क्षत्रिय राजपूताना पाठकपुर

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क्षत्रिय राजपूताना पाठकपुर पेज एडमिन /ठा.अमरपाल सिंह/जय श्री राम�?

29/01/2026

ध्यान रहे सुप्रीम कोर्ट ने मार्च तक रोक लगाया है कानून वापस नहीं हुआ है न कुछ बदलाव हुआ है।

14/01/2026

मेवाड़ धरा के पराक्रमी योद्धा, राजस्थान गौरव, वीर शिरोमणि महाराणा कुंभा जी की जयंती पर उन्हें कोटि-कोटि नमन!

राजस्थान की पावन धरा को अपनी वीरता से गौरवान्वित करने वाले, अद्वितीय रणनीतिकार और वास्तुकला के पुरोधा महाराणा कुंभा जी का शौर्य एवं पराक्रम आने वाली पीढ़ियों के लिए मार्गदर्शक बना रहेगा। @टॉप फ़ैन

28/07/2025

डिंपल यादव का ठेका अब ठाकुरों ने ले लिया है क्योंकि ठाकुरों में कुछ ऐसे व्यक्ति हैं जिन्हें पड़ी लकड़ी गां #ड में लेनी है

22/07/2025
26/04/2025

एक हमले में तुम कलमा पढ़ने लगे
सोचो क्षत्रियों ने हजारों वर्षों तक तुम्हारी रक्षा कैसे की होगी?

12/04/2025

मिश्रा जी के पेले जाने को ब्राह्मण vs ठाकुर का रूप न दे
मिश्रा जी को कूटने वाला भी कट्टर सनातनी ब्राह्मण है

"मेवाड़ महाराणा उदयसिंह जी की 453वीं पुण्यतिथि पर पढ़िए उनकी संक्षिप्त जीवनी"1522 ई. :- महाराणा सांगा व रानी कर्णावती के प...
28/02/2025

"मेवाड़ महाराणा उदयसिंह जी की 453वीं पुण्यतिथि पर पढ़िए उनकी संक्षिप्त जीवनी"

1522 ई. :- महाराणा सांगा व रानी कर्णावती के पुत्र कुंवर उदयसिंह का जन्म

1528 ई. :- जब कुंवर उदयसिंह 6 वर्ष के थे, तब पिता महाराणा सांगा का देहांत हुआ

1534 ई. :- कुंवर उदयसिंह 12 वर्ष के थे, तब माता कर्णावती जी समेत हज़ारों क्षत्राणियों ने जौहर किया

1535 ई. :- दासीपुत्र बनवीर द्वारा महाराणा विक्रमादित्य की हत्या, बनवीर का चित्तौड़गढ़ पर कब्ज़ा व कुंवर उदयसिंह को मारने का प्रयास, महाबलिदानी माता पन्नाधाय द्वारा पुत्र चंदन का बलिदान करके कुंवर के प्राणों की रक्षा

1537 ई. :- कुंभलगढ़ दुर्ग में सामंतों द्वारा महाराणा उदयसिंह का राज्याभिषेक

1538-39 ई. :- महाराणा उदयसिंह व महारानी जयवंता बाई का विवाह

1540 ई. :- कुंवर प्रताप का जन्म, मावली के युद्ध में 20 वर्षीय महाराणा उदयसिंह द्वारा बनवीर के सेनापति कुंवरसिंह की पराजय, महाराणा की ताणा विजय, कूटनीति से बनवीर को चित्तौड़गढ़ के युद्ध में पराजित कर गढ़ पर अधिकार

1544 ई. :- अफगान बादशाह शेरशाह सूरी की चित्तौड़गढ़ पर चढ़ाई की ख़बर सुनकर महाराणा उदयसिंह ने कूटनीति से दुर्ग की चाबियां उसके पास जहाजपुर भिजवा दी, शेरशाह ने शम्स खां को फौज देकर चित्तौड़ भेजा। शम्स खां किले की तलहटी में फौज समेत रहने लगा, जिससे महाराणा के अधिकार सीमित हो गए।

1546 ई. :- महाराणा उदयसिंह द्वारा सही समय आने पर शम्स खां की फौज पर आक्रमण व विजय

1546 :- महाराणा उदयसिंह ने मीराबाई जी को चित्तौड़गढ़ लाने के लिए ब्राम्हणों को भेजा, पर मीराबाई जी नहीं आईं

1554 ई. :- महाराणा उदयसिंह ने बूंदी के शासक राव सुल्तान हाड़ा को बर्खास्त कर राव सुर्जन हाड़ा को बूंदी की गद्दी पर आसीन किया

