06/25/2026
आज़म ख़ान: सलाखों के पीछे एक शख्स, लेकिन लोगों के दिलों में एक विचार
मोहम्मद आज़म ख़ान न डाकू हैं, न बलात्कारी, न माफिया, न चोर-लुटेरे। उनके समर्थक उन्हें एक शिक्षाविद, समाजसेवी और शिक्षा की अलख जगाने वाला नेता मानते हैं। उन्होंने अपनी राजनीतिक पहचान से आगे बढ़कर शिक्षा के क्षेत्र में एक ऐसा सपना देखा, जिसे जौहर यूनिवर्सिटी के रूप में साकार करने की कोशिश की गई।
आज जौहर ट्रस्ट के 12AB रजिस्ट्रेशन को रद्द किए जाने की खबर ने उन लोगों को दुखी किया है, जो इस संस्थान को शिक्षा के एक बड़े केंद्र के रूप में देखते हैं। समर्थकों का मानना है कि किसी संस्था को आर्थिक या प्रशासनिक दबावों में घेरा जा सकता है, लेकिन उसके पीछे की सोच और मक़सद को खत्म नहीं किया जा सकता।
57 महीनों से अधिक समय से जेल में बंद आज़म ख़ान के बारे में उनके चाहने वालों का कहना है कि उनका सबसे बड़ा "गुनाह" यह था कि उन्होंने ग़रीबों और पिछड़े तबकों के बच्चों के लिए उच्च शिक्षा का एक बड़ा दरवाज़ा खोलने का सपना देखा। अगर वह केवल सत्ता और राजनीति तक सीमित रहते, तो शायद आज इतनी मुश्किलों का सामना न करना पड़ता।
यूनिवर्सिटी की कुछ इमारतें गिराई जा सकती हैं, उसके रास्तों में रुकावटें डाली जा सकती हैं, लेकिन शिक्षा के लिए रखी गई नींव को मिटाया नहीं जा सकता। इतिहास गवाह है कि विचारों को जेल की सलाखों में क़ैद नहीं किया जा सकता।
आज़म ख़ान आज एक नाम से बढ़कर एक सोच बन चुके हैं—वह सोच जो कहती है कि शिक्षा सबसे बड़ी ताक़त है, वह सोच जो बच्चों को किताबों से जोड़ती है, वह सोच जो समाज को आगे बढ़ाने का रास्ता दिखाती है।
वक़्त गुज़र जाएगा, दौर बदल जाएंगे, लेकिन आने वाली नस्लें जब शिक्षा के महत्व की बात करेंगी, तो उन लोगों को भी याद करेंगी जिन्होंने इसके लिए संघर्ष किया, कीमत चुकाई और अपने सपनों को हक़ीक़त बनाने की कोशिश की।
✍️ "सलाखें जिस्म को क़ैद कर सकती हैं, लेकिन ख़्वाबों, विचारों और शिक्षा की रोशनी को नहीं।" 📚🌹