07/09/2022
श्री बदरीनाथ धाम से आप सभी भक्तों को वामन द्वादशी महोत्सव व माता मूर्ति मेला की हार्दिक शुभकामनाएं।
आज श्री बदरीनाथ धाम वामन द्वादशी पर्व के शुभ मुहूर्त पर माता मूर्ति उत्सव का आयोजन किया गया ।।
आज भगवान का महाभिषेक और दोपहर का राजभोग अपनी माता के साथ माणा स्तिथ माता मूर्ति मंदिर में हुआ।। जिस कारण आज श्री बदरीनाथ धाम जी का दिव्य मंदिर सुबह 10:00 बजे से दोपहर 3:00 बजे तक कपाट बंद रहे।।।
यह उत्सव हर वर्ष भव्य रूप में मनाया जाता है
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श्री बदरीनाथ धाम में पौराणिक परंपरा व धार्मिक परंपराओं का निर्वहन आज भी होता है ।।
👉आज इस धार्मिक आयोजन के बाद मुख्य पुजारी अलकनंदा नदी पार कर देव दर्शनी तक आ जा सकते हैं।
श्री बदरीनाथ धाम हिंदुओ की आस्था का सर्वोच्च धाम है। इसे बैकुंठ धाम के नाम से भी जाना जाता है। जगतगुरू आदिशंकराचार्य जी ने इसकी पुनः स्थापना की थी।
इस दिव्य मंदिर के मुख्य पुजारी रावल जी कुछ पौराणिक परम्पराओं से बंधे हैं।
परंपराओं के अनुसार कपाट खुलने के दिन से रावलजी रोजाना सुबह तप्त कुंड में स्नान करने के बाद सीधे मंदिर में पूजा अर्चना के लिए जाएंगे। इस दौरान उनके साथ दो स्वसंसेवक उनके आगे सोने की छड़ी लेकर चलेंगे। इस दौरान रावल को कोई भी श्रद्धालु स्पर्श नहीं कर सकता। प्रत्येक दिन रावल सुबह से शाम तक चार बार रावल कुंड में स्नान करने के बाद मंदिर में प्रवेश कर पूजा अर्चना करते हैं। धार्मिक नियमों के अनुसार बावन द्वादशी पर्व पर माता मूर्ति मेले में ही रावल पहली बार श्री बदरीनाथ धाम के पंचशिला, पंचकुंड क्षेत्र से बाहर निकलते हैं।