Shersingh Sisodiya

Shersingh Sisodiya हिंदू युवा वाहिनी, हिन्दूत्व एवम राष्ट्रवाद के प्रति समर्पित एक प्रखर सांस्कृतिक एवं सामाजिक संघठन

हिंदुत्व राष्ट्र की संचेतना है , इस पर प्रहार महाप्रलय को आमंत्रण है ।।
पूज्य योगी आदित्यनाथ सांसद गोरखपुर संरक्षक हिन्दू युवा वाहिनी
।। देश में मोदी - प्रदेश में योगी ।।
आओ चले योगी के साथ लक्ष्य 2017

हिन्दु युवा वाहिनी का संविधान
हिन्दु युवा वाहिनी का उदय अप्रैल २००२ में रामनवमी की पुण्य पावन तिथि पर श्री गोरक्षनाथ मन्दिर, गोरखपुर में एक सामान्य हिन्दू सम्मेलन के रूप में हुआ। यह संस्था राष्ट्री

य स्तर की गैर सरकारी, अराजनैतिक तथा एक विशुद्ध सांस्कृतिक संगठन के रूप में राष्ट्रीय भावना, हिन्दू हित, संगठित आवाज, हिन्दुत्व, हिन्दू ग्रन्थों में आस्था, आपसी सौहार्द, समता मूलक समाज की स्थापना एवं परस्पर सहयोग की भावना पैदा करेगी।

संगठन
वर्ष २००२ के अप्रैल माह में श्री राम नवमी के पावन पर्व पर परम पूज्य योगी आदित्यनाथ जी महाराज ने महानगर से कुछ राष्ट्रवादी नवयुवकों को संगठित कर हिन्दु युवा वाहिनी की आधारशिला रखी। अपने दृढ़ निश्चय एवम् पारदर्शी क्रिया कलापों के कारण मात्र ९ वर्षों के अल्पकाल में ही हिन्दु युवा वाहिनी ने राष्ट्रवादी जनमानस का विश्वास प्राप्त किया है। जिसका विस्तार उत्तर प्रदेश के सभी ७२ जनपदों के ८६ इकाईयों में हुआ है।

संगठनात्मक दृष्टिकोण से हिन्दु युवा वाहिनी की निम्नलिखित इकाईयां हैं -

१. प्रदेश कार्य समिति

२. जिला कार्य समिति

३. ब्लाक कार्य समिति

४. न्याय पंचायत कार्य समिति

५. ग्राम पंचायत कार्य समिति

महानगर एवम नगर निकायों में संगठनात्मक ढाँचा

१. नगर मंडल कार्य समिति

२. महानगर / नगर पालिका / नगर पंचायत कार्य समिति

३. वार्ड कार्य समिति

संगठन को व्यापक आधार प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रकोष्ठों का गठन किया गया है।

१. मीडिया सेल

२. आई०टी० प्रकोष्ठ

संक्षिप्त परिचय
योगीजी का जन्म देवाधिदेव भगवान् महादेव की उपत्यका में स्थित देव-भूमि उत्तराखण्ड में 5 जून सन् 1972 को हुआ। शिव अंश की उपस्थिति ने छात्ररूपी योगी जी को शिक्षा के साथ-साथ सनातन हिन्दू धर्म की विकृतियों एवं उस पर हो रहे प्रहार से व्यथित कर दिया। प्रारब्ध की प्राप्ति से प्रेरित होकर आपने 22 वर्ष की अवस्था में सांसारिक जीवन त्यागकर संन्यास ग्रहण कर लिया।
आपका कुशल नेतृत्व युगान्तकारी है और एक नया इतिहास रच रहा है।...