1555-57 ई. :- महाराणा उदयसिंह द्वारा कुंवर प्रताप को सेनापति बनाकर वागड़, छप्पन व गोडवाड़ के क्षेत्र विजित कर मेवाड़ में मिलाना

1557 ई. :- अफगान हाजी खां की वजह से मेवाड़ महाराणा उदयसिंह व मारवाड़ नरेश राव मालदेव के बीच युद्ध। इस लड़ाई में महाराणा के ललाट पर तीर लगा।

1559 ई. :- अकबर की ग्वालियर विजय। महाराणा उदयसिंह द्वारा अकबर के शत्रु राजा रामशाह तोमर को चित्तौड़ दुर्ग में शरण देना व अपनी पुत्री का विवाह कुंवर शालिवाहन तोमर से करवाना। इसी वर्ष महाराणा द्वारा विश्व के सबसे खूबसूरत शहरों में से एक 'उदयपुर' की स्थापना की गई। महाराणा द्वारा नौचोक्या महल, नेका की चौपाड़, जनाना रावला, राज आंगन, मोती महल, उदयसागर झील का निर्माण।

1560 ई. :- बैरम खां व अकबर के बीच हुए तिलवाड़ा युद्ध से पूर्व बैरम खां द्वारा महाराणा उदयसिंह से फौजी सहायता की मांग व महाराणा द्वारा फौज देने से इनकार।

1561 ई. :- अकबर की मालवा विजय। अकबर के शत्रु मालवा के बाज बहादुर को महाराणा उदयसिंह ने शरण दी।

1562 ई. :- अकबर की मेड़ता विजय। महाराणा उदयसिंह द्वारा अकबर के शत्रु वीर जयमल जी को मेवाड़ में बदनोर की जागीर देना। इसी वर्ष सिरोही के मानसिंह जी देवड़ा ने मेवाड़ में शरण ली। इसी वर्ष महाराणा ने सादड़ी पर अधिकार किया। इन्हीं दिनों महाराणा उदयसिंह ने अकबर के अफगान शत्रुओं को मेवाड़ में शरण देकर मेवाड़ की फौज में भर्ती किया।

1563 ई. :- महाराणा उदयसिंह की भोमट के राठौड़ों पर विजय

1565 ई. :- महाराणा उदयसिंह द्वारा उदयसागर झील की प्रतिष्ठा

1567 ई. :- अकबर द्वारा चित्तौड़गढ़ पर आक्रमण, महाराणा उदयसिंह सामंतों की सलाह पर राजपरिवार सहित राजपीपला चले गए, दुर्ग में वीर पत्ताजी व जयमलजी के नेतृत्व में केसरिया, रानी फूल कंवर जी के नेतृत्व में जौहर, अकबर द्वारा 30000 नागरिकों का कत्लेआम। अकबर के 30000 सिपाहियों की मृत्यु।

1568 ई. :- बाज बहादुर की मांग को लेकर अकबर ने उदयपुर पर कुछ सैनिक टुकड़ियां भेजीं, छुटपुट लड़ाइयां भी हुईं, फिर भी महाराणा ने बाज बहादुर को अकबर के हवाले नहीं किया।

1570 ई. :- महाराणा उदयसिंह द्वारा कुंभलगढ़ में नई फौज तैयार करके गोगुन्दा पधारना व गोगुन्दा को मेवाड़ की राजधानी घोषित करना। इसी वर्ष अकबर का नागौर दरबार हुआ, जिसमें महाराणा उदयसिंह ने जाने से इनकार किया।

1571 ई. :- अकबर द्वारा राजा भारमल के ज़रिए महाराणा उदयसिंह को संधि प्रस्ताव भिजवाना व महाराणा द्वारा अधीनता स्वीकार करने से इनकार।

28 फरवरी, 1572 ई. :- होली के दिन महाराणा उदयसिंह जी का देहांत

मेवाड़ महाराणा उदयसिंह जी को शत शत नमन

राजपूत समाज का वो लड़का जिसने छोटी सी उम्र में बहुत बड़ा नाम कमाया है और समाज को अपनी आवाज के जरिए एक नई पहचान दी है हमारे...
23/01/2025

राजपूत समाज का वो लड़का जिसने छोटी सी उम्र में बहुत बड़ा नाम कमाया है और समाज को अपनी आवाज के जरिए एक नई पहचान दी है हमारे समाज के युवाओ को एक करने में सबसे महत्वपूर्ण योगदान है और जिसकी वजह से आज हमारे युवा वर्ग के भाई यूट्यूब पर समाज के लिए गाने बना कर समाज को एक नई पहचान दे रहे है।

