Manght Giri

Manght Giri भारतीय ट्रेड यूनियन सीटू राज्य उपाध्यक्ष जयपुर राजस्थान

Centre of Indian Trade Unions (CITU)स्थापना दिवस — 30 मई 1970वर्गीय एकता और वर्ग संघर्ष के 56 वर्षों के स्वर्णिम इतिहास ...
21/05/2026

Centre of Indian Trade Unions (CITU)

स्थापना दिवस — 30 मई 1970

वर्गीय एकता और वर्ग संघर्ष के 56 वर्षों के स्वर्णिम इतिहास को मनाते हुए

30 मई को सीटू का लाल झंडा बुलंद करो!

मुख्य मांगें

1. चार लेबर कोड बिल / श्रम संहिताओं को खत्म करो।

2. न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह लागू करो।

3. ट्रेड यूनियनों पर हमले बंद करो।

4. ट्रेड यूनियन अधिकारों पर हमले बंद करो।
जिला स्तरीय, तहसील स्तरीय एवं कार्यस्थलों पर विरोध प्रदर्शन आयोजित करो।

दुनिया भर के मजदूरों — एक हो!

वर्ग संघर्ष को तेज करो!
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भारतीय ट्रेड यूनियन केन्द्र (सीटू)

राजस्थान राज्य कमेटी, जयपुर

18/05/2026

जब न्यायपालिका पर भी राजनीतिक छाया दिखने लगे,
तब लोकतंत्र सिर्फ कमजोर नहीं खतरनाक मोड़ पर होता है!
✅️लोकतंत्र की सबसे बड़ी ताकत क्या होती है?
न संसद…
न सरकार…
बल्कि एक स्वतंत्र और निष्पक्ष न्यायपालिका।
1.क्योंकि जब जनता की आवाज दबा दी जाती है,
2.जब मीडिया सत्ता के सामने झुकने लगे,
3.जब एजेंसियों पर सवाल उठने लगें,
तब आखिरी उम्मीद अदालत ही होती है।
लेकिन अगर न्यायपालिका पर भी राजनीतिक प्रभाव के आरोप लगने लगें,
तो यह सिर्फ एक संस्था का संकट नहीं,
पूरे लोकतंत्र की आत्मा पर खतरे की घंटी है।
पूर्व न्यायाधीशों द्वारा यह कहना कि
“न्यायपालिका में राजनीतिक झुकाव वाले लोगों की संख्या बढ़ रही है”
कोई साधारण बयान नहीं है।
यह उस चिंता का संकेत है
जिसे एक जागरूक समाज नजरअंदाज नहीं कर सकता।
✅️सवाल यह है कि
क्या न्याय अब सिर्फ संविधान से चलेगा
या सत्ता की सुविधा से भी प्रभावित होगा?
क्योंकि न्यायपालिका का काम सरकार को खुश करना नहीं,
संविधान की रक्षा करना होता है।
अगर जजों की नियुक्ति, फैसलों और संस्थाओं पर जनता का भरोसा कमजोर पड़ने लगे,
तो लोकतंत्र धीरे-धीरे “संवैधानिक ढांचे” से निकलकर
“प्रचार तंत्र” में बदलने लगता है।
सबसे बड़ा कटाक्ष यही है कि
सत्ता हर मंच से “लोकतंत्र की जननी” होने का दावा करती है,
लेकिन लोकतंत्र की असली संस्थाओं की स्वतंत्रता पर सवाल लगातार बढ़ रहे हैं।
इतिहास गवाह है—
तानाशाही हमेशा टैंकों से नहीं आती,
कभी-कभी वह संस्थाओं को धीरे-धीरे कमजोर करके भी आती है।
पहले मीडिया का डर खत्म होता है…
फिर विपक्ष को बदनाम किया जाता ह!
फिर जांच एजेंसियां सवालों में आती हैं!
और अंत में अगर न्यायपालिका भी दबाव महसूस करने लगे,
तो जनता के अधिकार सिर्फ किताबों में बच जाते हैं।
यही कारण है कि
एक स्वतंत्र न्यायपालिका किसी भी लोकतंत्र की रीढ़ होती है।
न्यायाधीश अगर सत्ता के करीब दिखने लगें,
तो आम नागरिक अदालत को “न्याय का मंदिर” नहीं,
“प्रभाव का केंद्र” समझने लगता है।
और यह स्थिति किसी भी लोकतंत्र के लिए बेहद खतरनाक होती है।
आज जरूरत किसी पार्टी का समर्थन या विरोध करने की नहीं,
बल्कि संविधान और संस्थाओं की स्वतंत्रता बचाने की है।
क्योंकि लोकतंत्र चुनाव से नहीं बचता,
लोकतंत्र बचता है—
स्वतंत्र न्यायपालिका से
निष्पक्ष संस्थाओं से
सवाल पूछती जनता से
और संविधान के प्रति ईमानदारी से
याद रखिए…
जब न्यायपालिका मजबूत होती है,
तब सबसे शक्तिशाली सरकार भी संविधान से ऊपर नहीं जा सकती।
लेकिन जिस दिन जनता अदालतों पर भरोसा खोने लगे,
उस दिन लोकतंत्र का सबसे बड़ा संकट शुरू हो जाता है।

