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https://youtu.be/kL4nbPODwfA?si=SxV6-AI48haT-hfW
24/02/2025

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Bua Ji Ke Gehna (बुआ जी के गहना) is an adaptation of Shirshendu Mukhopadhyay's novel, Goynar Baksho revolves around a matriarch of a Bengali Hindu family who...

25/03/2024
19/04/2021
16/01/2021

हमारे पास तो पहले से ही अमृत से भरे कलश थे...फिर हम वो अमृत फेंक कर उनमें कीचड़ भरने का काम क्यों कर रहे हैं...?

जरा इन पर विचार करें...*🧐👇🏻
० यदि *मातृनवमी* थी,तो मदर्स डे क्यों लाया गया ?

० यदि *कौमुदी महोत्सव* था,तो वेलेंटाइन डे क्यों लाया गया ?

० यदि *गुरुपूर्णिमा* थी,तो टीचर्स डे क्यों लाया गया ?

० यदि *धन्वन्तरि जयन्ती* थी,तो डाक्टर्स डे क्यों लाया गया ?

० यदि *विश्वकर्मा जयंती* थी,तो प्रद्यौगिकी दिवस क्यों लाया गया ?

० यदि *सन्तान सप्तमी* थी,तो चिल्ड्रन्स डे क्यों लाया गया ?

० यदि *नवरात्रि* और *कन्या भोज* था,तो डॉटर्स डे क्यों लाया गया ?

० *रक्षाबंधन* है तो सिस्टर्स डे क्यों ?

० *भाईदूज* है ब्रदर्स डे क्यों ?

० *आंवला नवमी, तुलसी विवाह* मनाने वाले हिंदुओं को एनवायरमेंट डे की क्या आवश्यकता ?

० केवल इतना ही नहीं, *नारद जयन्ती* ब्रह्माण्डीय पत्रकारिता दिवस है...

० *पितृपक्ष* 7 पीढ़ियों तक के पूर्वजों का पितृपर्व है...

० *नवरात्रि* को स्त्री के नवरूप दिवस के रूप में स्मरण कीजिये...

*संस्कृति रक्षा अभियान...*
👏🏻🚩👏

11/01/2021

एक राजा के दरबार मे एक अजनबी इंसान नौकरी मांगने के लिए आया उससे उसकी क़ाबलियत पूछी गई,तो वो बोला, "मैं आदमी हो चाहे जानवर, शक्ल देख कर उसके बारे में बता सकता हूँ।
राजा ने उसे अपने खास "घोड़ों के अस्तबल का इंचार्ज" बना दिया।
चंद दिनों बाद राजा ने उससे अपने सब से महंगे और मनपसन्द घोड़े के बारे में पूछा,
उसने कहा, "नस्ली नही हैं।
राजा को हैरानी हुई, उसने जंगल से घोड़े वाले को बुला कर पूछा।उसने बताया, घोड़ा नस्ली तो हैं, पर इसकी पैदायश पर इसकी मां मर गई थी, ये एक गाय का दूध पी कर उसके साथ पला है।
राजा ने अपने नौकर को बुलाया और पूछा तुम को कैसे पता चला के घोड़ा नस्ली नहीं हैं ?"
"उसने कहा "जब ये घास खाता है तो गायों की तरह सर नीचे करके, जबकि नस्ली घोड़ा घास मुह में लेकर सर उठा लेता हैं। राजा उसकी काबलियत से बहुत खुश हुआ, उसने नौकर के घर अनाज ,घी, मुर्गे, और अंडे बतौर इनाम भिजवा दिए और उसे रानी के महल में तैनात कर दिया।
चंद दिनो बाद , राजा ने उस से रानी के बारे में राय मांगी, उसने कहा, "तौर तरीके तो रानी जैसे हैं लेकिन पैदाइशी नहीं हैं।
राजा के पैरों तले जमीन निकल गई, उसने अपनी सास को बुलाया, मामला उसको बताया, सास ने कहा "हक़ीक़त ये हैं, कि आपके पिताजी ने मेरे पति से हमारी बेटी की पैदाइश पर ही रिश्ता मांग लिया था, लेकिन हमारी बेटी 6 माह में ही मर गई थी, लिहाज़ा हम ने आपके रजवाड़े से करीबी रखने के लिए किसी और की बच्ची को अपनी बेटी बना लिया।राजा ने फिर अपने नौकर से पूछा "तुम को कैसे पता चला ?"
"उसने कहा, " रानी साहिबा का नौकरो के साथ सुलूक गंवारों से भी बुरा हैं।
एक खानदानी इंसान का दूसरों से व्यवहार करने का एक तरीका होता हैं, जो रानी साहिबा में बिल्कुल नही।
राजा फिर उसकी पारखी नज़रों से खुश हुआ और बहुत से अनाज , भेड़ बकरियां बतौर इनाम दीं साथ ही उसे अपने दरबार मे तैनात कर दिया।कुछ वक्त गुज़रा, राजा ने फिर नौकर को बुलाया,और अपने बारे में पूछा।नौकर ने कहा "जान की सलामती हो तो कहूँ।”
राजा ने वादा किया।
उसने कहा, "न तो आप राजा के बेटे हो और न ही आपका चलन राजाओं वाला है।"
राजा को बहुत गुस्सा आया, मगर जान की सलामती का वचन दे चुका था, राजा सीधा अपनी मां के महल पहुंचा।

