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20/08/2026

हम प्रमुख समाचार-पत्रों—द हिंदू, इंडियन एक्सप्रेस, इकोनॉमिक टाइम्स, बिज़नेस स्टैंडर्ड, फाइनेंशियल एक्सप्रेस और द इकोनॉमिस्ट—की महत्त्वपूर्ण समसामयिक घटनाओं पर द्विभाषी व्याख्यान तैयार करते हैं।

आपको सभी समाचार-पत्र स्वयं पढ़ने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसमें बहुत समय लगेगा। हम आपके सामने परीक्षा की दृष्टि से महत्त्वपूर्ण समाचार प्रस्तुत करेंगे। यदि कोई समाचार आपके लिए प्रासंगिक होगा, तो हम उसका विस्तृत विश्लेषण करके सरल द्विभाषी व्याख्यान तैयार करेंगे।आप हमें लिख भी सकते हैं कि आपको कौन से समाचार का लेक्चर चाहिए ।
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'भाषा की पाठशाला' में आज के शब्द : नैवेद्य, प्रसाद, भोग, भोगना और भुगतना।*********************भोग : यह बना है ‘भुज्’ धात...
17/08/2026

'भाषा की पाठशाला' में आज के शब्द : नैवेद्य, प्रसाद, भोग, भोगना और भुगतना।
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भोग : यह बना है ‘भुज्’ धातु से और इसका अर्थ है– भक्षण करना, खाना, आस्वादन करना। भोग भोजन का भी होता है, किसी कर्म के परिणाम का भी और जीवन के दुःख-सुख का भी। दैनंदिन जीवन में जब पूजा-अर्चना के निमित्त हम कुछ ‘भोग’ लगाते हैं, तो इसे प्रभु पहले रस-रूप में ही चखें अथवा ग्रहण करें– ऐसी अभिलाषा रखते हैं। कर्मफल-भोग रूप में यह ‘भोग’ सुखद अथवा दुःखद कुछ भी हो सकता है; इसलिए कहा जाता है कि जो भोग होगा, वह भोगना ही पड़ेगा।

भुगतना : भोग से बने विकारी रूप ‘भुगतना’ का अर्थ बुरा परिणाम भोगने के लिए रूढ हो गया है। यहाँ ध्यातव्य है कि रूढ को तद्भव रूप में ‘रूढ़’ भी लिखा जा सकता है, जैसे ‘जड’ को तद्भव रूप में ‘जड़’ लिखा जा सकता है।

स्मरण रहे कि यह तो कहा जा सकता है कि तुमने ग़लती की है तो अब सजा भुगतो; पर यह कदापि नहीं कहा जा सकता कि तुमने कठिन परिश्रम कर सफलता पाई है, अब सुख-समृद्धि भुगतो। हाँ, सुख-समृद्धि जैसे सकारात्मक अर्थ में ‘भोग’ शब्द का प्रयोग बिलकुल ठीक है।

नैवेद्य : संस्कृत की ‘विद्’ धातु में जानने, सीखने, अनुभव करने इत्यादि का भाव है। इसी से ‘वेद’ शब्द बना है तो इसी से विद्या, वेदना, निवेदन इत्यादि शब्द भी बने हैं। इसी विद् से बना है– निवेद्य (नि+ विद् + ण्यत्), जिसका अर्थ है– किसी देवमूर्ति को भोग लगाना और निवेदन करना। आगे, इसी से संज्ञा शब्द ‘नैवेद्य’(निवेद् + ष्यञ्) बना है। एक वाक्य में कहें तो जब हम ईश-आराधना के समय कुछ रख कर ईश्वर से निवेदन करते हैं तो वह ‘नैवेद्य’ बन जाता है।

