उदय प्रताप सिंह

उदय प्रताप सिंह भारत को पुनः विश्वगुरु बनाने के लिये दृढ़ संकल्प

पूर्व प्रधानमंत्री स्व० श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि एवं नमन!
25/06/2021

पूर्व प्रधानमंत्री स्व० श्री विश्वनाथ प्रताप सिंह जी की जयंती पर विनम्र श्रद्धांजलि एवं नमन!

"चन्देलों की बेटी थी, गौंडवाने की रानी थीचण्डी थी रणचण्डी थी, वह दुर्गावती भवानी थी।" राज्य और धर्म की रक्षा के लिए अपना...
24/06/2021

"चन्देलों की बेटी थी, गौंडवाने की रानी थी
चण्डी थी रणचण्डी थी, वह दुर्गावती भवानी थी।"

राज्य और धर्म की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान देने वाली साहस और पराक्रम की प्रतिमूर्ति, महान वीरांगना रानी दुर्गावती जी के बलिदान दिवस पर उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि।

राष्ट्रहित में सदैव तत्पर रहने वाले महान देशभक्त, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के समर्थक, भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्रद्धेय...
23/06/2021

राष्ट्रहित में सदैव तत्पर रहने वाले महान देशभक्त, राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के समर्थक, भारतीय जनसंघ के संस्थापक श्रद्धेय डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी की पुण्यतिथि पर शत् शत् नमन।

भारत माता के लिए उनका संकल्प एवं विचार हम सभी के लिए अनुकरणीय है।

11/06/2021
05/11/2020

आईपीसी 306 के तहत दुराशय के होने का अनुमान नहीं बल्कि इसे स्पष्ट और विशिष्ट होना चाहिए, SC ने पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने में दोषी करार पति को बरी किया

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि आत्महत्या के लिए उकसाने [धारा 306 आईपीसी] की सामग्री को जाहिर तौर पर होने के अनुमान के तहत नहीं माना जा सकता बल्कि इसे स्पष्ट और विशिष्ट होना चाहिए।

जस्टिस एनवी रमना, जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस हृषिकेश रॉय की पीठ ने एक ऐसे पति की दोषसिद्धि को रद्द कर दिया है, जिस पर पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप था।

गुरचरण सिंह को अपनी पत्नी की आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया गया था। सिंह पर उनके माता-पिता के साथ आईपीसी की धारा 34 के तहत पढ़ी गई धारा 304 बी और 498 ए के तहत आरोप लगाए गए थे। हालांकि ट्रायल कोर्ट ने उल्लेख किया कि आईपीसी की धारा 304 बी और 498 ए के तहत उन्हें दोषी ठहराने के लिए सामग्री अपर्याप्त थी, लेकिन कहा कि भले ही पति के खिलाफ इसके लिए कोई आरोप तय नहीं किया गया हो, लेकिन उसे धारा आईपीसी की 306 के तहत पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी ठहराया जा सकता है। ट्रायल कोर्ट ने यह भी देखा कि एक विवाहित महिला की अपेक्षा उसके पति के हाथों प्यार और स्नेह और वित्तीय सुरक्षा होगी और यदि उसकी उम्मीदें किसी कृत्य से निराश होती हैं या पति की लापरवाही से, यह धारा 107 आईपीसी के अर्थ के भीतर उकसावे को उत्पन्न करेगा और धारा 306 आईपीसी के तहत सजा को आकर्षित करेगा।
उच्च न्यायालय ने ट्रायल कोर्ट के उस दृष्टिकोण का समर्थन किया कि मृतक को वैवाहिक घर में परिस्थितियों और माहौल से आत्महत्या करने के लिए धकेल दिया गया था और आरोपी द्वारा दायर अपील को खारिज कर दिया था।
उसकी अपील पर विचार करते हुए, पीठ ने कहा कि पति पर या ससुराल वालों के खिलाफ क्रूरता का न तो कोई प्रत्यक्ष प्रमाण है और न ही यह दिखाने के लिए है कि मृतक की विशेष आशा को या अपेक्षा पति द्वारा निराश की गई थी।
पीठ ने उल्लेख किया,

