Awadhesh Sah

Awadhesh Sah karm karo phal ki chinta mat karo

एक स्कूल ने अपने युवा छात्रों के लिए एक मज़ेदार यात्रा का आयोजन किया,रास्ते में वे एक सुरंग से गुज़रे, जिसके नीचे से पहले ...
04/12/2023

एक स्कूल ने अपने युवा छात्रों के लिए एक मज़ेदार यात्रा का आयोजन किया,
रास्ते में वे एक सुरंग से गुज़रे, जिसके नीचे से पहले बस ड्राइवर गुज़रता था..
सुरंग के किनारे पर लिखा था पांच मीटर की ऊँचाइ..

बस की ऊंचाई भी पांच मीटर थी इसलिए ड्राइवर नहीं रुका.. लेकिन इस बार बस सुरंग की छत से रगड़ कर बीच में फंस गई, इससे बच्चे भयभीत हो गए..

बस ड्राइवर कहने लगा "हर साल मैं बिना किसी समस्या के सुरंग से गुज़रता हूं, लेकिन अब क्या हुआ?

एक आदमी ने जवाब दिया :

सड़क पक्की हो गई है इसलिए सड़क का स्तर थोड़ा बढ़ा दिया गया है..

वहाँ एक भीड़ लग गयी..

एक आदमी ने बस को अपनी कार से बांधने की कोशिश की, लेकिन रस्सी हर बार रगड़ी तो टूट गई, कुछ ने बस खींचने के लिए एक मज़बूत क्रेन लाने का सुझाव दिया और कुछ ने खुदाई और तोड़ने का सुझाव दिया..

इन विभिन्न सुझावों के बीच में एक बच्चा बस से उतरा और बोला "टायरों से थोड़ी हवा निकाल देते हैं तो वह सुरंग की छत से नीचे आना शुरू कर देगी और हम सुरक्षित रूप से गुज़र जाएंगे"..

बच्चे की शानदार सलाह से हर कोई चकित था और वास्तव में बस के टायर से हवा का दबाव कम कर दिया इस तरह बस सुरंग की छत के स्तर से गुज़र गई और सभी सुरक्षित बाहर आ गए..

घमंड, अहंकार, घृणा, स्वार्थ और लालच से हम लोगो के सामने फुले होते हैं। अगर हम अपने अंदर से इन बातों की हवा निकाल देते हैं तो दुनिया की इस सुरंग से हमारा गुज़रना आसान हो जाएगा..

समस्याएं हम में हैं हमारे दुश्मनों की ताक़त में नहीं..
Awadhesh

बापू जल्दी चलो कोचिंग का टाइम हो गया हैँ.... इतनी देर से लायें तुम रिक्शा .... कुछ छूट जायेगा तो कोनो नहीं समझायेगा मुझे...
04/12/2023

