08/05/2023
पैसे के बल पर भूपेश जी का प्रचार तंत्र कुछ ऐसा है कि वो रातोरात कोई भी बात वायरल कर छत्तीसगढ़ की जनता को भ्रमित कर ले जाता है....
फिसड्डी साबित हुई रोका-छेंका व गौठान आदि योजनाएं इसका जीवंत उदाहरण हैं, इन योजनाओं का प्रचार इतना तगड़ा कि लगता था छत्तीसगढ़ में क्रांति आ गई है....भूपेश बस एक छड़ी घुमा रहे हैं और पूरे प्रदेश में खुशहाली छा जा रही है....
ये भ्रष्टाचार से कमाए उन पैसों की ताकत थी,कि प्रचार-तंत्र द्वारा जारी की गई सामग्री को घर-बैठे पढ़ने वाले आम इंसान को लगता था कि भूपेश छत्तीसगढ़ में क्रांतिकारी काम कर रहे हैं,जबकि सच्चाई इसके एकदम विपरीत साबित हुई...
इसी तरह इनके प्रचार तंत्र ने एक शब्द "दाऊ" पर बहुत जोर दिया था, ये शब्द चल भी निकला था....
इस एक शब्द की आड़ में भूपेश जी अपनी सभी नाकामयाबी छिपा ले जा रहे थे, कुछ गड़बड़ भी हो रही थी तो इनका प्रचार-तंत्र प्रदेश में "दाऊ-दाऊ" चिल्लाने लगता था, और जनता इसमें भ्रमित होकर इनके कुकर्म भूल जा रही थी..!
ये तो हुई इनके आडंबर की कहानी...जोकि अब लगभग अपने अंत को पहुँच चुकी है, सौम्या-सूर्या और ढेबर को सामने रख कर किये गए इनके भ्रष्टाचार ने इनके चेहरे पर पड़े नकाब हो हटा दिया है....
अब भूपेश जी का वास्तविक चेहरा जनता के सामने है,और इस कालिख से ये अपना पल्ला नहीं झाड़ सकते क्योकिं इनके संरक्षण के बिना इतना लंबा-चौड़ा भ्रष्टाचार कतई संभव नहीं हो पाता....
चलो देर से ही सही,लेकिन झूठ बेनकाब तो हुआ.....
और अब इनके लिए ये कहने से कोई गुरेज नहीं-
"जिसे समझा था दाऊ, वो तो बड़ा दगाबाज निकला"