30/08/2019
30 अगस्त, 2019
पंचकूला
*सक्षम योजना के नाम पर या तो मुख्यमंत्री वास्तविक रोज़गार दें या फिर झूठे दावे करना बंद करें : मधु आनंद, स्वराज इंडिया पंचकूला*
*- सक्षम योजना के में हुई पुलिस की कार्यवाही का स्वराज इंडिया पंचकूला ने विरोध किया*
*- स्वराज इंडिया से पंचकूला विधान सभा क्षेत्र की प्रत्याशी मधु आनंद ने मुख्यमंत्री खट्टर को लिखा पत्र। कहा कि प्रदेश के युवाओं के पार्टी अभिभावक की तरह पेश आना चाहिए था, लेकिन उन पर पुलिस की कार्यवाही की गई*
*- मधु आनंद सक्षम कार्यरत महिलाओं और युविकाओं के साथ मुख्यमंत्री को पत्र देने पंचकूला के रेड बिशप पहुंची, लेकिन मिलने नहीं दिया गया। पत्र पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी ने लिया।*
28 अगस्त को पंचकूला में सक्षम योजना के लाभार्ती हरियाणा के मुख्यमंत्री से मिलने पहुंचे थे, लेकिन उनको न सिर्फ रोका गया, उन पर पुलिस कार्यवाही भी की गई। उसी दिन शाम को स्वराज इंडिया से पंचकूला विधान सभा क्षेत्र की प्रत्याशी मधु आनंद युवा हल्ला बोल के साथियों के साथ उन्हें मिलीं। इस अन्याय का विरोध करते हुए उन्होंने आज मुख्यमंत्री को पत्र लिखा और इस अनदेखी और अन्याय पर रोष व्यक्त किया।
मधु आनंद स्वराज इंडिया पंचकूला के साथियों और सक्षम योजना में कार्यरत महिलाओं और युविकाओं के साथ रेड बिशप में मुख्यमंत्री से मिलने पहुंची। वे चाहती थी कि वे मुख्यमंत्री से मिलकर यह पत्र उन्हें दें। लेकिन उन्हें मिलने नहीं दिया गया। पुलिस अधिकारियों ने उनसे पत्र ले लिया और आश्वासन दिया कि पत्र मुख्यमंत्री जी को दिया जाएगा।
पत्र में मधु जी ने सक्षम योजना के विज्ञापनों और दावों पर प्रश्न उठाये। उन्होंने लिखा,"मैं इन युवाओं से सेक्टर 5, पंचकूला के धरना स्थल पर मिली। जैसा कि इस योजना में तय है कि ग्रेजुएट युवाओं को 7500 रुपये महीना और पोस्ट ग्रेजुएट को 9000 रुपये निश्चित किये गए हैं। कम से कम 100 घंटे के काम की गारंटी है। अब आप स्वयं बताएं कि जब एक चपरासी को 17000 रुपये महीना मिल रहा है, ऐसे में हमारे प्रदेश के शिक्षित युवाओं को इतना कम मानदेय दे कर आप इनका मज़ाक नहीं उड़ा रहे हैं? यह मानदेय तो उन युवाओं के लिए हैं जिन्हें रोज़गार मिला। आप भी जानते हैं कि लगभग 1 लाख युवाओं में से कितनों को आपने वास्तव रोज़गार दिया है। महिलाएं हैं, लडकियां हैं - यदि वे अपने घर के आसपास कुछ काम की गुज़ारिश कर रही हैं, तो क्या यह असंभव है? इतने कम वेतन, जो सामान काम - सामान वेतन के सिद्धांत के विरुद्ध है, के बावजूद फिर आप तीन साल और 35 वर्ष की आयु सीमा का भी अड़ंगा डाल रहे हैं। बताइये, युवा बेरोज़गारी को कैसे झेलेंगे? इनके परिवार कैसे जियेंगे?"
उन्होंने सक्षम में दिए जा रहे रोज़गार पर सवाल उठाते हुए कहा,"वैसे तो मुझे यह भी पता चला कि इन युवाओं को उनकी शिक्षा के अनुरूप काम भी नहीं मिल रहा। एक पोस्ट ग्रेजुएट को अगर कोई सुरक्षा कर्मी का काम दिया जाएगा तो यह सिर्फ उसका अपमान ही नहीं है, शिक्षा का भी अपमान है। और यहां तो एम फिल, पी एच डी तक की यह व्यथा है।"
उन्होंने पंचकूला के धरना स्थल में मूलभूत सुविधाओं की दयनीय परिस्थिति पर भी सवाल उठे। उन्होंने लिखा कि वहाँ न शौचालय का बंदोबस्त है, न पानी का। महिलाएं और लडकियां धरने पर बैठें तो सुरक्षा का कोई प्रबंध नहीं है। मधु आनंद ने मुख्यमंत्री को भारत की सभ्यता की याद दिलाते हुए कहा, "हम शहीद भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त से अपनी विरासत पाते हैं। आपको याद दिलाना मैं अपना फ़र्ज़ समझती हूँ कि हमारे शहीदों ने अंग्रेज़ों की जेल में भी अपने लिए मानवीय मूल्यों की रक्षा के लिए, मूल भूत सुविधाओं के लिए लम्बी लड़ाई लड़ी थी, और अंग्रेज़ों को भी सुनना पड़ा था। फिर आप तो एक लोकतांत्रिक तरीके से चुनी हुई सरकार हैं। क्या ऐसी परिस्थितियां आपको विचलित नहीं करती?"
मधु आनंद ने मुख्यमंत्री की जन आशीर्वाद यात्रा पर सवाल उठाते हुए उनसे पूछा कि राजनीतिक ज़मीन को युवाओं के सपनों की आहुति देकर मज़बूत करेंगे? उन्होंने कहा कि या तो मुख्यमंत्री अपने दावों के अनुरूप युवाओं की पीड़ा का निवारण करें, या फिर ऐसा करने में वे अगर असमर्थ हैं तो तो कम से कम इनके नाम पर झूठे दावे कर इन्हें और पीड़ा तो न पहुंचाएं।
मधु आनंद के साथ युवा हल्ला बोल के जिला संयोजक हर्षित भी थे, जिन्होंने सक्षम युवाओं को भरोसा दिलाया कि रोज़गार और आदर से अपना जीवन यापन किसी भी मनुष्य का अधिकार है। और भाजपा सरकार ने तो अपने 2014 चुनाव के नाम पर ही युवाओं के वोट पाए थे। इसलिए यह युवाओं का अधिकार है कि सरकार की जवाबदेही तय करें।
स्वराज इंडिया प्रेसिडियम सदस्य शालिनी मालवीय ने याद दिलाया कि हमारे राष्ट्रीय अध्यक्ष, योगेंद्र यादव, बेरोज़गारी के मामले पर खट्टर साहेब को पहले ही बहस की चुनौती दे चुके हैं। वे उनके अपने क्षेत्र करनाल में 9 सितम्बर को उनसे मिलने भी जा रहे हैं। लोकतंत्र में चुनी हुई सरकारों को नारों या दावों पर नहीं, जनता के वास्तविक हालात पर बोलना चाहिए। और यह तो जग ज़ाहिर है कि हरियाणा में बेरोज़गारी आज आसमान छू रही है। देखना यह है कि सरकार कब तक युवाओं की आवाज़ को अनसुना कर अपनी पीठ ठोकती है।