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IAS की तैयारी करें मात्र 999 में.....Pathjyoti IAS starting Admission in Mock Test Program for UPSC Prelims Examination ...
10/03/2026

IAS की तैयारी करें मात्र 999 में.....

Pathjyoti IAS starting Admission in Mock Test Program for UPSC Prelims Examination 2027.

There will be 60 Mock Tests

Mock Test will be in Hindi and English and Online and Offline mode both.

Those who will take admission in Prelims program will also get guidance for Mains and Interview.

fee is 999 Only.

हम UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2027 के लिए मॉक टेस्ट प्रोग्राम में प्रवेश शुरू कर रहे हैं। इसमें 60 मॉक टेस्ट होंगे। मॉक टेस्ट हिंदी और अंग्रेजी में होंगे और ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में आयोजित किए जा सकेंगे। प्रारंभिक परीक्षा कार्यक्रम में प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के लिए भी मार्गदर्शन मिलेगा। संपूर्ण शुल्क मात्र 999 रुपये है।

https://forms.gle/CXou7Kirh6HsSfDP6

जिनको भी एडमिशन लेना है दिया गया गूगल फॉर्म भर दें।

09/03/2026

We are starting Admission in Mock Test Program for UPSC Prelims Examination 2027.
There will be 60 Mock Tests

Mock Test will be in Hindi and English and Online and Offline mode both.

Those who will take admission in Prelims program will also get guidance for Mains and Interview.

Registration fee is 999 Only.

हम UPSC प्रारंभिक परीक्षा 2027 के लिए मॉक टेस्ट प्रोग्राम में प्रवेश शुरू कर रहे हैं। इसमें 60 मॉक टेस्ट होंगे। मॉक टेस्ट हिंदी और अंग्रेजी में होंगे और ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों मोड में आयोजित किए जा सकेंगे। प्रारंभिक परीक्षा कार्यक्रम में प्रवेश लेने वाले उम्मीदवारों को मुख्य परीक्षा और साक्षात्कार के लिए भी मार्गदर्शन मिलेगा। पंजीकरण शुल्क मात्र 999 रुपये है।

https://forms.gle/CXou7Kirh6HsSfDP6

जिनको भी एडमिशन लेना है दिया गया गूगल फॉर्म भर दें।


Success stories are going on . In 2025  exam ,again, we have the inspirational soul . Join us to create history for 2026...
09/03/2026

Success stories are going on . In 2025 exam ,again, we have the inspirational soul . Join us to create history for 2026 / 2027 exam aspirants start.

A Great success story of PATHJYOTI IAS. 9 candidates finally selected in civil services 2025 exam under guidance of Shri...
06/03/2026

A Great success story of PATHJYOTI IAS.
9 candidates finally selected in civil services 2025 exam under guidance of Shri Virendra Ojha Sir.
1. Manika Gupta Rank 127
2. Gaurav Ojha Rank 204
3. Tanmay Rank 229
4. Ankit Raushan Rank 255
5. Vishal Pattanayak Rank 341
6. Darshana Singh Baghel Rank 383
7. Akash Purohit Rank 416
8. Shubham Kumar Rank 634
9. Himanshu Raj Rank 704

Thanks to all who supported our cause and vision.

The 2026 prelims exam module is at final and decisive phase .We are announcing soon 2027 prelims exam . You may join the 2027 exam what’s app group. We will announce further on that chat.

https://chat.whatsapp.com/Iu3TFiVp85V1RruQKg5i1G?mode=gi_t

Congratulations
06/03/2026

Congratulations

30/12/2025

विकसित भारत—गारंटी फॉर रोज़गार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025 भारत की ग्रामीण रोज़गार नीति में एक मौलिक वैचारिक और संरचनात्मक परिवर्तन को दर्शाता है। यह अधिनियम औपचारिक रूप से महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोज़गार गारंटी अधिनियम, 2005 (MGNREGA) को निरस्त करता है, परंतु रोज़गार को एक अधिकार के रूप में समाप्त नहीं करता; बल्कि उसे विकास-आधारित, योजना-प्रधान और परिसंपत्ति-सृजन से जुड़ी गारंटी में रूपांतरित करता है। अधिनियम के तहत ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के मज़दूरी रोज़गार की वैधानिक गारंटी दी गई है, जो पूर्ववर्ती व्यवस्था की तुलना में संख्यात्मक विस्तार है।