माँ ने कहा, "ये सच है, तुम एक चरवाहे के बेटे हो, हमारी औलाद नहीं थी तो तुम्हे गोद लेकर हम ने पाला
राजा ने नौकर को बुलाया और पूछा , बता, "तुझे कैसे पता चला ?”

उसने कहा " जब राजा किसी को "इनाम दिया करते हैं, तो हीरे मोती और जवाहरात की शक्ल में देते हैं

लेकिन आप भेड़, बकरियां, खाने पीने की चीजें दिया करते हैं ये रवैया किसी राजाओं का नही, किसी चरवाहे के बेटे का ही हो सकता है।"

किसी इंसान के पास कितनी धन दौलत, सुख समृद्धि, रुतबा, इल्म, बाहुबल हैं ये सब बाहरी दिखावा हैं.

इंसान की असलियत की पहचान उसके व्यवहार और उसकी नियत से होती हैं धन दौलत से नही।

10/01/2021

*भगवान शीघ्र कैसे मिलें।*

एक राजा सायंकाल में महल की छत पर टहल रहा था. अचानक उसकी दृष्टि महल के नीचे बाजार में घूमते हुए एक सन्त पर पड़ी. संत तो संत होते हैं, चाहे हाट बाजार में हों या मंदिर में अपनी धुन में खोए चलते हैं.
राजा ने महूसस किया वह संत बाजार में इस प्रकार आनंद में भरे चल रहे हैं जैसे वहां उनके अतिरिक्त और कोई है ही नहीं. न किसी के प्रति कोई राग दिखता है न द्वेष.संत की यह मस्ती इतनी भा गई कि तत्काल उनसे मिलने को व्याकुल हो गए.
उन्होंने सेवकों से कहा इन्हें तत्काल लेकर आओ.
सेवकों को कुछ न सूझा तो उन्होंने महल के ऊपर ऊपर से ही रस्सा लटका दिया और उन सन्त को उस में फंसाकर ऊपर खींच लिया.
चंद मिनटों में ही संत राजा के सामने थे. राजा ने सेवकों द्वारा इस प्रकार लाए जाने के लिए सन्त से क्षमा मांगी. संत ने सहज भाव से क्षमा कर दिया और पूछा ऐसी क्या शीघ्रता आ पड़ी महाराज जो रस्सी में ही खिंचवा लिया !
राजा ने कहा- एक प्रश्न का उत्तर पाने के लिए मैं अचानक ऐसा बेचैन हो गया कि आपको यह कष्ट हुआ.
संत मुस्कुराए और बोले- ऐसी व्याकुलता थी अर्थात कोई गूढ़ प्रश्न है. बताइए क्या प्रश्न है.
राजा ने कहा- प्रश्न यह है कि भगवान् शीघ्र कैसे मिलें, मुझे लगता है कि आप ही इसका उत्तर देकर मुझे संतुष्ट कर सकते हैं ? कृपया मार्ग दिखाएं.
सन्त ने कहा‒‘राजन् ! इस प्रश्न का उत्तर तो तुम भली-भांति जानते ही हो, बस समझ नहीं पा रहे. दृष्टि बड़ी करके सोचो तुम्हें पलभर में उत्तर मिल जाएगा.