महंत योगी आदित्यनाथ
गोरक्षपीठाधीश्वर , गोरक्षपीठ
श्री गोरखनाथ मन्दिर गोरखपुर (उ.प्र.)
संसद सदस्य (लोकसभा)- गोरखपुर।

संरक्षित करें
जीवन वृत
जन्म तिथि - 5 जून,1972
जन्म स्थान - उत्तराखण्ड
वैवाहिक स्थिति - विरक्त ब्रह्मचारी
शिक्षा - विज्ञान से स्नातक
पता - श्री गोरखनाथ मन्दिर, गोरखपुर (उ.प्र.)273015
फोन - (0551) 2255453, 2255454
फैक्स - (0551) 2255455
बेबसाइट - www.yogiadityanath.in
ईमेल - [email protected]
दिल्ली का पता - 123-125, नार्थ एवेन्यू, नई दिल्ली-1
फोन - (011) 23092633
अभिरुचि - धर्म, अध्यात्म, सामाजिक-सांस्कृतिक कार्य, गो-रक्षा एवम् हिन्दुत्व पर आधारित राजनीति।
प्रकाशित पुस्तकें - यौगिक षट्कर्म
हठयोग:स्वरूप एवं साधना
राजयोग:स्वरूप एवं साधना
हिन्दु राष्ट्र नेपाल : अतीत एवं वर्तमान
प्रधान सम्पादक - योगवाणी

    रविन्द्र भाटी कोंग्रेस पोषित बिकाऊ था, जिसने सिर्फ bjp यानी हिन्दुओ के वोट काटे और खुद भी हारा हिन्दुओ को भी हराया, ...
28/08/2026

रविन्द्र भाटी कोंग्रेस पोषित बिकाऊ था, जिसने सिर्फ bjp यानी हिन्दुओ के वोट काटे और खुद भी हारा हिन्दुओ को भी हराया, और कोंग्रेस के गिरोह को जिताया, आनंद पाल कांड में भी वही हुआ था वसुधरा हारी अशोकउद्दीन गेहला जीता हिन्दू हारा, ऐसे ही हर निर्वाचन क्षेत्र में bjp के वोट कटवे के लिए कई निर्दलीय हिन्दुओ को खरीदकर खड़ा किया जाता है जो 1000 से 3000 वोट तोड़कर कोंग्रेस ठगबंधन के मुल्लाओं जिताने ने और हिन्दुओ की bjp को हराने का काम करते हैं।

पहले BJP को 2027- 2029 के इलेक्शन जितने दो फिर UGC का मुद्दा उठाएंगे, तब तक बीके हुए लोगो के अराजक मुद्दे नही उठाएंगे और विपक्ष के टूलकिट के मोहरे नही बनेंगे,

#राजस्थान में करणी सेना के नाम से कुछ बिकाऊ पंच अध्यक्ष पदाधिकारी कोंग्रेस के कठमुल्ले सुअर दिग्विजय चूहे के हाथों बिककर bjp का विरोध कर रहे हैं, जौसे कोकरोजो की ने किया वैसे ही हिंसक आंदोलन के नाम पर देश के युवाओं में अराजकता फैलाकर हिन्दुओ को आपस में तोड़ना चाहते है।

एक रहोगे सेफ रहोगे, बटोगे तो काटोगे

14/08/2026

वर्ष 1947 में विभाजन, मात्र सीमाओं का ही नहीं हुआ था। वह असंख्य परिवारों के सपनों, संबंधों और संवेदनाओं का बिखराव भी था।

'विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस' हमें उस अकल्पनीय पीड़ा को स्मरण करने, उससे सीख लेने और राष्ट्र की एकता-अखंडता को सर्वोच्च मानने का संदेश देता है।

विखंडन की इस विभीषिका में अपने प्राण गंवाने वाले निर्दोष नागरिकों को विनम्र श्रद्धांजलि। उनकी स्मृतियां हमें सदैव सशक्त, संगठित और अखंड भारत के निर्माण के लिए प्रेरित करती रहेंगी।

28/07/2026

जागो देश के प्रहरी!

​राजनीति की शतरंज के मोहरे न बनो,
राष्ट्रनीति के धुरंधरों में चेहरे बनो!