हालाँकि, इस विस्तार के साथ अधिकार की प्रकृति में सूक्ष्म किंतु महत्वपूर्ण बदलाव दिखाई देता है। अब रोज़गार शुद्ध माँग-आधारित न होकर विकसित ग्राम पंचायत योजना से उत्पन्न कार्यों तक सीमित है, जिन्हें ब्लॉक, ज़िला और राज्य स्तर पर समेकित कर राष्ट्रीय ग्रामीण अवसंरचना स्टैक में जोड़ा जाता है। इससे रोज़गार गारंटी का स्वरूप आजीविका सुरक्षा से हटकर संरचित विकास हस्तक्षेप का हो जाता है। जल-सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना, आजीविका परिसंपत्तियाँ और जलवायु आपदा-निवारण जैसे विषयों पर बल देकर यह अधिनियम रोज़गार को दीर्घकालिक उत्पादक परिसंपत्तियों के निर्माण से जोड़ता है।

एक महत्त्वपूर्ण नया प्रावधान यह है कि पीक कृषि मौसम में 60 दिनों तक कार्य न कराने का प्रावधान किया गया है, जिससे कृषि श्रम की उपलब्धता सुनिश्चित हो सके। यह MGNREGA पर लगे उस आलोचनात्मक आरोप को स्वीकार करता है कि वह कृषि मज़दूरी बाज़ार को विकृत करता था। संघीय ढाँचे में भी सूक्ष्म बदलाव दिखता है—यद्यपि यह योजना केंद्र प्रायोजित बनी रहती है, परंतु मानक आवंटन (normative allocation) केंद्र द्वारा तय किया जाएगा और उससे अधिक व्यय का भार राज्यों पर होगा।

अधिनियम का एक और केंद्रीय तत्व है डिजिटल और तकनीकी शासन—बायोमेट्रिक उपस्थिति, जियो-टैगिंग, रियल-टाइम डैशबोर्ड और AI आधारित ऑडिट—जो पारदर्शिता बढ़ाते हैं, पर साथ ही बहिष्करण और निगरानी संबंधी चिंताएँ भी उत्पन्न करते हैं। समग्र रूप से, यह अधिनियम ग्रामीण रोज़गार को कल्याणकारी आय-सहायता से आगे बढ़ाकर विकासोन्मुख सार्वजनिक निवेश का उपकरण बनाता है, जो विकसित भारत @2047 की दीर्घकालिक दृष्टि के अनुरूप है

Happy birthday Respected Virendra Ojha Sir वीरेंद्र ओझा (Virendra Ojha) सर 1993 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी ...
23/12/2025

