इंडियन चाणक्य

इंडियन चाणक्य I write. I Teach. I Draw Political Strategies(राजनीतिक रणनीतिकार).

इन आंखों को अगर पढ़ सको तो जुबां से आवाज की आवश्यकता नहीं। इसमें एक योगी, एक राजा और एक पुत्र के बीच की भावनाओं का ज्वार...
04/05/2022

इन आंखों को अगर पढ़ सको तो जुबां से आवाज की आवश्यकता नहीं। इसमें एक योगी, एक राजा और एक पुत्र के बीच की भावनाओं का ज्वार है। एक सन्यासी केवल कुछ लम्हों में अपने पूरे जीवन का सुख पा लिया।😍

क्यूंकि आज के जमाने में आपके टिकट की पहली शर्त है  #सोशलमीडिया इंप्रेशन।चंद्रगुप्त बनना है तो चाणक्य का होना सर्वथा जरूर...
12/04/2022

क्यूंकि आज के जमाने में आपके टिकट की पहली शर्त है #सोशलमीडिया इंप्रेशन।
चंद्रगुप्त बनना है तो चाणक्य का होना सर्वथा जरूरी है।
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https://indianchanakya.com/1588-2/
22/03/2020

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दिल्ली 2020 चुनावी रिजल्ट अध्ययन by Pranjal Dutt Rai | Mar 5, 2020 | Uncategorized | 0 comments कुल विधानसभा क्षेत्र = 70  (सामान्य =58 , एससी=12, एसटी=0)  आम आदमी पा.....

05/03/2020

अमेरिकी राष्ट्रपति चुनाव की प्रक्रिया/पुराना मजेदार लेख
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खैर समझते है जरा इस चुनाव प्रक्रिया को भी--
अमेरिका में दो बड़ी पार्टियाँ हैं- रिपब्लिकन और डेमोक्रैट,हैं तो और भी ग्रीन पार्टी,पीस पार्टी..पर नजर रहती है इन्हीं दोनों पार्टियों के कैंडिडेट्स पर क्यूंकी दूसरी पार्टी का कोई आजतक प्रेजिडेंट नही बना और उनमें कुछ दम भी नहीं होता है।
पहले तो इन् पार्टियों के ऑफिसियल candidature के लिए ही काफी टफ चुनाव होता है, कई लोग तो नाम उछालने और माहौल बनाने के लिए ही खड़े हो जाते हैं ताकि अगले इलेक्शन में काम बन जाए और फिर धीरे से चुपचाप बैठ भी जाते हैं..अपने यहाँ जैसा हीं।
खैर..यु. एस. कई राज्यो में बँटा है, सब जानते हैं..अब हर राज्य में हर एक पार्टी के अपने अपने प्रभावशाली नेता होते हैं जिनको डेलीगेट्स कहा जाता है, जैसे यूपी में #बीजेपी के नेता हैं "मुलायम चचा"😂😉 हाँ हाँ..क्यूंकि अपने #बिहार वाले नीतिश चचा की तो कोई पार्टी ही नहीं है,वो तो "मौकापरस्त" हैं--"परिस्तिथियों के नेता"(sorry,नो मजाक)😊
हाँ, तो मैं कह रहा था कि....पार्टियों के नेता..डेलीगेट्स..ये ही वास्तव में इन उम्मीदवारों का चयन करते हैं।
इसके भी दो तरीके है जो अलग अलग पार्टियां अपनाती हैं--पहला "primary method" दूसरा "काकस मेथोड़े".
ई दुन्नु methodes के भी बड़े नखरे हैं वो बाद में कभी।
आपको कैसे भी आधे डेलीगेट्स का सपोर्ट ले लेना है.. बस।
हाँ..पर आप वहाँ पैसा,दारु,साईकिल और लैपटॉप बाँटकर इनकी सहमति नै ले सकते "आदित् पाड़े" की तरह...और ना हीं इनके रिश्तेदारों का अपहरण करके "फलां ढमकाँ पाड़े" की तरह..😂😉
मान लीजिए आप कैसे भी इन् 50% डेलीगेट्स को पोल्हियाँ लिए अपने पक्ष में..मतलब आपका candidature पक्का।
इसे राजनितिक term में कहते हैं "party convention"
अब आपको पार्टी की ओर से मिलेगा "रनिंग मेट"..जो अब आपके और पार्टी के चुनाव की रणनीति बनाने में आपकी मदद करेगा और आपके जितने के बाद यही बनेगा "vice President" मतलब यहाँ सवाल रनिंग मेट के फ्यूचर का भी है।
कुल मिलाकर यह सब घोषणा वगैरह हो जाता है जून से पहले ही....फिर बारी आती है "डिस्कशन" की...वो भी एक दूसरे के सामने..लाइव...जिसे टी.व्. पर पूरी जनता देख रही है और इसी के आधार पर आपका भविष्य निर्धारित किया जायेगा।
तीन राउंड का डिस्कशन..और लगभग 95%मामला यही पर सेट हो जाता है।
तीसरे राउंड के बाद..जनता को इन दोनों कैंडिडेट्स के विभिन्न मुद्दों पर दिए गए विभिन्न विचारो को अच्छे से समझने के लिए कच्छ दिन का समय दिया जाता है,फिर नवंबर महीने के पहले सोमवार के बाद ही आने वाले मंगलवार को चुनाव होता है..किसी और दिन नहीं..जैसे नवोदय का इंट्रेंस टेस्ट साल के फरवरी महीने के दूसरे संडे को ही होता है.. केवल वैसे ही।
अब इसी बारी देख लीजिए, 1नवम्बर को भी मंगल वार ही था पर पहला सोमवार पड़ा 7 नवम्बर को और उसके बाद वाला मंगलवार पड़ा आज...बोले तो 8नोवेम्बर को तो हो रहा है चुनाव जस्ट सिंपल तो है😊
अब यहाँ थोड़ा लोच आता है,क्योंकि जनता सीधे राष्ट्रपति को नहीं चुनती वह तो "इलेक्टर्स" को चुनती ह जैसे हमारे यहाँ होते हैं "सांसद"... जितना बड़ा राज्य उतने इलेक्टर्स..जैसे कैलिफोर्निया बड़ा राज्य है तो 55 इलेक्टर्स और डेलावेयर छोटा राज्य है तो केवल 3 ,पर इन् इलेक्टर्स को वो पावर नहीं होता है।
पुरे अमेरिका में इलेक्टर्स हैं कुल 538,जिनमे से राष्ट्रपति बनने के लिए 270चाहिए ही.. हर हाल में।
अब इतना क्र लिए तो आप बन जाईयेगा पुरे विश्व के सबसे ताकतवर आदमी..हाँ पर आपके पास "जन्म की नागरिकता" होनी चाहिए,बस।
इसबार क्या हुआ की पहले डिबेट में #ट्रम्प बोल गए कुछ उल्टा,महिलाओं को लेकर..पलड़ा कुछ हल्का होता इससे पहले दूसरे में हिलेरी क्लिंटन के ईमेल लीक वाला मामला सामने आ गया..तीसरे में रक्षा,विदेश नीति महिलाओं का अधिकार,मुस्लिम देशों के प्रति नजरिया,,ये सभी मुद्दे छाये रहे..अब देखते हैं..कौन जीतता है..वैसे दोनों हैं तो उल्लू ही...एक अपना मुंह नहीं संभल सकता है तो दूसरा अपना ईमेल..अब ये देश क्या ख़ाक संभालेंगे😂😊
"हर डाल पे उल्लू बैठा है..अंजाम-ए गुलिस्ता क्या होगा"--
"प्रांजल दत्त राय"
08-11-16