दुश्मन को लगे तुम देश के पहरे बने,
हर संकट में तुम राष्ट्र की ढाल बनकर तने।

​छोड़ो विदेशी सोच का यह अंधियारा,
पुकारती तुम्हें आज भारत माँ की धारा।

चंद टुकड़ों की खातिर मत बेचो ईमान को,
संस्कारों से सींचो अपने आत्म-सम्मान को।

​सिर्फ डिग्रियों का बोझ शिक्षा नहीं होती,
जो जड़ों को भूल जाए, वह विद्या नहीं होती।

संस्कृति का स्वाभिमान दिल में जगाना होगा,
भटके हुए युवाओं को सही राह दिखाना होगा।

​मत बनो किसी दल की गंदी चाल का हिस्सा,
तुम लिखो भारत के नए उत्थान का किस्सा।

विवेक को अपनाओ, सत्य का पथ चुनो,
सपनों में केवल राष्ट्र का निर्माण बुनो।

​जब युवा जागेगा, देश का भाग्य जागेगा,
अधर्म और षड्यंत्र यहाँ से दूर भागेगा।

उठो वीर! तुम ही इस देश की शान हो,
कल के भारत का जीवित स्वाभिमान हो।

अब बस.. अब मौन त्यागने का समय आ गया।असली देशभक्त जब तक मैदान में नहीं उतरते तब तक बहरूपिए ही खुद को भगतसिंह बताते हुए घू...
22/07/2026