Happy birthday Respected Virendra Ojha Sir

वीरेंद्र ओझा (Virendra Ojha) सर 1993 बैच के भारतीय राजस्व सेवा (IRS) अधिकारी हैं, जो वर्तमान में प्रधान आयकर आयुक्त के रूप में कार्यरत हैं। वह न केवल एक प्रशासनिक अधिकारी हैं, बल्कि एक लेखक, धावक (Ultra Marathon Runner) और यूपीएससी उम्मीदवारों के मेंटर के रूप में भी प्रसिद्ध हैं।
वीरेंद्र ओझा सर के बारे में मुख्य विवरण निम्नलिखित हैं:
पेशेवर करियर और शिक्षा प्रशासनिक सेवा: उन्होंने 1993 में IRS जॉइन किया था।
शिक्षा: उन्होंने इलाहाबाद विश्वविद्यालय (Allahabad University) से विज्ञान और कानून (Science and Law) में स्नातक की डिग्री प्राप्त की है।
सामाजिक पहल: मार्गदर्शन (Margdarshan)
वीरेंद्र ओझा सर यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों को मुफ्त मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए 'मार्गदर्शन' नाम से एक अभियान चलाते हैं। उनका उद्देश्य उन छात्रों की मदद करना है जिनके पास संसाधनों या कोचिंग की महंगी फीस भरने की क्षमता नहीं है। वह विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं और महिलाओं को सिविल सेवा में आने के लिए प्रोत्साहित करते हैं।
लेखन और साहित्य :
वह एक सक्रिय ब्लॉगर और लेखक भी हैं। उनकी प्रमुख कृतियों में शामिल हैं:
'इलाहाबाद डायरी: एक गैर मामूली दास्तान': इस पुस्तक के लिए उन्हें महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित करने की घोषणा की गई है।
दास्तान और भी हैं: इलाहाबाद डायरी का ही अगला भाग है।
इसके अलावा उन्होंने 'कुछ शब्द मेरे' जैसी अन्य काव्य रचनाएँ भी लिखी हैं।
उपलब्धियां और खेल:
अल्ट्रा मैराथन: वह एक कुशल धावक हैं। 2017 में उन्होंने दक्षिण अफ्रीका की प्रसिद्ध 'कॉमरेड्स मैराथन' (लगभग 89 किमी की दौड़) में हिस्सा लिया और कांस्य पदक (Bronze Medal) जीता।
वह 20 से अधिक हाफ मैराथन और कई फुल मैराथन पूरी कर चुके हैं।

वीरेंद्र ओझा (IRS) सर द्वारा संचालित 'पथज्योति' (Pathjyoti) अभियान, उनके व्यापक 'मार्गदर्शन' मिशन का ही एक डिजिटल और संस्थागत विस्तार है। यह विशेष रूप से उन मेधावी छात्रों के लिए बनाया गया है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं लेकिन सिविल सेवा (UPSC/PCS) में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं।

पथज्योति अभियान की मुख्य बातें नीचे दी गई हैं:
1. एक धर्मार्थ पहल (Charitable Venture)
पथज्योति का उद्देश्य कोचिंग के नाम पर होने वाले व्यवसायीकरण को चुनौती देना और शिक्षा को "नि:शुल्क" उपलब्ध कराना है। वीरेंद्र ओझा सर स्वयं इस मंच के माध्यम से ऑनलाइन क्लास लेते हैं।
2. प्रमुख सेवाएं और सुविधाएं
नियमित ऑनलाइन कक्षाएं: Pathjyoti IAS यूट्यूब चैनल और अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रति बजे लाइव कक्षाएं आयोजित की जाती हैं।
मॉक टेस्ट: यूपीएससी के नवीनतम सिलेबस के आधार पर हर रविवार को प्रीलिम्स के लिए मॉक टेस्ट आयोजित किए जाते हैं।
विषय-वार गहराई: इसमें इतिहास, राजनीति (Polity), और भूगोल जैसे विषयों पर विशेष लेक्चर सीरीज उपलब्ध हैं।
अध्ययन सामग्री: टेलीग्राम और व्हाट्सएप ग्रुप्स के माध्यम से छात्रों को महत्वपूर्ण नोट्स और अपडेट्स साझा किए जाते हैं।

3. भौतिक केंद्र (Physical Center)
प्रयागराज (इलाहाबाद) में इसका एक स्थायी केंद्र भी है, जहाँ छात्र सीधे मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं:
पता: 63F/1 स्टेनली रोड, बेली अस्पताल के पीछे, प्रयागराज (इलाहाबाद)-211002।

4. इस अभियान के तहत वीरेंद्र ओझा सर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी छात्रों को मुफ्त में सलाह देते हैं। इसमें शामिल हैं:
नोट्स बनाने की तकनीक: परीक्षा के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण विषयों को कैसे छाँटें।
साक्षात्कार (Interview) की तैयारी: व्यक्तित्व विकास और आत्मविश्वास बढ़ाने के टिप्स।
रणनीति निर्माण: कार्यबल और समय प्रबंधन कैसे किया जाए।

