18/03/2017
# # # # # # # # # # केशव प्रसाद मौर्य को 190 विधायकों का समर्थन # # # # # # # # उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री पद की तेज होती दौड़ में भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष केशव प्रसाद मौर्य के पक्ष में 190 विधायक खुलकर आने को तैयार हैं। गुरुवार को अमित शाह ने जब केशव के सीएम पद की दौड़ से बाहर होने का संकेत दिया, उसके बाद से केशव समर्थक लामबंद होने लगे हैं।
केशव प्रसाद मौर्य के नेतृत्व में भाजपा ने उत्तर प्रदेश में जिस तरह से असाधारण बहुमत हासिल किया है, उसके बाद से ओबीसी विधायकों का दबाव है कि चुनावों में सबसे ज्यादा मेहनत करने वाले केशव प्रसाद मौर्य को ही मुख्यमंत्री पद सौंपा जाए।
भाजपा विधायक दल के नेता के चुनाव में हो रही देरी के कारण, और मुख्यमंत्री पद के कई दावेदार उभरने के बीच, केशव प्रसाद मौर्य के समर्थक अपनी ताकत एकजुट करने में जुट गए हैं।
करीब 100 विधायक ओबीसी के जीतकर आए हैं, और इनके लिए तो केशव प्रसाद मौर्य ने टिकट दिलाने से लेकर जिताने तक में काफी मेहनत की थी। इस चुनाव में कुशवाहा-मौर्य-सैनी समेत अन्य ओबीसी जातियों ने भी भाजपा का खुलकर साथ दिया है, और यह सब केशव प्रसाद के कारण ही हो सका है। इसके अलावा अन्य जातियों के भी उम्मीदवार व्यक्तिगत तौर पर केशव के ऋणी हैं और उनकी सहज उपलब्धता उनकी दावेदारी को बढ़ा रही है।
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केशव प्रसाद मौर्य अगर मुख्यमंत्री नहीं बनाए जाते हैं, तो इन विधायकों का क्या रुख होगा, ये तो अभी साफ नहीं है। हालाँकि इतना तय है कि शनिवार को विधायक दल की बैठक से पहले केशव समर्थक 190 विधायक और कई सांसद पार्टी नेतृत्व के सामने अपनी राय रखेंगे।
विधायकों का कहना है कि जीत का स्वाभाविक श्रेय केशव प्रसाद मौर्य को है और उन्हें मुुख्यमंत्री बनाना जन भावनाओं के अनुरूप होगा। इसके अलावा, ओबीसी को भाजपा से मजबूती से जो़ड़े रखने में भी केशव प्रसाद अच्छी भूमिका निभा सकते हैं।
विधायकों का कहना है कि वे अलग से प्रदर्शन कर ये मांग नहीं रखना चाहते क्योंकि खुद केशव प्रसाद इसके पक्ष में नहीं हैं, और दूसरी बात, विधायकों को यकीन है कि विधायक दल के नेता के चयन में बहुमत केशव के साथ रहेगा और नेतृत्व इस बात का सम्मान करेगा।
हालाँकि बुंदेलखंड, पूर्वांचल, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, अवध के तमाम विधायकों का कहना है कि वो खुलकर ये मांग रखने को तैयार हैं, और जरूरत पड़ने पर वो ये कर भी सकते हैं।
बुंदेलखंड के एक विधायक का कहना है कि केंद्र ने ऐसा कोई संकेत नहीं दिया है कि वो विधायकों की इच्छा के विपरीत किसी नेता को सौंपेगा।
गुरुवार को जब अमित शाह ने कहा था कि मौर्य जिसे कहेंगे, उसके नाम को ही वो सीएम पद के लिए मंजूरी दे देंगे, तो इसे माना गया था कि अमित शाह केशव प्रसाद के पक्ष में नहीं हैं।
इसके बाद श्री मौर्य के बीमार होने और आईसीयू में भर्ती होने की खबरें आने से केशव समर्थकों में बेचैनी भी देखी गई।
केशव समर्थकों का यह भी मानना है कि इस समय वे ओबीसी के नेता के रूप में तेजी से उभर रहे हैं।अगर उन्हें मुख्यमंत्री नहीं बनाया जाता है तो उनकी छवि पर असर पड़ेगा और माना जाएगा कि भाजपा ने उनका केवल इस्तेमाल किया है।
वैसे केंद्र में रक्षामंत्री का पद एक तरह से खाली हुआ है, लेकिन लगता नहीं कि मोदी केशव प्रसाद मौर्य को इतना भारी मंत्रालय सौंपेंगे। केंद्र में राज्यमंत्री का पद या कोई छोटा मोटा मंत्रालय देना अब उनके नए कद के अनुरूप नहीं होगा।
ऐसे में माना जा रहा है कि अगर भाजपा किसी अन्य नेता को उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री के रूप में थोपने की कोशिश करती है तो भाजपा में असंतोष बढ़ सकता है, जो कि 2019 में महंगा पड़ सकता है।
एक कारण यह भी है कि 2019 में भाजपा को फिर से केशव प्रसाद मौर्य की ज़रूरत पड़ सकती है और अगर उनके साथ न्याय न हुआ तो उनकी कदर तब ओबीसी जातियों के बीच पहले जैसी नहीं रह जाएगी, जिसका खामियाजा भाजपा को ही भुगतना पड़ सकता है।