Indian Student Socity

Indian Student Socity this is the page for all the student who believes in nationalism

http://hindutva.info/dhokebaaz-kejriwal/एक ऐसी ख़बर सामने आ रही है जो आपको बेहद नागवार गुज़रेगी जिसको पढ़कर आपका रोम रोम...
21/09/2016

http://hindutva.info/dhokebaaz-kejriwal/
एक ऐसी ख़बर सामने आ रही है जो आपको बेहद नागवार गुज़रेगी जिसको पढ़कर आपका रोम रोम जल उठेगा ।उरी अटैक में हमारे 18 वीर जवान शहीद हुए हैं और पूरे देश में ईस्को लेकर बेहद ग़ुस्से का माहौल है सारा देश पाक ....

आरा। सपने में भी नीतीश कुमार ने नहीं सोचा था कि उनकी इस तरह से छीछालेदर होगी। यही नहीं, सोशल मीडिया पर भी उनकी खूब खिंचा...
21/09/2016

आरा। सपने में भी नीतीश कुमार ने नहीं सोचा था कि उनकी इस तरह से छीछालेदर होगी। यही नहीं, सोशल मीडिया पर भी उनकी खूब खिंचाई हुई है। राजनीतिक दलों ने भी इसकी निंदा की है, हां इस मामले पर राजद ने चुप्पी साध रखी है।

दरअसल, उरी में शहीद हुए जवान अशोक कुमार की पत्नी को बिहार सरकार की ओर से पांच लाख की सहायता राशि देने की घोषणा नीतीश कुमार ने की थी। जिस पर शहीद की पत्नी ने कहा था- मेरा पति शराब पीकर या नाली में गिरकर नहीं मरा है। बिहार सरकार भिखारी है।

साथ ही उन्होंने चेक को लेने से भी इनकार कर दिया। इस बयान के बाद नीतीश कुमार ने मुआवजा की राशि बढ़ाई और 11 लाख कर दिया है। अभी तक इस पर शहीद की पत्नी की प्रतिक्रिया नहीं आई है। बाद में शहीद की पत्नी ने कहा कि हमारा मकसद किसी का दिल दुखाना नहीं है, लेकिन सोचना तो सबको चाहिए।

इसे भी पढ़ें: बिहार कैबिनेट: शहीदों के परिजनों को 11-11 लाख रुपये देगी सरकार

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के उरी में शहीद हुए 18 जवानों के लिए कई राज्य सरकारों ने मुआवजे का एलान किया है। इसी कड़ी में बिहार सरकार ने पांच लाख रुपए मुआवजे का ऐलान किया था। मुआवजे की राशि सुन जब सोशल मीडिया पर लोगों ने खिंचाई की तो सरकार ने मुआवजा 5 से बढ़ा कर 11 लाख कर दी।

'बिहार सरकार भिखारी है'
एक सवाल पर शहीद जवान की पत्नी बेहद नाराज दिखीं। उन्होंने कहा कि, 'बिहार सरकार भिखारी है। उसकी भीख की जरूरत मुझे नहीं है। उसकी भीख हम क्यों लेंगे? सभी सरकारों ने जब 20 लाख मुआवजे दिए हैं, तो ये 5 लाख क्यों दे रहे हैं? हमारा पति कोई शराब पीकर या नाली में गिरकर नहीं मरा है। हमको नहीं चाहिए उसका पैसा, वह अपना अपने पास रखे। साथ ही शहीद की पत्नी संगीता ने सोमवार को कहा था कि, 'हमको और कुछ नहीं चाहिए। मेरे पति और जवानों की शहादत का बदला चाहिए। पाकिस्तान बार-बार वार करता है, उन्हें दौड़ा-दौड़ाकर मारो।'

पीएम मोदी ने सेना को दी खुली छूट – कुछ भी करो, मुझे जवानों की शहादत का बदला चाहिए.......रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने श्...
21/09/2016

पीएम मोदी ने सेना को दी खुली छूट – कुछ भी करो, मुझे जवानों की शहादत का बदला चाहिए.......
रक्षा मंत्री मनोहर पर्रिकर ने श्रीनगर दौरे से लौटते ही सोमवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उरी हमले की रिपोर्ट सौंपी है। जिसके बाद पीएम हाईलेवल मीटिंग की। इस बैठक में तय हुआ कि पड़ोसी के प्रति अब आक्रामक रुख अपनाए जाने की जरूरत है। बताया जा रहा है कि सरकार अब सीमा पार की नापाक कार्रवाई का हथियारों से जवाब दे सकती है। डीजीएमओ ने कहा, आर्मी जवाब जरूर देगी। वक्त और जगह भी वह खुद ही तय करेगी। हम इस तरह के हमलों का जवाब देने में सक्षम हैं। हमे सरकार की तरफ से आदेश मिल चुके हैं।