5. मिशन 'नेशन बिल्डिंग'
इस अभियान का विजन केवल परीक्षा पास कराना नहीं है, बल्कि "राष्ट्र निर्माण" के लिए समर्पित और संवेदनशील नौकरशाह तैयार करना है। वीरेंद्र ओझा सर अक्सर कहते हैं कि छात्रों को शहरों के महंगे स्टेडियमों (बड़ी कोचिंग क्लास) में नहीं, बल्कि सही मेंटरशिप के साथ कहीं से भी तैयार किया जा सकता है।

14/11/2025
09/11/2025

NCERT Books for UPSC Civil Services and Other Exams

28/10/2025

भारत में रिकॉर्ड न्यूनतम महंगाई और उसके आर्थिक प्रभाव (सितंबर 2025)

सितंबर 2025 में भारत की खुदरा महंगाई दर (Retail Inflation / CPI) घटकर 1.54% रह गई, जो पिछले 99 महीनों में सबसे कम है। यह गिरावट भारतीय रिज़र्व बैंक (RBI) और सरकार दोनों के लिए अहम संकेत है।

इस वित्तीय वर्ष में, अगस्त को छोड़कर हर महीने महंगाई में कमी आई है। वित्त वर्ष 2025–26 की पहली छमाही में औसत महंगाई दर 2.2% रही, जो RBI के 2%–6% के लक्ष्य दायरे में है। पहले जब महंगाई ऊँची थी, तब RBI लगातार कहता था कि उसका असली लक्ष्य 4% है, न कि केवल इस दायरे में रहना। अब जब महंगाई लगातार इससे नीचे है, तो चुनौती उलटी हो गई है — RBI को अब यह देखना है कि कीमतें बहुत नीचे न चली जाएँ, जिससे अर्थव्यवस्था की गति न धीमी पड़े।

कमजोर मांग का संकेत

कम महंगाई यह दिखाती है कि मांग (Demand) कमजोर है और सप्लाई (Supply) उससे ज़्यादा। यानी बाज़ार में चीज़ें तो भरपूर हैं, लेकिन लोग उतनी खरीदारी नहीं कर रहे। उदाहरण के लिए, कपड़े और जूते (Clothing and Footwear) की महंगाई सितंबर में सिर्फ 2.3% रही, और पिछले दो वर्षों से लगातार घट रही है।

यह स्थिति कुछ हद तक चीन (China) जैसी है, जहाँ उत्पादन ज़्यादा और घरेलू मांग कम है। फर्क यह है कि चीन अपनी अतिरिक्त वस्तुएँ निर्यात (Exports) करके बेच सकता है, जबकि भारत के लिए यह मुश्किल है क्योंकि इस समय वैश्विक व्यापार तनाव (Trade Tensions) के कारण निर्यात प्रभावित है।

सरकार और RBI की भूमिका

सरकार ने मांग बढ़ाने के लिए आयकर (Income Tax) और GST दरों में कटौती की। लेकिन अधिकांश परिवारों ने टैक्स से बची राशि को कर्ज चुकाने या बचत बढ़ाने में लगाया, न कि खर्च में। इससे बाजार में अपेक्षित मांग नहीं बढ़ी। अब ज़रूरत है कि लोगों की वास्तविक आय (Real Wages) और रोजगार बढ़ें ताकि वे ज़्यादा खर्च कर सकें।

RBI के पास अब मौका है कि वह दिसंबर 2025 की मौद्रिक नीति (Monetary Policy) बैठक में ब्याज दरें (Interest Rates) घटाए। इससे कर्ज सस्ता होगा, निजी निवेश (Private Investment) और उपभोग (Consumption) को बल मिलेगा। इस समय RBI को “विकास को प्राथमिकता (Support Growth)” देनी चाहिए, न कि ज़रूरत से ज़्यादा सतर्कता।

भविष्य की दिशा

RBI को अपनी महंगाई अनुमान प्रणाली (Inflation Forecasting) में सुधार करना होगा। अप्रैल में उसने महंगाई 4% बताई थी, लेकिन छह महीने में इसे घटाकर 2.6% करना पड़ा। यह बड़ी चूक है।

