06/04/2026
ग्राम मोलाहेड़ा के लिए यह गर्व और प्रेरणा का क्षण है कि स्वर्गीय गुरूजी श्री ग्यारसी लाल जी गुर्जर के पोते हर्ष का चयन सैनिक स्कूल अंबिकापुर (छत्तीसगढ़) में हुआ है। यह उपलब्धि केवल एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि पूरे परिवार और गांव की मेहनत, संस्कार और दूरदर्शी सोच का परिणाम है।
हर्ष ने यह सिद्ध कर दिया कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो और मेहनत सच्ची हो, तो कोई भी मंज़िल दूर नहीं रहती। उसकी इस सफलता के पीछे उसके पिता रवि जी का निरंतर मार्गदर्शन, अनुशासन और समर्थन रहा है। साथ ही परिवार में देशसेवा की परंपरा भी मजबूत रही है, जिसका उदाहरण हर्ष के ताऊ योगेश जाँगल जी हैं, जो भारतीय नौसेना से सेवानिवृत्त होकर आज भी युवाओं के लिए प्रेरणा बने हुए हैं।
इस अवसर पर स्वर्गीय गुरूजी श्री ग्यारसी लाल जी गुर्जर का जीवन स्वयं में एक प्रेरणादायक अध्याय है। उन्होंने केवल अपने परिवार ही नहीं, बल्कि पूरे गुर्जर समाज को शिक्षा और जागरूकता का संदेश दिया। उनकी दूरदृष्टि का सबसे बड़ा उदाहरण यह है कि उन्होंने अपनी बेटियों—मुकुलिका, मधुलिका और मंजुलिका—को उस समय उच्च शिक्षा दिलाई, जब समाज में लड़कियों की पढ़ाई को उतना महत्व नहीं दिया जाता था। ये तीनों बहनें कोटपूतली क्षेत्र में गुर्जर समाज की पहली बेटियां थीं, जिनकी शादी बालिग होने और स्नातक शिक्षा पूरी करने के बाद एक साथ हुई।
इनमें से मुकुलिका जी आज एक सरकारी अध्यापक के रूप में समाज में शिक्षा की अलख जगा रही हैं। यह उपलब्धि दर्शाती है कि गुरूजी ने बेटियों को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने में कितनी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनका यह कदम आज भी पूरे समाज के लिए एक मिसाल है कि शिक्षा ही असली शक्ति है, चाहे वह बेटा हो या बेटी।
हर्ष की सफलता कहीं न कहीं उन्हीं महान संस्कारों और प्रगतिशील सोच का परिणाम है, जो गुरूजी ने अपने परिवार में स्थापित किए थे। आज उनका आशीर्वाद ही हर्ष को इस मुकाम तक लेकर आया है।
हर्ष की यह उपलब्धि गांव और समाज के अन्य युवाओं के लिए एक प्रेरणा है कि वे भी शिक्षा, अनुशासन और दृढ़ संकल्प के साथ अपने सपनों को साकार करें। सैनिक स्कूल में चयन न केवल एक बड़ी सफलता है, बल्कि देशसेवा की दिशा में पहला मजबूत कदम भी है।
हम सभी ग्रामवासी हर्ष को इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर हार्दिक बधाई देते हैं और उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं। साथ ही, स्वर्गीय गुरूजी श्री ग्यारसी लाल जी गुर्जर को शत-शत नमन करते हुए उनके आशीर्वाद और प्रेरणा के लिए हृदय से आभार व्यक्त करते हैं।
जय हिंद!