18/05/2026
S*X !! चौंक गए ??
जी हाँ सेक्स या प्रजनन ( Reproduction) की प्रक्रिया ।
जिसको सुनते ही सब ऐसी दृष्टि से देखते हैं , मानो क्या अपराध कर दिया ।
आज मैं उसी के विषय में बताने जा रहा हूँ ।
जितना हम जानते हैं , मात्र उतना ही ज्ञान नहीं है । बल्कि जितना हम नहीं जानते , वह अनंत मात्रा में है ।
हम उतना ही जानते हैं जितना हमें जनाया जाता है । और इसका अर्थ यह नहीं कि जितना हमें जनाया गया बस उतना ही है।
S*x या प्रजनन एक ऐसा तत्व है जिससे यह सम्पूर्ण सृष्टि परिचालित है और इसी से यह सृष्टि है ।
इसको हिक़ारत की दृष्टि से देखना , स्वयं हिक़ारत है । यह भगवान की ही एक शक्ति है ।
इस विषय को इसलिए उठाना पड़ा क्योंकि कई लोगों के प्रश्न थे इस विषय पर ।
लोग प्रजनन का अर्थ प्रजनन अंग तक ही समझते हैं और कुछ लोगों की बुद्धि एकमात्र प्रजनन अंगों तक ही सीमित रहती है ।
इस विश्व में अनेकानेक प्राणी हैं। सभी जीवों के Digestive system, Respiratory System, Nervous System , Reproductive System , Excretory System भिन्न भिन्न प्रकार के होते हैं ।
कुत्ते में अलग , बिल्ली में अलग ,amoeba में अलग , गाय में अलग , सांप में अलग ,वायरस में अलग , बैक्टीरिया में अलग ।
कई प्रकार के प्रजनन की विधि होती है ।
कायिक प्रजनन
अकायिक प्रजनन
लैंगिक प्रजनन
अलैंगिक प्रजनन
से लेकर अन्यान्य विभिन्न प्रकार के ।
संक्षिप्त में बताता हूँ :-
* कोई अपने ही एक cell या कोशिका से ही प्रजनन कर देता है । उसे किसी मादा या नर की भी जरूरत नहीं पड़ती ।
* किसी को cell की भी जरूरत नहीं पड़ती वह अपने Nucleus से ही प्रजनन कर देता है ।
* कोई दो cell मिलकर प्रजनन करते हैं , जिसमें कोई आवश्यक नहीं कि एक मादा हो या एक नर हो ।
* स्थूल प्राणी जगत में प्रजनन अंगों की आवश्यकता होती है जिसके माध्यम से नर अपना शुक्राणु मादा को देता है ।
* पौधे वगैरह अपने तने से , अपने पत्तों से , अपने spores से , अपने फलों से , अपने बीजों से , अपने पुष्पों से , अपने जड़ से इत्यादि से ही प्रजनन कर देते हैं ।
उनको किसी विशेष अंग की आवश्यकता नहीं होती ।
ये तो वह है जो शायद आप लोग जानते होंगे ।
अब आते हैं जो आप लोग शायद नहीं जानते ।
* रक्त और रक्त मिलकर भी प्रजनन होता है। ( इसमें किसी प्रजनन अंग की आवश्यकता नहीं होती ।)
* पसीने की बूंद से भी प्रजनन होता है । ( इसमें भी किसी प्रजनन अंग की आवश्यकता नहीं होती ।)
जैसे पसीने से भीगे हुए कपड़े को रख देने से उसमें अपने आप चूहे पैदा हो जाते हैं।
* एक दूसरे को छू लेने या स्पर्श मात्र से भी प्रजनन होता है । ( इसमें किसी प्रजनन अंग की आवश्यकता नहीं होती ।)
* एक दूसरे को आँख से आँख मिलाकर भी प्रजनन होता है । मात्र एक दूसरे को प्रजनन करने के भाव से देखकर ( इसमें किसी प्रजनन अंग की आवश्यकता नहीं होती ।)
* सोचने मात्र से भी प्रजनन होता है । ( इसमें किसी प्रजनन अंग की आवश्यकता नहीं होती ।)
* शरीर के dna या उसके अंश मात्र से भी प्रजनन होता है ।।
मृत शरीर में कीड़े पड़ना इत्यादि इन सब प्रक्रिया में किसी कायिक अकायिक की आवश्यकता नहीं पड़ती ।
यह जो नीचे की प्रजनन की प्रक्रिया मैंने बताई है । यह सब देवताओं के प्रजनन की प्रक्रिया है ।
और विभिन्न स्तर के देवताओं के प्रजनन की प्रक्रिया है ।
पाताल के अधिष्ठात्री देवताओं की अलग , पृथ्वीलोक में रहने वाले देवताओं की अलग , आकाश अर्थात खाली स्थान पर रहने वाले देवताओं की अलग , अंतरिक्ष में व्याप्त देवताओं की अलग ।
यक्ष, गंधर्व , प्रजापति , देव , असुर , नाग, किन्नर आदि सब के अलग अलग प्रजनन की विधियाँ होती हैं ।
देवता हैं क्या ???? देवता वह तेज़ का अंश है जो ब्रह्मांड के विभिन्न शक्तियों को संचालित करते हैं। जैसे ग्राम को संचालित करने वाले , जल की शक्ति को संचालित करने वाले , अग्नि को , वायु को , सूर्य जैसे अग्नि के पिंड को , पहाड़ को ,इत्यादि देवता होते हैं । ( इसके विषय में Detail फिर कभी )
ये मनुष्य form में नहीं होते । ध्यान दीजिए । यह सब तेज के रूप में होते हैं । लेकिन जब यह मनुष्यों को दर्शन देने आते हैं तो मनुष्य की आँख, भावना को ध्यान रखते हुए यह मनुष्य रूप में ही प्रत्यक्ष होते हैं ।
यह किसी भी रूप को धारण कर सकते हैं।
देखिये प्रजनन किससे होता है ???