अब बस.. अब मौन त्यागने का समय आ गया।
असली देशभक्त जब तक मैदान में नहीं उतरते तब तक बहरूपिए ही खुद को भगतसिंह बताते हुए घूमते हैं। वामपंथ का इतिहास जनता लाशों पर चढ़कर सिंहासन हासिल करने का ही रहा है, वो लाशें बिछाते हैं और इनपर राजनीति करते हैं। इसलिए आज जब देश में अराजकता फैलाने के षडयंत्र चल रहे हैं तब हर देशभक्त नागरिक को इस देश का रक्षक बनना होगा।
भारत के बाहर भारत को समाप्त करने के अनेक एक्सपेरिमेंट किए जा रहे हैं, वहीं से काफी एजेंडा बनाए जाते हैं उनमें से जो भारत में थोड़ा पसंद कर लिया जाता है उसे लागू करने के लिए चेहरे ढूंढने शुरू किए जाते हैं। उसके बाद शुरू होता है असली ड्रामा जो भारत के साथ खेला जाता है और खिलवाड़ किया जाता है भारत की जनता और उसकी भावनाओं और संवेदनाओं के साथ और दूर बैठकर आनंद लिया जाता है भारत में उपज रही अराजकता का..
भारत वर्षों बाद नक्सल आतंक से मुक्त हुआ था तो अनेक नक्सल प्रभावित क्षेत्र राहत की सांस महसूस कर रहे थे। लेकिन भारत से कईं कोसों दूर बैठे अर्बन नक्सली समूह भारत सरकार की इस सफलता से जल-भुन रहे थे। वो नए समूह को टारगेट करने का कोई मौका ढूंढ रहे थे और अगर मैं ये कहूं कि पटकथा पहले लिखी जा चुकी थी और चेहरा ही ढूंढा जा रहा था तो कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी क्योंकि एक ही दिन में कोई पेज बनना और उसे एक ही दिन में इतना अप्रत्याशित समर्थन सोशल मीडिया पर मिलना सामान्य नहीं है। ख़ैर कुछ ही दिनों में वो चेहरा मिलता है भारत की न्यायपालिका के माध्यम से.. और कहानी आगे बढ़ती है
• कॉकरोच शब्द का प्रयोग किया चीफ जस्टिस ने लेकिन इन्हें विरोध करना है नरेन्द्र मोदी का
• नीट पेपर को व्यवस्थित और पारदर्शी रूप से करवाने के लिए तुलनात्मक रूप से अधिक जिम्मेदारी थी NTA (National testing agency) की लेकिन इन्हें विरोध करना है धर्मेन्द्र प्रधान का, पेपर लीक करने वाले दोषियों को और खरीदने वाले माफियाओं को सजा दिलवाना इनका मुद्दा है ही नहीं इन्हें सिर्फ सरकार से इस्तीफा चाहिए
• अपने पक्ष में निष्पक्ष माहौल बनाने के लिए शुरुआत में सभी पोलिटिकल पार्टियों को नकारना ताकि देश की भोली भाली जनता का साथ मिले, लेकिन जब ऐसा नहीं हुआ तो धीरे धीरे मुखौटे हटाकर सारी विपक्षी पार्टियों को आमंत्रित करना
• शुरुआत में अपने आप को अहिंसा का पुजारी और गांधी जी के मार्ग पर चलने वाला बताना और भूख हड़ताल शुरू करना लेकिन जब कोई प्रभाव नहीं दिखा तो सरकार और देश की बहुसंख्यक विचारधारा पर हमला बोला ताकि सरकार आक्रामक होकर कोई गलत कदम उठाए
• पहले से सुनियोजित संसद मार्च की रूपरेखा बनाकर छात्रों के मुखौटे को पहने गुंडों को प्रदर्शन में शामिल करना ताकि पुलिस को बल प्रयोग करना पड़े और शिकार बने मासूम छात्र जिनकी वीडियो और फोटो का सहारा लेकर फिर ये अपना एजेंडा स्थापित कर सके।
• जिन्हें NEET के माध्यम से अपना भविष्य बनाना था उन होनहार छात्रों ने दुबारा परीक्षा दी और अपनी काबिलियत के बल पर अपेक्षित परिणाम भी प्राप्त किया, हो सकता है कुछ छात्र इस प्रदर्शन में भी हों लेकिन इस प्रदर्शन में अधिकांश वो हैं जिनका नीट तो क्या किसी भी प्रतियोगी परीक्षा से कोई संबंध नहीं है क्योंकि उन्हें प्रतियोगी भावना और उसके लिए तैयारी का कोई आभास ही नहीं है
और अगर यह प्रदर्शन पेपर लीक के प्रति सरकार और आयोजक संस्था जवाबदेही तय करने को लेकर था तो उसमें..
1. उमर खालिद को रिहा करने
2. धारा 370 वापस लगाने
3. मेरा लिंग मेरी मर्जी
4. RSS मुर्दाबाद
5. ब्राह्मणवाद और मनुवाद से आजादी
6. LGBTQ अधिकार
7. संविधान बचाओ
8. नेपाल बना देंगे
9. मोदी को गोली मार दो
10. अंबानी / अडानी
11. प्रेमानंद महाराज ढोंगी है
12. हिंदुत्व मुर्दाबाद, बस नाम रहेगा अल्लाह का..
13. इंडियन आर्मी रेपिस्ट है
इन सब मुद्दों की क्या भूमिका..??
यह तो सीधा किसी मुद्दे के नाम पर इकट्ठा करके अपने पोलिटिकल एजेंडा को सेट करने का ही काम हुआ।
यदि यह प्रदर्शन केवल छात्रों और उनके भविष्य को लेकर चिंतित थे तो उन्हें अपने मंच को प्रचलित राजनीति से मुक्त रखना था। और यदि राजनीतिक तौर पर ही इसे उठाना था तो पहले ही दिन यहां आकर सभी विपक्षी पार्टियों से मिलते, उनके सामने अपना विषय रखते और उन्हें सहमत करके भारत की संसद में यह मुद्दा चर्चा के लिए रखवाते। लेकिन नहीं ऐसा लोकतांत्रिक तरीका अपनाने पर तो सरकार उसका लोकतांत्रिक माध्यम से ही उसका जवाब देती और इस अनियमितता के जिम्मेदारों को उचित सजा दिलवा देती। और इस दौरान कुछ भी असामान्य या अराजक नहीं होता। एक और तरीका था भारत की न्यायपालिका के माध्यम से जिससे सीधा जांच होकर प्रत्येक दोषी को सजा मिलती।
ये सब कैसे होने दिया जाता क्योंकि प्रारंभ से ही मूल मुद्दा नीट पेपर लीक का समाधान करना था ही नहीं.. मुद्दा तो था भारत में अशांति खड़ी करना, सरकार के प्रति रोष उत्पन्न करना और वैश्विक स्तर पर भारत की छवि खराब करना यह इससे सिद्ध होता है कि इस प्रदर्शन की प्रतिदिन की ख़बर अमेरिकी मीडिया में छपती है, 20 जुलाई के संसद मार्च की खबर 17 जुलाई के न्यूज लिंक्स में आ जाती है।
इन सब बातों को जोड़ने के बाद इस प्रदर्शन के मास्टर माइंड लोगों को भारत विरोधी क्यों न कहा जाए, मैं ये नहीं कहता कि प्रदर्शन में गए छात्र देशद्रोही हैं वह तो देशभक्त हैं क्योंकि वह यह सोचकर बैठे हैं कि वो क्रांतिकारी है जो देश की व्यवस्था सुधारने के लिए संघर्ष करने का जिम्मा उठाए हुए हैं। लेकिन वो लोग जरूर देशद्रोही हैं जो उन्हें उकसाकर वहां बुला रहे हैं और खुद दूर बैठकर बर्गर खा रहे हैं।
वो जरूर देशद्रोही हैं जो इन मासूम छात्रों की भीड़ में कुछ गुंडे छोड़कर देश की सार्वजनिक संपत्ति को बर्बाद कर रहे हैं, वो जरूर देशद्रोही हैं जो भारत के सुरक्षा बलों के लिए अभद्र शब्दों का उपयोग कर रहे हैं।
वो सब लोग देशद्रोही हैं जो भारत से बाहर बैठकर भारत की बर्बादी की पटकथा रच रहे हैं।
भारत की सरकार अहंकारी नहीं बेहद संवेदनशील है लेकिन वो देशद्रोही एजेंडा के सामने झुकने वाली तो बिल्कुल नहीं है।
लेकिन मैं एक जिम्मेदार युवा और देशभक्त भारतीय नागरिक होने के नाते उन सब देशद्रोहियों को चेतावनी देना चाहता हूँ कि इस गफलत में मत रहना कि चंद लोगों में अराजकता के बीज बोकर तुम भारत को बर्बाद कर दोगे, यह भारत सदियों से इस प्रकार के षड्यंत्रकारी ताकतों से दो दो हाथ करता आया है। भारत में आज भी एक बहुत बड़ा वर्ग दिन रात भारत के परमवैभव के लिए काम करता है, भारत के लिए जीता है और जरूरत पड़ने पर भारत के लिए मर मिटने को भी तैयार रहता है।
इसलिए अगर भारत में इस प्रकार की अराजकता फैलाने की, भारत की सार्वजनिक संपत्ति और सुरक्षा बलों को चोट पहुंचाने की कोशिश की तो भारत के सुरक्षा बल तो सक्षम है ही उसके साथ साथ भारत के करोड़ों देशभक्त नागरिक भी है जो आवश्यकता पड़ने पर सुरक्षा बलों के कंधे से कंधा मिलाकर इस देश की सुरक्षा व्यवस्था को सुनिश्चित करने के लिए सड़कों पर चट्टान की तरह खड़े मिलेंगे।
भारत के छात्र, युवा देश का भविष्य है उनके प्रति प्रत्येक सरकार और प्रत्येक व्यक्ति को जिम्मेदार होना चाहिए लेकिन उसी समय मैं यह भी मानता हूँ कि भारत के युवा भारत की एकता, अखंडता और संप्रभुता से कोई समझौता नहीं करते।
#भारतमाता_की_जय

