17/03/2024
मित्रों ,
हम पं. हरिशंकर तिवारी जी के वंशज हैं, हमारी रगों में उनका रक्त दौड़ता है, और हमारे कण-कण में उनके दिये हुए संस्कार स्थापित हैं । ब्राह्मण स्वाभिमान के लिए सत्ताधीशों से युद्ध लड़ते लड़ते , बाबूजी को जो आपने अपना स्नेह दिया , उसी स्नेह ने पंडित जी को ब्राह्मण स्वाभिमान के प्रतीक के रूप में स्थापित किया | उस लड़ाई को सदैव लड़ते रहने का दायित्व हमें विरासत में मिला है । इस संघर्ष-पाथ पर अग्रसर हो, हमें जितनी भी बाधाओं का सामना करना पड़े, हम अपने स्वाभिमान से समझौता कदापि नहीं करेंगे ।
हम ब्रह्मऋषि वशिष्ठ के वंशज हैं , हम भगवान परशुराम के वंशज हैं , हम पंडित हरिशंकर तिवारी के वंशज हैं । स्वाभिमान से जिये हैं ! स्वाभिमान से जीते रहेंगे ! लड़ेंगे ! जीतेंगे !
आपका अपना- “कुशल “