INDIA Ka ye Roop dekh ke ro pri ak forn country ki photographar....www.fb.com/rajeevnitpनई दिल्ली: दुनिया के बेहद गरीब ल...
21/09/2016

INDIA Ka ye Roop dekh ke ro pri ak forn country ki photographar....
www.fb.com/rajeevnitp
नई दिल्ली: दुनिया के बेहद गरीब लोगों में से एक-तिहाई भारत में रहते हैं तथा यहां पांच साल से कम उम्र में मौत के मामले सबसे अधिक होते हैं। सहस्राब्दि विकास लक्ष्यों से जुड़ी संयुक्त राष्ट्र की ताजा रिपोर्ट में यह दावा किया गया है।
केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री नजमा हेपतुल्ला ने नई दिल्ली में यह रिपोर्ट जारी की। उन्होंने बताया कि रिपोर्ट के तथ्य नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के लिए चुनौती हैं और वह इससे निपटने में सफल रहेगी। नजमा ने कहा, अच्छे दिन आएंगे।
उन्होंने गरीबी उन्मूलन के प्रति प्रधानमंत्री की प्रतिबद्धता और 'सबका साथ, सबका विकास' नारे का उल्लेख करते हुए कहा, हमने जो कुछ किया है, उस पर गर्व नहीं करना है। गरीबी सबसे बड़ी चुनौती है।...मुझे भरोसा है कि जब अगली रिपोर्ट आएगी, तो हम इससे बेहतर होंगे।
मंत्री ने कहा कि रिपोर्ट में मानव विकास के मानकों से जुड़े आंकड़े दुनिया के अलग-अलग क्षेत्रों के लिए अलग हैं, लेकिन भारत के संदर्भ में जो आंकड़े दिए गए हैं, वह प्रशंसनीय नहीं हैं। नजमा का संयुक्त राष्ट्र कार्यक्रम के साथ लंबा जुड़ाव रहा है और अटल बिहारी वाजपेयी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार के दौरान वह इसमें करीब से शामिल थीं।

harnahi, purbi ke sbhi baccho ne..सोमवार को शिवहर जन जागरण मंच की एक आवश्यक बैठक हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के समन्...
21/09/2016

harnahi, purbi ke sbhi baccho ne..
सोमवार को शिवहर जन जागरण मंच की एक आवश्यक बैठक हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के समन्वयक मो. हसनैन ने करते हुए जिले में शिक्षा के साथ-साथ अन्य विकास के मुद्दों पर चर्चा करते हुए स
शिवहर। सोमवार को शिवहर जन जागरण मंच की एक आवश्यक बैठक हुई। कार्यक्रम की अध्यक्षता मंच के समन्वयक मो. हसनैन ने करते हुए जिले में शिक्षा के साथ-साथ अन्य विकास के मुद्दों पर चर्चा करते हुए सदस्यों से विचार विमर्श किया। वहीं शिक्षा मंत्री द्वारा जिलाधिकारी के शिवहर के नवाब उच्च विद्यालय के खाली पड़े दस वर्ग कक्षों में कला संकाय के आठ विषयों की पढ़ाई के भेजे प्रस्ताव की स्वीकृति पर हर्ष जताते हुए जिलाधिकारी राज कुमार को बधाई दी। साथ हीं शिक्षा मंत्री को भी इसके लिए धन्यवाद ज्ञापित किया गया। इस दौरान जिले के अन्य विकास मामलों को भी गति देने के लिए जिलाधिकारी से मांग की गई। मौके पर अनिल सिंह, प्रखंड समन्वयक गौरव, अर्जुन निसांत, मनोज कुमार समेत मंच के अन्य सदस्य मौजूद थे।

