14/08/2025
*मतलबी दुनिया*
मुझसे वही नाराज़ हैं,
जिनके मतलबी इरादों में
मैंने साथ नहीं दिया,
जिनके छल के रास्तों पर
मैंने पांव नहीं रखा।
मैंने सच को थामा,
तो उन्होंने रिश्ते छोड़ दिए,
मैंने ईमान बचाया,
तो उन्होंने अपने चेहरे मोड़ लिए।
मतलबी चाहतों की भीड़ में
मैं अकेला सही, पर साफ हूँ,
ज़मीर की कीमत पर
ना मैंने दोस्त खरीदे,
ना रिश्ते बेचे।
आज भी आईना देखता हूँ,
तो चेहरे पर कोई दाग़ नहीं,
बस मित्र थोड़े कम है पर
जो हैं उनके दिल में खोट नहीं।
#रिश्ते ी_दुनिया