01/09/2026
डूओपीटी (DoPT) सर्कुलर और मेरिट बनाम आरक्षण पर सामान्य जन-मुद्दा
75 साल बाद भी मेरिट कब तक कतार में खड़ी रहेगी? 🇮🇳
हाल ही में सरकारी भर्तियों और नियमों को लेकर जारी सर्कुलर बताते हैं कि किस तरह आज भी अवसर जातियों के खांचों में बंटे हुए हैं।
90% अंक लाने वाला सामान्य वर्ग का युवा बाहर बैठता है, और कम अंक वाला व्यक्ति चयनित हो जाता है।
क्या देश की प्रशासनिक व्यवस्था, तकनीकी दक्षता और स्वास्थ्य सेवाओं में 'योग्यता' के बजाय 'जाति' को प्राथमिकता देना देशहित में है?
हमारा लक्ष्य किसी वर्ग का विरोध करना नहीं, बल्कि देश में "एक देश, एक अवसर, केवल मेरिट" की व्यवस्था कायम करना है। जरूरतमंदों को आर्थिक व शैक्षणिक मदद मिले, लेकिन अवसरों का आधार सिर्फ योग्यता हो।
जागो युवा, उठो और अपनी प्रतिभा के अधिकार के लिए आवाज उठाओ! ✊
डिस्क्लेमर (Disclaimer):
इस पोस्ट में व्यक्त विचार देश की शिक्षा एवं भर्ती व्यवस्था में योग्यता (Merit) और समानता के सिद्धांतों पर आधारित एक स्वतंत्र दृष्टिकोण हैं। इसका उद्देश्य किसी वर्ग विशेष का विरोध करना नहीं, बल्कि निष्पक्ष व्यवस्था पर सकारात्मक चर्चा को बढ़ावा देना है।
— ज्योति मोंगा (सच की आवाज)