तरियानी प्रखंड काग्रेस आज जनता की समस्याओं के निदान के लिए संघर्षरत है। काग्रेस लोकतात्रिक पार्टी है, जो आम कार्यकर्ताओं को संवाद मंच उपलब्ध करा संगठन की नीतियों को निर्धारित करती
शिवहर। तरियानी प्रखंड काग्रेस आज जनता की समस्याओं के निदान के लिए संघर्षरत है। काग्रेस लोकतात्रिक पार्टी है, जो आम कार्यकर्ताओं को संवाद मंच उपलब्ध करा संगठन की नीतियों को निर्धारित करती है। भाजपा की रणनीति विभाजनकारी है। इसलिए हमें पूरी जिम्मेदारी के साथ देशहित में अपनी भूमिका को निभानी है। उक्त बातें मंगलवार को प्रखंड मुख्यालय में पार्टी के कार्यकारिणी कमेटी की बैठक को संबोधित करते हुए कही। साथ हीं कहा कि संगठन की मजबूती के लिए आवश्यक है कि बूथ स्तर पर कमेटी का गठन कर कार्यकर्ताओं को सक्रिय किया जाय। हम सब पार्टी के कर्मठ सिपाही है जो पार्टी नेतृत्व के आदेशों की पालना करते हुए सभी कार्यक्रमों को सुचारू रूप से चलाने के लिए संकल्पित हैं। जनता की उम्मीद पर खरा उतरने के लिए हमें सतत् प्रयास कर वर्तमान भाजपा के निरंकुश शासन का पर्दाफाश करना है। नवंबर माह में पंचायत अध्यक्ष एवं प्रखंड अध्यक्ष सम्मेलन पर चर्चा किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता प्रखंड अध्यक्ष राहुल कुमार सिंह ने किया। वहीं मीडिया प्रभारी मुकेश कुमार सिंह ने पार्टी नीतियों से अवगत कराते हुए कार्यो के संचालन की रूप रेखा बताई। मौके पर जिला काग्रेस कमेटी से मुरली मनोहर सिहं, सुनिल कुमार सिंह, जिला उपाध्यक्ष सद्दाम हुसैन, प्रमोद राय, मो. वकील, जग्रनथ सहनी, कौशल किशोर सिंह, राकेश प्रसाद सिंह, नगीना मांझी समेत कई कांग्रेसी मौजूद थे।

Happy birthday. ........
13/09/2016

Happy birthday. ........

फेमस तो कोठे के बाई भी रहती है... हाँ अन्तर बस इतना है कि वो तन बेचती है और ये आतंकी कन्हैया अपनी मा बहन और वतन बेचता है...
04/05/2016

फेमस तो कोठे के बाई भी रहती है... हाँ अन्तर बस इतना है कि वो तन बेचती है और ये आतंकी कन्हैया अपनी मा बहन और वतन बेचता है।

NIT Patna is going to organise a protest for demanding the full security & justice to the non-local students of NIT Srin...
07/04/2016

NIT Patna is going to organise a protest for demanding the full security & justice to the non-local students of NIT Srinagar. They are forced to live a scary life in their NIT campus. They were brutally beaten by J & K police for waving national flag and chanting "Vande Matram" in campus. Hoisting the national flag in our own country is not a crime and no one can stop us to do the same. We demand a strict actions against those brutal policemen who had beaten the innocent NITians. Students are being tortured through various means by local students, local public and few professors. They are not allowed to interact with media. They are helpless, they have no support. It's time to raise our voice against this brutal incident happened.

We request all students (Boys as well as girl) and professors of NIT Patna to please gather together to protest against injustice happened and salute to their bravery. Please bring National Flag & Banners with you, if possible. Let us stand together with them and pay tribute to the nationalism of these proud sons and daughters of our mother India.

29/02/2016

सऊदी में 6 हजार भारतीयों को पूर्ण रोजगार


रियाद। सऊदी अरब में अवैध ढंग से रह रहे कामगारों को अपने निवास को कानूनी रूप देने के लिए सरकार द्वारा समय सीमा छह अप्रैल को बढ़ाने के बाद करीब 6,000 भारतीयों को पूर्ण रोजगार हासिल हुआ है। जेद्दा में भारतीय वाणिज्य दूत फैज अहमद किदवई ने कहा कि मिशन ने 10,000 भारतीयों को अपना दर्जा सही करने में मदद की है।

अरब न्यूज के अनुसार, किदवई ने कहा, ""जब हमने देखा कि भारी संख्या में लोग वाणिज्य दूतावास में रोजगार के लिए आ रहे हैं तो हमने कंपनियों को बुलाया और उनसे नियमित कर्मचारियों की भर्ती करने को कहा। जिन कामगारों ने अपनी दस्तावेज ठीक कर लिए थे उनके लिए तीन रोजगार मेलों का आयोजन किया गया। इसमें 200 से अधिक सऊदी और भारतीय कंपनियां शामिल हुई। इनमें कुल 6,000 भारतीयों को पूर्णकालिक रोजगार मिला।""