निष्कर्षतः, इतनी कम महंगाई भारत के लिए अवसर है — नीतिगत ढील (Policy Support) देकर मांग, रोज़गार और निजी निवेश को बढ़ाने का। तभी यह स्थिर कीमतें भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि (Sustainable Growth) में बदल पाएँगी।

#अर्थव्यवस्था #महंगाई #मौद्रिकनीति #सिविलसेवा

27/10/2025

चीन की अर्थव्यवस्था: 2025 में विकास और चुनौतियाँ

मित्रों, आज हम बात करेंगे वर्ष 2025 में चीन की अर्थव्यवस्था (Chinese Economy) की स्थिति पर। हाल ही में जारी आँकड़ों के अनुसार, चीन की पहली तिमाही (January–March) में 5.4%, दूसरी तिमाही (April–June)** में 5.2%, और तीसरी तिमाही (July–September) में 4.8% की वृद्धि दर (Growth Rate) रही है। यानी, चीन अपने 5% वार्षिक लक्ष्य (Annual Target) के करीब तो है, लेकिन वृद्धि की रफ्तार धीमी हो रही है।

यह गिरावट ऐसे समय में आई है जब अमेरिका और चीन (US-China) के बीच टैरिफ समझौते (Tariff Truce) को कई बार बढ़ाया गया है। दोनों देश अब दुर्लभ खनिज (Rare Earth Minerals) और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (Artificial Intelligence) जैसे क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं।

विशेषज्ञ लिज़ी सी. ली (Lizzi C. Lee) के अनुसार, चीन की अर्थव्यवस्था “स्थिर लेकिन कमज़ोर (Stable but Not Strong)” है। औद्योगिक उत्पादन (Industrial Output) अच्छा है, पर खपत (Consumption) और निवेश (Investment) कमजोर हैं। इसका अर्थ है कि आपूर्ति पक्ष (Supply Side) तो मज़बूत है, पर मांग पक्ष (Demand Side) में लोगों और कंपनियों का भरोसा घटा है।

निर्यात (Exports) के आँकड़े दिखाते हैं कि चीन का व्यापारिक ढाँचा बदल रहा है। अमेरिका को निर्यात घटा है, जबकि ASEAN देशों और बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से जुड़े देशों को निर्यात बढ़ा है। यानी, चीन अपने व्यापार को विविध (Diversify) कर रहा है ताकि टैरिफ के असर को कम कर सके।

सबसे बड़ी चिंता है रियल एस्टेट संकट (Property Crisis)। पहले यह चीन की अर्थव्यवस्था की रीढ़ था, लेकिन अब घरों के दाम गिर रहे हैं और लोगों की खरीद शक्ति (Purchasing Power) घट रही है। इससे घरेलू खपत (Domestic Consumption) कमजोर हुई है। साथ ही, कॉरपोरेट मुनाफा (Corporate Profit) और रोज़गार (Employment) भी घटे हैं।

इसके अलावा, स्थिर पूंजी निवेश (Fixed Asset Investment) में भी गिरावट आई है — लगभग 0.5% सालाना कमी। यह केवल रियल एस्टेट नहीं, बल्कि निजी कंपनियों के घटते भरोसे (Confidence) को भी दिखाता है। सरकार ने 500 अरब युआन (Yuan) के वित्तीय पैकेज (Fiscal Injection) की घोषणा की है, लेकिन यह अस्थायी राहत है।

चीन की सरकार अब दो बड़ी चुनौतियों से जूझ रही है — धीमी वृद्धि (Slow Growth) और निजी क्षेत्र में विश्वास बहाली (Restoring Private Sector Confidence)।

अंत में, कहा जा सकता है कि चीन की अर्थव्यवस्था लचीली (Resilient) तो है, पर उसे अब नीति स्थिरता (Policy Stability), रोज़गार सृजन (Job Creation) और घरेलू मांग (Domestic Demand) को बढ़ाने की दिशा में काम करना होगा। आने वाले महीनों में चीन को “स्थिरता के साथ सुधार (Stability with Reform)” के रास्ते पर आगे बढ़ना होगा।

