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✨ चैत्र नवरात्रि एवं हिंदू नववर्ष की मंगलमय शुभकामनाएँ ✨चैत्र नवरात्रि के पावन प्रथम दिवस पर माँ शैलपुत्री की आराधना के ...
19/03/2026

✨ चैत्र नवरात्रि एवं हिंदू नववर्ष की मंगलमय शुभकामनाएँ ✨

चैत्र नवरात्रि के पावन प्रथम दिवस पर माँ शैलपुत्री की आराधना के साथ अपने जीवन में नई ऊर्जा, नई आशा और सकारात्मक शुरुआत का स्वागत करें।
यह पावन पर्व हमें शक्ति, धैर्य और संकल्प के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।

माँ शैलपुत्री का आशीर्वाद आप सभी के जीवन में
🌼 सुख
🌼 शांति
🌼 उत्तम स्वास्थ्य
🌼 और समृद्धि लेकर आए।

आइए, इस शुभ अवसर पर अपने मन, कर्म और विचारों को शुद्ध कर एक नए, उज्जवल और सफल वर्ष की शुरुआत करें।

🙏 जय माता दी 🙏


ाता_दी #हिंदू_नववर्ष #नवरात्रि

🔴 सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसलालंबे समय से अनुबंध पर काम कर रहे कर्मचारियों को नियमितीकरण से वंचित नहीं किया जा सकतानई दिल...
07/02/2026

🔴 सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला
लंबे समय से अनुबंध पर काम कर रहे कर्मचारियों को नियमितीकरण से वंचित नहीं किया जा सकता
नई दिल्ली —
सुप्रीम कोर्ट ने अनुबंध और कच्चे कर्मचारियों के हक़ में एक बेहद अहम और राहत भरा फैसला सुनाया है। सर्वोच्च न्यायालय ने साफ शब्दों में कहा है कि राज्य सरकारें लंबे समय से सेवा दे रहे अनुबंध कर्मचारियों को नियमितीकरण से वंचित नहीं रख सकतीं, खासकर तब जब उनकी नियुक्ति नियमों के तहत और स्वीकृत पदों पर की गई हो।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि
➡️ वर्षों तक किसी कर्मचारी से लगातार काम लेना और
➡️ फिर उसे केवल “अनुबंध” का बहाना बनाकर नियमित अधिकारों से दूर रखना
न्याय और समानता के सिद्धांतों के खिलाफ है।
🧑‍⚖️ कोर्ट की अहम टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि —
राज्य एक मॉडल नियोक्ता (Model Employer) होता है, और उससे यह अपेक्षा की जाती है कि वह कर्मचारियों के साथ न्यायपूर्ण और मानवीय व्यवहार करे, न कि शोषणकारी रवैया अपनाए।
कोर्ट ने यह भी माना कि जब कोई कर्मचारी लंबे समय तक लगातार सेवा देता है, तो उसके भीतर नियमित होने की वैध उम्मीद (Legitimate Expectation) पैदा होती है, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता।
⚖️ सरकारों को स्पष्ट संदेश
सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को निर्देश दिया कि —
✔️ वे अपनी नियमितीकरण नीतियों का ईमानदारी से पालन करें
✔️ लंबे समय से कार्यरत अनुबंध कर्मचारियों के मामलों पर विचार जरूर करें
✔️ केवल तकनीकी बहानों के आधार पर कर्मचारियों को अधिकारों से वंचित न करें
👥 कर्मचारियों में खुशी की लहर
इस फैसले के बाद देशभर में काम कर रहे लाखों कच्चे, संविदा और अनुबंध कर्मचारियों के बीच खुशी और उम्मीद की लहर दौड़ गई है। यह फैसला उन कर्मचारियों के लिए एक मजबूत आधार बनेगा, जो वर्षों से सरकारी विभागों में काम कर रहे हैं लेकिन आज भी असुरक्षित भविष्य से जूझ रहे हैं।
📌 क्यों है यह फैसला ऐतिहासिक?
✔️ लंबे समय से काम कर रहे अनुबंध कर्मचारियों के पक्ष में स्पष्ट रुख
✔️ सरकारों की मनमानी पर सुप्रीम कोर्ट की सख्ती
✔️ नियमितीकरण की लड़ाई को मिला संवैधानिक बल
यह फैसला आने वाले समय में कच्चे कर्मचारियों के हक़ की लड़ाई में मील का पत्थर साबित हो सकता है।

यूँ ही नही खिचड़ी को राष्ट्रीय व्यंजन स्वीकार किया जाता है। *खिचड़ी का अर्थ होता है, सबसे मिलकर बना यानि एकता या संगठन का ...
15/01/2026

