आदिवासी अंचल

आदिवासी अंचल आदिवासी जगत की परम्पराओं व समस्याओ को उजागर करने का एक मंच।

इस पेज का उद्देश्य आदिवासी महापुरुषो के विषय मे तथ्यात्मक जानकारी प्रसारित करना व आदिवासी समुदाय की संस्कृति, परम्परा तथा समस्या को उजागर करना है।

18/07/2022

• आदिवासी विरोधी है नया वन संरक्षण नियम-2022

• आदिवासी समुदाय के वन अधिकारो के व्यवस्थापन की सुनिश्चितता को शुन्य करता है नया वन संरक्षण नियम-2022

:- पर्यावरण वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भारत सरकार द्वारा वन भूमि के व्यपवर्तन हेतु लाये गये नये नियम वन संरक्षण नियम-2022 के प्राविधानो को आदिवासी समुदाय व आदिवासी वर्ग को जंगल पर अधिकार देने वाले वन अधिकार कानुन का विरोधी बताते हुये एनएसयुआई(पुर्वी उत्तर प्रदेश) के प्रदेश सचिव Ankush dubey ने भाजपा पर हमला बोला है। उन्होने कहा है कि एक तरफ भाजपा राष्ट्रपति के चुनाव मे आदिवासी वर्ग से प्रत्याशी उतारकर आदिवासी वर्ग की हितैषी होने का दिखावा कर रही है वही प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार के वन मंत्रालय द्वारा वन भूमि के व्यपवर्तन हेतु नया नियम वन संरक्षण नियम-2022 लाया गया है जिसमे यह सुस्पष्ट नही है कि जंगल की भूमि को किसी एजेन्सी को लीज पर अथवा गैर वानिकी कार्य हेतु उपयोग हेतु दिये जाने के दरम्यान उस भूमि पर आदिवासी वर्ग एवं अन्य परम्परागत वन निवासियो के नीहित वन अधिकारो का व्यवस्थापन कब किया जायेगा साथ ही साथ उन्होने कहा है कि नियमावली मे उल्लेखित है कि केन्द्र सरकार द्वारा कार्य हेतु वन भूमि के उपयोग की अन्तिम अनुमति प्रदान किये जाने के पश्चात राज्य सरकार द्वारा वन अधिकारो का व्यवस्थापन किया जायेगा जिस पर प्रश्न चिन्ह उठाते हुये उन्होने कहा है कि पुर्व कि नियमावली मे वन अधिकारो के व्यवस्थापन के उपरान्त वन भूमि के उपयोग की अनुमति मिलती थी जिसके कारण यह सुनिश्चित था कि वन अधिकारो का व्यवस्थापन किया जायेगा तथा वन अधिकारो का व्यवस्थापन नही होने की दशा मे वन भूमि व्यपवर्तित नही हो सकती जिससे वन भूमि के व्यपवर्तन के दरम्यान आदिवासी समुदाय व अन्य परम्परागत् वन निवासियो के वन अधिकार सुरक्षित थे परन्तु नये नियम के अनुसार जब सम्बन्धित ऐजेन्सी को वन भूमि का उपयोग करने व कब्जा लेने का आदेश प्राप्त हो जायेगा तो वन अधिकारो का व्यवस्थापन होना सुनिश्चित नही रह जायेगा।
उन्होने यह भी कहा है कि केन्द्र मे सत्तासीन नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार नये वन संरक्षण नियम को केवल कार्पोरेट घरानो को सहजता से वन दोहन हेतु सौपने तथा कार्पोरेट घरानो को पुर्व मे वन भूमि को उपयोग हेतु दिये जाने के दरम्यान बाधा बनने वाले वन अधिकारो के व्यवस्थापन के प्रश्न को शुन्य करने के उद्देश्य से ला रही है जिसे आदिवासी समुदाय व अन्य परम्परागत् वन निवासियो के बीच जाकर बताया जायेगा तथा इसका व्यापक विरोध किया जायेगा।