"अपने पति और ससुराल वालों से मृतक की अपेक्षा का स्तर और उसकी हताशा का स्तर क्या हो सकता है, यदि कोई हो, तो रिकॉर्ड पर किसी भी सबूत के माध्यम से नहीं पाया गया है। पति द्वारा अधिक लापरवाही, अभियोजन पक्ष द्वारा नहीं दिखाई जा सकी है।"

भारतीय दंड संहिता की धारा 107 का हवाला देते हुए, पीठ ने कहा कि जब भी कोई व्यक्ति किसी कार्य या चूक करने के लिए भड़काता है या किसी अवैध कार्य में सहायता करता है, तो किसी व्यक्ति को उस चीज को करने के लिए उकसाना कहा जा सकता है।

यह कहा:

"जैसा कि सभी अपराधों में, दुराशय की स्थापना की जानी है। आईपीसी की धारा 107 के तहत निर्दिष्ट अपराध को साबित करने के लिए, एक विशेष अपराध करने के लिए मनो:स्थिति दिखाई देनी चाहिए, ताकि दोष का निर्धारण किया जा सके। दुराशय को साबित करने के लिए, रिकॉर्ड में यह स्थापित करने या दिखाने के लिए कुछ होना चाहिए कि अपीलकर्ता के पास एक दोषी दिमाग था और उस मन की अवस्था में, मृतक को आत्महत्या के लिए उकसाया।"

दुराशय के घटक को मूल रूप से मौजूद होने के लिए ग्रहण नहीं किया जा सकता है, लेकिन इसे दृश्यमान और विशिष्ट होना चाहिए। हालांकि, वर्तमान मामले में क्या हुआ है कि ट्रायल कोर्ट और हाई कोर्ट दोनों ने कभी इस बात की जांच नहीं की कि अपीलकर्ता का अपराध के लिए दुराशय था या नहीं, वह इसके लिए प्रतिबद्ध था।

पीठ ने फैसले को एसएस छेना बनाम विजय कुमार महाजन (2010) 12 एससीसी 190, अमलेंदु पाल उर्फ ​​झंटू बनाम पश्चिम बंगाल राज्य (2010) 1 एससीसी 707, मंगत राम बनाम हरियाणा राज्य (2014) 12 एससीसी 595 के रूप में भी संदर्भित किया जो धारा 306 आईपीसी के तहत अपराध के लिए आवश्यक सामग्री पर चर्चा करते हैं।

रिकॉर्ड पर सबूतों को ध्यान में रखते हुए, बेंच ने अपील की अनुमति देते हुए कहा :

"कानून की उपरोक्त समझ के साथ आगे बढ़ना और वर्तमान मामले में तथ्यों का अनुपात लागू करने से, यह स्पष्ट है कि अपनी मृतक पत्नी की उचित देखभाल करने में अपीलकर्ता की ओर से कोई भी गलत कृत्य या अवैध चूक नहीं देखी जाती है। सबूत यह भी नहीं दर्शाता है कि मृतक को अपने पति से लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इस आशय के लिए माता-पिता या किसी अन्य अभियोजन पक्ष के गवाहों द्वारा कोई भी गवाही नहीं दी गई है।

ट्रायल कोर्ट और हाईकोर्ट ने अप्राकृतिक मौत पर और बिना किसी सबूत के केवल अनुमानों के माध्यम से निष्कर्ष निकाला कि अपीलकर्ता अपनी पत्नी को आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी है। ऐसी परिस्थितियों में, हमें यह घोषित करने में कोई संकोच नहीं है कि ट्रायल कोर्ट और उच्च न्यायालय ने गलत निष्कर्ष निकाला है कि मृतक को वैवाहिक घर में परिस्थितियों या माहौल से आत्महत्या करने के लिए प्रेरित किया गया था। यह सामग्री के समर्थन के बिना, एक अनुमान से ज्यादा कुछ नहीं है। इसलिए, आईपीसी की धारा 306 के तहत अपीलकर्ता की सजा बरकरार रखने का आधार नहीं हो सकता।"

05/11/2020

#अर्णव #गिरफ्तारी
तत्काल किसी ऐसे सबूत के बिना सिर्फ़ उत्पीड़न का आरोप लगाना आईपीसी की धारा 306 के तहत सज़ा दिलाने के लिए पर्याप्त नहीं : सुप्रीम कोर्ट [निर्णय पढ़े]

सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर कहा है कि आईपीसी की धारा 306 के तहत लाया गया कोई भी मामला, सिर्फ़ उत्पीड़न के ही आरोप पर नहीं टिक सकता। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए घटना के होने के समय, आरोपी की ओर से किये गए कोई तत्काल कार्य का सबूत होना ज़रूरी है, जिससे यह साबित हो कि आरोपी द्वारा मृतक को आत्महत्या के लिए बाध्य किया गया।

न्यायमूर्ति एल. नागेश्वर राव और न्यायमूर्ति एम. आर. शाह ने Rajesh vs. State of Haryana मामले में हाईकोर्ट के एक फ़ैसले के ख़िलाफ़ की गई अपील पर सुनवाई करते हुए यह बात कही।

हाईकोर्ट ने आरोपी राजेश को हत्या के लिए उकसाने का दोषी पाया था और उसकी सज़ा को जायज़ ठहराया था। उसके बहनोई अरविंद (मृतक) ने आत्महत्या से पहले लिखे अपने नोट में लिखा था कि उसके ख़िलाफ़ दहेज माँगने का झूठा आरोप लगाया गया और उसके ख़िलाफ़ एक पंचायत हुई, जिसमें उसे आरोपी ने थप्पड़ मारा था।

वह यह उत्पीड़न बर्दाश्त करने की स्थिति में नहीं था और इसके चलते वह आत्महत्या जैसा क़दम उठाने पर मजबूर हुआ। उसने लिखा था कि आरोपी सहित उसके रिश्तेदार भी, उसकी मौत के लिए ज़िम्मेदार हैं।

पीठ ने कहा, "…जिस व्यक्ति पर यह अपराध करने का आरोप लगा है उसके द्वारा उकसाने की कार्रवाई को अभियोजन को अवश्य ही साबित करना चाहिए और तभी उसे आईपीसी की धारा 306 के तहत दोषी ठहराया जा सकता है।" पीठ ने यह भी कहा कि ग़ुस्से में कही गई बातें या ग़ैर इरादतन चूक को उकसाना नहीं कहा जा सकता।

पीठ ने कहा कि सितम्बर 2001 में हुई पंचायत और थप्पड़ मारने की घटना और अरविंद द्वारा 23.02.2002 को की गई आत्महत्या के बीच कोई संबंध नहीं है। सिर्फ़ इसलिए कि उसने थप्पड़ मारा, आरोपी को इस आधार पर आत्महत्या के लिए उकसाने का दोषी नहीं माना जा सकता।

आरोपी द्वारा दाखिल अपील स्वीकार करते हुए अदालत ने कहा कि आरोपी की ओर से मृतक को न तो आत्महत्या के लिए उकसाया गया और न ही उसे इसके लिए उत्साहित किया गया और इस तरह उसे इसके लिए ज़िम्मेदार नहीं माना जा सकता।

राम जन्मभूमि आंदोलन करने वाले मुख्य 10 क्रान्तिकारी जिन्हें आने वाली पीढ़ी भी जाने। ये है श्री अशोक सिंघल जीश्री प्रवीण त...
30/07/2020

राम जन्मभूमि आंदोलन करने वाले मुख्य 10 क्रान्तिकारी जिन्हें आने वाली पीढ़ी भी जाने। ये है
श्री अशोक सिंघल जी
श्री प्रवीण तोगड़िया जी
श्री लालकृष्ण आडवाणी जी
श्री मुरली मनोहर जोशी जी
साध्वी ऋतुमभरा जी
उमा भारती जी
श्री कल्याणसिंह जी
श्री विनय कटियार जी
श्री विष्णु हरी डालमिया जी
।।जय जय श्री राम।।

