21/05/2026
मेरे बड़े भैया, मेरे अभिभावक, मेरे मित्र एवं मेरे सबकुछ प्रेम पंकज ललन भैया का इस तरह हमें छोड़कर चले जाना सिर्फ हमारे परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समाज की अपूरणीय क्षति है।
कैंसर जैसी निर्दयी बीमारी से लड़ते हुए भैया ने जिस पीड़ा को सहा, उसे शब्दों में बयां करना संभव नहीं। हमने अपनी आंखों से वो रातें देखी हैं जब दर्द से तड़पते हुए भी उनके चेहरे पर हिम्मत और परिवार के लिए चिंता दिखाई देती थी। रात-रात भर जागकर उन्हें संभालना, उनकी तकलीफ को महसूस करना… आज भी दिल को अंदर तक तोड़ दे रहा है।
लेकिन इतनी असहनीय पीड़ा में भी भैया ने कभी इंसानियत, अपनापन और लोगों की मदद करना नहीं छोड़ा। वो हर किसी के सुख-दुख में सबसे पहले खड़े होने वाले इंसान थे। समाज के लिए उनका प्रेम, लोगों के प्रति उनकी संवेदनशीलता और परिवार के प्रति उनका समर्पण उन्हें हमेशा सबसे अलग बनाता था।
आज घर का हर कोना उन्हें ढूंढ रहा है।
मां की आंखें नम हैं, परिवार की हिम्मत टूट चुकी है, और दिल मानने को तैयार नहीं कि अब भैया हमारे बीच नहीं हैं।
आपने हमेशा हमें समाज सेवा, इंसानियत और लोगों के दुख-दर्द में साथ खड़े रहने का पाठ पढ़ाया।
आपने हर परिस्थिति में हमें सही रास्ते पर चलना और रिश्तों की अहमियत समझाई।
हम शायद कभी आपकी तरह नहीं बन पाएंगे भैया, लेकिन जीवन भर कोशिश करेंगे कि आपके दिखाए हुए रास्ते और आपके आदर्शों पर चल सकें।
भैया, आपने दर्द सहकर भी हमें जीना सिखाया…
आप हमेशा हमारे दिलों में जिंदा रहेंगे।
आपकी यादें, आपका स्नेह और आपकी मुस्कान कभी मिट नहीं पाएगी।
ईश्वर से बस यही प्रार्थना है कि आपकी पुण्य आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और हम सभी को इस असीम दुःख को सहने की शक्ति प्रदान करें।
— आलोक अंजन “छोटे” एवं समस्त शोकाकुल परिवार 🙏🏻