आदिवासियों को संवैधानिक अधिकार दिलाने वाले विद्वान स्वर्गीय जयपाल सिंह मुंडा जी का संविधान सभा में वक्तव्य" As a jungli,...
18/04/2022

आदिवासियों को संवैधानिक अधिकार दिलाने वाले विद्वान स्वर्गीय जयपाल सिंह मुंडा जी का संविधान सभा में वक्तव्य

" As a jungli, as an Adibasi," "I am not expected to understand the legal intricacies of the Resolution. But my common sense tells me that every one of us should march in that road to freedom and fight together.Sir, if there is any group of Indian people that has been shabbily treated it is my people. They have been disgracefully treated, neglected for the last 6,000 years.The history of the Indus Valley civilization, a child of which I am, shows quite clearly that it is the new comers – most of you here are intruders as far as I am concerned – it is the new comers who have driven away my people from the Indus Valley to the jungle fastness.The whole history of my people is one of continuous exploitation and dispossession by the non-aboriginals of India punctuated by rebellions and disorder."

क्या जरूरत पड़ी होगी जयपाल सिंह मुंडा जी को संविधान सभा में यह बात रखने की जब प्रारुप समिति में पुर्व से दलित आदिवासी हितैषी डाक्टर अम्बेडकर मौजूद थे, मामला था अनुसूचित जनजातियों को अधिकार दिये जाने में हो रही असमानता

आदिवासी अपने रहनुमा, रहबर को नहीं पहचान सके इसलिए आज राष्ट्रीय स्तर पर थोपे जा रहे महापुरुषों का उन्हें गुणगान करना पड रहा व नेता विहीन है।

तुम्हारे विकास के मंदिर आदिवासियों की कब्रगाह:- मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडाअगस्त 1947 में जब अल्पसंख्यकों और वंचितों के...
15/04/2022

तुम्हारे विकास के मंदिर आदिवासियों की कब्रगाह:- मरांग गोमके जयपाल सिंह मुंडा

अगस्त 1947 में जब अल्पसंख्यकों और वंचितों के अधिकारों पर पहली रिपोर्ट प्रकाशित हुई तो उसमें केवल दलितों के लिए ही विशेष प्रावधान किए गए थे। दलित अधिकारों के लिए डॉ अंबेडकर बहुत ताकतवर नेता बन चुके थे, जिसका लाभ दलितों को तो मिलता दिख रहा था, लेकिन आदिवासियों को अनदेखा किया जा रहा था। ऐसे में जयपाल सिंह मुंडा ने कड़े तेवर दिखाए और संविधान सभा में जोरदार भाषण दिया।

“”आजादी की इस लड़ाई में हम सबको एक साथ चलना चाहिए। पिछले छह हजार साल से अगर इस देश में किसी का शोषण हुआ है तो वे आदिवासी ही हैं। उन्हें मैदानों से खदेड़कर जंगलों में धकेल दिया गया और हर तरह से प्रताड़ित किया गया, लेकिन अब जब भारत अपने इतिहास में एक नया अध्याय शुरू कर रहा है तो हमें अवसरों की समानता मिलनी चाहिए।””

ओडिशा की एक आदिवासी महिला जो आशा कार्यकर्ता का काम करती हैं, वो फ़ोर्ब्स की सबसे शक्तिशाली महिलाओं की लिस्ट में कैसे शाम...
03/12/2021

ओडिशा की एक आदिवासी महिला जो आशा कार्यकर्ता का काम करती हैं, वो फ़ोर्ब्स की सबसे शक्तिशाली महिलाओं की लिस्ट में कैसे शामिल हुईं? देखिए मातिल्दा कुल्लू की प्रेरणादायक कहानी।

“ओडिशा की एक आदिवासी महिला जो आशा कार्यकर्ता का काम करती हैं, वो फ़ोर्ब्स की सबसे शक्तिशाली महिलाओं की लिस्ट में क.....