प्रसाद : नैवेद्य चढ़ाने के बाद जो बच गया, वह ‘प्रसाद’ है, जिसे भक्त ग्रहण करता है। प्रसाद और नैवेद्य में मूल अंतर यह है कि नैवेद्य ईश्वर ग्रहण करते हैं, जबकि प्रसाद भक्त ग्रहण करते हैं। ऐसे प्रसाद शब्द के कई अर्थों में यह केवल एक अर्थ है। प्रसाद (प्र+ सद् +घञ्) शब्द के कई अन्य अर्थ भी हैं, जैसे– 1. कृपा या अनुग्रह 2. अच्छा स्वभाव, जिसे साहित्य में प्रसाद-गुण कहा जाता है। 3.स्वच्छता, निर्मलता, पारदर्शिता। 4. चढ़ावा इत्यादि।

विशेष : जानना चाहिए कि इसी प्रसाद से बने ‘प्रसादक’ शब्द का अर्थ है– स्वच्छ अथवा पवित्र करने वाला, अनुग्रह या आनंदित करनेवाला; जबकि ‘प्रसादन’ स्वच्छ अथवा निर्मल करने की क्रिया को कहते हैं। प्रसाद से मिलते-जुलते एक अन्य शब्द ‘प्रासाद’ का अर्थ है– राजमहल, विशाल अथवा गगनचुंबी भवन।

['दैनिक जागरण" और 'नई दुनिया' के सभी संस्करणों में प्रकाशित।]

09/08/2026

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यह महाभारत का व्हाटस एप समूह है । महाभारत के पूर्ण भाग को विश्लेषण के साथ लिख रहा हूँ । महाभारत समझने एवं पढ़ने की इच्छा रखने वालों का स्वागत है ।

मनीषा, प्रतिभा, बुद्धि, मेधा और प्रज्ञा में अंतर : 'भाषा की पाठशाला'*********************मनीषा :– ‘मन्’ धातु में सोचने, ...
03/08/2026

मनीषा, प्रतिभा, बुद्धि, मेधा और प्रज्ञा में अंतर : 'भाषा की पाठशाला'
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मनीषा :– ‘मन्’ धातु में सोचने, चिंतन करने, पूजा, आदर करने अथवा सम्मान देने का भाव है। मन वह है, जो सोच-विचार करता है, जो जानना चाहता है, अनुभव करना चाहता है। मन की क्रिया को ‘मनन’ कहा जाता है। इसलिए जो ज्ञात है अथवा समझा हुआ है, उसे ‘मनित’ कहा जाता है। अगर किसी चीज को प्रत्यक्ष समझा है तो कह सकते हैं– “यह मुझे ‘मनित’ है; अर्थात् ज्ञात है”।

विदित है कि हमारा मन विविध दिशाओं में विचरता है, भटकता है; लेकिन अगर हम इसे नियंत्रित कर लें तो कमाल होता है। नियंत्रित करनेवाली शक्ति ‘ईषा’ है। ईषा का मूल अर्थ हल का वह हिस्सा है, जिससे हल को दिशा दी जाती है, उसे नियंत्रित किया जाता है। इस प्रकार मनीषा मन की वह विशेष शक्ति, चाह, कामना, समझ अथवा प्रज्ञा है, जिससे वह विचार आदि करता है। इसी से व्युत्पत्न्न शब्द ‘मनीषिका’ का अर्थ भी समझ अथवा प्रज्ञा है।

जानना चाहिए कि मनीषा का विशेषण ‘मनीषी’ है। यह भी ध्यान रहे कि मनीषा से ही बने ‘मनीषित’ शब्द में केवल कामना अथवा इच्छा का भाव है। कुछ इच्छित, वांछित अथवा अभिलषित है तो कहेंगे यह ‘मनीषित’ है।

मेधा– मेधा में धारण करने की शक्ति अथवा स्मरणशक्ति के अच्छे होने का भाव है। मेधावी बच्चे न केवल पाठ को शीघ्र ही समझ लेते हैं, अपितु अधिक समय तक याद भी रखते हैं।

बुद्धि– ‘बुध्’ धातु से बने बुद्धि में जानने अथवा समझने का भाव है। जिसे बुद्धि, मति अथवा समझ आ गई, वह बुद्धिमान् हो गया।