बापू जल्दी चलो कोचिंग का टाइम हो गया हैँ.... इतनी देर से लायें तुम रिक्शा .... कुछ छूट जायेगा तो कोनो नहीं समझायेगा मुझे.... चंचल रिक्शा चलाते अपने बापू से बोली....
बिटिया सबेरे 30 रूपये कमा आया... मुझे पता था तू लेट ना हो जायें इसलिये एक सवारी छोड़ आया.... तेरी कोचिंग का, पढ़ाई का पैसा भी तो जुटाना हैँ तेरे बापू को... ठंड में मुंह से धुआं निकालता शाल ओढ़े हुए चंचल का बापू बोला....
तो बापू मैं तो कह रही थी मुझे दो चार बच्चे पढ़ा लेने दो .... कितने बच्चे पढ़ने को आयें.... तुमने ही मना कर दी.... अब तो मेरी बी . एस .सी भी हो गयी थी....
मुझे नहीं पढ़वाना अपनी बिटिया पर बालक बच्चे... बस तू छोटी मोटी ही सही सरकारी नौकरी पा ले..... अपने पैरों पर खड़ी हो जा मेरी मुनिया... बस मेरा जीवन सफल हो जायेगा....मुझे ना चाहिए पैसा... बस तू पढ़ जायें इतना ही हो जायें ..... ठंड से कांप रहे हैँ दोनों बाप बेटी..... कोहरे को चीरते हुए बापू का रिक्शा बिटिया के सपनों को पूरा करने आगे बढ़ता जा रहा हैँ.... जिसके पैरों में ठंड से सूजन आ गयी हैँ....
लो बापू आ गयी कोचिंग.... चंचल रिक्शे से उतर गयी... अपनी पुरानी कई सालों से पहन रही जैकेट के आगे अपने बैग को कर लिया कि जैकेट का धुंधलापन छुप जायें .... चुपचाप सिकुड़ कर पीछे की सीट पर बैठ ज़ाती थी चंचल....
अबकि बार तुझे नयी जैकेट दिलवा दूँगा मुनिया.... बहुत पुरानी हो गयी ये... कैसे छुपाती फिरती हैँ.... रिक्शे से उतर अपनी बेटी को निहारता बापू बोला...
ना बापू अब तो सरकारी नौकरी लगने के बाद वो बड़ी वाली जैकेट लूँगी ज़िसमें पूरा शरीर ढक जाता हैँ...
ठाकुर जी तेरी इच्छा जल्दी पूरी करें .... ले 10 रूपये की ये मुंगफली लाया था वो तेरा जो बीच में खाने का समय होता हैँ खा लेना...
ठीक हैँ बापू ... थोड़ी तुम ले लो.... तभी कोचिंग का मालिक बाहर आया... चंचल को देख बोला... तुम रोज लेट आती हो... ऐसे कैसे क्रैक करोगी कम्पटीशन .... पता है ना नेक्स्ट वीक हैँ एसएससी का पेपर...
जी सर.... अब नहीं होंगी लेट ... जल्दी से बापू को नमस्ते कर चंचल कोचिंग के अंदर चली गयी...
मास्साब ... मेरी मुनिया मेरे कारण लेट हो ज़ाती हैँ... वो तो सुबह 6 बजे ही तैयार हो ज़ाती हैँ... कुछ छूट जाया करें तो दुबारा समझा दिया करो उसे... पैसों की फिकर ना करो आप... और दे दूँगा ... ज़ितनी फीस हैँ उस से बढ़कर दे दूँगा... बापू हाथ जोड़कर सर से बोला..
नहीं नहीं... ऐसी कोई बात नहीं.... वो हम समझा देंगे... जाओ अपनी रोजी रोटी देखो... बेटी के लिए हम हैँ....
अगले सप्ताह एसएससी का पेपर हो गया... बापू रिक्शे से काफी दूर पड़े पेपर के सेंटर लेकर गया.... वहां पूरे दिन रुका रहा... बस ऊपर वाले को याद करता रहा.... एक परीक्षा अंदर चंचल दे रही थी... एक बाहर उसका बापू...
पेपर के बाद चंचल अगली परीक्षा की तैय़ारी में लग गयी .....
किसी ने रास्ते में चंचल के बापू से बोला... रिक्शा चलाना छोड़ दे अब... जा घर तेरी लड़की अधिकारी बन गयी.... बापू को विश्वास नहीं हुआ.... हांफता हुआ रिक्शा लेकर घर आया... उसका घर में जाना मुश्किल हो रहा था... इतनी भीड़ जो लगी थी उसके घर पर... जा जाने कितने लोगों ने उसकी पीठ थपथपायी ... अन्दर मीडिया के लोग बैठे थे... जो चंचल और उसकी अम्मो भाई को घेरे हुए थे... बापू को देख कैमरा उसकी तरफ हो गया....
एक पर एक प्रश्न बापू से किये जा रहे.... कि एक रिक्शे वाले ने लड़की को अपनी मेहनत और उसकी लगन से अधिकारी बना दिया... घर के एक एक कोने की वीडियो बन रही थी कि चंचल यहां पढ़ती थी... यहां खाना बनता था... बरसात में टपकती इस झोपड़ी में रहती थी.... इससे पहले तो कोई जानने नहीं आया कि एक रिक्शे वाले ने अपनी मुनिया को कैसे पढ़ाया.... भ्ई यहीं समाज हैँ.. जहां असफलता में आपको कोई नहीं पूछेगा .. ... और सफलता शोर मचाती हैँ.... कुछ भी हो आज़ चंचल अधिकारी बन गयी ... चंचल ने बापू के गंदे छाले पड़े हाथों को जी भरकर चूम लिया.... बापू भी बिफर पड़ा .... अपनी मुनिया को सीने से चिपका लिया... आखिर एक और गरीब आदमी की लड़की अधिकारी जो बन गयी थी ... रोज अखबार में पढ़ता था... आज मेरी मुनिया ने कर दिखाया.... आँखों में आयें ख़ुशी के आंसुओं को उसने आज रोका नहीं...
बापू रिक्शा अभी भी चला रहा हैँ... ये पिता बड़े स्वाभीमानी होते हैँ... बच्चों को आसमान की बुलंदियों पर पहुँचा देते हैँ पर खुद अपनी ज़ड़ो से जुड़े रहते हैँ...

