26/03/2026
सर्वसंकट हंत्री त्वंहि धन ऐश्वर्य प्रदायनीम्।
ज्ञानदा चतुर्वेदमयी महागौरी प्रणमाम्यहम्॥
कंचनाभा कराग्रस्थां स्वर्णरूपां मनोहराम्।
पूर्णेन्दु निभां त्रिनेत्रां च देवीं सर्वैः सुसंस्तुताम्॥
महागौरी: श्वेत वर्ण और वृषभ की सवारी करने वाली माँ महागौरी पूर्ण पवित्रता का स्वरूप हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, कठोर तपस्या के कारण जब इनका शरीर काला पड़ गया था, तब महादेव ने गंगाजल से इन्हें स्नान कराया, जिससे ये दमकते हुए कुंदन के समान 'महागौरी' कहलाईं। यह अवस्था मन की शुद्धि और शांति को दर्शाती है।
सिद्धिदात्री: माँ दुर्गा का नौवां रूप पूर्णता का है। कमल पर विराजमान माँ सिद्धिदात्री ब्रह्मांड की समस्त सिद्धियों की स्वामिनी हैं। स्वयं भगवान शिव ने इन्हीं की कृपा से आठ सिद्धियाँ प्राप्त की थीं, जिसके कारण उनका आधा शरीर स्त्री का हुआ और वे 'अर्धनारीश्वर' कहलाए।
चैत्र शुक्ल नवमी को भगवान नारायण के सातवें अवतार श्री राम का प्राकट्य हुआ था।श्रीराम के अवतार का उद्देश्य संसार में मर्यादा स्थापित करने के साथ साथ आज्ञाकारी,कर्तव्य परायण,धैर्यवान
वीर योद्धा,लोक कल्याणकारी कैसे रहना है,इसका संदेश देना भी था।
भये प्रकट कृपाला दीन दयाला कौशल्या हितकारी।
हर्षित महतारी मुनि मन हारी अदभुत रूप बिचारी।।