ओडिशा के सुंदरगढ़ ज़िले की रहने वाली आशा कार्यकर्ता आदिवासी महिला मातिल्दा कुल्लू ने फ़ोर्ब्स की सबसे शक्तिशाली महिलाओं ...
03/12/2021

ओडिशा के सुंदरगढ़ ज़िले की रहने वाली आशा कार्यकर्ता आदिवासी महिला मातिल्दा कुल्लू ने फ़ोर्ब्स की सबसे शक्तिशाली महिलाओं की लिस्ट में तीसरा स्थान हासिल किया है।मातिल्दा कुल्लू का अंधविश्वास के खिलाफ संघर्ष प्रेरणादायक है।जिसे सभी को जानना जरुरी है। बधाई, देश को आप पर गर्व है।

·       सोनभद्र मे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की शाखा स्थापित करने की कवायद।·       प्रदेश सचिव, एनएसय...
28/05/2021

· सोनभद्र मे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की शाखा स्थापित करने की कवायद।

· प्रदेश सचिव, एनएसयुआई पुर्वी युपी अंकुश दुबे द्वारा राष्ट्रपति को पत्र भेज सोनभद्र मे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय की शाखा स्थापित करने की की गयी थी मांग।

:- जनपदः-सोनभद्र मे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक की शाखा(केन्द्र) स्थापित करने को लेकर प्रदेश सचिव, एनएसयुआई पुर्वी युपी अंकुश दुबे द्वारा राष्ट्रपति को प्रेषित पत्र को राष्ट्रपति सचिवालय द्वारा उच्च शिक्षा विभाग, मानव संसाधन विकास मंत्रालय को आवश्यक कार्यवाही के निर्देश के साथ अग्रसारित किया गया है। दुबे द्वारा राष्ट्रपति को प्रेषित पत्र मे बताया गया था कि इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय अधिनियम-2007 की धारा-5 की उपधारा-29 के तहत् देश के विभिन्न जनजातीय क्षेत्रो मे प्रादेशिक केन्द्रो की स्थापना किया जाना प्राविधानित है तथा जनपद सोनभद्र मुलतः जनजातीय बाहुल्य है जहां खैरवार(खरवार), गोंड, अगरिया, पनिका, चेरो, बैगा आदि जनजातिया बहुतायात मे निवासरत् है तथा शैक्षणिक, सामाजिक व आर्थिक रुप से अत्यधिक पिछडी हुई है जिसका प्रमुख कारण इनके लिये सोनभद्र मे किसी उच्च शिक्षा का केन्द्र मय अनुसंधान सूविधा का नही होना है तथा आर्थिक रुप से स्मृध्द नही होने के कारण यह अन्य स्थानो पर जाकर उच्च शिक्षा ग्रहण करने मे भी असमर्थ है व जनजातीय बाहुल्य होने के कारण ही सोनभद्र की दुध्दी तथा ओबरा विधानसभा जनजातीय वर्ग हेतु आरक्षित है इसके अतिरिक्त जनपद सोनभद्र की सीमा से सटे हुये चन्दौली, मिर्जापुर व झारखण्ड, छत्तीसगढ राज्य के जिले तथा मध्य प्रदेश का सिंगरौली जिला भी जनजातीय क्षेत्र है। ऐसी परिस्थिति मे सोनभद्र मे इंदिरा गांधी राष्ट्रीय जनजातीय विश्वविद्यालय, अमरकंटक की शाखा(केन्द्र) स्थापित करने से सोनभद्र के अतिरिक्त समीपवर्ती जनपदो के जनजातीय वर्ग भी उच्च शिक्षा और अनुसंधान के अवसर प्राप्त कर सकेंगे तथा उनका सामाजिक, शैक्षणिक व आर्थिक विकास हो सकेगा। अंकुश ने कहा है कि महामहिम राष्ट्रपति महोदय द्वारा पत्र को संज्ञान मे लेकर आवश्यक कार्यवाही के निर्देश दिये जाने के बाद आशा है कि इस दिशा मे अविलम्ब कार्यवाही होगी।