यूँ ही नही खिचड़ी को राष्ट्रीय व्यंजन स्वीकार किया जाता है।
*खिचड़ी का अर्थ होता है, सबसे मिलकर बना यानि एकता या संगठन का भाव वाला व्यंजन है यह।*
आप सभी को मकर संक्रांति की हार्दिक शुभकामनाएं।
मकरसंक्रांति के अवसर पर भारत के लगभग सभी घरों में खिचड़ी बनाने की परंपरा है। खिचड़ी का अर्थ होता है सबका घुल-मिल जाना या एक हो जाना। जैसे खिचड़ी में सब्जी-दाल, चावल-मसाले आदि भोजन के अलग अलग अवयव/रूप एक होकर अनूठा स्वाद प्रकट करते हैं। ठीक वैसे ही हम अलग अलग वेश भूसा, खान-पान, रंग-संस्कृति युक्त भारतीय भी एक दूसरे के साथ मिलकर *सनातन खिचड़ी* बन जाते हैं, एक होकर सिर्फ और सिर्फ *सनातनी भारतीय* कहलाते हैं।
विधि के लिए तो आप जैसे चाहें सबको मिलाकर जैसे चाहें पका दें, बनेगी खिचड़ी ही। जैसे विश्व मे एकमात्र भाषा संस्कृत है जिसके शब्दो को कहीं भी किसी भी क्रम में रख दें वाक्य का अर्थ नही बदलता ऐसे ही हमारी खिचड़ी भी है, जैसे चाहें पका लें, कोई भी चीज आगे पीछे हो जाये तो भी न नाम बदलेगा न गुण और न ही स्वाद में कमी आयेगी। है न कमाल की बात और एक खास बात बताऊं अगर इसे बिना तेल, घी के भी बनायेंगे तो भी स्वाद में कोई खास गिरावट नही आयेगी।
चलिये अब काम की बात करते हैं, तो कहां थे हम....
हाँ, मकर संक्रांति पर। संक्रान्ति का अर्थ है सम्यक दिशा में क्रांति जो सामाजिक जीवन का उन्नयन करने वाली तथा मंगलकारी हो। मकर संक्रांति पर सूर्य नारायण दक्षिणायन से उत्तरायण में प्रवेश करते हैं। हिन्दू समाज मे समस्त शुभ कार्यों का प्रारंभ सूर्य के उत्तरायण होने से प्रारम्भ होता है। *सामान्य भाषा मे हम कहते हैं कि मकर संक्रांति के बाद से दिन बड़े और रातें छोटी होने लगती हैं।* इसे नकारात्मकता से अधिक सकारात्मकता के प्रभाव के रूप में भी देखा जाता है। मकर संक्रांति का विशेष धार्मिक और पौराणिक महत्व भी है। आज के दिन तड़के सुबह स्नान करना उत्तम माना जाता है। तिल का विशेष महत्व है अतः स्नान के जल में भी तिल के दाने डाले जाते हैं। तिल के पकवान लड्डू आदि बनाये जाते हैं और तिल का ही प्रसाद चढ़ाया जाता है। आज ही के दिन भीष्म पितामह जी ने धरती पर देह त्याग कर महाप्रयाण किया था। *मकर संक्रांति की तिथि पर ही 1863 में युवाओं के प्रेरणा स्रोत विवेकानंद जी का जन्म हुआ था* और आज ही के दिन स्वामी विवेकानंद जी के गुरुभाई अखंडानंद जी के शिष्य से राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के द्वितीय सर संघचालक श्री गुरुजी ने दीक्षा प्राप्त की थी।
संक्रांति या सम्यक दिशा में क्रांति को हम प्रभु श्री राम चन्द्र जी के जीवन से अच्छी तरह समझ सकते हैं। प्रभु श्री राम ने वन वन भटकते हुए माता सबरी के जूठे बेर खाये, निषाद राज की मित्रता का मान रखा, जंगल में रहने वाले जीवों जैसे पशु,पक्षी, वानर, भालू, गिलहरी सभी को एकजुट कर सेना तैयार की और अधर्म के विरुद्ध युध्द किया। यही है संक्रांति का सर्वोत्तम उदाहरण। वैसे शरीर को रोग मुक्त और शक्तिशाली बनाने में तिल का अपना वैज्ञानिक गणित है, इसे खाना हमारे शरीर के लिए आवश्यक है, बस इतना समझ लीजिए।