22/07/2026

अमेरिका और चीन समर्थित "जिहाद टूलकिट" कई देशों में सक्रिय हैं; जब कोई प्रधानमंत्री की बात नहीं मानता, तो एजेंट देशद्रोही विपक्ष को फंड देकर अराजकता फैलाते हैं और तख्तापलट करवाते हैं, ताकि ऐसी सरकार बन सके जो उनके हितों के अनुकूल हो। छात्रों से जुड़ी भावनात्मक ब्लैकमेलिंग के झांसे में न आएं और विदेशी बुरी राजनीति के शतरंज के खेल में मोहरे न बनें।
उदाहरण: , , , .
में, जहां वे ऐसा करने में नाकाम रहे, वहां उन्होंने युद्ध का सहारा लिया और देश को बर्बाद कर दिया।

22/04/2026

माता भूमि: पुत्रोऽहं पृथिव्या:

विश्व पृथ्वी दिवस की प्रदेश वासियों को हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं।

सनातन संस्कृति में धरती की व्याख्या माँ के रूप में की गई है, जो चराचर जगत का नि:स्वार्थ भाव से पोषण करती हैं।

आइए, 'विश्व पृथ्वी दिवस' के अवसर पर हम सभी प्राणदायिनी धरा को प्रदूषण से मुक्त और वृक्षों से युक्त करने का पावन संकल्प लें।

21/04/2026

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