I Love Azamgarh

I Love Azamgarh The district is named after its headquarters town, Azamgarh, which was founded in 1665 by Azam, son

DM Azamgarh श्री Ravindra Kumar IAS जी,89 किलोमीटर लंबी तमसा नदी को पुनर्जीवित करना ऐतिहासिक कार्य है आपके विजन, मेहनत औ...
27/03/2026

DM Azamgarh श्री Ravindra Kumar IAS जी,
89 किलोमीटर लंबी तमसा नदी को पुनर्जीवित करना ऐतिहासिक कार्य है आपके विजन, मेहनत और प्रशासनिक क्षमता ने असंभव को संभव कर दिखाया।
की जनता आपकी आभारी है 💐💐
Narendra Modi MYogiAdityanath Chief Minister Office Uttar Pradesh

Sometimes greatness arrives late, but shines the brightest. ❤️🥹From debuting at 30 to lifting trophies at 35 — Suryakuma...
10/03/2026

Sometimes greatness arrives late, but shines the brightest. ❤️🥹

From debuting at 30 to lifting trophies at 35 — Suryakumar Yadav’s journey is a story of pure perseverance. 🏆🇮🇳

08/03/2026
भारत बना टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन।न्यूज़ीलैंड को धूल चटाकरटीम इंडिया ने रच दिया इतिहास।मैदान में जोश,स्टेडियम में तिरंगे क...
08/03/2026

भारत बना टी20 वर्ल्ड कप चैंपियन।

न्यूज़ीलैंड को धूल चटाकर
टीम इंडिया ने रच दिया इतिहास।

मैदान में जोश,
स्टेडियम में तिरंगे की लहर…
और हर भारतीय के दिल में गर्व।

यह सिर्फ जीत नहीं,
140 करोड़ भारतीयों की भावना है।

भारत माता की जय। 🇮🇳🏆

“Eyes, chico… eyes never lie.”These haunting expressions alone are enough to show why he’s already being hailed as one o...
08/03/2026

“Eyes, chico… eyes never lie.”
These haunting expressions alone are enough to show why he’s already being hailed as one of the greatest actors in Indian cinema. 🎬👀

07/03/2026

सोन नदी के पानी हिलोर मारे
प्रीत मनवा म हमरे जोर मारे

चंदन! चंदन! चंदन!

ओह चंदन! तुम भले ही किसी उपन्यास के पात्र हो, लेकिन तुम्हारी रचना कहीं-न-कहीं से प्रेरित होकर ही की गई है। इस दुनियावी वन में तुम्हारे जैसे न जाने कितने ही चंदन और भी तो हैं, जो एक सुख की तलाश में भटक रहे हैं। लेकिन...?

मैंने जब तुम्हारी कहानी पढ़ी, तो हँसना तो खैर क्या ही आएगा, मैं तो रो भी नहीं सकी। इतनी सुन्न हो गई। तुम्हारे जैसा जीवन जिसे मिले, उसके पास विक्षिप्त होने के अलावा और बचता भी भला क्या है? लेकिन तुम? कभी-कभी सोचती हूँ कि इस तरह के जीवन के लिए विधाता जिन नायकों को चुनता है, क्यों चुनता है? क्या प्रयोजन? किस अभिप्राय से? क्या सिर्फ दूसरों की कहानी पूरी करने के लिए? क्योंकि अपनी तो कोई कहानी नहीं होती।

गुंजा ने कहा था न! तुमसे "सिर्फ डेढ़ पूरी खाई, यही मरद बनते हो?" चंदन! तुम अपने जीवन में इतने हार गये, लेकिन अपने गमों से बचने के लिए तुमने शराब का सहारा नहीं लिया। जो मुझे गुंजा मिलती, तो मैं कहती "ऐसे मरद बनते हैं।" पर अब गुंजा भी कहाँ मिलेगी। जीवन से हारे हुए लोगों के लिए तुम प्रेरणा हो चंदन!