राजा ने कहा‒ यदि मैं सचमुच इस प्रश्न का उत्तर जान रहा होता तो मैं इतना व्याकुल क्यों होता और आपको ऐसा कष्ट कैसे देता. मैं व्यग्र हूं. आप संत हैं. सबको उचित राह बताते हैं.
राजा एक प्रकार से गिड़गिड़ा रहा था और संत चुपचाप सुन रहे थे जैसे उन्हें उस पर दया ही न आ रही हो. फिर बोल पड़े सुनो अपने उलझन का उत्तर.
सन्त बोले- सुनो, यदि मेरे मन में तुमसे मिलने का विचार आता तो कई अड़चनें आतीं और बहुत देर भी लगती. मैं आता, तुम्हारे दरबारियों को सूचित करता. वे तुम तक संदेश लेकर जाते.
तुम यदि फुर्सत में होते तो हम मिल पाते और कोई जरूरी नहीं था कि हमारा मिलना सम्भव भी होता या नहीं.
परंतु जब तुम्हारे मन में मुझसे मिलने का विचार इतना प्रबल रूप से आया तो सोचो कितनी देर लगी मिलने में ?
तुमने मुझे अपने सामने प्रस्तुत कर देने के पूरे प्रयास किए. इसका परिणाम यह रहा कि घड़ी भर से भी कम समय में तुमने मुझे प्राप्त कर लिया.
हे राजन् ! इसी प्रकार यदि भगवान् को पाने की व्याकुलता हो तो भगवान् तत्काल तुम्हारे सामने आ जाएंगे।
राजा ने पूछा- परंतु भगवान् के मन में हमसे मिलने का विचार आए तो कैसे आए और क्यों आए ?
सन्त बोले- तुम्हारे मन में मुझसे मिलने का विचार कैसे आया ?
राजा ने कहा‒ जब मैंने देखा कि आप एक ही धुन में चले जा रहे हैं और सड़क, बाजार, दूकानें, मकान, मनुष्य आदि किसी की भी तरफ आपका ध्यान नहीं है, उसे देखकर मैं इतना प्रभावित हुआ कि मेरे मन में आपसे तत्काल मिलने का विचार आया.
सन्त बोले- यही तो तरीका है भगवान को प्राप्त करने का. राजन् ! ऐसे ही तुम एक ही धुन में भगवान् की तरफ लग जाओ, अन्य किसी की भी तरफ मत देखो, उनके बिना रह न सको, तो भगवान् के मन में तुमसे मिलने का विचार आ जायगा और वे तुरन्त मिल भी जायेंगे..!!

10/01/2021

िला_शाहजहां
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मुग़ल सम्राट शाहजहां को कौन नहीं जानता जिन्हें शानदार इमारतें तामीर करने का शौक था ताज महल , लाल किला समेत आगरा , दिल्ली , लाहौर और कश्मीर में बहुत से भवन उनकी यादगार हैं

क्या आप जानते हैं कि इतिहास में एक शाहजहां और हैं जिन्हें भी शानदार इमारते निर्माण कराने का शौक था नाम उनका भी शाहजहां था पर वह महिला थीं यानी शाहजहां बेगम भोपाल की नवाब

