30/04/2026
#2589वें त्रिविध पावनी वैशाख #बुद्धपूर्णिमा (01 मई 2026, दिन-शुक्रवार) के मंगल अवसर पर आप सभी धम्म बन्धुओं को हार्दिक बधाई, मंगल कामनाएं, जय भारत, नमो बुद्धाय ।
#करुणा बुद्धिज्म का मूल तत्व है। मानव समाज में करुणा के अनेक रूप हैं जैसे प्रेम, दया, प्यार और मुहब्बत आदि । करुणा के अतिरिक्त #मानवता के धम्म कार्यों की प्रधानता भी #बुद्धिज्म की एक अपनी अलग पहचान है।
मानवता और करुणा एक दूसरे के सम्पूरक हैं, जो व्यक्ति जितना अधिक करुणाशील होगा वह उतना ही मानवता के कार्यों को क्रियाशील करेगा और तो और बार - बार मानवता के कार्यों को करने से मानव हृदय में करुणा की बढ़ोत्तरी होती है।
बुद्धिज्म को परिभाषित करते हुए प्रसिद्ध वैज्ञानिक और भौतिक शास्त्री #अल्बर्टआइंस्टीन ने कहा था कि "बौद्ध धर्म भविष्य का धर्म होगा।" उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई धर्म आधुनिक वैज्ञानिक आवश्यकताओं को पूरा कर सकता है, तो वह बौद्ध धर्म ही है ।
#बुद्धिज्म का मुख्य लक्ष्य मानव को मानव बनाना होता है। कोई भी व्यक्ति त्रिशरण, पंचशील, अष्टशील और दस पारमिताओं को अपनाकर एक सभ्य मानव बन सकता है। सभ्य मानव ही समता,करुणा, स्वतंत्रता और मानवता का एक सभ्य मानव समाज का निर्माण कर सकता है।
#बुद्धिज्म के 2500 वर्षों के सफल इतिहास में दान, ध्यान और त्याग का भी अपना महत्त्वपूर्ण योगदान रहा है।
#बुद्धिज्म का विशेष ध्यान पद्धति #विपासना आज भी अनेक लोगों को #शारीरिकस्वास्थ्य और #मानसिकशान्ति प्रदान कर रहा है।
#बुद्धिज्म के विकास में #दान का अद्वितीय योगदान रहा है। चाहे अनाथपिंडक का जेतवन महाविहार हो या बिम्बिसार का वेणुवन महाविहार हो या सुजाता का पूर्वाराम महाविहार, सभी #दान से ही निर्मित थे। यहां तक आधुनिक काल में #पालीभाषा, #बुद्धिज्म के क्षेत्र विशेष और #धम्मलिपि के पठन के महान कार्य के क्रम में मा. जेम्स प्रिंसेज महोदय जी ने #दानं शब्द को सबसे पहले पढ़ने में सफलता प्राप्त किए थे।
#बुद्धिज्म के प्रसार और मानव को सभ्य बनाने के क्रम में #त्याग के अनेक उदाहरण हैं। बुद्ध स्वयं अपना राज- पाठ, पिता, पुत्र, शाक्य परिवार और पत्नी का #त्याग किए थे। सम्राट अशोक महान #बुद्धिज्म के प्रचार और प्रसार में अपने पुत्र और पुत्री को समर्पित कर दिए थे।
01 मई 2026 को #2589वें त्रिविध पावनी वैशाख #बुद्धपूर्णिमा महोत्सव विगत वर्षों की भांति इस वर्ष भी बुद्धिज्म अपने के मूल तत्व समता, स्वतंत्रता, मानवता, करुणा, प्रज्ञा, सील और समाधि के भविष्य को और सुदृढ़ करेगा।
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