Ranu Thakur

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जय श्रीराम 🚩
01/01/2025

जय श्रीराम 🚩

12/10/2024
यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः । तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम।।''जहाँ योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं ...
24/10/2023

यत्र योगेश्वरः कृष्णो यत्र पार्थो धनुर्धरः ।
तत्र श्रीर्विजयो भूतिर्ध्रुवा नीतिर्मतिर्मम।।'
'जहाँ योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं और जहाँ धनुर्धर पार्थ है, वहीं विजय, लक्ष्मी, कल्याण और शाश्वत नीति है, ऐसा मेरा अभिप्राय है।' ऐसा गीता के अंतिम श्लोक में संजय ने धृतराष्ट्र से कहा है।
योगेश्वर कृष्ण यानी ईशकृपा और धनुर्धर पार्थ यानी मानव- प्रयत्न। इन दोनों का जहाँ सुयोग हो वहाँ क्या असंभव है? ऊर्ध्वगामी मानव प्रयत्न और अविरत ईशकृपा का मिलन जहाँ हो, वहाँ विजय का ही शंखनाद सुनायी देगा, यह निर्विवाद सत्य है।
नवरात्रि के नौ दिन जगदंबा की उपासना करके दस इंद्रियों के साथ मन पर नियंत्रण कर समाज में फैली नकारात्मक उर्जा का दमन करने के लिए एवं भोग की वृत्ति को रोकने के लिए तत्पर विजय प्राप्ति करने का दिन विजयादशमी पर्व है। भक्ति और शक्ति का पवित्र मिलन दशहरा आप सभी को शुभ हो।

23/08/2023

चन्द्रयान 3 की सफलता के लिये सभी वैज्ञानिको को बहुत बहुत बधाई
वन्दे मातरम

नागपंचमी की बहुत बहुत बधाई एवम् शुभकामनाएँ सावन मास की शुक्ल पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन भग...
21/08/2023

नागपंचमी की बहुत बहुत बधाई एवम् शुभकामनाएँ
सावन मास की शुक्ल पंचमी तिथि को नाग पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. इस दिन भगवान शिव के आभूषण नाग देव की पूजा की जाती है. महाकाल की नगरी उज्जैन को मंदिरों का शहर कहा जाता है. इस शहर की गली- गली में मंदिर है. लेकिन नागचंद्रेश्वर मंदिर की आभा बेहद निराली है. इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि मंदिर के कपाट सिर्फ नाग पंचमी के दिन ही खुलते हैं
उज्जैन का नागचंद्रेश्वर मंदिर

सावन मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नाग पंचमी (Nag Panchami 2023) का त्योहार मनाया जाता है. तिथि के मुताबिक इस बार नाग पंचमी 21अगस्त को पड़ रही है. नाग पंचमी के दिन स्त्रियां नाग देवता की पूजा करती हैं सनातन धर्म में सर्प को पूज्यनीय माना गया है. नाग पंचमी के दिन नागों की पूजा की जाती है और उन्हें गाय के दूध से स्नान कराया जाता है. माना जाता है कि जो लोग नाग पंचमी के दिन नाग देवता के साथ ही भगवान शिव की पूजा और रुद्राभिषेक करते हैं, उनके जीवन से कालसर्प दोष खत्म हो जाता है. साथ ही राहु और केतु की अशुभता भी दूर होती है।

महाकाल की नगरी उज्जैन को मंदिरों का शहर कहा जाता है. इस शहर की हर गली में एक ना एक मंदिर जरूर है. उज्जैन में महाकालेश्वर मंदिर के तीसरे भाग में नागचंद्रेश्वर मंदिर है. नागचंद्रेश्वर मंदिर का अपना अलग महत्व है. इस मंदिर की सबसे खास बात ये है कि मंदिर के कपाट साल में सिर्फ एक बार नाग पंचमी के दिन 24 घंटे के लिए ही खुलते हैं. नागचंद्रेश्वर मंदिर की क्या खास बात है यह भी जान लेते हैं।

नेपाल से लाई गई थी प्रतिमा

भगवान नागचंद्रेश्वर की मूर्ति काफी पुरानी है और इसे नेपाल से लाया गया था. नागचंद्रेश्वर मंदिर में जो अद्भुत प्रतिमा विराजमान है उसके बारे में कहा जाता है कि वह 11वीं शताब्दी की है. इस प्रतिमा में शिव-पार्वती अपने पूरे परिवार के साथ आसन पर बैठे हुए हैं और उनके ऊपर सांप फन फैलाकर बैठा हुआ है. बताया जाता है कि इस प्रतिमा को नेपाल से लाया गया था. उज्जैन के अलावा कहीं भी ऐसी प्रतिमा नहीं है. यह दुनिया भर का एकमात्र मंदिर है जिसमें भगवान शिव अपने परिवार के साथ सांपों की शय्या पर विराजमान हैं।