18/05/2026
18/05/2026

विश्व व्यापार के दवाब में मोदी सरकार तीन कृषि कानून लेकर आई थी लाखों किसानों के संघर्ष ने उस वापिस लेने पर मजबूर किया लेकिन मोदी सरकार उसी दवाब के चलते एम एसपी समर्थन मूल्य पर खरीद को खत्म करने के लिए इस बार नये नये नियम लेकर आई है लेकिन किसान चुप्पी साधे हुए हैं श्री गंगानगर हनुमानगढ़ अन्न का कटोरा है यहां जितनी पैदावार होती है राजस्थान के दुसरे हिस्सो में इस इन दोनों जिलों से कम होती है यही हालात रहे तो आने वाली फसलें समर्थन मुल्य पर मोदी सरकार नहीं खरीदेंगी 80 करोड से उपर पाच किलो राशन पर आश्रित लोगों के हालात भी मोदी सरकार खराब करने कि पुरी तैयारी कर रही है एम एस पी खत्म किसान बाजार के हवाले किसान अपनी जमीने बेचेगा या धिरे धिरे बडी पूंजीपतियों को देंगे और मजदूर बनेंगे इसलिए श्रम कानूनों को खत्म कर चार लेबर कोड़ बिल लेकर आई है ताकि पूंजीपतियों को सस्ते गुलाम मिल सके।
मोदी सरकार पुरी तरह से सम्राज्यवादी नितीयो पर चल रही है और देश का प्रधानमंत्री झुठ छल कपट से सत्ता पर काबिज है।

आप पाच किलो राशन में खुश रहीए ।आप सोना मत खरीदो।आप तेल का तड़का मत लगाओ।आप हवाई जहाज कि यात्रा मत करो ।आप अच्छे कपड़े मत...
18/05/2026

आप पाच किलो राशन में खुश रहीए ।
आप सोना मत खरीदो।
आप तेल का तड़का मत लगाओ।
आप हवाई जहाज कि यात्रा मत करो ।
आप अच्छे कपड़े मत पहनो। पत्तो से शरीर ढकने कि आदत डालो।
तुम नक्सली आतंकवादी हो तुम अपनी सेलरी बढ़ाने की बात कर रहे हो आंदोलन कर रहे हो तुम न्यूनतम वेतन 30 हजार रुपए महीना मांग रहे हो।
तुम श्रम कानूनों की दुहाई दे रहे हों।
तुम गेंस गेस चिरल्ला रहे हो ।
हिन्दू खतरे में मुसलमानो से लड़ना है तुम को दलितों छोटी जाति वालो को यूजीसी वालों को सबक सिखाना है तुमको।
भाईयो बहनों हिन्दू राष्ट्र चाहिए या नहीं चाहिए।
तुमको इन सब में उलझा कर साहेब के 12 सालों के शासन में अपने पूंजीपति मित्रों अडानी अंबानी की संपत्ति 227% बढ़ा दी और अब तुम्हारा पाच किलो राशन भी खत्म करने की तैयारी चल रही है।
तुम्हारे सपनो को रोंधा जा रहा है तुम्हारे बच्चो के रोजगार खत्म कर दिए गए हैं और अडानी अंबानी जैसे पूंजीपतियों के लिए गुलाम बनाए जा रहे हैं।
और तुम मोदी मोदी चिरल्लाइए।
हरियाणा दिल्ली युपी राजस्थान के मजदूरों का आंदोलन इस बात को लेकर है कि एक तरफ पूंजीपतियों का मुनाफा आसमान छू रही रहा है और दुसरी और हमारी जिंदगी का गुजारा भी नहीं हो रहा है। इस बात को लेकर सड़कों पर उतरने पर भाजपा सरकार मजदूरों को आतंकवादी नक्सली वामपंथी नक्सलवाद घोषित कर एन एस ए लगा कर जैलो में डाल रही है क्यूंकि यह पूंजिपतियों की सरकार है जो तुम्हारी एकताबद्ध कतारों से तुम्हारे नारों से डरती है।

17/05/2026

डबल इंजन सरकार द्वारा मनरेगा को समाप्त करने के उद्वेश्य से कानून में संशोधन किया गया। Narendra Modi जी एवं Bhajanlal Sharma जी द्वारा बड़े जोर शोर से प्रचार किया गया कि अब सरकार काम 100दिन की बजाय 125, दिन मिलेगा । अप्रैल 2025 में जहां 216 लाख लेबर डेज सृजित हुए थे, वहीं अप्रैल 2026 में यह घटकर केवल 77 लाख रह जाना बेहद चिंताजनक और भाजपा सरकार की विफलता का प्रमाण है। राजस्थान के भरतपुर और बाड़मेर जैसे जिलों में सर्वाधिक 82% तक गिरावट ग्रामीण रोजगार पर सीधे हमले को दर्शाती है।
मनरेगा ग्रामीण गरीब, मजदूर, किसान और महिलाओं की जीवनरेखा है, लेकिन डबल इंजन सरकार रोजगार देने के बजाय योजनाओं को सीमित करने में लगी हुई है। गांवों में काम नहीं मिलने से मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो रहा है ।

बुढा नाला से आने वाला फेक्ट्रीयो का केमिकल युक्त पानी जान लेवा है हर घर नल जल मिशन भ्रष्टाचार की भेट चढने से जनता को स्व...
17/05/2026

बुढा नाला से आने वाला फेक्ट्रीयो का केमिकल युक्त पानी जान लेवा है हर घर नल जल मिशन भ्रष्टाचार की भेट चढने से जनता को स्वच्छ पेयजल नहीं मिल रहा है पानी में पोषक मिनरल्स की कमी होने से और प्रदुषित पानी से भयंकर बिमारीयो से जूझने को मजबुर है जनता वाक्टर वर्क्स से घरो में छोडे जाने वाले पानी की सेंपलीग जांच हो तो तथ्य उजागर हो । कम पानी पिना जनता के स्वास्थ्य के लिए ख़तरनाक साबित हो रहा है । प्रशासन पानी कि जांच करवाए और जनता के स्वास्थ्य के लिए स्वच्छ और मिनिरल्स युक्त पानी उपलब्ध करवाए।

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