27/06/2021
कोटडा प्रवास
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अनायास फोन पर एक पीड़ित की पीडा से लोगो से जुडाव हो जाता हे ,बरसो के सम्बन्ध निकल आते हे ।
ऎसा ही कोटडा के प्रवास पर अनुभव हुआ हमारे से पहले जिले के पुलिस अधिक्षक मिटिग ले रहे थे शायद चुने हुए जनप्रतिनिधियो की बैठक थी या CLG की हो शायद वो गाँव के पीड़ित की आवाज बहुत बार नही बन पाती है।
हम निर्धारित कार्यक्रम अनुसार ठेठ देहात मे 7 किलोमीटर गुजरात बोर्डर क्रोस कर आगे के राजस्थान की सीमा की पंचायत 16 km आगे महाद पहुँचे बस पुराने इतिहास की पिता से जनाकारी ले कर गया था स्टेट टाईम की परम्परागत रूप से वहा के मुखी की नियुक्ति पानरवा ठिकाने से होती थी ।मेरे दाता (पिता )ने बताया कि 60.वर्ष पुर्व महाद के बडळे (वटवृक्ष ) के निचे कालु मुक्खी
( गाव का मुखिया) की पाग बन्धाई के लिए रूके थे, तब पानरवा राणा साहब मोहब्बत सिह जी थे काला मुक्खी को आज भी याद किया जाता है।
आज भी मेला भरता है, हनुमान जी का मन्दिर है ।
वट की स्मृतियाँ मौन थी, पर आखों मे जीवन्त हो गई । वृक्ष और परिवार की जडे कितनी मझबुत होती हे अब समझ
आया ।
दातोड गाँव मे रमेश भाई के यहा रूकना निर्धारित था क्योंकि हमे आदिवासी अंचल मे उनकी समस्याओं समझना था ओर उन सब लोगो को अनुभव करवाना था हम उनसे अलग नही है।
एक कमरे मे सभी साथी ठहरे भोजन के बाद समस्या पर विचार विमर्श का लम्बा दोर चला । उस रात चार दिन से बिजली आई थी वो भी मात्र आधे घंण्टे के लिए गाँव के इलेक्ट्रीफाईड होने का सबुत दिया ।
बिना पंखे लाईट रात गुजारना तय था ।
राजनीतिक सक्रियता से लेकर पुलिस प्रशासनिक व्यवस्था , पंचायत राज ओर धर्म परिवर्तन तक पर खुल कर चर्चा हुई ।
प्रधानमंत्री आवास के पैसे मन चाहे खाते मे जाते हे,GEO टेगिग मे भी सेंध लगती हे स्वच्छ. भारत अभियान. के कुछ टायलेट जागरूक लोगो के नजर आए ।
बाकी नशे का व्यापार नाथु के हाथ है।
अब नाथु कौन हे ,नही जाना । हथ कढ सामान्य प्रचलन मे है ।
कोटडा के हेरिटेज बिल्डिग जिसमे कोर्ट हुआ करता था, कंक्रिट की नई बिल्डिंग बन गई नई ईजिनियरिग मे विकास ऎसे ही होता होगा ।
पुरा देवला से कोटडा माहद तक घटीया गौरव पथ नजर आए ड्रेनेज नाम मात्र का था । मीणा साहब लम्बे समय से Xen है, वही जबाव देह होगे ओफिस मे सोमवार को दिखे नही मिलना नही हो पाया ।
ईसाई बने परिवार ने उदयपुर से का बर्थ डे केक लाने का अनुरोध भी हमने पुरा किया सुबह केक काटा। लोग बहुत से कनवर्ट हुए हे घर वापसी को तेय्यार हे ।
मुल संस्कृति मे कोई परिवर्तन नही हे केवल नाम थोमस , एन्थनी ,एलेकजेन्डर हे ।
भोपा, देवरा , राम राम वही ।
कोटडा CO भुपेन्द्र जी से मुलाकात की
नए है, पुलिस मे ज्यादा अपेक्षा नही कर सकते पुरी कोटडा वृत की पुलिस महिला कानूनो से अनभिज्ञ नजर आई ।
वेसे अपडेशन होना चाहिए ।
सुबह पीडितो से मिलना हुआ शायद लोग सोच नही पाए की हम शहर से लोग उनके पास आ सकते हे ।
गजब का उत्साह ओर विश्वास था उनमे अचरज भी था ये लोग हमारे लिए उदयपुर कोर्ट मे बयान करवाने आ सकते ओर हमारे गाँव हमारी पीडा जानने भी आ सकते हे ।
रमेश भाई , सोहन भाई , ईशु भाई के लिए कृष्ण सुदामा का मिलन कहे ।
कृष्ण ये लोग हे ,जो इतने लोगो की पहुँच मे है। जो बन पडे सेवा करते है ,और पीड़ित की आवाज बनते है।
हम. ठहरे सुदामा शहर की बोल चाल व्यवहार की दरिद्रता तो है ही, जो पीड़ित से संवाद के लिए ट्रांसलेटर की जरूरत पड रही थी ।
पीडित का हमारे लिए शबरी का परिवार के समान था निश्छल प्रेम अनन्त
आशाएं लिए आया था.......एक RI किस तुनक मिजाजी मे था कि उसके जाति प्रमाणपत्र पर हस्ताक्षर नही कर रहा था . ....
पीडित प्रतिकर का मामला था संवेदन हीनता इसी को कहते है।
सात दिन से तहसील मे चक्कर काट रहा परिवार CO कोटडा को मामला अवगत करवाया ।
एक गरीब व्यक्ति पोपतट जोगी का अनोखा मामला आया उसकी पत्नी की दुर्घटना मे मृत्यु होने पर उसके प्रतिकर की राशी वकील दबा कर बेठा हे ।
बेंक डायरी, चेक बुक ,ATM , FD. सब कुछ वकील के पास ........ मन चाहे तब तीन पाँच हजार दे देता हे ।
उसे भी रूपये दिलाने हे बुढी आखो मे आशा कभी निराशा मे नही बदलना ही हनारा मिशन हो जता हे ।
लड़कियों का बेचान बहुत बडी समस्या थी दिलावर के कारनामे बताए 50. से ज्यदा बच्चिया बेच दी बताते हे पुलिस मे सेटिंग है। कोई कुछ नही बोलता अबकी बार सही से फाईल खुली है, चाह कर कोई नही बचा सकता ।
रमेश भाई सोहन जी गमार ईश्वर जी जागरूक लोग है,पर उन्हे लगता हे उन्हे हमारे सहयोग की आवश्यकता हे ।
ये साथी हमसे ज्यादा समझ रखते है .....
वास्तव मे हमसे ज्यादा व्यवहारिक समझ उनमे थी ।
रमेश भाई पाचवी पास है, पर समझ मे ग्रेजुएट है ।
सही मे हम उन्हे विश्वास दिलाने महाद तक पहुँचे । वही उन्ही के घर का बनाया ओर सब के साथ बेठक भोजन का आनन्द अलग था । मक्का की रोटी उडद की दाल और खरड पर पिसी लाल मिर्च ओर लहसुन की चटनी । विश्राम के बाद लगा कोटडा के सफर बहुत बाकी है ।
हमारे साथ जामुन, मुंग, खजुर साथ बाधे थे। स्मृतियों के लिए
कोटडा के वनवासी आतिथ्य को नमन🙏