#राम_मंदिर और #मनौना_धाम

साथ ही आप सभी की जानकारी के लिए बता दे की हमारे भाई ने अपने जिले बुलंदशहर से अयोध्या तक पैदल यात्रा की है साथ ही अपने गांव से मनौना धाम तक पैदल यात्रा की इसी के साथ वह समाज के पहले ऐसे कलाकार बन गए है जिन्होंने ये कदम उठाया है तो आप सभी अपना भरपूर प्यार अपने भाई को देते रहे

हमारे समाज का पहला ऐसा राजपूती गायक जिसने समाज को सबसे ज्यादा हिट गाने दिए है और समाज को एक नए शिखर पर अपने गानों के जरिये पहुंचाया है।

एक छोटे से गरीब परिवार में जन्मा ये लड़का समाज के लिए एक उभरता हुआ सितारा है जो कि गाने के साथ साथ अपने समाज के हर कार्य मे बढ़ चढ़ कर हिस्सा लेता है समाज का पहला ऐसा गायक जो समाज के हर मुद्दे पे आवाज उठाता है आज हमारे समाज मे जितने भी समाज के गायक है उन सभी मे एक उमंग जो आज देखने को मिलती है वो हमारे इस सितारे की ही देन है वरना आज से पहले इतने ज्यादा राजपूती गाने नही आते थे जबसे हमारे इस सितारे ने समाज को जगाने का कार्य अपने गानों के जरिये युवाओ तक इतिहास पहुंचाने में जो दिन रात मेहनत की है वो काबिले तारीफ है। 😊

अब आपने ये सब तो पढ़ ही लिया होगा वैसे हमने कहि नाम नही लिया है फिर भी फ़ोटो से आप अपने इस सितारे को तो पहचान ही गए होंगे 🤗

तो हम बात कर रहे है अपने समाज के सितारे भाई DK Thakur की 🔥

और एक खास बात आज जन्मदिवस है आज ही गाना आना है और आज ही समाज के मुद्दों के चलते कोर्ट भी जाना है क्योंकि तारीख भी आज ही है 🥹

जन्मदिवस की बधाइयाँ देने से पहले बहुत बहुत धन्यावाद करना चाहेंगे हम अपने इस सितारे का जिसने समाज के लिए इतना बड़ा योगदान दिया और इतना संघर्ष किया ❣️🙏✊

आज आप सभी से विनम्र निवेदन करना चाहेंगे अपने इस सितारे का सभी भाई बहन साथ दे और उनका होंसला बढ़ाये ताकि आने वाले समय मे हमारा ये सितारा हमेशा समाज में ऐसे ही चमकता रहे और समाज का नाम रोशन करे

जन्मदिवस की ढेर सारी शुभकामनाएं एवं बधाई
💐💐

महाकुंभ द्वार से हटा दी गई महादानी हर्षवर्धन की प्रतिमाठाकुर अमरपाल सिंह प्रयागराज। महाकुंभ में साधु-संतों को सारा खजाना...
31/12/2024

महाकुंभ द्वार से हटा दी गई महादानी हर्षवर्धन की प्रतिमा

ठाकुर अमरपाल सिंह

प्रयागराज। महाकुंभ में साधु-

संतों को सारा खजाना दान करने वाले सम्राट हर्षवर्धन की दो दशक पुरानी प्रतिमा बृहस्पतिवार को कुंभ मेला क्षेत्र से बाहर कर दी गई। मेला प्रशासन के निर्देश पर आधी रात को लोक निर्माण विभाग ने अलोपीबाग तिराहे पर लगी उनकी प्रतिमा करीब 500 मीटर दूर सीएमपी डॉट पुल चौराहे पर स्थापित करा दी।

उत्तर भारत के अधिकांश हिस्सों पर 606 से 647 ईस्वी तक शासन करते हुए कन्नौज के चक्रवर्ती सम्राह हर्षवर्धन ने ही महाकुंभ की सांस्कृतिक महिमा को लोकप्रिय बनाया था। सम्राट हर्षवर्धन हर कुंभ में पूरे लाव-

सीएमपी डॉट पुल चौराहे पर स्थापित की जा रही हर्षवर्धन की प्रतिमा। अमर उजाला

दो दशक पुरानी प्रतिमा सीएमपी डॉट पुल चौराहे पर रातोंरात की शिफ्ट

Dr Raj Shekhawat
Mahipal Singh Makrana
Jeevan singh sherpur
वीरू सिंह
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