झारखंड चुनाव मेंभाजपा की हार के कारण:1.सरयू फैक्टर2.स्थानीय चुनाव का तेजी से राज्य सरकार और स्थानीय कारकों से प्रभावित ह...
24/12/2019

झारखंड चुनाव मेंभाजपा की हार के कारण:
1.सरयू फैक्टर
2.स्थानीय चुनाव का तेजी से राज्य सरकार और स्थानीय कारकों से प्रभावित होना
3.स्थानीय मुदे
-खनिज संपदा, शासन की कुरीतियां, जैव-विविधता ऊर्जा, तथा बाजार आदि मुद्दों पर सरकार की विफलता

-निवेशक, युवा, किसान, आदिवासी,आमजन, अधिकारी तथा महिलायों के विश्वास का टूटना और वोटिंग शिफ्ट हो जाना।

4.वास्तविक हक़ीक़त के उलट केवल विज्ञापनिक विकास
5.राजनीतिक पार्टियों का हाईकमान कल्चर....अन्य

पढ़ें,

झारखंड में रघुबर दास की हार, भारतीय राजनीति के स्थानीय चुनाव का राज्य सरकार और स्थानीय कारकों/निर्णयों से प्रभावि....

23/12/2019

राजद की वापसी या बिहार 2020 के लिए नीतीश को स्वस्फूर्त आगामी संकेत!?
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बिहार-झारखंड आज भी राजनीतिक पटल पर अमूमन बराबर ही है। खासकर देवघर,कोडरमा जैसे सीमावर्ती विधानसभाएं।
समानता का आलम यह कि, आज भी यहां लालू का सिक्का जीवंत है।
महागठबंधन के कोटे से आरजेडी को देवघर, गोड्डा, कोडरमा, चतर, बरकट्ठा, छतरपुर और हुसैनाबाद सीट दी गई थी.
इसमें चतरा सीट से आरजेडी उम्मीदवार सत्यानंद भोक्ता आगे चल रहे हैं. दूसरे नंबर पर हैं बीजेपी उम्मीदवार जनार्दन पासवान. दोनों के बीच वोटों का अंतर 12 हजार से अधिक है. इसलिए जीत तकरीबन निश्चित दिख रही है.

देवघर से आरजेडी प्रत्याशी सुरेश पासवान अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बीजेपी के नारायण दास से आगे चल रहे हैं. इनदोनों के बीच भी वोटों का अंतर 13 हजार से अधिक है. यहां भी जीत तकरीबन निश्चित दिख रही है.