सऊदी अरब की सरकार ने एक जुलाई को विदेशी कामगारों को अपनी कानूनी स्थिति को सुधारने की समय सीमा को बढ़ाकर 3 नवंबर कर दिया था। पहले यह तिथि 3 जुलाई ही थी। वाणिज्य दूत ने बताया कि 95 प्रतिशत कामगारों को निर्माण और प्रौद्योगिकी क्षेत्र में जबकि पांच प्रतिशत को इंजीनियरिंग, एकाउंटिंग और होटल क्षेत्र में काम मिला। किदवई ने विदेशी कामगारों की वैधानिक स्थिति ठीक करने की समय सीमा बढ़ाने के लिए सऊदी अरब के राजा अब्दुल्ला बिन अब्दुल अजीज अल-सऊद के प्रति आभार जताया।
-

29/02/2016

@ जागो रे जागो @
www.fb.com/rajeevnitp

नारी जो जननी है मगर उसे आज के विकासशील दौर में भी दोयम दर्जे का जीवन जीना पड़ता है. दुनियाँ भर में महिलाएं जहाँ अपनी योग्यता के बल पर शीर्ष पदों को शोभायमान कर रहीं हैं वहीँ विश्व के कई देशों में औरत आज भी मर्दों की गुलाम की तरह बरती जाती हैं. भास्कर ने दस ऐसे देशों की सूचि प्रकाशित की है जहाँ नारी आज भी नारकीय जीवन जीने को मजबूर है. पेश है भास्कर की दिल दहला देने वाली रिपोर्ट…

सारी दुनिया में पुराने रीति-रिवाजों और धार्मिक सिद्धांतों की वजह से महिलाओं की दशा और भी खराब हो गई है....
बहुत सारे मामलों में युद्ध और प्राकृतिक आपदाओं की वजह से दुनिया का ध्यान महिलाओं की इस दुर्दशा से दूसरी ओर मुड़ जाता है. हालांकि, अभी की कुछ घटनाओं से लोगों में जागरूकता काफी बढ़ी है. अरब क्रांति में ट्यूनीशिया, मिस्र, लीबिया और यमन में महिलाओं को अपनी आवाज उठाने का मौका मिला....

@महिलाओं के लिए नर्क से कम नहीं सऊदी, ४ गवाह हों तो ही माना जाता है बलात्कार

सऊदी अरब -

2009 में ‘द वर्ल्ड इकॉनोमिक फोरम’ ने जेंडर के आधार पर भेदभाव के मामले में सऊदी अरब को सबसे बुरे देशों में से एक बताया है. सऊदी अरब में हर उम्र की महिला के साथ एक पुरुष अभिभावक का होना जरूरी है. यहां तक कि घर में घुसने के लिए महिला-पुरुष के दरवाजे भी अलग होते हैं. वहां भेदभाव वाले नियम आज भी मौजूद हैं, जैसे एक महिला 1990 के बाद से हवाई जहाज में यात्रा तो कर सकती है, लेकिन एयरपोर्ट तक कार चला कर नहीं जा सकती है. 2012 में पहली बार सराह अत्तर और वोजडन शाहरकनी ने ओलिंपिक में भाग लेकर एक नया इतिहास रचा. 2012 में एक नया नियम लागू किया गया, जिसमें 2015 में महिलाएं पुरुष की इजाजत के बिना भी वोट दे सकेंगी.....

पाकिस्तान -

9 अक्टूबर, 2012 को मलाला यूसुफजई पर हुए हमले के कुछ महीनों बाद ही दुनिया भर से हजारों लोगों ने मलाला को ‘नोबल शांति पुरस्कार’ देने की मांग की. तालिबान ने इस 15 साल की लड़की को गोली मार दी थी, क्योंकि वह महिला शिक्षा के लिए आवाज उठा रही थी. इसका इलाज ब्रिटेन में किया गया था और वह बच गई. 2008 में ही तालिबान ने सिर्फ महिला शिक्षा को रोकने के लिए करीब 150 स्कूलों को तबाह कर दिया. मलाला पर हुआ यह हमला तो बस एक ही पक्ष को दिखाता है. इस देश में ऑनर किलिंग, जबरदस्ती शादी कराना, महिला तस्करी, रेप और एसिड से हमला काफी आम बात है. पाकिस्तान में 90 फीसदी से ज्यादा महिलाएं उनके परिवार के लोगों के द्वारा ही मानसिक रूप से प्रताड़ित की जाती हैं....