अंगों से ??? नहीं नहीं , वह तो मात्र एक साधन है ।
प्रजनन होता है अमुक प्राणी के तेजमय अंश से ।
मनुष्य का तेज वीर्य और रज में स्थित होता है । वीर्य के द्वारा ही वह तेज निकलता है ।
ऐसे ही अन्य प्राणियों में अलग अलग साधन से । किसी में कुछ किसी में कुछ । जैसे कीड़ों में वीर्य नहीं होता , पौधों में वीर्य नहीं होता , amoeba में वीर्य नहीं होता लेकिन प्रजनन सब कर रहे हैं।
अब यह निर्भर करता है कि वह अपना तेज किस रूप में और किसके माध्यम से निकाले ।
तो यह हुआ विभिन्न प्रकार के प्रजनन की विधि ।
इन्हीं विधियों से सूर्य पुत्र कर्ण , इंद्र पुत्र अर्जुन, वायुपुत्र भीम , पवन पुत्र हनुमान , पराशर ऋषि द्वारा वेदव्यास , वेदव्यास द्वारा धृतराष्ट्र , पाण्डु , विदुर इत्यादि ।
इनको प्रजनन के लिए किसी विशेष अंग की आवश्यकता नहीं पड़ती । इनको मात्र अपना तेज किसी भी माध्यम से गर्भ में प्रविष्ट करना होता है । यहाँ तक कि मात्र संकल्प से ही वह अपना तेज किसी को दे सकते हैं।
इसलिए यह अपने अंदर से भ्रम निकाल दीजिये कि पाण्डु के सामने सब पांचों देवता मिलकर कुंती के साथ संसर्ग कर रहे थे और पाण्डु ताली बजा कर देख रहे थे ।
वेदों में कथानक तक आया है कि देवता ने एक अप्सरा को देखा ,दोनों कामासक्त हुए और मात्र देखने से ही दोनों का तेज मिलकर एक नए देवता को जन्म होता है ।
कामासक्त नहीं भी होंगे तब भी संकल्प मात्र से भी वह अपने तेज से उत्पत्ति कर सकते हैं ।
Actually क्या होता है कि हमारी बुद्धि जितना जानती है , या जितने स्तर का ज्ञान होता है , वही स्तर और फॉर्मूला हम सब में लगाना शुरू कर देते हैं।
यह सब तेज का विधान है ।
कोई पवन पुत्र हनुमान है तो इसका अर्थ यह है कि माता अंजना ने पवन देव का तेज वरण किया और फिर केसरी के वीर्य तेज का वरण करके वह आंजनेय हुए , केसरी नंदन हुए और पवनपुत्र हनुमान हुए ।
यह सब दिव्य बालक , पुरुष या स्त्री होते हैं । इनमें साधारण कुछ नहीं होगा , सब कुछ दिव्यता से युक्त होगा ।
जैसे दृष्टद्युम्न , द्रौपदी , इत्यादि ।
देखिये मनुष्य में 23 pairs of Chromosomes या गुणसूत्र होते है , मतलब कुल मिलाकर 46.