गोड्डा से आरजेडी उम्मीदवार संजय प्रसाद यादव, बीजेपी के अमित कुमार मंडल से आगे चल रहे हैं. हालांकि वोटों का अंतर 3 हजार से कुछ ज्यादा है.

कोडरमा से आरजेडी उम्मीदवार अमिताभ कुमार आगे चल रहे हैं. यहां दूसरे नंबर पर हैं बीजेपी के डॉ नीरा यादव. हालांकि दोनों के बीच वोटों का अंतर कम है.
ये तो रहा हालिया वाकया, पर एक वक्त था -चुनाव से तुरंत पहले, जब राजद संकटों में घिरी थी।
चुनाव से पहले लालू प्रसाद यादव जेल में बंद थे और तेजस्वी यादव के नेतृत्व को लेकर आरजेडी के भीतर ही कई तरह के सवाल उठ रहे थे. उसपर तेजप्रताप यादव के पारिवारिक झगड़ ने भी पार्टी का नुकसान ही किया है.

सबसे बड़ा झटका तो उस वक्त लगा जब झारखंड में आरजेडी की अध्यक्ष रही अन्नपूर्णा देवी ने चुनावों से पहले बीजेपी जॉइन कर ली. अन्नपूर्णा देवी झारखंड में आरजेडी का चेहरा थीं. अन्नपूर्णा देवी के पति स्व. रमेश कुमार अभिवाजित बिहार में लालू सरकार में मंत्री रह चुके थे. इनके निधन के बाद 1996 में कोडरमा सीट अन्नापूर्णा देवी को दी गई. 1996 से 2014 तक अन्नपूर्णा देवी कोडरमा सीट से जीत हासिल करती आ रही थी.

ऐसे कठिन वक्त में आरजेडी का चुनावों में उतरना आसान नहीं था. लेकिन चुनाव के नतीजों ने आरजेडी में आशा भरी होगी. एक बात ये भी कही जा रही है कि इन चुनावों में लालू प्रसाद यादव ने किंगमेकर की भूमिका निभाई है. जेल में रहते हुए भी उन्होंने महागठबंधन की रुपरेखा बनाने में मदद की. उनकी कोशिशों के चलते ही जेएमएम, कांग्रेस और आरजेडी एकसाथ आए.
बाकी........शाम तक।

23/12/2019

झारखंड: रघुबर दास या सरयू रॉय ?
भाजपा का हश्र !?

26/10/2019
https://qr.ae/TWC7b6
18/10/2019

https://qr.ae/TWC7b6

Pranjal Dutt Rai's answer: NEGOTIATIVE POLITICS ( साम -दाम की राजनीति):- — 500 reasons why Pranjal bhaiya [1] is great and why we love him. Describe everything…from smaller achievement to bigger one. JANADHIKAR VYAKHYA (जनाधिकार व्याख्य...

BHORE-103: Assembly Election Fact Book********************************************विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र स्तर के इस स...
14/10/2019

BHORE-103: Assembly Election Fact Book
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विधानसभा निर्वाचन क्षेत्र स्तर के इस सुंदर प्रकाशन में जनसांख्यिकीय और चुनावी विशेषताएं शामिल हैं . इसमें स्वतंत्रता के बाद से आजतक के विधानसभा स्तरीय ऐतिहासिक चुनाव परिणामों के साथ-साथ मतदान केंद्र स्तर के परिणाम भी शामिल हैं। विभिन्न सामाजिक-आर्थिक मुद्दे, सुविधाएँ, पेड़-पहाड़, नदियां, शौक, पेशा, जैसे अन्य ढेरों जरूरी सूचनाएं जो चुनाव के वक्त पार्टी, उम्मीदवार और निर्वाचन क्षेत्र की प्रमुख आवश्यकता है, उनका संकलन किया गया है। दिखाए गए सांख्यिकीय डेटा, ग्राफ़ और चार्ट विधानसभा क्षेत्र की जानकारी को बहुत आसान प्रारूप में प्रदान करते हैं।

रीति-रिवाज-भाषा: भोजपुरी स्थानीय भाषा है। लोग हिंदी/अंग्रेजी/उर्दू में भी बोलते हैं।
भोजन: लोगों का मुख्य भोजन गेहूं लिट्टी और चावल है।
महत्वपूर्ण त्योहार- Durga – Pooja, Deepawali, Janamashtami, Kali Pooja, Sarswati Pooja, Nag
Panchemi, Chhath Pooja, Shiv Ratri, Id, Bakarid, and Mohharam
नदी पहाड़ जंगल खेत तालाब और इनमें व्यवसाय की संभावनाएं-कृषि दुकानदारी शिक्षा और ठेकेदारी
इंटरनेट- 20000 + लोग
आधुनिकता- मॉडरेट
फैशन- कपड़ा, मोबाइल, मोटर साइकिल
फेसबुक- 18000+ एकाउंट्स
व्हाट्सअप- 15000 +

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