तुमने अपने खिलंदड़पन को त्याग कर भले ही चुप्पी साध ली हो, लेकिन मैंने, मैंने तुम्हारी मौन की भाषा सुन ली चंदन!

*****

जब कभी जी में ये इच्छा उठी कि हर वह सुख हम भी पा लें, जो दुनिया जग में सबको मिला है। बूढ़े बरगद, दीपासत्ती से हमने भी एक सुख माँग लिया। सुख क्या माँगा, जैसे बिपत ही माँग ली। तब हमने जाना कि, अपने लिए कभी सुख नहीं माँगना चाहिए। नहीं तो एक फूल देकर विधाता हजारों नागफनी भी दे देते हैं। ऐसे नागफनियों से भरी राह में चलना, चाहे जितना दूभर हो लेकिन चलना तो पड़ता है। काहे कि सबका अपना-अपना भाग होता है। मानुस! घर-दुआर बाँट सकता है, साज-सामान बाँट सकता है, माल-गोरू बाँट सकता है लेकिन भाग? भाग नहीं बाँट सकता।

भाग इतना जोरावर होता है कि, हम उसके आगे सिर्फ मूड़ी निहुरा सकते हैं। लड़ नहीं सकते, जीत नहीं सकते। जानते हैं क्यों? क्योंकि हमने अपने या अपनों के दुखों में जब-जब ईसर से सहायता माँगी, वो सुना ही नहीं। हमें लगा हमारी आवाज उस तक पहुँची ही नहीं, तो हम जरा और दम से उसको पुकारने लगे। उसने फिर भी नहीं सुना। हमने अपनी हथेलियां आपस में कस लीं, आँखें मींच लीं, जबड़े भींच लिये और पांव जमीन पर मजबूती से गाड़ दिये। और आवाज मुँह से नहीं, आत्मा से निकाली कि सायद इतना बल लगाकर बुलाने से ईसर सुन लेंगे, लेकिन नहीं सुनें। हम हार गये। अब इससे बढ़कर आखिर हम कर भी क्या सकते थे? सिवा एक जुगत के, कि अब हम ईसर के आगे अपना सर पटकें। एक नहीं, कई-कई बार पटकें। तब सायद उन तक हमारी आवाज पहुंचे। हमने वह भी कर लिया। और पता है? ईसर तब भी नहीं सुना। अब बताओ हमारे पास क्या चारा बचा? भाग की इस मार से बचने का? सिवा इसके, कि बाघ रूपी भाग के आगे हम किसी हिरन के बच्चे की तरह नतमस्तक हो आत्म समर्पण कर दें और मिमियाएं भी न! हमने वही किया।

आखिर हमारा दोष क्या था? बस इतना, कि हमने भी प्रेम चाह लिया था। अब भला हमें क्या मालूम था, कि प्रेम हमारे लिए पांडु की तरह सापित है। नहीं तो हम ऐसी भूल कभी न करते। भला हम क्या जानें कि जो प्रेम सबके जीवन में बिखरा-बिखरा घूम रहा है, उस प्रेम की एक बूँद जो हमें मिल जाएगी तो, कपार पर आसमान ही गिर पड़ेगा, धरती ही फट जाएगी। एक प्रेम ही तो चाहा था, कुबेर का खजाना थोड़ी माँग लिये थे, इंदर का सिंघासन थोड़ी छीन लिए थे। जिस प्रेम को सारे जग ने पाया, उसे बस! हमने नहीं। जिस प्रेम पर जोर सारे जग का है, एक बस! हमारा नहीं। जिस प्रेम ने सारी दुनिया को अपनाया, बस! हमें नहीं