लेकिन हर प्राणी में यह chromosomes के number अलग अलग होते हैं , संरचना अलग होती है , उनका rearrangement अलग होता है , उनका क्रम अलग होता है , उनके आपस में जुड़ने के विधान अलग अलग होते हैं।
किसी का inversion से होता है , किसी का fusion से होता है , किसी का reciprocal होता है , किसी का translocation के द्वारा होता है ।
कोई telomere से बन रहा होता है , तो कोई centromere से । कोई homozygous होता है तो कोई hetrozygous होता है।
जैसे बन्दर या चिंपांजी में अलग गुणसूत्र होते है जो मनुष्य से बहुत हद तक match करता है । लेकिन 48 गुणसूत्र होते हैं ।
उनका rearrangement अलग होता है ।
जैसे हनुमान जी को वानर प्रजाति का कहा जाता है। लेकिन वह बन्दर नहीं थे । वह पहले की प्रजातियाँ थी जो विलुप्त हो चुकी हैं लेकिन उनका गुणसूत्र मनुष्य के गुणसूत्र और संरचना से match करता है ।
अच्छा हाँ , जिनके पूर्वज बन्दर हैं या जो अपने बाप दादा को बन्दर मानते हैं ,यह लेख उनके लिए नहीं है , वह जायें और डार्विन के चरण चांटे ।
Darwin's theory has been seriously refuted and refused or destructed by several scientists now.
जैसे Neanderthal मानव के गुणसूत्र की संरचना मैच करती है लेकिन उनके गुणसूत्र का rearrangement बिल्कुल अलग होता है।
जैसे -
5- TTAGGG-3
5- CCCTAA- 3
चलिए हो सकता है न समझ आये आपको । ये Biology वाले student ही समझ सकते हैं ।
बस आप इतना समझिये कि इनके गुणसूत्र का rearrangement कुछ अलग होता है ।।
अब दूसरी बात :-
जैसे हमारे पास XY XX chromosomes होते हैं ,वैसे ही अन्य प्राणियों में भी विभिन्न प्रकार के chromosomes होते हैं।
जैसे साँप में WZ ZZ chromosomes , किसी में ZY , किसी में PS chromosomes ।
और जैसे हमारे में 46 होते हैं , वैसे ही किसी में 3 , 8 , 12 , 36 , 58 इत्यादि होते हैं।
देवताओं में इसी प्रकार विभिन्न chromosomes पाए जाते हैं । A से लेकर Z तक ही नहीं , आप शायद जो काल्पना नहीं कर सकते वहाँ तक ।
तो इन्हीं chromosomes की विभिन्नता के कारण मेघनाद की पत्नी सुलक्षणा नाग कन्या कहलाती थी , क्योंकि उसके गुणसूत्र में सिर्फ XY ही नहीं Z भी था और उसके chromosomes का rearrangement मनुष्यों की तरह होकर भी नाग के rearrangement की प्रक्रिया से match करती थी ।।
इसी तरह आप अन्य का भी समझिये । सब Chromosomes का कमाल होता था । उनकी संरचना , उनके प्रकार इत्यादि के कारण ही कोई मनुष्य होकर भी नाग कन्या, गंधर्व पुत्र , इत्यादि कहलाते थे ।
यह भी ध्यान रखने योग्य है कि नाग या वानर यह आज वाला नाग या बन्दर नहीं हैं। यह सब मनुष्य की तरह दिखने वाले प्राणी होते थे जिनकी गुणसूत्र का विभाग , Count , संरचना , जुड़ने की प्रक्रिया अलग होती थी जिसके कारण यह मनुष्य होते हुए भी नाग कन्या , या वानर पुत्र कहलाते थे ।
तो इसीलिए अपने दिमाग से यह भ्रांति निकाल दें कि कुंती ने ऐसे पुत्र पैदा किया , या इंद्र आदि देवता ऐसे करते होंगे या अग्नि देव ऐसे करते होंगे ।
अरे ये सब आप लोग करते हैं तो वही सबके लिए सोचते हैं ।
इसीलिए कुछ भी कहने सुनने से पहले अपने शास्त्रों का अध्ययन करिये । वेदों में सब विज्ञान भरा पड़ा है ।
हम सबसे प्राचीन हैं और हमें पता है कि उस वक़्त कौन सी प्रजाति अस्तित्व में थी या कैसे इन सब का प्रावधान था ।
और लोग तो नए नए हैं वह तो कुछ नहीं जानते । लेकिन आप सबसे प्राचीन सभ्यता हैं । उन लोगों के साथ अपनी हँसी मत उड़वाईये ।
ज्ञान लीजिये और उसी ज्ञान से उनको मारिये ।
और कोई प्रश्न हो तो आप पूछ सकते हैं ।
बस ऐसे ही बहुत से विषयों को लेकर मेरी आने वाली पुस्तक में चर्चा व खंडन होगा ।
- Shwetabh Pathak ( श्वेताभ पाठक )
Shwet Prem Ras
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