अफगानिस्तान -

अफगानिस्तान कई सारे झगड़ों से अभी तक उभर नहीं पाया है. इन सभी झगड़ों का असर देश के लोगों के मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ रहा है. यहां पर डिप्रेशन, पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस डिसऑर्डर और ज्यादा चिंता करना एक कॉमन समस्या है. यह समस्या परिवार को तहस-नहस कर रही है, खासकर महिलाओं को इन सबसे बहुत मुसीबतों का सामना करना पड़ रहा है.
अफगानिस्तान ‘तालिबान’ और ‘मुजाहिद्दीन’ के नियमों का पालन करते हुए पतन की तरफ जा रहा है. इस कारण यहां पर महिलाओं की शिक्षा अभी 15 फीसदी तक ही बढ़ पाई है. यहां पर सामान्यतः अरेंज मैरिज होती है और एक इंसान अपनी पत्नी को बिना उसकी मंजूरी के भी तलाक दे सकता है.
महिलाओं की दशा सुधारने के लिए नए लोकतंत्र की मांग जारी है. हालांकि, यह उस देश के लिए एक बड़ी बात है, जिस देश में महिलाओं की मृत्यु दर काफी ज्यादा है. उनकी औसत आयु 44 साल है....

चीन -

चीन में मानवाधिकार बहुत ही ज्यादा समय से एक अंतरराष्ट्रीय मामला बना हुआ है. अब जाकर थोड़ा ध्यान महिलाओं के अधिकारों पर दिया जा रहा है. चार दशकों से चीन में ‘एक बच्चे’ की पॉलिसी को प्रमोट किया जा रहा है, जिसका देश में जेंडर अनुपात पर बहुत ही गहरा असर पड़ रहा है. यह अनुमान है कि चीन के लगभग 40 मिलियन पुरुषों को पार्टनर नहीं मिलेगी.
इसके परिणामस्वरूप चीन के पड़ोसियों के लिए और भी बुरे हो सकते हैं. उत्तर कोरिया से कुछ महिलाएं पैसे कमाने के लिए सीमा पार जाती हैं, लेकिन यदि वो पकड़ी नहीं भी जाती हैं, तब भी यह देश उनके लिए काफी खतरनाक है. उत्तर कोरिया की हजारों लड़कियां इस देश में आती हैं. उनमें से लगभग 90 फीसदी को चीन में दुल्हनों (जिसके कई पति होते हैं) के काले बाजार में बेच दी जाती हैं......

माली -

माली में महिलाओं के गुप्तांग को अंग-भंग करने की बात सामने आती है. माली की 95 प्रतिशत से भी ज्यादा महिलाओं के साथ यह हुआ है. माली में शिक्षा की कमी के कारण लोग इससे होने वाले मानसिक एवं शारीरिक नुकसान को नहीं समझ पा रहे हैं. यह माना जाता है कि सेक्स के दौरान ज्यादा दर्द साइको-सेक्शुअल समस्याओं का कारण बन सकता है.
माली में एक महिला को घर से बाहर जाने से पहले भी अपने पति से अनुमति लेनी पड़ती है. हाल की रिपोर्ट के अनुसार वहां के ‘इस्लामिक चरमपंथी’ संगठन बिन ब्याही मां बन चुकी लड़कियों की एक लिस्ट बना रहे हैं. ऐसी हड़कियों को बर्बर दंड दिया जाता है. यह दंड फांसी, पत्थरों से मार देना और शरीर काट देने जैसे होते हैं. लगभग पिछले एक साल से महिलाओं के कुछ समूह अपने लिए अधिकारों की मांग कर रहे हैं.....

