25/08/2023
बागेश्वर उपचुनाव सिर्फ विधानसभा बागेश्वर की लड़ाई नही है। ये सीधे आर पार की लड़ाई है वर्तमान उत्तराखंड राज्य सरकार से -
(1) ये लड़ाई है बागेश्वर के गरुड़ तहसील के चौरसों गाँव मे 70 वर्षीय SC महिला के बलात्कारी से, जो अभी तक फरार है, और क्षेत्रीय नेताओं द्वारा इसे दबाए जाने की कोशिश जारी है।
(2) एग्जाम में 13 नंबर वालों को पहल और 60 वाले पीछे करने वाली प्रक्रियाओं से।
(3) भर्ती घोटालों से थके हुवे बेरोजगार युवाओं के न्याय के लिए।
(4) जबरदस्ती थोपे गए प्राधिकरण के कारण आत्महत्या करने वाले बागेश्वर वासियों की आत्मा शांति के लिए।
(5) विधानसभा चुनाव 2022 में झूठा नारा " मूल निवास " भू कानून लागू करने वालों से।
(6) महंगाई, बेरोजगारी, आय साधनों को समाप्त करने वालों से।
(7) अंकिता भण्डारी हत्या के दोषी पुलकित आर्य और BJP के VIP नेता से। जगदीश राम के हत्यारों से।
(8) ये लड़ाई है उन विभिन्न गांवों की, जो आज तक सड़क व्यवस्था से नही जुड़े है।
(9) ये लड़ाई है उन किसानों की, आपदा ग्रसित लोगों की , जिनकी फसल/जमीन कटी है पर मुआवज़े को अदद मोहताज है।
(10) गरुड़ की थकी हुवी जनता जो वर्षों से सब - रजिस्ट्रार कार्यालय खुलने के इंतजार में है।
(11) ये लड़ाई है बैजनाथ- बागेश्वर में बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्थाओं के लिए।
(12) ये लड़ाई है "हर घर जल" के नाम पर लोगों को ठगने वाली प्रक्रियाओं से।
(13) ये लड़ाई है आपसी मतभेद फैलाने वालों से।
(14) ये लड़ाई है नदी - नालों में बेख़ौफ़ जे सी बी मशीन घुसा देने वाले व्यक्तियों से जो सरकार का आशीर्वाद पाए है।
(15) ये लड़ाई है गरुड़ नगर पंचायत का अव्यवस्थाओं से मख़ौल उड़ाने वाली सरकार से।
(16) सरकारी तंत्र का दुरुपयोग एवं सरकारी कर्मचारियों पर दबाब डालने वाली प्रक्रियाओं से।
ये लड़ाई कोई व्यक्तिगत लड़ाई नही है, हम सभी बागेश्वर वासियों को तय करना है क्या उपरोक्त लड़ाई सही है या नही????