28/01/2018
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मीडिया जिन्हें गुंडा कह रहा है |उन्हीं गुंडों ने विदेशी आक्रमणकारियों से संघर्ष किया था| आज अगर लोग राजपूतों को गुंडा कहने के लिए जिंदा है |तो इन गुंडा कहने वाले लोगों के जिंदा रहने में राजपूतों की कई पीढ़ियों का योगदान है |जो युद्ध करते हुए बलिदान हो गई|
जिन्हें मीडिया गुंडा कह रही है| उनको ही सबसे ज्यादा वीरता के लिए परमवीर चक्र और महावीर चक्र प्रदान किए गए हैं|
राजपूतों के प्रति ईर्ष्या रखने वाले मीडिया के लोग एवं तथाकथित बुद्धिजीवी बनने वाले लोग अगर यह सोच रहे हैं कि TV पर दुष्प्रचार करने से राजपूत समाज परेशान हो जाएगा| तो वह गलत सोच रहे हैं|
अब राजपूतों की नई युवा पीढ़ी शिक्षित है और तर्कों के साथ जवाब देने में सक्षम है| मीडिया के हर झूठ का सोशल मीडिया एवं टीवी चैनलों पर राजपूत युवाओं द्वारा बहुत ही जोरदार दवा जवाब दिया जा रहा है| जिससे राजपूतों से ईर्ष्या करने वाले पूर्वाग्रह से ग्रसित मीडिया और तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग बौखला गया है |
व्यक्ति तभी बौखलाता है, जब वह किसी को दबा नहीं पाता है अथवा झूठ बोल रहा होता है |
टीवी डिबेट में इतना तो साफ परिलक्षित हो रहा है कि टीवी एंकर और तथाकथित बुद्धिजीवी बौखला रहे हैं |तो इससे साफ परिलक्षित हो रहा है, कि वह झूठ बोल रहे हैंऔर राजपूतों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं|
लेकिन अब समय बदल गया है |अब राजपूतों में शिक्षा की दर बढ़ गई है और शिक्षित राजपूत युवाओं को झूठे और तथ्यहीन कुतर्कों के द्वारा राजपूतों से ईर्ष्या रखने वाला मीडिया एवं तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग अब राजपूतों को दबा नहीं सकते हैं |
राजपूतों के शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन को भी राजपूतों से ईर्ष्या रखने वाला मीडिया एवं तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग राष्ट्र के लिए बलिदान देने वाले सच्चे राष्ट्र सेवक बलिदानी राजपूतों को बदनाम करने का जो प्रयास कर रहा है वह बहुत ही शर्मनाक है|
यह बहुत ही आश्चर्यजनक है कि राजपूतों के इतने बड़े राष्ट्रव्यापी आंदोलन में किसी भी व्यक्ति को चोट नहीं आई है |लेकिन फिर भी मीडिया एवं तथाकथित बुद्धिजीवी वर्ग राजपूतों को गुंडा कह रहा है|
राजपूतों का आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण आंदोलन है यह आंदोलन राष्ट्र के किसी भी व्यक्ति के विरुद्ध नहीं हैं यह आंदोलन केवल नारी एवं इतिहास के सम्मान की रक्षा के लिए किया जाने वाला पूर्णतया लोकतांत्रिक तरीके से किया जाने वाला शांतिपूर्ण आंदोलन है|
मीडिया एवं तथाकथित बुद्धिजीवियों के राजपूतों से ईर्ष्या रखने का एक प्रमाण यह है कि गुरुग्राम में बच्चों की बस पर हमला करने की घटना को राजपूतों से जोड़ दिया |जबकि उस ड्राइवर ने इस बात को बिल्कुल गलत बताया|
लेकिन ड्राइवर के बयान के बाद भी मीडिया एवं तथाकथित बुद्धिजीवियों ने अपने गलत बयान के लिए राजपूतों से माफी नहीं मांगी| क्योंकि शिष्टाचार यह कहता है कि अगर आपने किसी के प्रति , बिना सच्चाई जाने ही कोई बात कही है और अगर वह बात बाद में गलत सिद्ध होती है |तो उस व्यक्ति को माफी मांगनी चाहिए |लेकिन वर्तमान में अनैतिक मीडिया एवं अनैतिक तथाकथित बुद्धिजीवियों से नैतिकता की उम्मीद करना बेमानी है|
जय मां भवानी