अब अवसर मकर संक्रांति हो और खिचड़ी की बात न हो, यह कैसे संभव है। इसीलिये कहानी घूम फिर कर खिचड़ी की ओर चली आती है। *खिचड़ी नाम का शाब्दिक अर्थ ही है- जो उपलब्ध है, उसे मिला जुला कर बनाया गया व्यंजन।* तभी तो जब कोई अवांछित वस्तु किसी खास चीज में मिला देता है तो बरबस ही हमारे मुँह से निकल आता है, ये क्या किया भाई तुमने खिचड़ी कर दिया सब। मेरी राय में खिचड़ी सबसे आम भारतीय व्यंजन है, जो हर स्थान में बनाया, परोसा और पसंद किया जाता है। इसे स्वल्पाहार से लेकर भोजन और भोजन से लेकर प्रसाद सभी रुपों में स्वीकार किया जाता है। मरीज को खिलाना है तो पतली मूंगदाल की खिचड़ी, जमकर पेटभर उच्च पोषण प्राप्त करना हो तो समस्त सब्जी, दाल, चावल, घी, विविध मसाले आदि से इसे तैयार किया जाता है। प्रसाद के रूप में परोसना हो तो उच्च गुणवत्तायुक्त किन्तु कम मसालेदार यानि कि सात्विक तरीके से इसे बनाया जाता है। अलग अलग स्थानों में इसके अलग अलग नाम हैं।
यह एक ऐसा स्वादिष्ट भारतीय व्यंजन/भोजन प्रसाद है, जिसे बनाना कभी सीखना नही पड़ता, मतलब यह है कि- जिस भी तरह चाहो झोक/बघार लगा दो, फिर जितने भी कटे पिटे आइटम हैं प्याज, मिर्च, लहसन, कड़ी पत्ता, अनाब-शनाब सब डाल दो। थोड़ा भून लेने पर सब्जियां मटर, साग भाजी जो उपलब्ध हो डाल दो। मर्जी पड़े तब तक पकने दो। तब तक इधर उधर मटकना हो तो मटक आओ। आने के बाद चावल और दाल धोकर डाल दो। चम्मच चलाओ। स्वादानुसार नमक डाल दो। कुछ कम ज्यादा करना हो तो अभी भी विकल्प है। सब कुछ डाल दिया गया है कुछ और न बचा हो तो ढक्कन ढंक कर पकने के इंतजार करें। बीच बीच मे 2-3 बार चम्मच चलाते रहें वरना कभी कभी नीचे से थोड़ा जल जाता है। वैसे थोड़ा लग भी जाये तो चिंता न करें, स्वाद में और भी बढ़ोत्तरी होगी। अंत मे धीमी आंच पर पकाएं और पक जाने पर बिना इंतजार पेट पूजा कर लें। 😍
आसान विधि, बेहतरीन स्वाद, उच्च पोषण गुणवत्ता, पाचक, हल्का और झंझट मुक्त होने के कारण *यह कुआरों कि प्रिय तो है ही साथ ही परेशान शादीशुदाओं की राहत भी है। धर्मपत्नी के मायके जाने पर यही सूझता है।* कहीं नॉकरीपेशा लोगो का समय बचाऊ भोजन है तो कहीं बुजुर्गों का सहारा, कहीं पिकनिक की पसंद है तो कहीं पैसों की बचत। कही यह पोषण है तो कही हल्का भोजन। जिसने जिस रूप में चाहा वैसा अपनाया इसे। नाम की बात करें तो अवयवों और भाषा के हिसाब से थोड़े बहुत बदलाव के साथ खिचड़ी शब्द सर्वपरिचित है। लेकिन वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी अगर देखा जाए तो इसमे कार्बोहायड्रेट, बसा, प्रोटीन, मिनरल्स और विटामिन्स सब कुछ होते हैं और *खिचड़ी के चार यार दही, पापड़, घी, अचार* के साथ तो यह बेलेंस डाइट का फार्मूला बन जाती है।
लेकिन सच बात बताऊँ, पेटू लोगों के लिये यह न तो स्वल्पाहार है, न ही भोजन, न ही प्रसाद और न ही दवा। अपने लिए तो यह अवसर है, खूब दबा के खाने का, समय बचाने का, पेट से लेकर मन तक संतुष्ट कर लेने का और परिवार एवं प्रियजनों के साथ पलों को अनमोल पलों में बदल लेने का।
धन्यवाद 🙏
आप सभी को, पुनः मकर संक्रांति की हार्दिक
शुभकामनायें..