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22/10/2025

Economist पत्रिका में एक लेख प्रकाशित हुआ है — सूरज की रोशनी के स्वास्थ्य लाभ और उच्च अक्षांशों पर उसका प्रभाव (Scientific Geography Perspective)

सामान्य धारणा यह है कि सूर्य की अल्ट्रावायलेट (Ultraviolet - UV) किरणें त्वचा के लिए हानिकारक होती हैं और त्वचा कैंसर (Skin Cancer) का जोखिम बढ़ाती हैं। परंतु हाल के वैज्ञानिक शोध बताते हैं कि नियंत्रित और संतुलित सूर्य-प्रकाश (Balanced Sun Exposure) मानव स्वास्थ्य के लिए अत्यंत लाभदायक है।

सूरज की रोशनी हमारे शरीर में विटामिन D (Vitamin D) का निर्माण करती है, जो हड्डियों, प्रतिरक्षा तंत्र और हृदय स्वास्थ्य के लिए आवश्यक है। इसके अतिरिक्त, सूर्य-प्रकाश रक्तचाप को नियंत्रित करने, मानसिक स्वास्थ्य सुधारने तथा अवसाद (Depression) को कम करने में भी सहायक सिद्ध हुआ है। उच्च अक्षांश वाले देशों जैसे स्कॉटलैंड और नॉर्वे में किए गए अध्ययनों से पता चला है कि जिन लोगों को कम सूर्य-प्रकाश मिलता है, उनमें हृदय रोग (Cardiovascular Diseases) और मृत्यु-दर अधिक होती है।

अब यह समझना आवश्यक है कि उच्च अक्षांशों पर सूर्य की किरणें कम क्यों पहुँचती हैं।
पृथ्वी अपनी धुरी पर 23.5° झुकी हुई (Tilted Axis) है। भूमध्य रेखा (Equator) के निकट सूर्य की किरणें सीधी (Direct Rays) पड़ती हैं, जिससे अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है। किंतु जैसे-जैसे हम ध्रुवों (Poles) की ओर बढ़ते हैं, किरणें तिरछे कोण (Oblique Angle) से गिरती हैं, जिससे ऊर्जा बड़े क्षेत्र में फैल जाती है और तीव्रता घट जाती है। इसके अलावा, वहाँ किरणों को वायुमंडल (Atmosphere) से अधिक दूरी तय करनी पड़ती है, जिससे वे बिखर (Scatter) जाती हैं। सर्दियों में वहाँ दिन छोटे और रातें लंबी होती हैं, और बर्फ़ व बादलों की परावर्तन (Reflection) क्षमता अधिक होने के कारण अधिकांश प्रकाश वापस अंतरिक्ष में लौट जाता है।

इस प्रकार, इन क्षेत्रों में सूर्य-प्रकाश की कमी से विटामिन D की कमी, हड्डियों की दुर्बलता (Bone Weakness) और सीज़नल अफेक्टिव डिसऑर्डर (Seasonal Affective Disorder - SAD) जैसी समस्याएँ उत्पन्न होती हैं। वैज्ञानिकों के अनुसार, थोड़ी-बहुत नियंत्रित धूप — विशेषकर सुबह या शाम की हल्की किरणें — स्वास्थ्य के लिए लाभकारी होती हैं और यह जोखिम की तुलना में अधिक उपयोगी साबित होती हैं।

निष्कर्ष (Conclusion):
वैज्ञानिक भूगोल के अनुसार, पृथ्वी की स्थिति, अक्षांश (Latitude) और सूर्य-किरणों के कोण (Solar Angle) हमारे जीवन पर सीधा प्रभाव डालते हैं।
इसलिए कहा जा सकता है —

“अत्यधिक धूप हानिकारक है, परंतु पर्याप्त धूप जीवन का आधार है।”

संतुलन ही स्वास्थ्य का सबसे बड़ा नियम है — यही Scientific Geography का सुंदर संदेश है।


स्वास्थ्य/जीवनशैली #स्वस्थरहें #धूपकेफायदे
भूगोल/विज्ञान #पृथ्वीकाझुकाव #विज्ञान
समस्या/समाधान (Seasonal Affective Disorder)
स्थान विशिष्ट #भारत
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