अब दिन आते हैं जाते हैं, साल आते हैं जाते हैं। हम न उन्हें जीते हैं, न याद रखते हैं। कि गुजरे समय ने हमें क्या दिया? क्या लिया? उमिर गुजर रही है, कैसे गुजर रही है? कैसे भी गुजरे, हमें फरक नहीं पड़ता। हमारे लिए मरना और जीना अब एक समान है। अब सिर्फ जरूरतें रह गई हैं, सौक मर गये हैं। रिस्ते रह गये हैं, मन मर गया है। मकान रह गया है, घर मर गया है। साँस रह गई है और शरीर... वह भी तो मर सा गया है।

पाने को तो हम अभी भी क्या-कुछ नहीं पा सकते? लेकिन, अब वो मन नहीं रहा। मन! हाँ! हमारा मन कहीं बिला गया है। जामुन की परती में बौराता हुआ मन, सोना में डोंगी चलाता हुआ मन, भौजाई से चुहल करता हुआ मन, फगुआ में अबरख उड़ाता हुआ मन, गाँव में जोगीरा गाता हुआ मन अब कभी नहीं मिलेगा, कहीं नहीं मिलेगा। हम फूस की पलानी में चुप बैठ अपने अतीत और भबिस के वीभत्स चित्र देखते रहते हैं, उनसे लड़ते, संघर्ष करते रहते हैं। हमारा तो जनम ही संघर्ष के लिए हुआ है। हमारे शांत चेहरे में छुपा एक बिकराल ज्वार है। किसको दिखायें? किसको पतियाएं? हमारा है कौन? कभी-कभी सोचते हैं, तो पाते हैं कि वह चंदन कोई और था, किसी और जनम का।

हमारे कानों में जोर-जोर से आवाजें गूँजती हैं। भौजी की, भइया के आदेश की और काका की "चंदन भूजा या रस मिलेगा क्या?" और जब आँखें खोलता हूँ, तो जैसे किसी जंगली मंदिर के वीराने में एक मूरत चुपचाप पड़ी रहती है, खुद को अपने घर में वैसे ही पाता हूँ।

हमारा क्या है? हम इस काया में जोत दिये गये हैं भाग की जी हजूरी करने के लिए, कर रहे हैं। जिस दिन ये हल उतरेगा, हम चले जायेंगे। तब तक के लिए हम खंड के निखहरे बँसखट में पड़े अपने घर के भाँय-भाँय का सोर सुन रहे हैं। अँजोर तिवारी के घर आकर भी हमारी जिनगी में कोई अँजोर न हुआ।

सच ही तो है - "चिठिया हो तो हर कोई बाँचे, भाग न बाँचे कोय, करमवा बैरी हो गये हमार।"

~डॉली परिहार 🙏🌻
#सृजन_फिर_से

* #आजमगढ़ के भाई-बहन ने  #यूपीएससी में हासिल की शानदार सफलता*आजमगढ़,।  #बिलरियागंज के शांतिपुर निवासी भाई-बहन आदित्य हृद...
07/03/2026

* #आजमगढ़ के भाई-बहन ने #यूपीएससी में हासिल की शानदार सफलता*

आजमगढ़,। #बिलरियागंज के शांतिपुर निवासी भाई-बहन आदित्य हृदय उपाध्याय और आयुषी उपाध्याय ने यूपीएससी की परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर जिले का नाम गौरवांवित किया है। आदित्य हृदय उपाध्याय ने #154वीं रैंक हासिल की है, जबकि आयुषी उपाध्याय ने 361वीं रैंक प्राप्त की है।

आदित्य हृदय उपाध्याय #रुड़की से बीटेक में गोल्ड मेडलिस्ट हैं और पहले ही यूपीएससी परीक्षा में चयनित होकर आईआरएस (असिस्टेंट कमिश्नर इनकम टैक्स) के पद पर कार्यरत हैं। आयुषी उपाध्याय ने नेशनल लॉ कॉलेज से ग्रेजुएशन में गोल्ड मेडल हासिल किया है और दूसरे प्रयास में शानदार सफलता प्राप्त की है।

दोनों भाई-बहन की इस उपलब्धि से गांव में हर्ष का माहौल है। उनके माता-पिता अधिवक्ता सूर्यप्रकाश उपाध्याय और शिक्षिका प्रतिभा उपाध्याय ने दोनों को बधाई दी है।