27/11/2023
27/10/2022

CHHATH - EMOTIONAL OF BIHAR . Devotional short film. from CREATIVA MUSIC . This was not possible without your cooperation " THEPEOPLE OF muzaffapur and chaki...

मैं हमेशा से सोचता था कि प्लेट में सारी कटोरी गोल और एक लम्बी सी क्यूँ होती है? पूरी ज़िंदगी नासमझी में रायता डलवाता व ड...
17/10/2022

मैं हमेशा से सोचता था कि प्लेट में सारी कटोरी गोल और एक लम्बी सी क्यूँ होती है? पूरी ज़िंदगी नासमझी में रायता डलवाता व डालता रहा, और शादी विवाह में पनीर! लेकिन आज की जेनरेशन ने इसका सही उपयोग सिखा दिया!ईश्वर लम्बी उम्र करे इस बालक की 😂😂

एक आदमी ने दुकानदार से पूछा - केले और सेब क्या भाव लगाऐ हैं ? केले 20 रु.दर्जन और सेब 100 रु. किलो । उसी समय एक गरीब सी ...
28/09/2022

एक आदमी ने दुकानदार से पूछा - केले और सेब क्या भाव लगाऐ हैं ? केले 20 रु.दर्जन और सेब 100 रु. किलो । उसी समय एक गरीब सी औरत दुकान में आयी और बोली मुझे एक किलो सेब और एक दर्जन केले चाहिये - क्या भाव है भैया ? दुकानदार: केले 5 रु दर्जन और सेब 25 रु किलो। औरत ने कहा जल्दी से दे दीजिये । दुकान में पहले से मौजूद ग्राहक ने खा जाने वाली निगाहों से घूरकर दुकानदार को देखा । इससे पहले कि वो कुछ कहता - दुकानदार ने ग्राहक को इशारा करते हुये थोड़ा सा इंतजार करने को कहा।

औरत खुशी खुशी खरीदारी करके दुकान से निकलते हुये बड़बड़ाई - हे भगवान तेरा लाख- लाख शुक्र है , मेरे बच्चे फलों को खाकर बहुत खुश होंगे । औरत के जाने के बाद दुकानदार ने पहले से मौजूद ग्राहक की तरफ देखते हुये कहा : ईश्वर गवाह है भाई साहब ! मैंने आपको कोई धोखा देने की कोशिश नहीं की यह विधवा महिला है जो चार अनाथ बच्चों की मां है । किसी से भी किसी तरह की मदद लेने को तैयार नहीं है। मैंने कई बार कोशिश की है और हर बार नाकामी मिली है।तब मुझे यही तरीकीब सूझी है कि जब कभी ये आए तो मै उसे कम से कम दाम लगाकर चीज़े दे दूँ। मैं यह चाहता हूँ कि उसका भरम बना रहे और उसे लगे कि वह किसी की मोहताज नहीं है। मैं इस तरह भगवान के बन्दों की पूजा कर लेता हूँ ।

थोड़ा रूक कर दुकानदार बोला : यह औरत हफ्ते में एक बार आती है। भगवान गवाह है जिस दिन यह आ जाती है उस दिन मेरी बिक्री बढ़ जाती है और उस दिन परमात्मा मुझपर मेहरबान होजाता है । ग्राहक की आंखों में आंसू आ गए, उसने आगे बढकर दुकानदार को गले लगा लिया और बिना किसी शिकायत के अपना सौदा खरीदकर खुशी खुशी चला गया ।

कहानी का मर्म :-

खुशी अगर बांटना चाहो तो तरीका भी मिल जाता है l🌹🙏🌹🙏

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