जब भी याद करता हूँ उनके चरणों मे नतमस्तक हो जाता हूँ।
आज उनकी #27वीं पुण्यतिथि पर उन्हें बारम्बार नमन करता हूँ।
#अश्रुपूरित_श्रद्धांजलि
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Goswami Durgesh Giri Purvanchal Manaw Vikas Purvanchal Tour Travels लखनऊ पूर्व विधान सभा क्षेत्र 173