स्वीडन की एक न्यूज़ मैगज़ीन ने लिखा है....F16 के जमीदोज होते ही अमेरिका को पता चल गया था। भारत पर इसके इस्तेमाल से अमेरि...
07/03/2026

स्वीडन की एक न्यूज़ मैगज़ीन ने लिखा है....
F16 के जमीदोज होते ही अमेरिका को पता चल गया था। भारत पर इसके इस्तेमाल से अमेरिका गुस्से में था?।
.पर उस समय ये भी जरुरी था कि पाक को भारत के गुस्से से बचाना। क्योकि भारत का एक पायलट पाक कब्जे में जाते ही भारत ने बड़ी कार्यवाई के लिये ब्रम्होस मिसाइलें तैयार कर ली थी..।?
.प्लान यही था कि पाकिस्तान एयर फोर्स को रात में ही तहस नहस कर दिया जाये। जिसकी भनक अमेरिका को लग गयी .।
.अमेरिका ने तुरन्त पाकिस्तान को चेता दिया कि कब्जे में रखे भारत के पायलट को कोई नुक्सान नहीं होना चाहिये, नहीं तो भारत को रोकना नामुमकिन होगा, और चेताया कि युद्घ की स्थिति में वो F16 के इंजन को लॉक कर देगा..।
.भारत की सम्भावित कठोर कार्यवाई से घबराये खुद बाजवा ने UAE से बात की ,और उधर अमेरिका ने अरब और रूस से बात की..।
.अरब ने भारत से एक रात रुकने की सलाह दी.।
अरब ने करीब दोपहर में ही पीएमओ नयी दिल्ली से सम्पर्क साध लिया था और पाक को फटकार लगायी..।

रूस, अमेरिका ने पाक को समझा दिया की कल सुबह तक हर हाल में इंडियन पायलट को छोड़ने की घोषणा करे, वो भी बिना शर्त।

यही नहीं, पाक ने चीन से भारत के आसमान पर निगरानी कर रहे उपग्रह से डायरेक्ट लिंक मांगा, जिसे चीन ने मना कर दिया।

अन्त में पाक ने टर्की से मदद मांगी।
उसने फ़ौरन ही मना कर दिया पायलट को छोडने को कहा। इधर भारत क्या कर सकता है, इसकी जानकारी के लिये पूरे विश्व के बड़े देशो के उपग्रह भारत पर नजर रख रहे थे।

24 फरवरी से लेकर 28 फरवरी तक रात में, पाक के बड़े फौजी अधिकारी घर में बने बन्करों में रहते थे।

पाक बिलकुल असहाय था,

ऐसा इसलिए था क्योंकि देश का बागडोर किसी जेलेंस्की जैसे पप्पू के हाथों में नहीं बल्कि एक मजबूत हाथ में था।

अभिनंदन...

1:~लंका में राम जी = 111 दिन रहे।2:~लंका में सीताजी = 435 दिन रहीं।3:~मानस में श्लोक संख्या = 27 है।4:~मानस में चोपाई सं...
04/03/2026

1:~लंका में राम जी = 111 दिन रहे।
2:~लंका में सीताजी = 435 दिन रहीं।
3:~मानस में श्लोक संख्या = 27 है।
4:~मानस में चोपाई संख्या = 4608 है।
5:~मानस में दोहा संख्या = 1074 है।
6:~मानस में सोरठा संख्या = 207 है।
7:~मानस में छन्द संख्या = 86 है।

8:~सुग्रीव में बल था = 10000 हाथियों का।
9:~सीता रानी बनीं = 33वर्ष की उम्र में।
10:~मानस रचना के समय तुलसीदास की उम्र = 77 वर्ष थी।
11:~पुष्पक विमान की चाल = 400 मील/घण्टा थी।
12:~रामादल व रावण दल का युद्ध = 87 दिन चला।
13:~राम रावण युद्ध = 32 दिन चला।
14:~सेतु निर्माण = 5 दिन में हुआ।

