22/06/2022
#अन्तर्राष्ट्रीय_योग_दिवस
आजादी के अमृत महोत्सव एवं 8वें अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के परिप्रेक्ष्य में भारत के गौरव और उत्कर्ष एवं विश्वयोग गुरू के रूप में भारत की यौगिक जीवन पद्धति जिसके माध्यम से प्रत्येक भारतीय के मन व हृदय में त्याग, अनुशासन, सेवा साधना, सत्संग व मानवता के लिए कार्य करना रहा है। भारत विश्वगुरू के रूप में सुःख शांति प्रेम बॉंटता रहा है और इसी योगमयी जीवनपद्धति को अपनाता रहा है। ज्ञान और विज्ञान के इसी तर्क को सिद्ध करने के उद्देश्य से अन्तर्राष्ट्रीय योग दिवस के माध्यम से पूरा विश्व इससे लाभान्वित हो रहा है और इसी अमृत योग सप्ताह के आयोजन के परिप्रेक्ष्य में पॉंच दिवसीय योग प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन दिनांक 17.06.2022 से दिनांक 21.06.2022 तक इंस्टीट्यूट ऑफ एडवांस्ड स्टडी इन एजुकेशन (आई0ए0एस0ई0) प्रयागराज में संस्थान की प्राचार्य/अपर शिक्षा निदेशक ललिता प्रदीप के निर्देशन में संस्थान के परिसर में आयोजित किया गया। जिसमें 100 से अधिक प्रशिक्षणार्धियों ने प्रतिभाग किया।
प्रथम दिवस कार्यक्रम का शुभारम्भ कार्यक्रम समन्वयक प्रोफेसर सन्तराम सोनी एवं श्री अशोक नाथ तिवारी (रीडर), श्री रमेश तिवारी (रीडर) ने मॉ सरस्वती की मूर्ति पर माल्यार्पण व दीप प्रज्वलित करके किया। सरस्वती वन्दना संस्थान की प्रवक्ता अमिता सिंह, डा0 मीनाक्षी पाल एवं डॉ0 रूपाली दिव्यम ने प्रस्तुत किया, कार्यक्रम का संचालन स्मिता जायसवाल ने किया।
प्राचार्य/अपर शिक्षा निदेशक, ललिता प्रदीप ने बताया कि जब हम स्वयं स्वस्थ होंगे तो देश अपने आप स्वस्थ हो जायेगा। उन्होंने सभी प्रतिभागियों को अपने विद्यालय में प्रतिदिन योग करने के भी निर्देश दिये।
प्रशिक्षण में कार्यशाला में विषय विशेषज्ञ के रूप में रूचि गुप्ता, मण्डल अध्यक्ष, प्रयागराज उ0प्र0 योग एसोसिएशन, श्री विक्रांत त्रिपाठी, आनन्द योगालय प्रयागराज, श्री संतोष सिंह, उत्तर प्रदेश योग एसोसिएशन, तूलिका जायसवाल आनन्द योगालय प्रयागराज, डॉ0 दीप्ति योगेश्वर उत्तर मध्य सांस्कृतिक केन्द्र प्रयागराज द्वारा योग प्रोटोकॉल के विभिन्न अभ्यासों को प्रतिदिन कराया गया। जिसमें चालन क्रियायें, ग्रीवा चालन, स्कंध संचालन, कटि संचालन, घुटना संचालन, योगासन जिसमें ताड़ासन, वृक्षासन, पादहस्तासन, अर्द्धचक्रासन, त्रिकोणासन, भद्रासन, वज्रासन, अर्द्ध उष्ट्रासन, उष्ट्रासन, शशकासन, उत्तानमंडूकासन, मरीचासन, करासन, भुजंगासन, शलभासन, सेतुबंधानसन, उत्तानपादासन, अर्द्धहालासन, पवनमुक्तासन, शवासन, कपाल भॉति, प्राणायाम, अनुलोम विलोम, भ्रामरी प्राणायाम, ध्यान शांतिपाठ
ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः ।
सर्वें भद्राणि पश्यन्तु, मॉ कश्चिद् दुःखभाग्भवेत्।।
ॐ शांतिःशान्तिः शान्तिः
करके कराया गया। समापन सत्र में धन्यवाद ज्ञापन श्री रमेश तिवारी (रीडर) आई0ए0एस0ई0 प्रयागराज द्वारा किया गया। संस्थान के सहयोगी सदस्यों श्री समीर, श्रीमती दरख्शां आब्दी, श्री रणजीत, श्रीमती मीनाक्षी पाल, डॉ0 सन्तोष खन्ना, डॉ0 रूपाली दिव्यम, श्री यशवन्त कुमार, श्री अरविन्द साहू का सहयोग रहा। योग प्रशिक्षण कार्यक्रम सह समन्वयक श्री उपेन्द्र नाथ सिंह, श्रीमती अमिता सिंह, श्रीमती स्मिता जायसवाल का विशेष सहयोग रहा।
साभार:-
IASE, प्रयागराज