इराक -

इराक ऐसा देश है, जहां पर झगड़े और सांप्रदायिक विद्वेष बहुत ज्यादा है. सद्दाम हुसैन के न होने और अमेरिकी सेना के हटा लिए जाने के बावजूद इराक अभी भी खुद को बंटा हुआ मानता है. एक सर्वे से यह बात सामने आई है कि इराक में 19 फीसदी महिलाएं मानसिक परेशानियों से जूझ रही हैं. कहा जाता है कि सद्दाम हुसैन की मौत के बाद से महिलाओं की स्वतंत्रता काफी कम हो गई है. 2003 में कुछ एनजीओ भी शुरू हुए जैसे, ‘ऑर्गेनाइजेशन फॉर वुमेंस फ्रीडम इन इराक’. नई सरकार ने 2004 में एक ‘शारिया’ कानून भी लागू किया जो महिलाओं के विकास के लिए बनाया गया. ओडब्ल्यूएफआई ने महिलाओं की सुरक्षा में एक बड़ा रोल अदा किया है. इसने लोगों का ध्यान बढ़ते हुए रेप के मामलों, महिलाओं पर होने वाले हमलों, ऑनर किलिंग जैसे मामलों की तरफ आकर्षित किया. धार्मिक एवं सांप्रदायिक मामलों की वजह से महिलाओं को संघर्ष करना पड़ रहा है. 2003 से इस्लाम के दबाव की वजह से बुर्का प्रथा को काफी बढ़ावा मिला. एक महिला डॉ. लुब्ना नाजी ने बताया कि सद्दाम शासनकाल में महिलाएं ज्यादा स्वतंत्र थीं......

सोमालिया -

नवम्बर, 2012 में फोजिया यूसुफ हाजी अदान सोमालिया की पहली महिला विदेश मंत्री बनीं.....
महिलाओं के लिए सोमालिया एक बहुत ही बुरा देश माना जाता है.अदान ने कहा कि उनका विदेश मंत्री बनना राजनीति में एक बड़ी पहल है. इससे देश की हालत सुधारी जा सकेगी. 2011 में ‘थॉम्पसन रॉयटर्स फाउंडेशन सर्विस ट्रस्ट लॉ’ ने यह पाया कि महिलाओं के लिए शिक्षा के अवसर बहुत कम हैं. महिलाओं के खिलाफ घरेलू हिंसा आम बात है. यहां की 95 प्रतिशत लड़कियों के गुप्तांग अंग-भंग करने की बात भी सामने आई है. इस्लामी आतंकवादियों अल-शबाब वाले क्षेत्र सबसे ज्यादा बुरे माने जाते हैं. इन क्षेत्रों में महिलाओं को कैंपों में रहना होता है. यहां पर हथियार बंद गुटों के द्वारा उनके साथ रेप किया जाना एक आम बात है.....

भारत-

भारत एक बहुत ही तेजी से बढ़ने वाली इकॉनोमी है. हालांकि, हाल में ही हुए कुछ मामले जनता का ध्यान अपनी ओर खींचते हैं. दिसम्बर, 2012 को दिल्ली में बस में हुए गैंगरेप मामले ने पूरे देश को हिला कर रख दिया और यहां पर महिलाओं की सुरक्षा पर एक महत्वपूर्ण सवाल भी उठाया. एक सर्वे के अनुसार हर 14 घंटे में एक महिला का रेप होता है. 2012 में ‘थॉम्पसन रॉयटर्स फाउंडेशन’ के पोल के मुताबिक, भारत में महिलाओं की स्थिति अन्य जी20 देशों के मुकाबले बहुत ही खराब है. घरेलू हिंसा यहां की महिलाओं के मानसिक तनाव का एक कारण है.......

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो -

डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो को ‘दुनिया की रेप की राजधानी’ कहा जाता है. यूएन की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2009 में लगभग 8000 महिलाओं का रेप किया गया था. द्वितीय कांगो युद्ध के बाद से इस देश में हिंसा बरकरार है. इन महिलाओं का इस्तेमाल न केवल रेप के लिए, बल्कि युद्ध में हथियार के रूप में किया जाता है.
एक पत्रकार जिम्मी ब्रिग्स ने यहां कैंप में रहने वाली महिलाओं से बात की. उन्होंने पाया कि वे महिलाएं डिप्रेशन और पोस्ट-ट्रॉमेटिक स्ट्रेस से ग्रसित थीं. उनमें से बहुत-सी महिलाएं अपने परिवार की इज्जत के लिए कुछ भी कहने से डर रही थीं. उनके मानसिक स्वास्थ्य के लिए काफी कम सुविधाएं थीं.
कम उम्र में ही शादी एक आम बात है. कुछ ऑर्गेनाइजेशनंस का कहना है कि जब बात अरेंज मैरिज के लिए बाध्य करने की आती है तो यहां की पुलिस और स्थानीय अथॉरिटी को भी दोषी पाया गया है......
..................रजीव कुमार रंजन, एनआईटी, पटना

Address

Ara

Alerts

Be the first to know and let us send you an email when Indian Student Socity posts news and promotions. Your email address will not be used for any other purpose, and you can unsubscribe at any time.

Share