16/07/2020

वह रोजगार दो दया निधे,
परिवार का पालन कर सके,
बन्द फ़ैक्टरियों को चालू कर दे,
हम जीवन सफल बना पाए,
हम दीन, दुखी, निबले, बिफले,
सेवक बन कर संताप हरे,
हम है कोविड से पीडितनिधे,
हमको तारे खुद तर जाए,
वह रोजगार दो दया............
रोटी खातिर हम दर दर भटके,
कपड़ा हमसे दूर हुया,
जीवन नरक बना है अपना,
सुख शांति कोरोना ने हर लिया,
कोई मदद को नही अपना,
खाने को हम दर दर भटके,
वह रोजगार दो दया निधे,
परिवार का पोषण कर सके,
निज आन मान मर्यादा का प्रभु ध्यान रहे, अभिमान रहे,
इस पुष्प राष्ट्र के निर्माण को ,
बन्द फैक्ट्री चालू करवाये,
हम कैसे आत्मनिर्भर होए,
बन्द पड़ी फ़ैक्टरिया यहाँ,
वह रोजगार दो दया निधे,
परिवार का भरण कर सके,
जय हिंद, जय भारत।

15/07/2020

वैश्विक महामारी कोरोना जहाँ दिन दुगुनी रात चौगुनी की गति से जनमानस को अपने चंगुल में ले रही है , वही बहुत जल्द देश आर्थिक संकट के साथ साथ वेरोजगार की भयावह स्थिति में पहुचने वाला है।
चीन से सीमा विवाद के बाद उसके साथ भारत का संबंध अच्छा न होने के कारण और वैश्विक महामारी कोरोना में।लॉकडाउन की वजह से मोदी सरकार ने देश को आत्मनिर्भर होने के लिये बहुत बड़ा राहत पैकेज दिए लेकिन ये राहत पैकेज सरकारी योजना बनकर रह गया।
चार माह से अधिक लॉक डाउन हो जाने के बाद भी उत्तर प्रदेश सरकार अभी तक रोजगार के लिए कोई भी प्रभावी निर्णय नही ले पाई है।
लगभग 40 लाख से अधिक लोग दूसरे प्रदेश में प्राइवेट नौकरी व मजदूरी करने वाले लोग परिवार सहित उत्तर प्रदेश में वापस आ गए है, अब इस परिवारों के सामने बहुत बड़ी आर्थिक संकट की स्थिति है और अगर समय रहते इनको रोजगार न दिया गया तो शायद कोरोना से भी खतरनाक स्थित उत्पन्न हो जाय।
इस अवस्था मे प्रयागराज स्थिति नैनी औधोगिक क्षेत्र में बंद पड़ी फैक्टरियों को तत्काल चालू किया जाना नितांत आवश्यक है।
अगर उत्तर प्रदेश व केंद्र सरकार बन्द यूनिटों को प्रोत्साहन दे कर तत्काल शुरू कर दे तो प्रत्यक्ष रूप से लगभग पचास हजार रोजगार का सृजन हो सकता है और अप्रत्यक्ष रूप से लाखों लोगों को रोजगार मिल जाएगा।
जहाँ एक तरफ वेरोजगरी की वजह से तमाम परिवार समाप्त होने से बचे गे वही दूसरी तरफ देश आत्मनिर्भर भी होगा और हम चीन जैसे धूर्त देश को एक संदेश भी देगे की अब हमें तुमारी जरूरत नही।
राष्ट्रीय हिन्दू संगठन हमेशा से जनहित काम करता चला आ रहा है, जब कभी भी किसी का भी समाज का शोषण हुया, देश की संस्कृत व सभ्यता के साथ खिलवाड़ हुया उसकी रक्षा के लिए, उसके अधिकार की रक्षा के लिए संगठन जी जान से खड़ा रहा है।
नैनी में बंद पड़ी फ़ैक्टरियों को पुनः शुरू करने के लिए संगठन एक आंदोलन की नींव रख चुका है जिसका नाम "नैनी औधोगिक क्रांति'' है, के बैनर तले माननीय जिलाधिकारी व मंडलायुक्त को इस आशय का ज्ञापन दिया जा चुका है जल्द से जल्द बन्द फ़ैक्टरियों को चालू कर के लोगो को रोजगार दिया जाय अन्यथा एक प्रदेश व्यापी और इसके बाद राष्ट्र व्यापी आंदोलन संगठन करेगा जो सरकार के नीतियों एवं योजनाओ के खिलाफ होगा।
इस मुहिम से जुड़े और कोरोना से भी खतरनाक और भयावह स्थित वेरोजगरी से उत्पन्न होने वाली है जैसा हम सब देख पा रहे है।
जय हिंद, जय भारत।

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