प्रज्ञा– ‘प्र’ का अर्थ प्रकृष्ट अथवा विशिष्ट होता है और ‘ज्ञ’ का अर्थ जाननेवाला। प्रज्ञ(विशेषण) का अर्थ है– ‘विशेष ज्ञान युक्त’, विद्वान् अथवा मेधावी। ‘प्रज्ञ’ के गुण की संज्ञा ‘प्रज्ञा’ है। अतः, प्रज्ञा का शब्दिक अर्थ प्रकृष्ट अथवा विशिष्ट ज्ञान है।

प्रतिभा– प्रतिभा ‘प्रज्ञा’ से भी उच्च लब्धि वाला गुण है। ऐसी प्रज्ञा, जिसमें विशद कल्पनाशीलता हो, नवाचार हो, समाधानविषयक सामर्थ्य हो, उसे ‘प्रतिभा’ कहते हैं। प्रतिभा में ‘भा’ है, जिसमें चमक, प्रकाश आदिक का भाव है। [प्रति+ भा + क + टाप् = प्रतिभा]

अध्यवसाय से ज्ञान और प्रज्ञा की प्राप्ति संभव है; परंतु प्रतिभा को ईश्वरप्रदत्त माना जाता है। प्रतिभा का विशेषण ‘प्रातिभ’ है। उदाहरण : प्रातिभ-ज्ञान का अर्थ है– ‘प्रतिभा से प्राप्त ज्ञान’।

[दैनिक जागरण और नई दुनिया के सभी संस्करणों में आज प्रकाशित।]

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31/07/2026

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सूचना, संवाद, समाचार और ख़बर में अंतर को बस 2 मिनट में समझिए :  #हिंदी_पाठशाला
29/07/2026

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In this 'Hindi Pathshala' segment of DD Morning Show, linguist Kaml...

50 से ज्यादा लोग PCS के मॉक टेस्ट प्रोग्राम को लांच करते ही ज्वाइन कर चुके हैं लेकिन छात्रों की मांग को देखते हुए 99 रुप...
29/07/2026

50 से ज्यादा लोग PCS के मॉक टेस्ट प्रोग्राम को लांच करते ही ज्वाइन कर चुके हैं लेकिन छात्रों की मांग को देखते हुए 99 रुपए में एडमिशन आज शाम 6 बजे तक के लिए बढ़ाया जाता है।

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प्रयागराज और आसपास हैं तो आज समय निकालिए और आइए!**********************आज जी. बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज ...
28/07/2026

प्रयागराज और आसपास हैं तो आज समय निकालिए और आइए!
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आज जी. बी. पंत सामाजिक विज्ञान संस्थान, प्रयागराज में "शब्दकोश निर्माण एवं उसका महत्त्व" विषय पर आयोजित राष्ट्रीय कार्यशाला में मुख्य अतिथि के रूप में हिंदीप्रेमियों तथा शोधार्थियों से संवाद होगा।

यदि हिंदी, शब्द-व्युत्पत्ति और भाषा के भविष्य में आपकी रुचि है, तो इस सार्थक विमर्श का हिस्सा अवश्य बनें।

द्वितीय सत्र : अपराह्ण 02-04 बजे।

बहुत से हिन्दीप्रेमी मिलने आ रहे हैं, इसलिए मैं पहले ही पहुँच जाऊँगा। आइए!

आपकी स्नेहिल उपस्थिति की प्रतीक्षा रहेगी।

आपका ही,
कमल

UPSC में 2 साल में पथज्योति आई ए एस ने 15 से ज्यादा सेलेक्शन दिए हैं। आपके लिए भी अपनी तैयारी को सफलता की ओर ले जाने का ...
06/07/2026

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🚨 क्या आपकी  तैयारी वास्तव में UPSC परीक्षा के लिए पर्याप्त है? 🚨UPSC में सफलता केवल अधिक पढ़ने से नहीं मिलती, बल्कि निय...
22/06/2026

🚨 क्या आपकी तैयारी वास्तव में UPSC परीक्षा के लिए पर्याप्त है? 🚨

UPSC में सफलता केवल अधिक पढ़ने से नहीं मिलती, बल्कि नियमित मूल्यांकन, सही दिशा में सुधार और परीक्षा जैसी परिस्थितियों में अभ्यास से मिलती है।

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