10/04/2026
#सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण निर्णय में यह साफ कर दिया है कि केवल इस आधार पर मृतक की सैलरी से कटौती नहीं की जा सकती कि वह रिटायरमेंट के करीब था। जस्टिस राजेश बिंदल और जस्टिस विजय बिश्नोई की बेंच ने Sushila & Ors. v. Sudhakar & Anr. (SLP (Civil) No. 21717/2025) मामले में यह फैसला सुनाते हुए मुआवज़े की राशि में बड़ा इज़ाफा किया।
इस मामले में एक 59 वर्षीय रेलवे कर्मचारी की सड़क दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी। मोटर दुर्घटना दावा ट्रिब्यूनल (MACT) और बाद में हाईकोर्ट ने यह मानते हुए कि मृतक की नौकरी के केवल 6 महीने बचे थे, उसकी सैलरी में 50% की कटौती कर दी थी। इसी आधार पर मुआवज़ा तय किया गया, जिसे सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह गलत ठहराया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि मुआवज़े की गणना करते समय मृतक की “सालाना आय” को ही आधार बनाया जाएगा और ऐसी कोई भी कटौती, जिसका दुर्घटना से कोई संबंध नहीं है, कानूनन स्वीकार नहीं की जा सकती। अदालत ने यह भी दोहराया कि अगर दुर्घटना न होती, तो मृतक अपनी नौकरी जारी रखता और अपनी अंतिम सैलरी के अनुसार कमाता, इसलिए रिटायरमेंट के करीब होने का आधार बनाकर सैलरी कम करना न्यायसंगत नहीं है।
इसके साथ ही कोर्ट ने भविष्य की संभावनाओं (Future Prospects) को भी ध्यान में रखते हुए 10% की जगह 15% की वृद्धि लागू की। नतीजतन, जहां पहले MACT ने लगभग ₹11.37 लाख और हाईकोर्ट ने ₹14.05 लाख मुआवज़ा तय किया था, वहीं सुप्रीम कोर्ट ने इसे बढ़ाकर ₹23.51 लाख कर दिया।
ानूनीसलाह