12/06/2023
12 जून : कैप्टन श्री हरप्रसाद तंवर जी की द्वितीय पुण्यतिथि
( 12.01.1948 - 12.06.2021)
कैप्टन साहब से कौन वाकिफ नहीं है. रोबीला चेहरा, खनकती हुई आवाज और बिना लाग लपेट के अपनी बात कहने वाले नीडर शक्सियत के धनी व्यक्तित्व. थिगरिया के कैप्टन हरप्रसाद तंवर, कर्नल साहब के हरावल दस्ते के सेनापति, लोकमानस मे 'कर्नल बैंसला के हनुमान' कहे जाने वाले जानदार व्यक्ति.
हरप्रसाद जी सन 1992 में 5 राजपुत रेजिमेंट से सेवानिवृत होकर आये तो उन्होंने अपना जीवन समाज की सेवा के लिए अर्पित कर दिया.
थिगरिया गाँव के कैप्टन हरप्रसाद तंवर अपनी अनुशासित जीवन शैली तथा माइक्रो- मेनेजमेंट के लिए जाने जाते थे. थिगारिया और मुंडिया गांव गम्भीर नदी के तट के दोनों तरफ बसे हुए है।
कर्नल साहब और कैप्टन साहब की काफी पुरानी मुलाकात थी। तकरीबन सन 2000 से ही दोनों सामाजिक बदलाव हेतु मीटिंग्स में साथ साथ जाते थे। वहीं से उनके बीच आपसी विश्वास पनपा था।
कर्नल साहब को इन पर अटूट विश्वास था, कैप्टन साहब थे भी अपनी बात और कर्मठता के धनी.
सुरेश जी ( कोटा) बताते है कि कैप्टन हरप्रसाद तंवर जी को यूँ ही कर्नल साहब का हनुमान नहीं कहा जाता था. सरकार के साथ होने वाली बैठको में कैप्टन सीधे मुद्दे की बात करते थे. उन्हें बातचीत की रणनीति को भेदना बखूबी आता था.
बकौल सुरेश जी, एक बार आरक्षण संघर्ष समिति के सदस्यों को सरकार ने बातचीत के लिए जयपुर आमंत्रित किया. उन्हें रात को होटल में ठहराया गया था. सुबह एक आला अफसर कैप्टन साहब के पास आये, और पूछा, " कैप्टन साहब रात को नींद कैसी आई ?'' कैप्टन बोले, "मुझे नींद नहीं आई रात भर !" अफसर बोले, " क्यों ? कमरे में तो एसी लगा हुआ है, फिर क्यों नहीं आई नींद आपको ?''
कैप्टन साहब ने अपने इरादों को दर्शाते हुए तपाक से जवाब दिया, " हमे पटरियों पर ही बढ़िया नींद आती है.''
कर्नल साहब और कैप्टन साहब की आपसी मित्रता, विश्वास और लक्ष्य के प्रति श्रद्धा का आलम यह था कि जब भी कर्नल साहब हिंडोन में होते दोनों लगभग हर सुबह चाय साथ ही पीते, और लम्बी चर्चाओं में शुमार रहते. यह सिलसिला लम्बे समय तक चलता रहा.
कर्नल साहब उन्हें स्नेह से 'जीजा' कह कर पुकारते थे.
जब कभी दिल्ली और उत्तरप्रदेश में मीटिंग्स में आना होता, कर्नल साहब के साथ कैप्टन जरुर आते मेरे यहाँ नॉएडा, और खूब बाते करते, खूब स्नेह उड़ेलते.
हरप्रसाद जी के दो भाई भारतीय सेना में और एक भाई शिक्षक है.
कर्नल साहब बताते थे कि आन्दोलन की जमीनी जिम्मेदारियां खुद कैप्टन ही सम्भालते थे. खाने पीने की व्यवस्था हो, या बैठने आदि के जिम्मे हो. कैप्टन साहब बड़ी बारीकी से ध्यान रखते थे.
आन्दोलन की पूरी यात्रा में कैप्टन हरप्रसाद तंवर मजबूती से खड़े रहे. उनके परिश्रम, साहस और निरन्तरता के प्रति नतमस्तक होते हुए उन्हें याद कर रही हूँ. हम हमेशा आपके प्रति आभारी रहेंगे. पहली पुण्यतिथि पर आपको सादर नमन.
#कर्नल_बैंसला