नवाब शाहजहां बेगम का जन्म 30 जुलाई 1838 में भोपाल में हुआ इनके पिता नवाब जहांगीर मोहम्मद ख़ान बहादुर भोपाल के शासक थे अभी मात्र छह साल की थी कि पिता का इंतेकाल हो गया दस्तूर के मुताबिक यह भोपाल की नवाब बनीं लेकिन अल्प आयु थीं इस लिए सरकारी काम काज इनकी मां नवाब सिकंदर बेगम ने संभाला सन् 1868 में तीस साल की उम्र में मां का भी इंतेकाल हो गया उसके बाद यह पूरे अधिकारों के साथ नवाब बनीं और 1901 में अपनी मृत्यु के समय तक भोपाल की नवाब रहीं
इनकी शादी 1855 में बाकी मोहम्मद खां नुसरत जंग बहादुर से हुई जिनका 1867 में इंतकाल हो गया इस प्रकार वह मात्र 29 साल की उम्र में बेवा बन गईं तीन साल बाद खानदान वालों के दबाव में दूसरी शादी का फैसला किया और विश्व स्तरीय आलिम नवाब सिद्दीक हसन खां कन्नौजी से इनकी शादी हुई नवाब सिद्दीक हसन खां कन्नौजी बहुत बड़े आलिम व लेखक थे उनकी लिखी हुई किताबों की संख्या 250 से अधिक है

नवाब शाहजहां बेगम फारसी भाषा की शायरा थीं ताजूर व शीरीं इनके तखल्लुस थे मसनवी सिद्कुल बयान , ताजुल कला और दिवाने शीरीं इनके शेर के दीवान हैं इसके अतिरिक्त वह कई किताबों की लेखिका भी थीं जिनमें तहजीबुन्निसवां ( महिलाओं के संस्कार ) काफी मशहूर हुई
वह बहुत ही अच्छी शासनाध्यक्षा थीं उन्होंने जनता की भलाई के लिए बहुत कार्य किए अस्पताल बनवाएं उनके समय में चेचक के टीके का अविष्कार हुआ जनता के बीच विभिन्न प्रकार की अफवाहें फैली हुई थीं उन्हें दूर करने के लिए सबसे पहले अपने बच्चों को टीका लगवाया सिंचाई का इंतजाम किया टैक्स मे कटौती की
अक्तूबर 1900 में इन्हें कैंसर हो गया ग्यारह महीने इस बीमारी से जूझती रहीं और आखिर में हार गईं
इन्ना लिल्लाहे व इन्ना इलेहे राजेऊन

#ताजुल_मसाजिद
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इन्होंने जिन भवनों का निर्माण कराया उनमें भोपाल की शानदार मस्जिद ताजुल मसाजिद बहुत प्रसिद्ध है आज से तीस साल पहले यह मस्जिद विश्व की सबसे बड़ी मस्जिद मानी जाती थी अब विश्व में कई बड़ी मस्जिदें बन गई हैं लेकिन फिर भी यह विश्व की बड़ी मस्जिदों में से एक है यह चार लाख वर्ग मीटर में बनी है और 175000 नमाजियों के लिए गुंजाइश रखती है
#शाहजहां_मसजिद_वोवकिंग
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यह इंग्लैंड में पहली मस्जिद थी इस से पहले लोग घरों में नमाज पढ़ते थे नवाब शाहजहां बेगम ने इंग्लैंड का दौरा किया और वहां मुस्लिम स्टूडेंट्स के कहने पर मस्जिद का निर्माण कराया
#भोपाल_का_ताजमहल
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इन्होंने अपने रहने के लिए रंगमहल के नाम से एक महल बनवाया था जिसे उसकी खूबसूरती के कारण भोपाल का ताजमहल कहा जाता है यह बहुत शानदार इमारत थी 13 वर्ष में बन कर तैयार हुई थी अफसोस देख भाल की कमी के कारण इसकी खुबसूरती बाकी नहीं रही और इसमें लगे हुए सामान लोग लूट ले गए
इसके अतिरिक्त अस्पताल , ईदगाह और दूसरे भवनों का निर्माण भी किया गया

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के बनाए जाने में भी इन्होंने दिल खोलकर मदद की इनकी बेटी नवाब सुल्तान बेगम और नवासे नवाब हमीदुल्ला खान AMU के चांसलर रह चुके हैं

पुरूष शाहजहां हमें याद हैं पर महिला शाहजहां को हम भूल गए
Khursheeid ahmad

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