17/04/2026
प्रकाशनार्थ
लखनऊ, उत्तर प्रदेश के वामपंथी दलों की बैठक दिनांक 17 अप्रैल 2026 को माकपा राज्य कार्यालय लखनऊ में संपन्न हुई।बैठक की अध्यक्षता भाकपा राज्य सचिव अरविंद राज स्वरूप ने की। माकपा राज्य सचिव रविशंकर मिश्रा, केंद्रीय कमेटी मेंबर डाक्टर हीरालाल यादव, फारवर्ड ब्लॉक की नेता डॉक्टर आरती , माकपा राज्य सचिव मंडल सदस्य पीएन राय और बाबूराम यादव, भाकपा राज्य सचिव मंडल सदस्य रामचंद्र सरस उपस्थित रहे ।
बैठक के बाद वामपंथी दलों ने निम्नलिखित बयान जारी किया ,
नोएडा में वेतन वृद्धि, कार्य दशा में सुधार 8 घंटे काम आदि की मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे मजदूरों पर भाजपा सरकार की दमनात्मक कार्रवाई उसके श्रमिक विरोधी और तानाशाही चरित्र का द्योतक है। भाजपा की योगी सरकार मजदूरों किसानों आम जनता के दूसरे हिस्सों पर भी आए दिन जुल्म कर रही है और उनकी जायज मांगों को दबाने के लिए तानाशाही रुख अख्तियार कर रही है। पूरे प्रदेश में न केवल मजदूर बल्कि किसानों के हकों को जबरन छीनना और विरोध का दमन करना आम बात हो गई है।
नोएडा में मजदूरों और मजदूर नेताओं की गिरफ्तारी, जेल भेजा जाना और उन पर मुकदमे कायम करना, परिवार से संपर्क करने से रोकना बर्बरता की पराकाष्ठा है। यह तानाशाही पूर्ण कम अत्यंत निंदनीय है। यही नहीं दमन के विरोध में मांग पत्र देने वालों को भी प्रदेश भर में गिरफ्तार अथवा हाउस अरेस्ट किया गया है। इनमें गाजीपुर वाराणसी, फिरोजाबाद, चंदौली जनपदों में तो मजदूरों के साथ किसान नेताओं को भी घरों में अवैध ढंग से निरुद्ध किया गया और उन्हें डराने धमकाने की कार्रवाई की गई। वाम दलों ने कहा है कि उत्तर प्रदेश में जनतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों का हनन आम बात हो गई है। यहां कानून नहीं बल्कि जंगल राज कायम है।
भाजपा सरकार अपनी जिम्मेदारियां से बचने और नाकामियों की छिपाने के लिए जन आंदोलन को बदनाम करती है और जनता को अपमानित करती।
वामदलों ने कहा है कि नोएडा में आंदोलन के दौरान गिरफ्तार लोगों को रिहा किया जाए। उन पर व उनके परिवार पर दमन उत्पीड़न तत्काल बंद किया जाए। मजदूरों की जायज मांगों को पूरा किया जाए।वाम दलों ने माकपा महासचिव और उनके साथ गए सांसदों के प्रतिनिधिमंडल को डीएम से और मजदूर परिवार से न मिलने देने की तीव्र निंदा की है और इस तानाशाही पूर्ण कदम बताया है।
वाम दलों ने निर्णय लिया कि 23 अप्रैल को पूरे प्रदेश में जिलाधिकारी के माध्यम से राज्यपाल को संयुक्त ज्ञापन भेज कर आंदोलन मजदूर की जायज मांगों को मानने,प्रदेश में लोकतांत्रिक और संवैधानिक अधिकारों पर हमले रोकने की मांग की जाएगी।