15:~नलनील के पिता = विश्वकर्मा जी हैं।
16:~त्रिजटा के पिता = विभीषण हैं।

17:~विश्वामित्र राम को ले गए =10 दिन के लिए।
18:~राम ने रावण को सबसे पहले मारा था = 6 वर्ष की उम्र में।
19:~रावण को जिन्दा किया = सुखेन बेद ने नाभि में अमृत रखकर।

श्री राम के दादा परदादा का नाम क्या था?
नहीं तो जानिये-
1 - ब्रह्मा जी से मरीचि हुए,
2 - मरीचि के पुत्र कश्यप हुए,
3 - कश्यप के पुत्र विवस्वान थे,
4 - विवस्वान के वैवस्वत मनु हुए.वैवस्वत मनु के समय जल प्रलय हुआ था,
5 - वैवस्वतमनु के दस पुत्रों में से एक का नाम इक्ष्वाकु था, इक्ष्वाकु ने अयोध्या को अपनी राजधानी बनाया और इस प्रकार इक्ष्वाकु कुलकी स्थापना की |
6 - इक्ष्वाकु के पुत्र कुक्षि हुए,
7 - कुक्षि के पुत्र का नाम विकुक्षि था,
8 - विकुक्षि के पुत्र बाण हुए,
9 - बाण के पुत्र अनरण्य हुए,
10- अनरण्य से पृथु हुए,
11- पृथु से त्रिशंकु का जन्म हुआ,
12- त्रिशंकु के पुत्र धुंधुमार हुए,
13- धुन्धुमार के पुत्र का नाम युवनाश्व था,
14- युवनाश्व के पुत्र मान्धाता हुए,
15- मान्धाता से सुसन्धि का जन्म हुआ,
16- सुसन्धि के दो पुत्र हुए- ध्रुवसन्धि एवं प्रसेनजित,
17- ध्रुवसन्धि के पुत्र भरत हुए,
18- भरत के पुत्र असित हुए,
19- असित के पुत्र सगर हुए,
20- सगर के पुत्र का नाम असमंज था,
21- असमंज के पुत्र अंशुमान हुए,
22- अंशुमान के पुत्र दिलीप हुए,
23- दिलीप के पुत्र भगीरथ हुए, भागीरथ ने ही गंगा को पृथ्वी पर उतारा था.भागीरथ के पुत्र ककुत्स्थ थे |
24- ककुत्स्थ के पुत्र रघु हुए, रघु के अत्यंत तेजस्वी और पराक्रमी नरेश होने के कारण उनके बाद इस वंश का नाम रघुवंश हो गया, तब से श्री राम के कुल को रघु कुल भी कहा जाता है |
25- रघु के पुत्र प्रवृद्ध हुए,
26- प्रवृद्ध के पुत्र शंखण थे,
27- शंखण के पुत्र सुदर्शन हुए,
28- सुदर्शन के पुत्र का नाम अग्निवर्ण था,
29- अग्निवर्ण के पुत्र शीघ्रग हुए,
30- शीघ्रग के पुत्र मरु हुए,
31- मरु के पुत्र प्रशुश्रुक थे,
32- प्रशुश्रुक के पुत्र अम्बरीष हुए,
33- अम्बरीष के पुत्र का नाम नहुष था,
34- नहुष के पुत्र ययाति हुए,
35- ययाति के पुत्र नाभाग हुए,
36- नाभाग के पुत्र का नाम अज था,
37- अज के पुत्र दशरथ हुए,
38- दशरथ के चार पुत्र राम, भरत, लक्ष्मण तथा शत्रुघ्न हुए |
इस प्रकार ब्रह्मा की उन्चालिसवी (39) पीढ़ी में श्रीराम का जन्म हुआ | शेयर करे ताकि हर हिंदू इस जानकारी को जाने...see more

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