12 जनवरी | राष्ट्रीय युवा दिवस (  National Youth Day)आज के युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद जी का स्पष्ट, कठोर और जाग्रत स...
12/01/2026

12 जनवरी |
राष्ट्रीय युवा दिवस ( National Youth Day)
आज के युवाओं के लिए स्वामी विवेकानंद जी का स्पष्ट, कठोर और जाग्रत संदेश

स्वामी विवेकानंद जी यदि आज जीवित होते, तो शायद वे युवाओं को मधुर शब्दों से नहीं, बल्कि कठोर सत्य से जगाते—
क्योंकि आज का युवा ज्ञानहीन नहीं, बल्कि दिशाहीन हो गया है।
आज के युवा के सामने कठोर सच्चाई
आज का युवा—
❌ शरीर को आराम और भोग में गलाने लगा है
❌ मन को मोबाइल, नशे, अश्लीलता और त्वरित सुख का दास बना चुका है
❌ विचारों में संयम नहीं, लक्ष्य में स्थिरता नहीं
❌ अधिकार की बात करता है, पर कर्तव्य से बचता है
❌ स्वतंत्रता के नाम पर अनुशासन से भागता है
यह स्वतंत्रता नहीं है—यह गुलामी है।
गुलामी अपने ही इंद्रियों, आदतों और आलस्य की।

स्वामी विवेकानंद का आज के
युवा से प्रश्न
🔴 “क्या यही वह युवा है, जिससे राष्ट्र का निर्माण होगा?”
🔴 “क्या स्क्रीन पर झुकी गर्दन और कमजोर देह से इतिहास रचा जाएगा?”
🔴 “क्या नशे, आलस्य और आत्मदया से कोई महान बनता है?”
उत्तर स्पष्ट है—नहीं।
विवेकानंद जी का कठोर किंतु कल्याणकारी संदेश
🔹 उठो! केवल बिस्तर से नहीं—
आलस्य, भय, नशे और कायरता से उठो।
🔹 जागो! केवल आँखों से नहीं—
विचारों, आदतों और जीवन-लक्ष्य में जागो।
🔹 अपने शरीर को साधो, क्योंकि कमजोर शरीर में महान विचार टिक नहीं सकते।
🔹 अपने मन को संयम दो, क्योंकि असंयमित मन राष्ट्र को भी असंयमित बना देता है।
🔹 अपने जीवन को अर्थ दो, क्योंकि उद्देश्यहीन युवा समाज पर बोझ बन जाता है।
आज के युवा के लिए राष्ट्रीय युवा दिवस पर संकल्प
आज, स्वामी विवेकानंद जी की जयंती पर,
हर युवा स्वयं से यह संकल्प ले—
✔️ मैं नशे, आलस्य और भोगवादी जीवन से दूरी बनाऊँगा
✔️ मैं प्रतिदिन अपने शरीर, श्वास और सोच पर कार्य करूँगा
✔️ मैं मोबाइल नहीं, मस्तिष्क का स्वामी बनूँगा
✔️ मैं अधिकार से पहले कर्तव्य निभाऊँगा
✔️ मैं स्वयं को कमजोर नहीं, सक्षम और उत्तरदायी नागरिक बनाऊँगा
✔️ मैं केवल अपने लिए नहीं, राष्ट्र और समाज के लिए जिऊँगा
अंतिम चेतावनी और आह्वान
यदि युवा नहीं बदलेगा—तो भविष्य नहीं बदलेगा।
और यदि युवा जाग गया—तो कोई शक्ति भारत को रोक नहीं सकती।
स्वामी विवेकानंद जी का संदेश आज भी उतना ही जीवित है—
“उठो, जागो और तब तक मत रुको, जब तक लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।”
🔥 राष्ट्रीय युवा दिवस की शुभकामनाएँ 🔥
साभार: अतुल त्यागी

Sending 💕
08/01/2026

Sending 💕

आंग्ल नववर्ष 2026 में महादेव आप और आपके परिवार में स्वास्थ्य, सुख, दैवीय अनुकम्पा , सौहार्द, सम्पन्नता, उपलब्धियां बनाए ...
01/01/2026

आंग्ल नववर्ष 2026 में महादेव आप और आपके परिवार में स्वास्थ्य, सुख, दैवीय अनुकम्पा , सौहार्द, सम्पन्नता, उपलब्धियां बनाए रखे। नव वर्ष में वैश्विक स्तर पर भी शांति, सौहार्द्र, सद्भावना और सामंजस्य बना रहे, ऐसी अलौकिक प्रार्थना के साथ ।

30/12/2025

तुलसी पूजन की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏   #तुलसीपूजनदिवस
25/12/2025

तुलसी पूजन की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏

#तुलसीपूजनदिवस

 ! 🎄🎁Wishing you and your loved ones a happy and healthy Christmas!Golden era & Trending Music जिला स्वास्थ्य समिति जनपद...
25/12/2025

! 🎄🎁

Wishing you and your loved ones a happy and healthy Christmas!

Golden era & Trending Music जिला स्वास्थ्य समिति जनपद झाँसी उत्तर प्रदेश Rishi Raj World Health Organization (WHO)

जॉब अलर्ट
25/12/2025

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25/12/2025

📢 We’re Hiring | Join ADRA India’s Mission-Driven Team

ADRA India is expanding its field presence and inviting committed professionals to be part of our work. If you are passionate about community development, coordination, and creating sustainable impact, this could be your opportunity.

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