13/03/2024
#कड़वा पर #सत्य
ाख खर्च कर के एडमिशन लिया ाल में 48 पेपर पास किया और लगभग ्रोजेक्ट #मिनी_प्रोजक्ट ्रेनिग ना जाने क्या क्या किया??
उसके बाद जा के इंजीनियरिंग की डिग्री मिली।
जब नौकरी करने पहुंचता है तो 8000 प्रति महिना से शुरू होकर 12000 प्रति महिना में लगभग 90% लड़के अपने कैरियर की शुरुवात नोएडा ,दिल्ली, गुड़गांव , पुणे आदि जगह करते हैं।
महंगाई चरम पर होती है, पद इंजीनियर का होता है, घर वालों, रिस्तेदारो को बड़ी बड़ी आशा होती है। घर मोहल्ले गांव के दोस्त सोचते हैं भाई दिल्ली नोएडा में कमा रहा है ऐश कर रहा है। मां बाप सोचते हैं, लड़के की शादी कर दी जाए , तो जिम्मेदार हो जायेगा, पैसा बचाना सीखेगा। उसका एजुकेशन लोन भर जाएगा । घर पर खर्च भेजेगा, जैसे और लड़के भेजते हैं।इतना प्रेशर उन लड़कों पे पड़ता है कि बेचारे फस्टेट होकर ये सोचते हैं कि भाड़ में इतने पेपर देकर पहले अच्छा कॉलेज निकाला, उसके बाद मेहनत कर अच्छे मार्क्स लाए। सरकारी नौकरी तो निकल नहीं रही। हमसे कम नंबर वाला जुगाड़ से अच्छी प्राइवेट नौकरी पा लिया हम मध्यम वर्गीय परिवार के अपने घर के पहले इंजीनियर हम साला 8000 की नौकरी कर रहे । अशाये सबको बड़ी बड़ी हैं, छोड़ो ये सब चलो , दारू पिए सिगरेट पिए और अपनी कुंठा को शांत करे। नशे का केंद्र बना हुआ है नोएडा दिल्ली पुणे आदि शहर। जो ऐसे बेरोजगार समान कम तनख्वाह वाले इंजीनियरों से भरा पड़ा है।
कोई सरकार इनके बारे में नहीं सोचती, प्राइवेट कंपनियां इनका खून चूसती हैं।
कुछ बेचारे बीएड बीटीसी कर मास्टर हो जाते , कुछ बैंकों में मैनेजर और कुछ ................
#उत्तर_प्रदेश और #बिहार में लगभग हर गांवो में एक ना एक इंजीनियरिंग किया बेरोजगार मिल जायेगा। कभी उनके बारे में भी सोचिए , आपका एक एक वोट देश को किस दिशा में ले जा रहा है। सरकारी कर्मचारियों का न्यूनतम वेतन फिक्स है ,क्या इन प्राइवेट इंजीनिरिंग कालेजों की जिम्मेदारी नहीं की अच्छे वेतन वाली कंपनियों को बुलाएं और क्या सरकार लाखों करोड़ो कमाने वाली कंपनियों को स्किल्ड वर्क करने वाले लोगों के न्यूनतम वेतन प्रणाली लागू करने को नही कह सकती??
#विचारियेगा जब तक पड़ा लिखा देश चलाने वाला नहीं होगा, आम और मध्यम वर्गीय लोगों का कल्याण संभव नहीं है।
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