21/12/2020
8 साल बस काम ही काम सिलसिला जारी है.....👇
मंथन थियेटर एवं फ़िल्म फाउंडेशन का पहला नाटक दिसंबर 2012 में दिल्ली में दामिनी प्रकरण से शुरू हुआ था, उसके बाद ये सिलसला लगातार जारी हैं। 19 दिसंबर को हमने अपने 8 वर्ष पूरे किये है। मंथन की कुछ ऐसी बाते जो सब से सांझा करने का विचार हुआ।
मंथन के अभिनेताओ की दिन रात की मेहनत, लगन, जोश, ताक़त, हिम्मत , लडाकूपन और जुनून के बल पर ही हम यहा तक आए है।
अनेक उतार चढ़ाव और यादगार अनुभवो के ये खूबसूरत 8 साल । रोजाना बस काम ही काम । हर रोज एक नई जिम्मेदारी का अहसास । खुद के वजूद को हर रोज आईना दिखा, ताजा उम्मीदों, सपनो और तेवर के साथ जुझारूपन को लेकर हकीकत से संघर्ष कर, हिम्मत से आगे बढ़ना - सचमुच बहुत ही कठिन है पर आप सभी के सहयोग से ये हुआ है । मंथन थियेटर एक नए तरह के तेवर वाला थिएटर कर नया इतिहास रच रहा है। मंथन थियेटर के नुक्कड़ नाटको, मंच प्रस्तुतियों और अभिनेताओ की ईमानदारी, प्रतिबद्धता, हिम्मत और जुनून किसी से छुपा नही हैं,
मंथन ग्रुप ने अपने समाज के ज्वलंत सवालो और हकीकत से टकरा कर थियेटर की सामाजिक जिम्मेदारी निभाने की ईमानदारी से कोशिश की है।
मंथन के लिए थिएटर का मतलब सिर्फ मनोरंजन नहीं है,बल्कि सामाजिक और राजनैतिक सरोकार से जुड़े सवालों को उठाते हुए रचनात्मक परिवर्तन के लिए लगातार काम करना है l एक बेहतर दुनिया - जहाँ हम सबके सपनो को हकीकत मे बदलने के समान अवसर हों l जहां जाति , धर्म, रंग, प्रांत, गरीबी,अमीरी, जेंडर, छोटे -बड़े या कपड़े के आधार पर भेदभाव ना हो। समान शिक्षा व स्वास्थ्य का बुनियादी ढांचा सबको उपलब्ध हो।
हम मानते है कि थिएटर हमे सिर्फ अभिनेता ही नहीं, बल्कि अच्छा इंसान भी बनाता हैं । एक ऐसा नागरिक जो दूसरो से वैचारिक मतभेद के बावजूद सकारात्मक संवाद मे विश्वास करता है, आप सबके प्यार व सहयोग के लिए तहेदिल से धन्यवाद, अभी हमे बहुत काम करने है, उम्मीद है आप अपना प्यार और अपनापन इसी तरह बनाए रखेगें,
इसी कड़ी में हम बहुत जल्द अलग अलग विधाओं में कार्यशालाएं और गांव गांव में नाटक अभियान शुरू करने वाले हैं, मंथन को उम्मीद हैं कि आपका प्यार हमे हमेशा मिलता रहा रहेगा।
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आपका उमा शंकर (ओम शर्मा)
निर्देशक :- 8529274084
मंथन थिएटर एवं फ़िल्म फाउंडेशन.