13/11/2025
आजाद हिंद फौज के स्थापना दिवस पर विशेष,(आजाद हिंद फौज के अहीर रणबांकुरे)-
मैं अमर शहीदों का चारण,उनके गुण गाया करता हूँ
जो कर्ज राष्ट्र ने खाया है,मैं उसे चुकाया करता हूँ।
यह सच है,याद शहीदों की हम लोगों ने दफनाई है
यह सच है,उनकी लाशों पर चलकर आज़ादी आई है,
यह सच है, हिन्दुस्तान आज जिन्दा उनकी कुर्वानी से
यह सच अपना मस्तक ऊँचा उनकी बलिदान कहानी से।
सर्वप्रथम आज़ाद हिंद फ़ौज स्थापना दिवस पर इससे जुड़े प्रतयेक वीर को शत शत नमन,मित्रो इस पवित्र भूमि पर जब जब बाहरी आक्रमणकारियों ने हमला किया सबसे पहले द्वारकाधीश भगवन श्री कृष्ण चंद्र महाराज के रणबांकरे वंशज यदुवंशी क्षत्रिय अहीर ही भारत माता की रक्षा के लिए दुश्मनों से लोहा लिए,ईस्ट इंडिया कंपनी के विरूद्ध सर्वप्रथम तलवार 1756 में ही तमिलनाडु के ही यादव वीर वीरन अल्गुमुथु ने ही उठाई थी और युद्ध करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए,जब 1857 की क्रांति की चिंगारी देश में लगी तो पुरे भारत के यदुवंशी अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह कर दिए,रेवाड़ी हरियाणा के अहीर राजा महाराजा राव तुलाराम सिंह बहादुर और उनके भाई सेनापती राव गोपाल देव और 5 हजार अहीर सैनिक नसीबपुर के युद्ध के मैदान में अंग्रेजो को भयंकर टक्कर दी थी जिसमे 5 हजार से भी ज्यादा अहीर सैनिक शहीद हुए थे,पुरे देश भर में अहीरो का अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह का नतीजा यह हुआ था की गोरी सरकार ने अहीरो की भर्ती सेना में बंद कर दी थी क्योंकि उन्हें डर था कि कही अहीर दुबारा अंग्रेजो के खिलाफ विद्रोह न कर दे।
जब आजाद हिंद फौज का गठन हुआ तो नेताजी सुभाष चंद्र बोस के एक इशारे पर पुरे देशवासियों ने बढ़ चढ़कर फ़ौज में भर्ती होने शुरू कर दिया जिसमें सबसे अधिक संख्या में वीर यदुवंशी ही थे,सरकारी दस्तावेजो के अनुसार हर पल्टन में सबसे अधिक यदुवंशी सैनिक ही थे,बर्मा युद्ध में भी सबसे ज्यादा शहीद यदुवंशी रणबांकुरे ही हुए थे।जिनमे सबसे ज्यादा प्रसीद कैप्टन भागमल यादव,कालूराम गवली,बेगराज यादव,मंगतूराम यादव इत्यादि दे जिन्हीने अंग्रेजो से जबरदस्त लोहा लिया था और नेता जी सुभाष चंद्र बोस के बहुत करीबी थे।
इन जवानों के याद में हरियाणा के गुरुग्राम के गांव नखडोला में आज़ाद हिंद फ़ौज़ के सैनिकों की याद में बनाये गए शहीद स्मारक बनाया गया है।
ऐसा कोई युद्ध नहीं जहां वीर अहीरों की शौर्य गाथाएं ना हो
आजाद हिंद फौज जिसने भारत को आजाद कराने में बड़ी भूमिका निभाई थी इस फौज में बड़ी संख्या में यादव सैनिक थे,चाहे काबुल का युद्ध हो या तालकोटा का,चाहे 1857 की क्रांति हो या रेजांगला और कारगिल का युद्ध मातृभूमि की रक्षा के लिए वीर अहीरो ने हर युद्ध में बलिदान दिया है और अद्भुद शौर्य का परिचय दिया है।
II वीर भोग्या वसुंधरा II
सिंहनी के जाये शेर अहीर I
रणबांके हैं वीर अहीर II
II राष्ट्र-रक्षा परम धर्म है,अहीर रेजिमेंट राष्ट्र-रक्षा हेतु बलिदान के लिए II
जय श्री कृष्ण ।।
जय जय यदुकुल ।।