त्रिकाल पूजा की है परंपरा

मान्याताओं के मुताबिक, भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा की परंपरा है. त्रिकाल पूजा का मतलब तीन अलग-अलग समय पर पूजा. पहली पूजा मध्यरात्रि में महानिर्वाणी होती है, दूसरी पूजा नागपंचमी के दिन दोपहर में शासन द्वारा की जाती है और तीसरी पूजा नागपंचमी की शाम को भगवान महाकाल की पूजा के बाद मंदिर समिति करती है. इसके बाद रात 12 बजे वापिस से एक साल के लिए बंद हो जाएंगे।

पौराणिक कथा

मान्यताओं के मुताबिक, सांपों के राजा तक्षक ने भगवान शिव को मनाने के लिए तपस्या की थी जिससे भोलेनाथ प्रसन्न हुए और सर्पों के राजा तक्षक नाग को अमरत्व का वरदान दिया. वरदान के बाद से तक्षक राजा ने प्रभु के सा‍‍‍न्निध्य में ही वास करना शुरू कर दिया. लेकिन महाकाल वन में वास करने से पूर्व उनकी यही इच्छा थी कि उनके एकांत में विघ्न ना हो.इसलिए यही प्रथा चलती आ रही है कि सिर्फ नागपंचमी के दिन ही उनके दर्शन होते हैं. बाकी समय परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है. दर्शन को उपलब्ध होते हैं. शेष समय उनके सम्मान में परंपरा के अनुसार मंदिर बंद रहता है।

#नागचंद्रेश्वर #उज्जैन #महाकाल

शिवांश प्रताप सिंह
15/08/2023

शिवांश प्रताप सिंह

राजपूत शब्द का मतलब सिर्फ राजस्थान से नही है --अंग्रेजो की मेहरबानी से आज के क्षत्रियो को राजपूत शब्द का मतलब तक नही पता...
10/08/2023

राजपूत शब्द का मतलब सिर्फ राजस्थान से नही है --

अंग्रेजो की मेहरबानी से आज के क्षत्रियो को राजपूत शब्द का मतलब तक नही पता । राजपूत शब्द को " राजस्थान " से जोड़कर देखते है।

जबकि यह सत्य नही है -- राजपूत शब्द का राजस्थान से तो कोई लेना देना ही नही है , ओर ना ही राजपूताने का राजस्थान से कोई लेना देना है ।

आप स्वयं सोचे --

ना तो राठौड़ मूल रूप से राजस्थान के है,
ना कुशवाह
ना यदुवँशी राजस्थान् मूल के है,
ओर ना ही तंवर राजस्थान मूल के है

यहां तक कि जिन महाराणा प्रताप का नाम गर्व से सुनते है, उनका खुद का मूल राजस्थान से नही है ।

राम के वंशजो की पुरानी गद्दी अयोध्या से शुरू होती है, कृष्ण की गद्दी भी द्वारिका से, यह दोनों ही प्रदेश राजस्थान में नही है, पांडव दिल्ली से है, ओर परमार, प्रतिहारो का गढ़ भी पूर्व में राजस्थान् के बाहर ही रहा है ।

राजस्थान में राजपूतो का जमघड़ लगने का एक ही कारण था, बॉर्डर से दुश्मन को देश मे ना घुसने दिया जाए । इसी कारण विभिन्न भारतीय प्रदेशो के राजपूतो ने राजस्थान में आके डेरा डाल लिया ।

राजपूत का अर्थ इस तरह है --

रज = मिट्टी
पूत = पुत्र

मिट्टी का पुत्र, राजपूत -- धरती का पुत्र राजपूत ।

जो अपना अस्तित्व मिट्टी से जोड़े, वह राजपूत । इसमे राजस्थान, उत्तरप्रदेश, महाराष्ट्र आदि को बीच मे लाने की आवश्यकता क्या है ??

राजपूतो का तो कोई एक प्रदेश कभी हो ही नही सकता।

राजपूत के घोड़े का मुख जिधर है, वहीं प्रदेश राजपूत का है , इस बात को भूलकर अगर आप प्रान्त के नाम पर लड़ते हो, ऊँचा या नीचा समझते हो, तो आपको अपने आप को ठीक कर लेना चाहिए ।

याद रखे --

ना कोई कश्मीर का
ना राजस्थान का
ना महाराष्ट्र का
ना हिमाचल का

सिंध से लेकर रामेश्वरम तक सभी राजपूत ---- राजपूत मतलब धरती पुत्र ।

क्षत्रिय केवल राजपूत --

राजपूत ओर क्षत्रिय में कोई भेद नही है ।

यह मराठा, राजपुताना, हिमाचली, पहाड़ी, यह सब आपस मे ऊंच नीच कर खुद को बर्बाद कर लेने के रास्ते है, इस रास्ते पर न चले ।

िवाजी
ाराणा

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