युपी के सोनभद्र के विकास खंड-दुद्धी के रन्नू गांव में चार आदिवासियो का वोट फर्जी तरीके से डाल दिया गया जब उन्होंने इसका ...
29/04/2021

युपी के सोनभद्र के विकास खंड-दुद्धी के रन्नू गांव में चार आदिवासियो का वोट फर्जी तरीके से डाल दिया गया जब उन्होंने इसका विरोध किया तो पुलिस द्वारा पीटा गया।

MYogiAdityanath जी के राज में आदिवासी को मतदान करने का अधिकार भी सुरक्षित नहीं बचा है। Election Commission of India District Magistrate Sonbhadra Ankush dubey

https://www.amarujala.com/uttar-pradesh/sonebhadra/rannu-fiercely-feared-voters-and-police-personnel-assaulted-injured-on-the-possibility-of-fake-voting-in-sonbhadra

सोनभद्र के दुद्धी विकास खंड दुद्धी के रन्नू गांव में बृहस्पतिवार को सुबह मतदान शुरू होते ही सुबह करीब 8.30 बजे कुछ मत....

एनसीएल के भूमि अधिग्रहण से विस्थापित आदिवासी परिवारो के साथ अन्याय जारी है। एनसीएल के 10 कोयला खदानों मे विभिन्न प्रकृति...
07/08/2020

एनसीएल के भूमि अधिग्रहण से विस्थापित आदिवासी परिवारो के साथ अन्याय जारी है। एनसीएल के 10 कोयला खदानों मे विभिन्न प्रकृति के संविदा कार्यो मे मात्र 1334 आदिवासी मजदुर कार्यरत है और जिनमे से सभी विस्थापित नही है। इसके विरूध्द मुखर होकर आवाज उठाने की आवश्यकता है।

"""From my point of view, the people of Scheduled Tribes community in India have been the most exploited and which conti...
31/01/2019

"""From my point of view, the people of Scheduled Tribes community in India have been the most exploited and which continues today and it is very sad that institutions like Scheduled Tribes Commission are also watching all the things and made of tamashabeen""""(मेरे दृष्टिकोण से, भारत में अनुसूचित जनजाति समुदाय के लोगों का सबसे अधिक शोषण हुआ है और जो आज भी जारी है और यह बहुत दुखद है कि अनुसूचित जनजाति आयोग जैसी संस्थाएँ भी तमाम चीजों को देख रही हैं और तमाशबीन बनी हुई हैं।)

BBC News हिंदी | मध्य प्रदेश में चंद रुपयों के लिए गिरवी रखना पड़ता है राशन कार्ड: ग्राउंड रिपोर्ट -

मध्य प्रदेश के कई गाँवों में राशन कार्ड गिरवी रखने के बाद लोग दाने-दाने को मोहताज हो गए हैं.

12/01/2019

कोल को आदिवासी (एसटी) का दर्जा दिये के कुछ तथ्य,,,,,,
:-आदिवासी(जनजाति) का दर्जा दिये जाने का प्रमुख आधार है संस्कृति और कोल जाति का पारम्परिक नृत्य है कोल ददरा
:-मोदी सरकार ने कोल के आदिवासी का दर्जा देने की फाइल दबाई हुई है और 2013 में आदिवासी का दर्जा देने की उ0 प्र0 सरकार की संस्तुति को लागू करने के लिए तैयार नहीं है। 1965 में ही लोकर समिति ने कोल को आदिवासी का दर्जा देने को कहा था। 2004 और 2013 में उ0 प्र0 सरकार ने संस्तुति की पर कोल आदिवासी में शामिल नहीं हुए

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